हस्तरेखा और वैवाहिक सुख – विवाह रेखा ही बता देती है विवाह सुख

हस्तरेखा और वैवाहिक सुख —विवाह रेखा ही बता देती है विवाह सुख —


प्रिय पाठकों/मित्रों,सुखी जीवन का आधार दाम्पत्य सुख ही है। परिवार का सुचारू संचालन पति-पत्नी में आकर्षण, प्रेम, समर्पण एवं विश्वास पर टिका हुआ होता है। इनका अभाव दाम्पत्य जीवन को नरक तुल्य बना देता है। विवाह मुहूर्त, कुंडली मिलान, जन्मांग में दाम्पत्य सुख आदि संदर्भ से अलग मनुष्य की हथेली में उपस्थित विवाह रेखा की चर्चा की जा रही है।पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की शादी के बिना समाज में स्त्री और पुरुष का रिश्ता मान्य नहीं होता। जीवन में विवाह के बारें में सटीक भविष्यवाणी करनी हो तो ज्योतिषी हाथों की विवाह रेखा का अध्ययन करते हैं।


पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की हथेली में विवाह रेखा बहुत ही छोटी होती है परंतु व्यक्ति के जीवन में बहुत प्रभावशाली होती है। हाथ की रेखाओं का अध्ययन करते समय हम विवाह रेखा की उपेक्षा नहीं कर सकते। हृदय रेखा एवं जीवन रेखा की तरह यह रेखा इतनी गहरी एवं बड़ी नहीं होती। विवाह रेखा बुध की उंगली के नीचे शुरु होकर अनामिका उंगली की तरफ जाती है। यह हृदय रेखा के ऊपर छोटी उंगली के नीचे स्थित होती है।


आपकी हथेली में विवाह रेखा:— हथेली में यह रेखा सबसे छोटी लेकिन सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है। इस रेखा को विवाह रेखा, वासना रेखा, प्रणय रेखा आदि नाम से जाना जाता है। कनिष्ठा अंगुली के नीचे हृदय रेखा के ऊपर एवं बुध पर्वत के बगल में यह रेखा होती है। हथेली में विवाह रेखाओं की संख्या चार तक हो सकती है। इनमें से एक रेखा ही सर्वाधिक पुष्ट एवं लंबी होती है। विवाह रेखा हृदय रेखा के ऊपर ही सर्वाधिक पुष्ट एवं लंबी होती है। विवाह रेखा हृदय रेखा के ऊपर ही होना चाहिए। जिन व्यक्तियों के हाथों में यह हृदय रेखा के नीचे होती है उनका विवाह प्रायः नहीं होता है। 


पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की विवाह रेखाओं का अधिक होना इस बात का संकेत है कि विवाह पूर्व या विवाह बाद उतने स्त्री/पुरुषों से प्रणय संबंध बनेंगे कारण विवाह रेखा के साथ जो छाटी-छोटी रेखाएं हैं वे प्रणय रेखाएं है। यदि हथेली में प्रणय रेखाओं का अभाव है तो व्यक्ति काम लोलुप न होकर संयमित जीवन जीता है।दाम्पत्य सुख के लिए हथेली में विभिन्न पर्वत विशेष कर गुरु/शुक्र पर्वत तथा अन्य रेखाओं की स्थिति भी विचारणीय रहती है।विवाह रेखा कनिष्टका यानि सबसे छोटी ऊंगली के निचले हिस्से में जिसे बुध पर्वत कहते हैं वहां आड़ी होती हैं। यह कई जातकों के हाथों में एक तो कई के हाथों में कई भी होती है। 


जानिए आपके हाथ में कहां होती है विवाह रेखा—


हमारी हथेली में थोड़े-थोड़े समय में कई रेखाएं बदलती रहती हैं। जबकि कुछ खास रेखाएं ऐसी हैं, जिनमें अधिक बड़े बदलाव नहीं होते हैं। इन महत्वपूर्ण रेखाओं में जीवन रेखा, भाग्य रेखा, हृदय रेखा, मणिबंध, सूर्य रेखा, विवाह और संतान रेखाएं शामिल हैं। हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार विवाह रेखा से किसी भी व्यक्ति के विवाह और प्रेम प्रसंग पर विचार किया जाता है। विवाह रेखा सबसे छोटी उंगली (लिटिल फिंगर) के नीचे वाले भाग पर आड़ी स्थिति में होती है। पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की छोटी उंगली के नीचे वाले भाग को बुध पर्वत कहा जाता है। विवाह रेखा एक या एक से अधिक भी हो सकती है।विवाह और वैवाहिक जीवन से जुड़ी खास बातें जानने के लिए हस्तरेखा ज्योतिष श्रेष्ठ मार्ग है। विवाह संबंधी बातें जानने के लिए हथेली में विवाह रेखा का अध्ययन मुख्य रूप से किया जाता है। 


