आइये जाने बुध ग्रह का पुराणों व ज्योतिष शास्त्र में महत्त्व,प्रभाव एवं उपाय—–

आइये जाने  बुध ग्रह का पुराणों व ज्योतिष शास्त्र में महत्त्व,प्रभाव एवं उपाय—–
 
जानिए बुध ग्रह के बारे में –
—-बुध ग्रह को बुद्धि का देवता माना जाता है। कुंडली में इसकी स्थिति काफी अधिक महत्व रखती है। यदि बुध अच्छी स्थिति में हो तो व्यक्ति को बुद्धि संबंधी कार्यों में विशेष सफलताएं प्राप्त होती हैं। जबकि ये अशुभ स्थिति में हो तो कई प्रकार की मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।बुध एक ऐसा ग्रह है जो सूर्य के सानिध्य  में ही रहता है। जब कोई ग्रह सूर्य के साथ होता है तो उसे अस्त माना जाता है। यदि बुध भी 14 डिग्री या उससे कम में सूर्य के साथ हो, तो उसे अस्त माना जाता है। लेकिन सूर्य के साथ रहने पर बुध ग्रह को अस्त का दोष नहीं लगता और अस्त होने से परिणामों में भी बहुत अधिक अंतर नहीं देखा गया है। बुध ग्रह कालपुरुष की कुंडली में तृतीय और छठे भाव का प्रतिनिधित्व करता है। पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09024390067 ) के अनुसार बुध की कुशलता को निखारने के लिए की गयी कोशिश, छठे भाव द्वारा दिखाई देती है। जब-जब बुध का संबंध शुक्र, चंद्रमा और दशम भाव से बनता है और लग्न से दशम भाव का संबंध हो, तो व्यक्ति कला-कौशल को अपने जीवन-यापन का साधन बनाता है। जब-जब तृतीय भाव से बुध, चंद्रमा, शुक्र का संबंध बनता है तो व्यक्ति गायन क्षेत्र में कुशल होता है। अगर यह संबंध दशम और लग्न से भी बने तो इस कला को अपने जीवन का साधन बनाता है। इसी तरह यदि बुध का संबंध शनि केतु से बने और दशम लग्न प्रभावित करे, तो तकनीकी की तरफ व्यक्ति की रुचि बनती है। कितना ऊपर जाता है या कितनी उच्च शिक्षा ग्रहण करता है, इस क्षेत्र में, यह पंचम भाव और दशमेश की स्थिति पर निर्भर करता है। पंचम भाव से शिक्षा का स्तर और दशम भाव और दशमेश से कार्य का स्तर पता लगता है। बुध लेख की कुशलता को भी दर्शाता है। यदि बुध पंचम भाव से संबंधित हो, और यह संबंध लग्नेश, तृतीयेश और दशमेश से बनता है, तो संचार माध्यम से जीविकोपार्जन को दर्शाता है और पत्रकारिता को भी दर्शाता है। पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09024390067 ) के अनुसार मंगल से बुध का संबंध हो और दशम लग्न आदि से संबंध बनता हो और बृहस्पति की दृष्टि या स्थान परिवर्तन द्वारा संबंध बन रहा हो, तो इंसान को वाणिज्य के कार्यों में कुशलता मिलती है। इस प्रकार कुशलता बुध तय करता है। क्षेत्र अलग-अलग ग्रहों और भावों व भावों के स्वामी का संबंध जीवकोपार्जन का क्षेत्र बताता है। यद्यपि इस प्रकार के बहुत से क्षेत्र हैं, लेकिन उन पर बुध ग्रह का प्रभाव अवश्य देखने को मिलता है। जब भी किसी क्षेत्र को विशेष योग्यता का सम्मान मिले, तो खेलों के क्षेत्र में भी यदि मंगल, शनि, राहु और बुध का संबंध खिलाड़ियों की जन्मपत्री में देखने को मिलता है।
  
