जानिए की केसे करें शाबर मंत्र से रोगों का उपचार..???

जानिए की केसे करें शाबर मंत्र से रोगों का उपचार..???
 
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान शंकर, माँ  पार्वती के साथ लोक-भ्रमण के लिए निकले. भ्रमण करते हुए दोनों एक घोर भयानक निर्जन प्रदेश में आए. वहां देखा कि एक साधक गुफा में मंत्र-साधना में लीन है और एक मंत्र का निरंतर जाप कर रहा है. उसका मंत्र जाप सुनकर भगवान शंकर चैंक गए और करूणा भरी दृष्टि से पार्वती की ओर देखकर बोले-‘सती , यह अशुद्ध उच्चरण कर रहा है. इसका अच्छा फल तो मिलेगा  नहीं उल्टे मृत्यु को प्राप्त करेगा.‘
 
पार्वतीजी बोली-‘भगवान, इसके जन्मदाता तो आप ही हैं. अपने मंत्र को इतना क्लिष्ट क्यों बना दिया. अगर यह मर गया, तो इसका दोष आपको ही लगेगा.‘ भगवान शंकर पार्वती का यह तर्क सुनकर मौन हो गए. कुछ क्षण बाद बोले-‘ तुम ठीक कहती हो पार्वती. इनका सरल रूप भी होना चाहिए. अच्छा, मैं उपाय करता हूं. ‘ वह अधेड़ साधु का वेश धरकर उसके पास गए, उसे अशुद्ध जाप करने से रोका और सरल मंत्र बतलाया. इस प्रकार उन्होंने अपना संपूर्ण मंत्र सरलीकरण करके उसको दे दिया.
 