जानिए आपके हाथ की विवाह रेखा के प्रभाव/असर–


1. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की किसी हथेली में एक से अधिक विवाह रेखाएं प्रेम-प्रसंग की संख्या की ओर इशारा करती हैं। साथ ही, यह रेखा यह भी बताती है कि आपका वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा। यदि विवाह रेखा नीचे की ओर बहुत अधिक झुकी हुई हों तो वैवाहिक जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

2. यदि किसी व्यक्ति के दोनों हाथों में विवाह रेखा के आरंभ में दो शाखाएं हो तो उस व्यक्ति की शादी टूटने का भय रहता है।

3. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की यदि किसी स्त्री के हाथ में विवाह रेखा के आरंभ में द्वीप चिह्न हो तो उसका विवाह किसी धोखे से होने की संभावनाएं रहती हैं। साथ ही, यह निशान जीवन साथी के खराब स्वास्थ्य की ओर भी इशारा करता है।

4. यदि किसी व्यक्ति के हाथ में विवाह रेखा बहुत अधिक नीचे की ओर झुकी हुई दिखाई दे रही है और वह हृदय रेखा को काटते हुए ओर नीचे चले जाए तो यह शुभ लक्षण नहीं माना जाता है। ऐसी रेखा वाले व्यक्ति का जीवन साथी उसकी मौजूदगी में ही गुजर सकता है।

5. यदि किसी व्यक्ति की हथेली में विवाह रेखा लम्बी और सूर्य पर्वत तक जाने वाली है तो यह संपन्न और समृद्ध जीवन साथी का प्रतीक है।

6. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की यदि बुध पर्वत से आई हुई कोई रेखा विवाह रेखा को काट दे तो व्यक्ति का वैवाहिक जीवन परेशानियों भरा होता है।

7. विवाह रेखा अगर बीच में टूटी हो तो यह विवाह टूटने का संकेत माना जाता है। इसके लिए हथेली के दूसरे चिह्नों पर भी विचार करना चाहिए।

8. यदि विवाह रेखा के अंत में किसी सांप की जीभ के समान दो शाखाएं हों तो यह पति-पत्नी के बीच वैचारिक मतभेद पैदा करती है।

9. यदि किसी पुरुष के बाएं हाथ में दो विवाह रेखा है और दाएं हाथ में एक विवाह रेखा है तो ऐसे लोगों की पत्नी श्रेष्ठ होती है। इन लोगों की पत्नी बहुत अधिक प्रेम करने वाली और पति का बहुत अधिक ध्यान रखने वाली होती है।

10. यदि दाएं हाथ में दो विवाह रेखा है और बाएं हाथ में एक विवाह रेखा है तो ऐसे लोगों की पत्नी अपने पति का अधिक ध्यान रखने वाली नहीं होती है।

11. दोनों हाथों में विवाह रेखा समान लंबाई की और समान शुभ लक्षणों वाली होती है तो ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन सुखी होता है। इन लोगों का अपने जीवन साथी से काफी अच्छा तालमेल होता है।

12. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की यदि किसी व्यक्ति के हाथ में विवाह रेखा ऊपर की ओर मुड़ जाए और छोटी उंगली तक पहुंच जाए तो ऐसे व्यक्ति के विवाह में काफी परेशानियां आती हैं। आमतौर पर ऐसी विवाह रेखा वाले इंसान का विवाह होना बहुत मुश्किल होता है यानी इन लोगों के अविवाहित रहने की संभावनाएं काफी अधिक होती हैं।

13. यदि विवाह रेखा के अंत में त्रिशूल के समान चिह्न दिखाई दे रहा है तो व्यक्ति अपने जीवन साथी से बहुत अधिक प्रेम करने वाला होता है। ये प्रेम हद से अधिक हो जाता है। कुछ वर्षों बाद ऐसा व्यक्ति जीवन साथी के प्रति उदासीन भी हो जाता है।

14. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की यदि विवाह रेखा को कोई खड़ी रेखा या रेखाएं काट रही हैं तो यह विवाह में देरी और बाधाओं का संकेत है।

15. ऊपर की ओर मुड़ी हुई विवाह रेखा शुभ नहीं मानी जाती है। यदि ये रेखा थोड़ी सी ऊपर की ओर मुड़ गई है तो व्यक्ति का विवाह होने में बहुत बाधाएं आती हैं और विवाह हो भी जाता है तो वैवाहिक जीवन सुखी नहीं कहा जा सकता है।

16. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की यदि किसी व्यक्ति के हाथ में विवाह रेखा और हृदय रेखा के बीच की दूरी बहुत ही कम है तो ऐसे लोगों का विवाह कम उम्र में होने की संभावनाएं होती हैं। आमतौर पर विवाह रेखा और हृदय रेखा के बीच की दूरी ही व्यक्ति के विवाह की उम्र बताती है। इन दोनों रेखाओं के बीच जितनी अधिक दूरी होगी विवाह उतने ही अधिक समय बाद होता है। ऐसी संभावनाएं काफी अधिक रहती हैं।

17. यदि किसी व्यक्ति के हाथ में विवाह रेखा पर क्रॉस का निशान है तो हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार ऐसे लोगों का जीवन साथी जल्दी गुजर सकता है।

18. यदि विवाह रेखा पर किसी वर्ग के समान चिह्न दिखाई दे रहा है तो यह जीवन साथी के खराब स्वास्थ्य का संकेत देता है।

19. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की यदि विवाह रेखा के प्रारंभ में किसी द्वीप के समान चिह्न है तो जीवन साथी का कोई अनैतिक संबंध हो सकता है। द्वीप का चिह्न अंत में हो तो यह जीवन साथी के स्वास्थ्य के लिए बुरा संकेत है।

20. यदि किसी व्यक्ति की हथेली में विवाह रेखा के प्रारंभ में तिल है तो यह जीवन साथी के बुरे स्वास्थ्य की ओर इशारा करता है। यदि यह तिल अधिक गहरा हो तो यह जीवन साथी के जीवन के लिए खतरे की ओर इशारा करता है।

21. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की यदि स्त्री के हाथ में विवाह रेखा जंजीरनुमा हो तो वह अपने विलास हेतु प्रेम के मामले में चारित्रिक पतन पाती है तथा उसका स्वभाव क्रूरता एवं निष्ठुरता का होता है।

22. मस्तक रेखा छोटी हो हृदय रेखा उसके नजदीक हो शुक्र पर्वत ऊंचा तथा हृदय रेखा छोटी होकर शनि पर्वत के पहले ही समाप्त हो तो व्यक्ति कुकर्मी होता है।

23. शुक्र पर्वत उभरा हुआ हो उस पर जाली हो, अंगूठे के प्रथम पर्व पर नक्षत्र तथा तर्जनी की तीसरी संधि पर तारे का चिन्ह हो तो व्यक्ति दुश्चरित्र होता है।

24. पतिब्रता स्त्री के लक्षण देखें – गुरु पर्वत अच्छा तथा उस पर एक रेखा हो, अनामिका के प्रथम पर्व पर क्राॅस हो, मंगल मैदान में स्पष्ट रेखाएं हों, अंगुलियों की रेखाएं लालिमा युक्त हों, हाथ छोटा एवं साफ रेखाओं वाला हो।

25. आदर्श पति का लक्षण देखें – हथेली सुदृढ, तर्जनी सीधी हो मस्तक रेखा महीन, गहरी एवं सीधी हो, शुक्र एवं चंद्र पर्वत अच्छे हों, अंगूठा चैकोर हो तथा हृदय रेखा गुरु पर्वत पर दो मुंही हो गई हो तथा शाखाएं लंबी हों।

26. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की यदि स्त्री के हाथ में विवाह रेखा पर नक्षत्र, विवाह रेखा झुक कर हृदय रेखा को स्पर्श करे, विवाह रेखा पर काला धब्बा, विवाह रेखा हृदय रेखा से मिलकर बारीक रेखाएं दोनों रेखाओं को काटे तो वैधव्य घटित हो सकता है।

27. सुखद विवाह के लक्षण हैं यदि चंद्र पर्वत से आकर कोई रेखा भाग्य रेखा में मिले, भाग्य रेखा चंद्र पर्वत से निकल कर हृदय रेखा तक जाये, मणिबंध से रेखा निकलकर शनि पर्वत तक पहुंचे तथा चंद्र पर्वत से कोई रेखा आकर उसमें मिले।

28. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की यदि विवाह रेखा पूर्ण पुष्ट तथा लालिमा युक्त हो तो व्यक्ति का दाम्पत्य सुखमय व्यतीत होता है। यदि विवाह रेखा कनिष्ठा अंगुली के दूसरे पोर तक चढ़े तो व्यक्ति को पत्नी की प्राप्ति नहीं होती है।