—–बुधग्रह को नवग्रह मंडल में युवराज का पद प्राप्त है |
—–इसको चंद्रमा का पुत्र मन जाता है |
—-अंग्रेजी में इसको मरकरी कहा जाता है |
—-इस ग्रह का रंग हरा होता है |
—–यह एक बहुत ही सोम्य और सरल ग्रह है |
—–बारह राशियों में इसको मिथुन और कन्या राशी का आधिपत्य प्राप्त है |
—–बुधग्रह कुंडली में कन्या राशी में उच्च का और मीन राशी में नीच का फल देता है |
—–इसके अच्छे मित्रो में शनि और शुक्र का नाम आता है राहू को भी बुध का साथी माना जाता है | मगर बुध की शत्रुता चंद्रमा के साथ मानी गयी है |
—–सूर्य, मंगल,गुरु और को सम माना गया है |
—–इसको बुधि,वाणी और तर्क का ग्रह माना जाता है 
—–इसके देवता गणपति है |
—–बुधग्रह के प्रभाव वाला जातक सुन्दर, सुशिल और बुद्धिमान होता है |
——किर्याओ में बुध के प्रभाव वाला जातक पंडिताई का काम करता है और विद्धवान होता है गणित का मास्टर और पूर्व में किसी वस्तु अथवा बात का अनुमान या पूर्वाभास प्राप्त करने में माहिर होता है |
——बुध प्रधान जातक व्यापारी होता है और वकालत, दलाली, सेल्समेनशिप आदि के पुरषार्थ के कामो में खूब कमाता है |
—–काल पुरुष में इसको वाणी का रूप कहा गया है |
बुधग्रह की उत्पत्ति का पौराणिक वृत्तांत—–
बुध कि उत्पत्ति का वर्णन पद्म ,मत्स्य ,मार्कंडेय ,विष्णु एवम ब्रह्म आदि अनेक  पुराणों में मिलता है |जगतपिता ब्रह्मा जी के पुत्र प्रजापति अत्रि  थे |अत्रि के पुत्र चंद्रमा हुए जिनको ब्रह्मा जी ने नक्षत्रों व औषधियों का अधिपति बनाया |चन्द्र ने राजसूय यज्ञ के अनुष्ठान से दुर्लभ ऐश्वर्य व सम्मान प्राप्त किया जिसे पा कर उसे मद हो गया |उसकी बुध्धि भ्रष्ट हो गयी और मदांध हो कर एक दिन अनितिपूर्वक देवगुरु बृहस्पति कि पत्नी तारा का अपहरण कर लिया|देवों तथा ऋषि मुनियों ने चन्द्र को समझाने का बहुत यत्न किया पर काम के वशीभूत होने के कारण उसने एक न सुनी |अंत में देवराज इंद्र ,रूद्र व देवसेना ने देवगुरु को न्याय दिलाने के लिए चन्द्र पर चढाई कर दी |  पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09024390067 ) के अनुसार बृहस्पति का विरोधी होने के कारण शुक्राचार्य ने दैत्य व दानवों सहित चन्द्र का पक्ष लिया |तारकमय नामक भीषण संग्राम हुआ |सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड इस भयानक देवासुर संग्राम से पीड़ित हो गया | ब्रह्मा जी ने   मध्यस्थता करके दोनों  पक्षों में सुलह करा दी तथा देवगुरु को उनकी पत्नी वापिस दिला दी |जिस समय तारा कि वापसी हुई उस समय वह गर्भवती थी |यह जान कर बृहस्पति बहुत कुपित हुए |उन्हों ने तारा को गर्भ त्याग करने का आदेश दिया |पति के आदेश कि पालना करते हुए तारा ने वह गर्भ एक तृण समूह में त्याग दिया |वह बालक अत्यंत सुंदर व तेजस्वी था | देवताओं के प्रश्न करने पर तारा ने उस बालक का पिता चंद्रमा को बताया | यह सुन कर चन्द्र ने उस बालक को अपना लिया और उसका नाम बुध रख दिया | ब्रह्मा जी ने बुध को नवग्रह मंडल में स्थान दिया |ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति कि  बुध से शत्रुता का कारण इसी कथा में छुपा हुआ है |
बुध का विवाह—-
पुराणों के अनुसार वैवस्वत मनु के वंश में इल नाम का एक राजा हुआ | एक बार राजा इल शिकार के लिए एक वन में गए|उस वन में एक स्थान भगवान शंकर और पार्वती कि रति क्रीडा  के लिए सुरक्षित था जिसे अम्बिका वन कहा जाता था | उस स्थान पर शिव ,कार्तिकेय ,गणेश व नंदी के सिवाय कोई अन्य  पुरुष प्रवेश  नहीं कर सकता था| किसी भी अन्य पुरुष के प्रवेश करने पर उसका स्त्री रूप हो जाना निश्चित था |राजा इल अनभिज्ञता वश उस आरक्षित स्थान में चले गए तथा स्त्री रूप में परिवर्तित हो गए |उसी स्थान पर किसी यक्षिणी से उन्हें उस शाप के बारे में ज्ञान हुआ | काल कि गति को स्वीकार कर उन्हों ने अपना नाम इला रख लिया तथा स्त्री रूप व स्वभाव अपना लिया |अम्बिका वन से बाहर आने पर इला का मिलन सोम पुत्र बुध से हुआ |दोनों एक दूसरे में आसक्त हो गए तथा विवाह बंधन में  बंध गए |कालान्तर में इला के गर्भ से चन्द्र वंश कि वृध्धि करने वाला तेजस्वी पुत्र हुआ जिसका नाम पुरुरवा रखा गया | बाद में शिव व पार्वती कि आराधना करके इला ने अपने पूर्व पुरुषत्व कि प्राप्ति कर ली और फिर से इल बन कर अपने राज्य में चले गए |
 
