जानिए कब और कैसे मनाएं मौनी अमावस्या 27 जनवरी 2017 (शुक्रवार) को

जानिए कब और कैसे मनाएं मौनी अमावस्या  27 जनवरी 2017 (शुक्रवार) को

 

 

मौनी अमावस्या  27-01-2017

प्रिय पाठकों /मित्रों , इस वर्ष  27 जनवरी 2017 (शुक्रवार) को मौनी अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा. मौनी अमावस्या के दिन सूर्य तथा चन्द्रमा गोचरवश मकर राशि में आते हैं इसलिए यह दिन एक संपूर्ण शक्ति से भरा हुआ और पावन अवसर बन जाता है इस दिन मनु ऋषि का जन्म भी माना जाता है. इसलिए भी इस अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है. मकर राशि, सूर्य तथा चन्द्रमा का योग इसी दिन होता है अत: इस अमावस्या का महत्व और बढ़ जाता है. इस दिन पवित्र नदियों व तीर्थ स्थलों में स्नान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है |

पाटन वाले पंडित दयानंद शास्त्री (मोबाईल–09669290067 ) के अनुसार माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। इस दिन मौन रहना चाहिए। मुनि शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति हुई है। इसलिए इस व्रत को मौन धारण करके समापन करने वाले को मुनि पद की प्राप्ति होती है। इस दिन मौन रहकर यमुना या गंगा स्नान करना चाहिए। यदि यह अमावस्या सोमवार के दिन हो तो इसका महत्त्व और भी अधिक बढ़ जाता है। माघ मास के स्नान का सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण पर्व अमावस्या ही है। माघ मास की अमावस्या और पूर्णिमा दोनों ही तिथियां पर्व हैं। इन दिनों में पृथ्वी के किसी-न-किसी भाग में सूर्य या चंद्रमा को ग्रहण हो सकता है। ऐसा विचार कर धर्मज्ञ-मनुष्य प्रत्येक अमावस्या और पूर्णिमा को स्नान दानादि पुण्य कर्म किया करते हैं।

पुराणों के अनुसार मौनी अमावस्या शरद-संक्रांति के बाद की दूसरी या महाशिवरात्रि से पहले की अमावस्या होती है। किसानों को पता होता है कि अमावस्या के दौरान बीजों का अंकुरण और पौधों का विकास मंद या स्थिल सा हो जाता है। किसी भी पौधे को अपने रस को ऊपर तक पहुंचने में बहुत मुश्किल होती है। खास तौर पर इन तीन महीनों के दौरान, संक्रांति से लेकर महाशिवरात्रि तक, उत्तरायण के पहले चरण में, 0 डिग्री से 33 डिग्री उत्तर तक के अक्षांश में, पूर्णिमा और अमावस्या दोनों का असर बढ़ जाता है।

मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र संगममें देवताओं का निवास होता है इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस मास को भी कार्तिक के समान पुण्य मास कहा गया है। गंगा तट पर इस करणभक्त जन एक मास तक कुटी बनाकर गंगा सेवन करते हैं।शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है। इस दिन त्रिवेणी स्थल (तीन नदियों का संगम) पर स्नान करने से तन की शुद्धि, मौन रहने से मन की शुद्धि और दान देने से धन की शुद्धि और वृद्धि होती है। इस दिन गंगा में स्नान करने से दैहिक (शारीरिक), भौतिक (अनजाने में किया पाप), दैविक (ग्रहों गोचरों का दुर्योग) तीनों प्रकार के मनुष्य के पाप दूर हो जाते हैं। इस दिन स्वर्ग लोक के सारे देवी-देवता गंगा में वास करते हैं। जो पापों से मुक्ति देते हैं।पुराणों में मौनी अमावस्या के दिन त्रिवेणी स्नान की जो महिमा वर्णित की गई है, वह स्वर्ग एंव मोक्ष को देने वाली है। स्नान के साथ ही पुराणों में त्रिवेणी तट पर दान की अपार महिमा वर्णित है।  

त्रिवेणी माघवं सोमं भरद्वाजंच वासुकिमः। 

वन्देक्षयवटं शेषं प्रयागं तीर्थनायकम।। 

प्रयाग तीर्थो का राजा है, यहां गंगा, यमुना एंव अदृश्य सरस्वती का संगम स्थान पवित्र त्रिवेणी, वेणीमाधव, सोमनाथ, भरद्वाज मुनि का आश्रम, वासुकि नाथ, अक्षयवट एंव शेषनाथ- ये सभी पवित्र स्थान है। मौनी अमावस्या को स्नान करके अपने नित्यकर्म से निवृत्त होने के बाद तिल, तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला और वस्त्र आदि का दान करना चाहिए। आज के दिन आप एक दिन, एक सप्ताह, एक महीना तथा एक वर्ष का मौन व्रत रखकर आप शररीरिक, वाचिक व मानसकि कष्टों से मुक्ति पा सकते है।