बाद में वह साधक ‘ सिद्ध या नाथ ‘ कहलाया. ‘ नाथ ‘ संप्रादय का वह पहला नाथ था तब से इस परंपरा में चैरासी पीढ़ी के चैरासी नाथों का विवरण मिलता है और इनके द्वारा अपनाया गया सरल मंत्रीकरण ‘ शाबर मंत्र ‘ कहलाया.
——-भाषा का प्रयोगः-
क्लिष्ट संस्कृत के स्थान पर साधारण बोलचाल की  भाषा में मंत्र बना दिए गए, जिनका जाप कर साधक सिद्धि प्राप्त कर सकता है. पर समय के साथ-साथ इसमें भी  भारी परिर्वतन आ गया है. भाषा और शब्द प्रयोग समय के साथ बदलते रहे हैं. खड़ी बोली को आंचलिक भाषा से निकलने में सैकड़ों साल का समय लग गया, तब यह खड़ी बोली बनी. इस प्रकार संस्कृत से हिन्दी  या अन्य प्रादेशिक भाषाएं बनने-संवरने में सैकड़ों वर्ष लग गए अतएव इसी प्रकार ‘ शाबर मंत्र ‘ बदलते गए और कुछ अशिक्षित संप्रदाय के हाथ में पड़ कर और भी अपभ्रश रूप में आ गए. कुछ का तो प्रभाव ही जाता रहा. वास्तव में मंत्र ध्वनि विज्ञान पर निर्मित हैं. ध्वनि का अपना विशेष प्रभाव होता है और ध्वनि नष्ट नहीं होती. ध्वनि को सदा के लिए कैद करके रखा जा सकता है. ध्वनि को हजारों मील दूर से बजाए जाने पर पुनः उच्चारित होने के लिए पकड़ा जाता है. कहीं भी ध्वनि भले ही वह आपके खंासने या कराहने की हो, निकल गई तो निकल गई, बन गई तो बनी ही रहती है. आश्चर्य की बात है न. तब तो संसार में ये अरबों मनुष्य हैं और अरबों वर्षो से जो ध्वनियां ची आ रही हैं, क्या वह सब जीवित हैं! जी हां जीवित हैं. वैज्ञानिक इस बात को मानते हैं. शाबर मंत्र में सरलीकरण किया गया. पर समय के साथ-साथ अवैज्ञानिक ढंग से शब्दों में हेर-फेर होता गया और इसी कारण उनका प्रभाव नष्ट होता गया. फलतः‘ शाबर मंत्र ‘ एक ढकोसला बन गया. शाबर के साथ यह भी रहा है और आज भी है कि यह प्रायः अनपढ़ लोगों द्वारा ओझा, गुनिया, भगत आदि द्वारा ही अपनाया गया. खासतौर से झाड़-फंूक के ‘समय इनका उच्चारण करने की प्रथा परंपरा से चली आ रही है. लोहे का खुला चाकू, मोर पंखों का गुच्छा लेकर नजर, बुखार, भूत-प्रेत, दांत दर्द आदि में प्रयोग किया जाता रहा है. झाड़-फूंक में ही इनको अधिकतर काम में लाया गया. तांत्रिक लोग इन मंत्रों का प्रयोग नहीं करते थे.
——  मंत्रों का शुद्ध रूपः-तंत्र में संस्कृत मंत्र आदि क्लिष्ट हैं तो शाबर मंत्रों का शुद्ध रूप लुप्त है. वह उपरोक्त कारणें से इतने विकृत असंगत हो गए है कि केवल         खिलवाड़ बन कर रह गए हैं. उनकी इस विधा से अपरिचित प्रकाशनों द्वारा शाबर मंत्रों पर अनाप-शनाप प्रकाशन धड़ल्ले से चालू हैं. इन्द्र जाल, वृहद इंद्रजाल, शाबर मंत्र जैसे नाम देकर शाबर मंत्र विधा का और सत्यानाश कर दिया गया है. ध्वनि विज्ञान से सर्वदा परे, इससे बिल्कुल मेल न खाने वाला खिलवाड़ बना दिया गया है. यही सब तंत्र विधा के प्रति और उपेक्षा का कारण बन गया है. तंत्र-मंत्र-यंत्र से लेकर हस्तरेखा तक, शाबर मंत्र से लेकर ज्योतिष तक, सेक्स से लेकर टोटकों तक सब लिखा है. जिसे सरलीकरण के पवित्र उदेश्य से मंत्र का सरलीकरण, शाबर मंत्रों का अपना उपयोग, अपना महत्व है पर आज वह लुप्त है और व्यर्थ हो गया है. वास्तव में इसमें इतना कूड़ा आ गया है कि मोतियों को खोज निकालना मुश्किल है. इसकी परंपरा भ्रष्ट हो गई है.यह विधा काफी सीमा तक महत्वहीन हो गई है. शाबर विज्ञान,ध्वनि विज्ञान की दृष्टि से शाबर मंत्रों का संयोजन ही बिगड़ गया है. केवल अनपढ़, गुनिया, ओझा, भगत ही इसका उपयोग कर रहें हैं जो अधिकतर असफल रहता है, शब्द ध्वनि विज्ञान है और जब तक उसका संयोजन इसी आधार पर नहीं होगा, मंत्र रूप में वह कभी  भी प्रभावकारी  नहीं रहेंगे. शाबर मंत्रों की अपनी उपयोगिता है, हो सकता है कि कुछ शाबर मंत्र प्रभावशाली हों, इसका निर्णय कौन करें?. परीक्षण में शायद सदियां लग जाएं.
 
पंडित दयानन्द शास्त्री
Mob.–
—09411190067(UTTARAKHAND);;
—09024390067(RAJASTHAN);;
— 09711060179(DELHI);;
 —-vastushastri08@gmail.com;
—-vastushastri08@rediffmail.com;
—-vastushastri08@hotmail.com;
My Blogs —-
—4.-http://jyoteeshpragya.blogspot.in/?m=1…;;;
—5.- http://bhavishykathan.blogspot.in/  /?m=1…;;;
प्रिय मित्रो. आप सभी मेरे ब्लोग्स पर जाकर/ फोलो करके – शेयर करके – जानकारी प्राप्त कर सकते हे—- नए लेख आदि भी पढ़ सकते हे….. धन्यवाद…प्रतीक्षारत….
Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s