पुराणों में बुध का स्वरूप और प्रकृति—–
 
मत्स्य पुराण के अनुसार बुध कनेर के पुष्प के अनुसार कान्ति वाला ,पीत रंग के पुष्प व वस्त्र धारण करने वाला तथा मनोहर रूप वाला है | नारद पुराण के अनुसार बुध त्रिदोष युक्त,हास्य प्रिय,एवम,अनेकार्थी शब्दों का प्रयोग करने वाला है |
 
 ज्योतिष शास्त्र में बुध का स्वरूप और प्रकृति—–
 
बृहत् पाराशर ,सारावली ,फलदीपिका आदि ग्रंथों के मतानुसार बुध सुन्दर ,हास्य प्रिय ,वात-पित्त-कफ प्रकृति का ,कार्य करने में चतुर,मधुर भाषी ,रजोगुणी,विद्वान, त्वचा व नस प्रधान शरीर वाला ,  कला कुशल ,सांवले रंग का तथा हरे रंग के वस्त्र धारण करने वाला है |
 
बुध ग्रह कि गति—–
 
गरुड़ व विष्णु पुराण के अनुसार बुध का रथ वायु एवम अग्नि से निर्मित है | उसमें वायु के समान वेग वाले अश्व जुते हैं जिनका रंग भूरा है |भागवत पुराण के अनुसार बुध कि स्थिति शुक्र से 2 लाख योजन ऊपर है |जब बुध सूर्य कि गति का उल्लंघन करता है तब पृथ्वी पर सूखा या अतिवृष्टि का योग होता है | स्थूल रूप से बुध एक राशि में 25 दिन तक संचार करता है |
 
वैज्ञानिक परिचय——-
रोमन मिथको के अनुसार बुध व्यापार, यात्रा और चोर्यकर्म का देवता , युनानी देवता हर्मीश का रोमन रूप , देवताओ का संदेशवाहक देवता है। इसे संदेशवाहक देवता का नाम इस कारण मिला क्योंकि यह ग्रह आकाश मे काफी तेजी से गमन करता है।बुध सौर मंडलका सूर्य से सबसे निकट स्थित और आकार मे सबसे छोटा ग्रह है। यह सूर्य की एक परिक्रमा करने मे ८८ दिन लगाता है। यह लोहे और जस्ते का बना हुआ हैं। यह अपने परिक्रमा पथ पर २९ मील प्रति क्षण की गति से चक्‍कर लगाता हैं।पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09024390067 ) के अनुसार बुध सूर्य के सबसे पास का ग्रह है और द्रव्यमान से आंठवे क्रमांक पर है।इसकी सूर्य से दूरी ४६,०००,००० किमी(perihelion ) से ७०,०००,००० किमी(aphelion) तक रहती है। जब बुध सूर्य के निकट  होता है तब उसकी गति काफी धीमी  होती है। बुध का कोई भी ज्ञात चन्द्रमा नही है। |बुध सामान्यतः नंगी आंखो से सूर्यास्त के बाद या सूर्योदय से ठीक पहले देखा जा सकता है।
 
ज्योतिष शास्त्र में बुध—–
 
ज्योतिष शास्त्र में मंगल को सौम्य  ग्रह की श्रेणी में रखा गया है | राशि मंडल में इसे मिथुन  और कन्या  राशियों का स्वामित्व प्राप्त है | यह कन्या  राशि में1-15 डिग्री उच्च का 16-20 मूल त्रिकोण का तथा शेष राशि में स्व गृही  तथा कर्क में नीच का होता है | पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09024390067 ) के अनुसार बुध अपने स्थान से सातवें स्थान को पूर्ण दृष्टि से देखता है |सूर्य व शुक्र से मैत्री ,मंगल गुरु  व शनि से समता तथा चन्द्र से शत्रुता रखता है | | बुध अपने वार ,स्व नवांश,स्व द्रेष्काण,स्व तथा उच्च राशि , दिन एवम रात्रिकाल में ,उत्तर दिशा में बलवान होता है |
 
कारकत्व ——
 
बुध बुध्धि ,विद्या ,चतुराई ,मामा ,मित्र ,वाणी ,कुमार अवस्था,त्वचा,हरे पदार्थ,पन्ना,दूत कर्म ,हास्य,ज्योतिष विद्या,गणित, कला-कौशल,व्यापार,लेखन,बीमा,संचार के साधन,यंत्र –मन्त्र-तंत्र,कूटनीति,लिपिक,शिक्षक,कराधान,मुद्रा विनिमय ,पुस्तक विक्रेता, आढ़तदलाली,डाक –तार विभाग आदि का कारक है |
 