वैसे तो इस इस दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान किया जा सकता है लेकिन जो भक्त त्रिवेणी के संगम में स्नान करते हैं उन्हें सौ हजार राजसूय यज्ञ के बराबर फल की प्राप्ति होती है. इस दिन संगम में स्नान करना और अश्वमेघ यज्ञ करना दोनों के फल समान है. लेकिन अगर संगम या गंगा यमुना में स्नान नहीं कर पायें तो भी कोई बात नहीं. घर पर गंगा जल मिले जल से स्नान कर अगर आप विधि विधान से सूर्यदेव की उपासना और दान कर लेंगे तो पितरों का ही नहीं देवताओं का भी आशीर्वाद बरसेगा और मिल जाएगा कई जन्मों का पुण्य.

इस दिन भगवान विष्णु और पीपल का पूजन तथा उनकी 108 प्रदक्षिणा करने का विधान है। 108 में से 8 प्रदक्षिणा पीपल के वृक्ष को कच्चा सूत लपेटते हुए की जाती हैं। प्रदक्षिणा करते समय 108 फल पृथक-पृथक रखे जाते हैं, बाद में वे किसी ब्राह्मणों में वितरीत कर दिये जाते हैं। ऐसा करने से संतान चिरंजीवी होती है, दरिद्रता का निवारण होता है, जीवन में सुख-शांति आती है।

योगिक परंपराओं में प्रकृति से मिलने वाली इस सहायता का लाभ उठाने के लिए बहुत सी प्रक्रियाएं हैं। इनमें से एक है, मौनी अमावस्‍या से लेकर महाशिवरात्रि तक मौन रखना। उस वर्ष इसका महत्‍व बढ़ जाता है जब यह बारह वर्ष के सौर-चक्र को पूरा कर रही होती है तब सभी जल राशियों और जल पर इसका काफी प्रभाव होता है। यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारा शरीर हमारे लिए सबसे घनिष्ठ और आत्मीय जल-भंडार है, क्योंकि इसमें 70 फीसदी पानी है। इसलिए व्यक्ति भी इससे प्रभाव से प्रभावित होता है।

काल-चक्र की सवारी करें या काल के अंतहीन चक्रों में फंसे रहें। यह समय और यह दिन सबके परे जाने का एक अद्भुत अवसर प्रदान करता है। 

पाटन वाले पंडित दयानंद शास्त्री (मोबाईल–09669290067 ) से जानिए मौनी अमावस्या के दिन क्या करें ?

—माघ मास में पवित्र नदियों में स्नान करने से एक विशेष ऊर्जा प्राप्त होती है।

—-अमावस्या के दिन जप-तप, ध्यान-पूजन करने से विशेष धर्मलाभ प्राप्त होता है। 

— हमारे शास्त्रों में वर्णित है कि माघ मास में पूजन-अर्चन व नदी स्नान करने से भगवान नारायण को प्राप्त किया जा सकता है तथा इन दिनों नदी में स्नान करने से स्वर्ग प्राप्ति का मार्ग मिल जाता है। 

—-जो लोग घर पर स्नान करके अनुष्ठान करना चाहते हैं, उन्हें पानी में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर तीर्थों का आह्वान करते हुए स्नान करना चाहिए। 

—-इस दिन सूर्य को अर्घ्य देने से गरीबी और दरिद्रता दूर होती है।

—- मोनी अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी परिक्रमा करें। 

—इसके अलावा मंत्र जाप, सिद्धि साधना एवं दान कर मौन व्रत को धारण करने से पुण्य प्राप्ति और भगवान का आशीर्वाद मिलता है।

माघ मास की प्रत्येक तिथि पर्व है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या मौनी अमावस्या के रूप में प्रसिद्ध है। माघ मास में मंगलवार उपासना का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया है जिसके करने से धर्म, अर्थ,काम व मोक्ष- इन चारों पुरुषार्थों की सहज प्राप्ति तो होती ही साथ ही लौकिक सुख-सुविधाओं का भी अम्बार लग जाता है। 

—विशेष—-

1- जिन जातकों का बुघ ग्रह पीडि़त या अशुभ फल दे रहा है, वह लोग मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रहकर तुलसी के पेड़ का पूजन करें तथा प्रातःकाल तुलसी पत्तियों का सेवन करें। इसी दिन किन्नरों को हरी चूडि़यां व हरे रंग की साड़ी का दान करने से बुध ग्रह शुभ फल देने लगता है। 