29. खंडित विवाह रेखा जीवन के मध्य काल में पत्नी वियोग देती है यह योग पत्नी की मृत्यु होने या तलाक होने से बनता है। विवाह रेखा नीचे की ओर जाकर हृदय रेखा को छुए तो पत्नी की मृत्यु हो जाती है।

30. शुक्र पर्वत से कोई रेखा निकलकर विवाह रेखा को स्पर्श करे तो वैवाहिक जीवन अत्यंत दुखमय हो जाता है। अंत में दो मुंही विवाह रेखा भी दाम्पत्य जीवन को कलह युक्त बनाती है।

31. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की हथेली में विवाह रेखा का चैड़ा होना विवाह के प्रति कोई उत्साह न होने का संकेत है। विवाह रेखा से प्रारंभ होकर कोई पतली रेखा हृदय रेखा की ओर जाये तो पति पत्नी के साथ जीवन भर बना रहता है।

32. विवाह रेखा का अंत में कई भागों में बंट जाना अत्यंत दुखी दाम्पत्य का संकेत है। दो मुंही विवाह रेखा की एक शाखा हृदय रेखा को स्पर्श करे तो व्यक्ति का प्रेम संबंध पत्नी की बहन से भी हो जाता है। रेखा की ऐसी स्थिति यदि स्त्री के हाथ में हो तो उसका प्रेम संबंध पति के भाई से हो जाने की आशंका रहती है।

33. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की यदि विवाह रेखा सूर्य रेखा को स्पर्श कर नीचे की ओर जाये तो अनमेल विवाह होता है। यदि बुध पर्वत पर विवाह रेखा कई भागों में बंट जाये तो कई बार सगाई टूटती है। यदि विवाह रेखा मस्तक रेखा को स्पर्श करे तो पति अपनी पत्नी की हत्या कर देता है।

34. विवाह रेखा पर काला धब्बा पत्नी सुख का अभाव बताता है। यदि विवाह रेखा से कोई रेखा निकल कर शुक्र पर्वत को स्पर्श कर ले तो पत्नी में चारित्रिक दोष हो सकता है।

35. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की यदि विवाह रेखा आयु रेखा को काटे या विवाह रेखा भाग्य रेखा एवं मस्तक रेखा परस्पर मिले तो दाम्पत्य दुख एवं कलह से परिपूर्ण रहता है। आड़ी रेखा से विवाह रेखा का कटना भी वैवाहिक सुख हानि देता है।

36. विवाह रेखा में झुकाव और झुकाव पर क्राॅस बना हो तो पति/पत्नी की आकस्मिक मृत्यु हो सकती है। विवाह रेखा के उद्गम पर द्वीप का चिन्ह दाम्पत्य सुख बिगाड़ता है।

37. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की यदि विवाह रेखा पर एक से अधिक द्वीप शादी सुख से वंचित रखते हैं। यदि विवाह रेखा का झुकाव कनिष्ठा की ओर हो तो जीवन साथी की मृत्यु उससे पूर्व होती है। यह लक्षण पति के हथ में हो तो पत्नी की और स्त्री के हाथ में हो तो पति की मृत्यु।

38. बुध क्षेत्र पर दो सामानांतर पुष्ट रेखाओं का होना दो विवाह होने का संकेत है। दो हृदय रेखाएं होने पर विवाह नहीं होता है।

39. चंद्र पर्वत से कोई रेखा आकर विवाह रेखा से मिले तो व्यक्ति भोगी एवं कामुक होता है। मंगल रेखा से आकर कोई रेखा विवाह रेखा को स्पर्श करे तो विवाह सुख नहीं मिलता।

40. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की भाग्य रेखा और मस्तक रेखा में यव का चिन्ह हो, भाग्य रेखा टेढ़ी हो, विवाह रेखा ऊपर की ओर मुड़ी हो तो व्यति विवाह नहीं करना चाहता है।

41. व्यक्ति आदर्श पति सिद्ध होगा यदि तर्जनी सुंदर सुडौल हो गुरु पर्वत पर एपैक्स केंद्र में हो, शुक्र, चंद्र पर्वत अपने केंद्र में हो, मस्तक रेखा पतली हो तथा आयु रेखा से मिली हो, हृदय रेखा से एक रेखा तर्जनी की ओर तथा दूसरी तर्जनी और मध्यमा के बीच में हो।

42. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की विवाह रेखा पर फोर्क हो, शुक्र पर्वत उभार लिए हुए हो, मस्तक रेखा जंजीरनुमा हो, शुक्र मुद्रिका दोहरी हो एवं कटी हो तथा हृदय रेखा में यव हो तो व्यक्ति इश्कबाज होता है।