रोग  —–
 
जनम कुंडली में  बुध  अस्त ,नीच या शत्रु राशि का ,छटे -आठवें -बारहवें  भाव में स्थित हो ,पाप ग्रहों से युत  या दृष्ट, षड्बल विहीन हो तो  उदर रोग,त्वचा विकार ,विषम ज्वर ,कंठ रोग, बहम,कर्ण एवम नासिका रोग, पांडू,संग्रहणी,मानसिक रोग, वाणी में दोष,इत्यादि रोगों से कष्ट हो सकता है |
 
फल देने का समय—–
 
बुध अपना शुभाशुभ फल  32-36 वर्ष कि आयु में एवम अपनी दशाओं व गोचर में प्रदान करता है | कुमार अवस्था पर भी  इस का अधिकार कहा गया है |
 
बुध का राशि फल——-
 
जन्म कुंडली में बुध का मेषादि राशियों में स्थित होने का फल इस प्रकार है :-
 
मेष में – बुध हो तो जातक कृश देह वाला,धूर्त ,विग्रह प्रिय , नास्तिक, दाम्भिक,मद्यपान करने वाला, जुआरी,,नृत्य संगीत में रूचि रखने वाला ,असत्य भाषी ,लिपि का ज्ञाता ,परिश्रम से प्राप्त धन को नष्ट करने वाला ,रति प्रिय,ऋण व बंधन भोगने वाला,कभी चंचल तो कभी स्थिर स्वभाव का होता है |
 
वृष   में  बुध  हो तो जातक कार्य में दक्ष ,विख्यात,शास्त्र का ज्ञाता ,वस्त्र अलंकार व सुगंध प्रेमी ,स्थिर प्रकृति,उत्तम स्त्री व धन से युक्त,मनोहर वाणी वाला ,हास्य प्रेमी व वचन का पालन करने वाला होता है |
 
मिथुन में  बुध हो तो जातक ,बहुत विषयों का ज्ञाता ,शिल्प कला में कुशल, ,धर्मात्मा ,बुद्धिमान,प्रिय भाषी,कवि,अल्प रतिमान,स्वतंत्र,दानी,पुत्र,-मित्र युक्त ,प्रवक्ता एवम अधिक कार्यों में लीन होता है |
 
कर्क में बुध  हो तो जातक प्राज्ञ ,विदेश निरत,रति व गीत संगीत में चित्त वाला,स्त्री द्वेष के कारण नष्ट धन वाला,कुत्सित,चंचल,अधिक कार्यों में रत,अपने कुल कि कीर्ति के कारण प्रसिद्ध,बहु प्रलापी जल से धन लाभ प्राप्त करने वाला तथा अपने बन्धु-बांधवों से द्रोह करने वाला होता है |
 
सिंह में  बुध हो तो जातक कला व ज्ञान से हीन,असत्यवादी, अल्पस्मृतिवान ,स्वतंत्र,अपने कुल का विरोधी तथा दूसरों को स्नेह करने वाला, दुष्कर्मी,सेवक,संतान सुख से वंचित होता है |
 
कन्या में बुध  हो तो जातक धर्म प्रिय,प्रवक्ता,चतुर,लेखक,कवि,विज्ञान –शिल्प निरत,मधुर,पूज्य,अपने गुणों के कारण प्रसिध्ध , अपने कार्य के लिए अनेक युक्तियों का प्रयोग करने वाला तथा उदार  होता है |
 
तुला मे बुध  हो तो जातक शिल्पकार,विवादी,वाक् चतुर,इच्छानुसार व्यय करने वाला ,अनेक दिशाओं में व्यापार करने वाला ,अतिथि-देव-गुरु-ब्राह्मण भक्त,चापलूसतथा जल्दी ही क्रोधी या शांत हो जाने वाला होता है |
 
वृश्चिक में बुध  हो तो जातक परिश्रमी,शोकयुक्त,द्रोही,जुआरी,मद्यपान करने वाला ,घमंडी , त्यक्त धर्मा,दुष्ट स्त्री भोक्ता, ,लज्जाहीन,मूर्ख,लोभी,कपटी,नीच कार्यों में लीन,ऋणी,अधम जनों में प्रीति व दूसरों कि वस्तुओं को लेने वाला होता है |
 
धनु में बुध हो तो जातक विख्यात , यथार्थ वक्ता ,उदार,गुणी,शास्त्र का ज्ञाता ,वीर,शील,मंत्री,पुरोहित,कुल मेंप्रधान,महा पुरुष,अध्यापक ,वाक् चतुर,दानी व्रती,व लेखक होता है |
 
