जानिए कब और क्यों मनाएं “फुलेरा दूज”

जानिए कब और क्यों मनाएं “फुलेरा दूज” (28 फरवरी 2017 )…????

प्रिय पाठकों/मित्रों, फुलेरा दूज का त्योहार बसंत पंचमी और होली के बीच फाल्गुन में मनाया जाता हैं |इस दिन का हर क्षण शुभ और पवित्र होता है. इस दिन बिना मुहूर्त देखे सारे मंगल काम किए जाते हैं |ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की फुलेरा दूज पूरी तरह दोषमुक्त दिन है. इस दिन का हर क्षण शुभ होता है. इसलिए कोई भी शुभ काम करने से पहले मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती |इस दिन दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ाने के लिए राधा-कृष्ण का पूजन किया जाता है। यह उत्सव हमें संबंधों के बीच आए मतभेदों को भुलाकर आगे बढ़ने की सीख देता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार उत्तर भारत में फुलेरा दूज खास तौर पर मनाई जाती है और यहां इसे रंगों को त्योहार भी कहा जाता है। मथुरा और वृंदावन में फुलेरा दूज उत्सव मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में कृष्ण की लीलाओं का गान किया जाता है, भजन और नृत्य के साथ कृष्ण की भक्ति की जाती है।माना गया है कि इस दिन में साक्षात श्रीकृष्ण का अंश होता है। जो भक्त इस दिन श्रद्धापूर्वक श्रीकृष्ण की भक्ति करते हैं उनके जीवन में प्रेम वर्षा होती है। इसे फूलों का त्योहार भी कहा गया है। फाल्गुन मास में कई प्रकार के सुंदर और विविध रंगों वाले फूलों का आगमन होता है और इन तरह-तरह के फूलों से ही कृष्ण मंदिरों की सजावट की जाती है।

आज 28  फरवरी 2017  (मंगलवार) को फुलेरा दूज पुरे हर्षोल्लास से मनाई जाएगी |

जानिए फुलेरा दूज का पूजन मुहूर्त समय–

द्वितीय तिथि आरम्भ  = 19:06 on 27/Feb/2017

द्वितीय तिथि समापन  = 17:20 on 28/Feb/2017

आइए जानते हैं और किन बातों के लिए महत्वपूर्ण है फुलेरा दूज का त्योहार:—

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री से जानिए फुलेरा दूज का महत्व—

– फुलेरा दूज मुख्य रूप से बसंत ऋतु से जुड़ा त्योहार है.

– वैवाहिक जीवन और प्रेम संबंधों को अच्छा बनाने के लिए इसे मनाया जाता है.

– फुलेरा दूज वर्ष का अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है, इस दिन कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं.

– फुलेरा दूज में मुख्य रूप से श्री राधा-कृष्ण की पूजा की जाती है.

– जिनकी कुंडली में प्रेम का अभाव हो, उन्हें इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा करनी चाहिए.

– वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर करने के लिए भी इस दिन पूजा की जाती है.

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार अगर आप कोई नया काम शुरू करना चाहते हैं तो फुलेरा दूज का दिन इसके लिए सबसे उत्तम होगा. माना जाता है कि इस दिन में साक्षात श्रीकृष्ण का अंश होता है. तो जो भक्त प्रेम और श्रद्धा से राधा-कृष्ण की उपासना करते हैं, श्रीकृष्ण उनके जीवन में प्रेम और खुशियां बरसाते हैं |

 

 

 

 

जानिए फुलेरा दूज का पर्व मनाने की विधि—-

– शाम को स्नान करके पूरा श्रृंगार करें.

– राधा-कृष्ण को सुगन्धित फूलों से सजाएं.

– राधा-कृष्ण को सुगंध और अबीर-गुलाल भी अर्पित कर सकते हैं.

– प्रसाद में सफेद मिठाई, पंचामृत और मिश्री अर्पित करें.

– इसके बाद ‘मधुराष्टक’ या ‘राधा कृपा कटाक्ष’ का पाठ करें.

– अगर पाठ करना कठिन हो तो केवल ‘राधेकृष्ण’ का जाप कर सकते हैं.

– श्रृंगार की वस्तुओं का दान करें और प्रसाद ग्रहण करें.