2- जिन लोगों का चन्द्र ग्रह अशुभ फल दे रहा है, वह लोग मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रहें तथा खीर से भोलेनाथ का भोग लगाकर गरीबों में वितरण करें।

 

पाटन वाले पंडित दयानंद शास्त्री (मोबाईल–09669290067 ) से जानिए मौनी अमावस्या महात्म्य—

पाटन वाले पंडित दयानंद शास्त्री (मोबाईल–09669290067 )के अनुसार  मौनी अमावस्या के दिन व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान, पुण्य तथा जाप करने चाहिए. यदि किसी व्यक्ति की सामर्थ्य त्रिवेणी के संगम अथवा अन्य किसी तीर्थ स्थान पर जाने की नहीं है तब उसे अपने घर में ही प्रात: काल उठकर दैनिक कर्मों से निवृत होकर स्नान आदि करना चाहिए अथवा घर के समीप किसी भी नदी या नहर में स्नान कर सकते हैं. पुराणों के अनुसार इस दिन सभी नदियों का जल गंगाजल के समान हो जाता है. स्नान करते हुए मौन धारण करें और जाप करने तक मौन व्रत का पालन करें |

इस दिन व्यक्ति प्रण करें कि वह झूठ, छल-कपट आदि की बातें नहीं करेगें. इस दिन से व्यक्ति को सभी बेकार की बातों से दूर रहकर अपने मन को सबल बनाने की कोशिश करनी चाहिए. इससे मन शांत रहता है और शांत मन शरीर को सबल बनाता है. इसके बाद व्यक्ति को इस दिन ब्रह्मदेव तथा गायत्री का जाप अथवा पाठ करना चाहिए. मंत्रोच्चारण के साथ अथवा श्रद्धा-भक्ति के साथ दान करना चाहिए. दान में गाय, स्वर्ण, छाता, वस्त्र, बिस्तर तथा अन्य उपयोगी वस्तुएं अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करनी चाहिए |

व्रत का है बड़ा महत्व—

इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्त्र गोदान का फल मिलता है। शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गयी है। अश्वत्थ यानि पीपल वृक्ष। इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा और वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेटकर परिक्रमा करने का विधान होता है। धान, पान और खड़ी हल्दी को मिला कर उसे विधानपूर्वक तुलसी के पेड़ को चढ़ाया जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी खास महत्व समझा जाता है। कहा जाता है कि महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ्य और सभी दुखों से मुक्त होगा। ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों कि आत्माओं को शांति मिलती है।

भूखे का पेट भरना है लाभकारी—-

पाटन वाले पंडित दयानंद शास्त्री (मोबाईल–09669290067 )के अनुसार  तंत्र शास्त्र में भी मौनी अमावस्या को विशेष तिथि माना गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए उपाय विशेष ही शुभ फल प्रदान करते हैं। मौनी अमावस्या के दिन भूखे प्राणियों को भोजन कराने का भी विशेष महत्व है। इस दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं। गोलियां बनाते समय भगवान का नाम लेते रहें। इसके बाद समीप स्थित किसी तालाब या नदी में जाकर यह आटे की गोलियां मछलियों को खिला दें। इस उपाय से आपके जीवन की अनेक परेशानियों का अंत हो सकता है।

चीटी को खिलाएं मीठा आटा—-

पाटन वाले पंडित दयानंद शास्त्री (मोबाईल–09669290067 ) के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाने से आपके पाप कर्मों का क्षय होगा और पुण्य कर्म उदय होंगे। यही पुण्य कर्म आपकी मनोकामना पूर्ति में सहायक होंगे।

मौनी अमावस्या को शाम के समय घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। बत्ती में रुई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें। साथ ही दीए में थोड़ी सी केसर भी डाल दें। यह मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का उपाय है।

पाटन वाले पंडित दयानंद शास्त्री (मोबाईल–09669290067 ) से जानिए कैसे करें पूजन—-

शास्त्रों में वर्णित है कि नदी, सरोवर के जल में स्नान कर सूर्य को गायत्री मंत्र उच्चारण करते हुए अर्घ्य देना चाहिए लेकिन जो लोग घर पर स्नान करके अनुष्ठान करना चाहते हैं, उन्हें पानी में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। सोमवती अमावस्या या मौनी अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी परिक्रमा करें। सोमवती अमावस्या के दिन सूर्य नारायण को जल देने से गरीबी और दरिद्रता दूर होती है। जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर है, वह गाय को दही और चावल खिलाएं तो मानसिक शांति प्राप्त होगी। इसके अलावा मंत्र जाप, सिद्धि साधना और दान कर मौन व्रत को धारण करने से पुण्य प्राप्ति और भगवान का आशीर्वाद मिलता है।

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