मकर में बुध हो तो जातक,अधम,मूर्ख ,नपुंसक,कुल के गुणों से रहित,दुखी,स्वप्न में विहार करने वाला,चुगल खोर,असत्यवादी,अस्थिर, ऋणी,डरपोक,मलिन व बंधुओं से त्यक्त होता है |
 
 कुम्भ में बुध हो तो जातक करे हुए कार्य का त्यागी ,शत्रु पीड़ित,अपवित्र,डरपोक,भाग्यहीन,दूसरों कि आज्ञा कापालन करने वाला,नपुंसक होता है |
 
मीन में  बुध हो तो जातक निर्धन विदेश वासी,सिलाई के काम में निपुण ,विज्ञान व कला से हीन ,परधन संचय में दक्ष,सज्जनों का प्रेमी होता है |
 
(बुध पर किसी अन्य ग्रह कि युति या दृष्टि के प्रभाव से उपरोक्त राशि फल में परिवर्तन भी संभव है| )
 
बुध का सामान्य  दशा फल—–
 
जन्म कुंडली मेंबुध  स्व ,मित्र ,उच्च राशि -नवांश का ,शुभ भावाधिपति ,षड्बली ,शुभ युक्त -दृष्ट हो तो बुध की शुभ दशा में मित्रों से समागम ,यश प्राप्ति,वाणी में प्रभाव व अधिकार, बुध्धि कि प्रखरता,विद्या लाभ,परीक्षाओं में सफलता ,हास्य में रूचि,सुख-सौभाग्य ,गणित-वाणिज्य-कंप्यूटर-सूचना विज्ञान आदि क्षेत्रों में सफलता ,व्यापार में लाभ ,स्वाध्याय में रूचि,पद प्राप्ति व पदोन्नति होती है | पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09024390067 ) के अनुसार लेखकों,कलाकारों,ज्योतिषियों,शिल्पकारों ,आढतियों ,दलालों के लिए यह दशा बहुत शुभ फल देने वाली होती है |जिस भाव का स्वामी बुध होता है उस भाव से विचारित कार्यों व पदार्थों में सफलता व लाभ होता है |कुंडली में बुध अच्छा होता है तो जातक की त्वचा और रंगरूप बहुत ही सुन्दर और देखने में प्रिय होता है | यह त्वचा प्रधान ग्रह है, अगर कुंडली में बुध ख़राब हो तो त्वचा सम्बन्धी रोग होते है और दशा महादशा में भी खराबफल देता है इससे वायु, काफ व पित के रोग देता है और शारीर के तंत्रिका तंत्र यानि की नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है | पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09024390067 ) के अनुसार बुध के कमजोर होने से जातक के सोचने और समझने की शक्ति कमजोर होती है जेसे की त्वचा का सुन्न होना, नाक के सेंसर कम काम करते है, चोट लगने या किसी प्रकार की पीड़ा का महसूस नहीं होना, त्वचा पर काले रंग के धब्बे बन जाना और स्वतः ही समाप्त हो जाना जेसे प्रभाव दिखाई देते है | शारीरr में बुध को छाती और भुजाओ के आगे के भाग का आधिपत्य भी दिया गया है | अगर कुंडली में बुध कमजोर हो तो शुक्र को बलवान करके बुध की शक्ति को बढाया जा सकता है |
 
पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09024390067 ) के अनुसार यदि बुध अस्त ,नीच शत्रु राशि नवांश का ,षड्बल विहीन ,अशुभभावाधिपति  पाप युक्त दृष्ट हो तो  बुध  दशा में मनोव्यथा,स्वजनों से विरोध ,नौकरी में बाधा,कलह, मामा या मौसी को कष्ट ,त्रिदोष विकार ,उदर रोग त्वचा विकार विषम ज्वर कंठ रोग  बहम कर्ण एवम नासिका रोग पांडु रोग  संग्रहणी मानसिक रोग  वाणी में दोष इत्यादि रोगों से कष्ट, विवेक कि कमी ,विद्या में बाधा ,परीक्षा में असफलता ,व्यापार में हानि ,शेयरों में घाटा तथा वाणी में दोष होता है | पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09024390067 ) के अनुसार जिस भाव का स्वामी बुध होता है उस भाव से विचारित कार्यों व पदार्थों में असफलता व हानि होती है |बुध अगर कुंडली में कमजोर हो तो पारिवारिक जीवन को प्रभावित करता है और जातक की शादी लेट होती है कभी कभी होती ही नहीं, शादी शुदा जिन्दगी में भी शारीरिक सुखो में कमी आती है पति और पत्नी भी आपस में एक दुसरे के सामने झूठ बोलते है व आपस में काफी मनमुटाव होता है कलेश चलता रहता है और कभी कभी तो सम्बन्ध भी विच्छेद हो जाते है | अगर किसी का वैवाहिक जीवन कलेश्मय हो तो समझना की बुध ग्रह कुंडली में कमजोर है | बुध के मजबूत होने से धन धन्य की कमी नहीं रहती जीवन बहुत आनद से गुजरता जाता है | अगर व्यापार में भी बार बार घाटा होता है या बदलना पड़ता है तो बुध ही इसका कारन होता है | अगर वकालत, दलाली आदि का काम नहीं चलता है तो भी बुध ही इसका कारन होता है | पन्ना इसका रत्न होता है और पीतल इसका धातु होता है |
 