कृष्ण भक्त इस दिन को बड़े उत्साह से मनाते हैं. राधे-कृष्ण को गुलाल लगाते हैं. भोग, भजन-कीर्तन करते हैं क्योंकि फुलेरा दूज का दिन कृष्ण से प्रेम को जताने का दिन है. इस दिन भक्त कान्हा पर जितना प्रेम बरसाते हैं, उतना ही प्रेम कान्हा भी अपने भक्तों पर लुटाते हैं. 

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार इस दिन आप अपने जीवनसाथी के साथ मतभेद दूर करने के उपाय भी कर सकते हैं | जानिए कैसे:—-

जीवनसाथी आपकी बात ना समझे तो…

– सोने वाले पलंग के चारों पावों में गुलाबी धागा बांधें.

– पलंग के नीचे गंदगी इकट्ठा न होने दें.

– सोने के लिए ढेर सारे तकियों का प्रयोग न करें.

फुलेरा दूज पर राधे-कृष्ण की उपासना आपके जीवन को सुंदर और प्रेमपूर्ण बना सकती है. तो आप भी पूरे आनंद से ये पर्व मनाइए और कृष्ण भक्ति का लाभ उठाइए |

जानिए क्यों हैं “फुलेरा दूज” प्रेम और खुशियां बिखेरने वाला दिन—-

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार इसे फूलों का त्योहार भी कहते हैं क्योंकि फाल्गुन महीने में कई तरह के सुंदर और रंगबिरंगे फूलों का आगमन होता है और इन्हीं फूलों से राधे-कृष्ण का श्रृंगार किया जाता है |फुलेरा दूज के बाद से होली तक कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। वैसे तो होली का डांडा गढ़ने के बाद ही शुभ कार्यों पर निषेध रहता है लेकिन फुलेरा दूज को अत्यंत शुभ मुहूर्त माना जाता है। कहा जाता है कि फाल्गुन में राधा और कृष्ण का प्रेम चरम पर था और गोपियों ने उन पर फूलों की बारिश करके उनके प्रेम को सहर्ष स्वीकार किया था और इसलिए इसे उनके मिलन की तिथि के रूप में स्वीकार किया जाता है।ज्योतिष के जानकारों की मानें तो फुलेरा दूज के दिन से ही लोग होली के रंगों की शुरुआत कर देते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से ही भगवान कृष्ण होली की तैयारी करने लगते थे और होली आने पर पूरे गोकुल को गुलाल से रंग देते थे. 

जानिए क्या रखें  फुलेरा दूज पर्व मनाने समय सावधानियां?

– शाम का समय ही पूजन के लिए सबसे उत्तम होगा.

– रंगीन और साफ कपड़े पहनकर आनंद से पूजा करें.

– अगर प्रेम के लिए पूजा करनी है तो गुलाबी कपड़े पहनें .

– अगर वैवाहिक जीवन के लिए पूजा करनी है तो पीले कपड़े पहनें.

– पूजा के बाद सात्विक भोजन ही ग्रहण करें.

आज जानिए पंडित दयानन्द शास्त्री से की जिन जातकों भी सुख-समृद्धि या बरकत नही हो रही हे ।।                          

जिन्हें मानसिक अशांति रहती हे ।।।                              

जिन्हें अथक प्रयास या मेहनत करने के बाद भी फल नही मिलता हे ।।                 

जिनके जीवन में परेशानियां समाप्त होने का नाम नही ले रही हैँ।।                               

वे सभी जातक जिनके हाथो में मस्तिष्क रेखा चन्द्र पर्वत तक जा रही हैं, वे सभी आज चन्द्रमा के दर्शन करे और मन ही मन में अपना नाम गोत्र  बोलकर अपनी मनोकामना बोले।।                          

जिनको सुख- समृद्धि या बरकत लेनी हे वे सभी जानिए पंडित दयानन्द शास्त्री से की क्या करें उपाय??? 

               

आज आप चन्द्रमा को कोई भी सिक्का या रुपया दिखाकर वह सिक्का अपने पास रख लेवे फिर गुड़ खा लेवे।।।  लाभ होगा।।                         

जिन्हें शांति नही मिल रही हे वे चन्द्रमा को  दूध का अर्घ्य देवे।जिनके गुप्त शत्रु ज्यादा हे, वे मोली का धागा पर 7 गांठे बॉध देवे और फिर शनिवार को तेल में डाल कर जला देवे ।।     

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करे :—-    

            

पण्डित “विशाल” दयानन्द शास्त्री।। 

मोबाईल–09669290067…

वाट्स एप— 09039390067…

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