43. यदि हथेली में चंद्र क्षेत्र विकसित हो तो व्यक्ति काम लोलुप तथा स्त्रियों के पीछे लगने वाला होता है। हथेली में प्रणय रेखाएं हों सूर्य पर्वत उभार लिए हो तो व्यक्ति काफी सोच विचार के बाद ही अन्य स्त्रियों से प्रेम संपर्क स्थापित करता है।

44.पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की  यदि शनि पर्वत अधिक उभार लिए हुए हो तो व्यक्ति अपने से बड़ी आयु की स्त्रियों से प्रेम संबंध स्थापित करता है उसे स्त्रियों से धन लाभ भी होता है।

45. गहरी प्रणय रेखा गहरे प्रेम संबंध होना बताती है एवं कमजोर प्रणय रेखा अल्प समय के लिए प्रेम संबंध होना व्यक्त करती है। प्रणय रेखा पर क्राॅस हो तो प्रेम संबंध शीघ्र समाप्त हो जाता है और यदि द्वीप हो तो व्यक्ति को प्रेम में बदनामी सहना पड़ता है। प्रणय रेखा सूर्य पर्वत की ओर जाये तो व्यक्ति का प्रेम संबंध ऊंचे घराने की स्त्रियों से होता है।

46 .यदि बुध क्षेत्र के आसपास विवाह रेखा के साथ-साथ दो-तीन रेखाएं चल रही हों तो व्यक्ति अपने जीवन में पत्नी के अलावा और भी स्त्रियों से रिलेशनशिप में रहता है।

47. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की शुक्र पर्वत पर टेढ़ी रेखाओं की संख्या यदि ज्यादा हैं तो ऐसे व्यक्ति के जीवन में किसी एक स्त्री या पुरुष का विशेष प्रभाव रहता है।

48. यदि प्रारम्भ में विवाह रेखा एक, किन्तु बाद में दो से अधिक रेखाओं में विभक्त हो जाए तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति एक साथ कई रिलेशनशिप में रहता है।

49. किसी व्यक्ति के विवाह रेखा में आकर या विवाह रेखा स्थल पर आकर कोई अन्य रेखा मिल रही हो तो प्रेमिका के कारण उसका गृहस्थ जीवन नष्ट होने की संभावना रहती है।

50. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की यदि प्रणय रेखा आरम्भ में पतली और बाद में गहरी होने का मतलब है कि किसी स्त्री अथवा पुरुष के प्रति आकर्षण एवं लगाव आरम्भ में कम था, किन्तु बाद में धीरे-धीरे प्रगाढ़ होता गया है।

51. किसी की हथेली में विवाह रेखा एवं कनिष्ठका अंगुली के मध्य से जितनी छोटी एवं स्पष्ट रेखाएं होंगी, उस स्त्री या पुरुष के विवाहोपरान्त अथवा पहले उतने ही प्रेम सम्बन्ध होते हैं।

52. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की विवाह रेखा आपके सुखी वैवाहिक जीवन के बारे में भी बताती है। यदी आपकी विवाह रेखा स्पष्ट तथा ललिमा लिए हुए है तो आपका वैवाहिक जीवन बहुत ही सुखमय होगा।

53. गुरू पर्वत पर यदि क्रॉस का निशान लगा हो तो यह शुभ विवाह का संकेत होता है। यदि यह क्रॉस का निशान जीवन रेखा के नज़दीक हो तो विवाह शीघ्र ही होता है।

54 . अगर विवाह रेखा ऊपर की तरफ आती हुई हृदय रेखा (Marriage Line Touches Heart Line) से मिले या फिर विवाह रेखा पर तिल हो या क्रॉस का निशान हो तो शादी में बहुत कठिनाइयां होती हैं। 

55. पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की यदि विवाह रेखा स्वास्थ्य रेखा से स्पर्श करे तो भी विवाह नहीं होता है। अगर विवाह रेखा पर एक से अधिक द्वीप हों या काला तिल हो तो यह जीवन भर अविवाहित होने का भय पैदा करता है।


पंडित दयानंद शास्त्री बताते हैं की यदि कुंडली मिलान के साथ-साथ यदि संभव हो तो हथेली में मौजूद विवाह रेखा, अन्य रेखाओं, पर्वतों एवं विभिन्न चिन्हों द्वारा स्थापित दाम्पत्य सुखदायक एवं दुखदायक योगों पर अवश्य ही विचार कर लेना चाहिए जिससे भावी दंपत्ति का वैवाहिक जीवन पूर्ण सुखद रहे।

शुभम भवतु..कल्याण  हो…

 

 

 

 

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