 गोचर में बुध का प्रभाव —–
 
जन्म या नाम राशि से 2,4,6,8,10 व 11 वें स्थान पर बुध  शुभ फल देता है |शेष स्थानों पर बुध का भ्रमण अशुभ कारक  होता है |
जन्मकालीन चन्द्र से प्रथम स्थान पर बुध का गोचर अप्रिय वाणी का प्रयोग,चुगलखोरी,धन हानि ,सम्बन्धियों को हानि तथा अनादर करता है |
दूसरे स्थान पर बुध  का गोचर धन आभूषण कि प्राप्ति,विद्या लाभ,वाक् पटुता, उत्तम भोजन व सम्बन्धियों से लाभ कराता है ||
तीसरे स्थान पर बुध  का गोचर  भय ,बंधुओं से विवाद ,धन हानि,मित्र प्राप्ति कराता है |
चौथे स्थान पर बुध का गोचर माता का सुख,जमीन जायदाद का लाभ ,घरेलू सुख,बड़े लोगों से मैत्री कराता है |  |
पांचवें स्थान पर बुध  का गोचर मन में अशांति  ,संतान कष्ट ,योजनाओं में असफलता व आर्थिक चिंता करता है |
छ्टे स्थान पर बुध   का गोचर धन लाभ ,उत्तम स्वास्थ्य ,शत्रु पराजय , यश मान में वृद्धि देता  है| लेखन और कलात्मक कार्यों में प्रसिध्धि मिलती है |
सातवें स्थान पर बुध के  गोचर से स्त्री से विवाद ,शरीर पीड़ा,राज्य व उच्चाधिकारी से भय ,यात्रा –व्यवसाय में हानि और चिंता करता है |
आठवें स्थान पर बुध  के गोचर सेआकस्मिक धन प्राप्ति,सफलता,विजय व उह्ह सामजिक स्थिति देता है |
नवें  स्थान पर बुध  के  गोचर से  भाग्य हानि ,विघ्न ,धन मान कि हानि होती है |
दसवें  स्थान पर बुध  के  गोचर से पद प्राप्ति,शत्रु कि पराजय व्यवसाय में लाभ,यश व सफलता प्राप्त  होती है |
ग्यारहवें स्थान पर बुध के गोचर से आय वृध्धि ,व्यापार में लाभ , आरोग्यता, भूमि लाभ,भाइयों को सुख ,कार्यों में सफलता , संतान सुख  , मित्र सुख व हरे पदार्थों से लाभ होता है |
बारहवें   स्थान पर बुध  के  गोचर से  अपव्यय , स्थान हानि,स्त्री को कष्ट , शारीरिक कष्ट ,मानसिक चिंता होती है विद्या प्राप्ति में बाधा ,किसी कार्य कि हानि ,शत्रु से पराजय होती है |
 
( गोचर में बुध के उच्च ,स्व मित्र,शत्रु नीच आदि राशियों में स्थित होने पर , अन्य ग्रहों से युति ,दृष्टि के प्रभाव से , अष्टकवर्ग फल से या वेध स्थान पर शुभाशुभ ग्रह होने पर उपरोक्त गोचर फल में परिवर्तन संभव है | )
 
बुध का कुंडली के बारह भावो में फल इस प्रकार होता है——
 
———-प्रथम भाव में बुध- पीली आभा लिये चेहरा होता है,लम्बी उम्र का मालिक होता है,गणित और गणना करने वाले विषयों में प्रवीणता होती है,मजाकिया स्वभाव होता है यानी हर बात को मजाकिया लहजे में कहना,धर्म के कार्यों में रुचि होती है।
——दूसरे भाव में बुध- अच्छे कार्य करने में रुचि होती है,हिम्मत बहुत होती है,बुद्धि से तेज होता है,मेहनत भी खूब करता है,वकील या नेता जैसे गुण होते है बात की बात में धन होता है,दलाली और शेयर बाजार वाले कामो में रुचि होती है।
——तीसरे भाव में बुध- लेखनी का पक्का होता है,कम्पयूटर और इसी प्रकार के यंत्रों को संचालित करने की क्षमता होती है,सोफ़्टवेयर आदि बनाने में निपुणता होती है,चित्रकारी और कविता करने में रुचि होती है,विषयों में आशक्ति होती है,सदगुण भी भरे होते है,मोटा शरीर होता है,गोलमटोल आकृति होती है,बहिने अधिक और भाई कम होते है,पिता का धन बेकार हो जाता है।
——-चौथे भाव में बुध- भाग्यवान होता है,दान करने में निपुण होता है,दान देने में कुपात्र और सुपात्र को समझने की हिम्मत होती है,लिखने की कला होती है,नीतियों पर चलने का आदी होता है,बुद्धिवान होता है।
——पंचम भाव में बुध- जन्म से स्वार्थ जीवन में भरा होता है,अपना काम निकालने में चतुरता होती है,काम निकालने के बाद भूलने की आदत होती है,सन्तान का अभाव होता है,केवल धन की चाहत होती है,जमीनी काम को करने और जमीन आदि के प्रति मानसिकता बनी रहती है।
——-छठे भाव में बुध- कलेश करना अच्छा लगता है,लेकिन वाणी में मिठास होती है,आलसी शरीर होता है,अभिमान की मात्रा भरी होती है,परिश्रमी और कामुकता का समावेश मिलता है। दूसरों की सेवा करना अच्छा लगता है।
——–सप्तम भाव में बुध- पति या पत्नी के लिये सुखदायक होता है,कान्तिवान शरीर होता है,तोंद निकल जाती है,सुन्दर और कुलीन प्रकृति होती है,सम्पादन करने की क्षमता होती है,उदार प्रकृति होती है।
——-अष्टम भाव में बुध- लम्बी उम्र होती है,सुन्दर पत्नी या पति होता है,बात का भरोसा नही होता है,खेती के कार्य में निपुणता होती है,जैसे बागवानी आदि,न्याय करने के अन्दर बेईमानी का समावेश होता है,व्यापार से लाभ केवल दलाली वाले कामों में होता है।
——नवम भाव में बुध- बुद्धिमान होता है,तीर्थाटन करने की कामना होती है,अपने समाज में बात रखने वाला होता है कवि गान विद्या में डिग्री या डिप्लोमा होता है,न्याय यात्रा करवाने वाले कार्यों का मानस रहता है। विदेशी लोगों और अंग्रेजी में अच्छा ज्ञान होता है।
——–दसम भाव में बुध- राज योग का कारण बनता है,अल्पायु होना भी माना जाता है,माता की बहिन से स्वभाव मिलता जुलता है,पिता के प्रति वफ़ादारी नही होती है,खुद के कामों को खुद के प्रयासों से ही खत्म करने की भावना बन जाती है।
——ग्यारहवें भाव में बुध- लाभ में अपार सम्पत्ति की कामना होती है पिता की जायदाद मिलती है,छोटे भाई बहिनो से स्नेह होता है,माता के लिये कष्टकारी होता है,शिक्षा और मनोरंजन में अधिक ध्यान रहता है।
——-बारहवें भाव में बुध- विद्वान धर्मात्मा स्वभाव होता है,किसी भी भाषा को पकडने की क्षमता होती है,दैवीय ज्ञान की जानकारी होती है,समाज में गुणी माना जाता है,शास्त्र का अच्छा ज्ञान होता है आलसी शरीर होता है |
 
बुध शान्ति के उपाय—
कुंडली में बुध कमजोर हो तो बुध के लिए निम्न प्रयोग किये जा सकते है जिसके प्रभाव से बुध भी शुभफल प्रदान करेगा —-
—–पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09024390067 ) के अनुसार बुध के कुप्रभाव में दिये जाने वाले दान आश्लेषा ज्येष्ठा और रेवती नक्षत्रों में स्वयं के बजन के बराबर हरी मूंग हरे वस्त्र फ़ल हरी मिठाई कांसा पीतल हाथीदांत पन्ना स्वर्ण कपूर शराब षटरस भोजन घी फ़ूल आदि दान में दिये जाते है,
—–जन्मकालीन बुध  निर्बल होने के कारण अशुभ फल देने वाला हो तो निम्नलिखित उपाय करने से बलवान हो कर शुभ फल दायक हो जाता है |
—-रत्न धारण —-– पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09024390067 ) के अनुसार हरे  रंग का पन्ना सोने या चांदी की अंगूठी में आश्लेषा,ज्येष्ठा ,रेवती  नक्षत्रों में जड़वा कर बुधवार को सूर्योदय के बाद  पुरुष दायें हाथ की तथा स्त्री बाएं हाथ की कनिष्टिका अंगुली में धारण करें | धारण करने से पहले ॐ  ब्रां ब्रिं  ब्रों सः बुधाय  नमः मन्त्र के १०८ उच्चारण से इस में ग्रह प्रतिष्ठा करके धूप,दीप , लाल पुष्प, गुड  ,अक्षत आदि से पूजन कर लें |
——दान व्रत ,जाप —–   
—–पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09024390067 ) के अनुसार बुधवार  के नमक रहित व्रत रखें ,  ॐ  ब्रां ब्रीं ब्रों सः बुधाय  नमः मन्त्र का ९००० संख्या में जाप करें | बुधवार को कर्पूर,घी, खांड, ,हरे  रंग का वस्त्र और फल ,कांसे का पात्र ,साबुत मूंग  इत्यादि का दान करें | तुलसी को जल व दीप दान करना एवम  श्री विष्णु सहस्रनामस्तोत्र का पाठ करना भी शुभ रहता है |दान श्रद्धा पूर्वक दक्षिणा सहित ब्राह्मण को संकल्प पूर्वक बुध ग्रह के नक्षत्र काल में करना चाहिये।
—– किसी विद्धवान व्यक्ति से बुध के ९०००+९०० कुल ९९०० जाप – ॐ बुं बुधाय नमः के जाप करवा कर शनि करवाए कभी कभी ये जाप डबल भी करवाने पड़ते है |
—– प्रति बुधवार बुध देवता के संबंधित विशेष अर्चना करें अथवा बुध की पूजा किसी योग्य व्यक्ति से करवाकर शांति करवानी चाहिए |
—–अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा निरन्तर उसकी देखभाल करनी चाहिए। बुधवार के दिन तुलसी पत्र का सेवन करना चाहिए।
—– रोज श्रीगणेश का पूजन करें और प्रत्येक बुधवार को गणपति को मोदक अथवा बूंदी के लड्डू का भोग लगाये | और ॐ बुं बुधाय नमः के जाप करे नित्य २ माला करे |
—– बुध ख़राब होने पर हरे रंग से दूरी बनाए रखें। अपने आसपास कोई भी हरे रंग की वस्तु ना रखे। हरे रंग के कपडे न पहने और कमरे में हरा रंग न लगाये |
—- पांच बुधवार तक पांच कन्याओं का हरे वस्त्र दान करें।
——- गरीबों को बुध का दान हरे वस्त्र, मुंग और महिला को हरी चूडिया दान करें।
——अपने घर में कंटीले पौधे, झाड़ियाँ एवं वृक्ष नहीं लगाने चाहिए। फलदार पौधे लगाने से बुध ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है।
——– उपहार आदि में बुध से संबंधित वस्तुएं ना लें।
—– पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09024390067 ) के अनुसार प्रति बुधवार गाय को हरी घास खिलाएं।- बुध की वजह से अधिक परेशानी हो या त्वरित राहत के लिए सात मुंगे हरे कपड़े में बांध कर नदी में प्रवाहित करें। हरी सब्जियाँ एवं हरा चारा गाय को खिलाना चाहिए।
—– प्रति बुधवार हरि इलाइची नदी में बहाएं, इसके बाद एक इलाइची और तुलसी के पत्ते खाएं।
——-बुधवार के दिन हरे रंग की चूड़ियाँ हिजड़े को दान करनी चाहिए।
——-तोता पालने से भी बुध ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है।
—– प्रति बुधवार गरीबों को हरे मूंग का दान करें।
—– प्रति बुधवार व्रत-उपवास करें।
—- आपकी कुंडली के अनुसार ज्योतिषी से सलाह लेकर बुध का रत्न पन्ना धारण करें।
—–बुध के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु बुधवार का दिन, बुध के नक्षत्र (आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती) तथा बुध की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
प्रत्येक जातक अपनी राशिनुसार बुध की अनुकूलता के लिए क्या करे यह जानिए——
—-पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब.-09024390067 ) के अनुसार यदि कुंडली में बुध अशुभ होता है तो बने बनाएं काम बिगाड़ देता है।कुंडली में बुध अच्छी स्थिति में होता है तो, महापुरुष योग भी बनाता है।राजयोग और बुधाआदित्य नाम के शुभ योग भी बुध के कारण बनते है।बुध के शुभ प्रभाव के लिए अपनी राशि अनुसार प्रयोग करें तो आप भी सफल होंगे।
 
मेष- घोड़े को हरा चारा खिलाए या रोगीयों को औषधि का दान दें।
वृष- विद्यार्थियों को अध्ययन की सामग्री दान दें।
मिथुन- हरे पौधों को पानी दें या तोते को हरी मिर्च खिलाए।
कर्क- 10 वर्ष से कम उम्र वाली कन्या को मिठाई खिला कर भेंट दें।
सिंह- किन्नर को हरी चुडिय़ां दान दें।
कन्या- गाय को हरे मूंग खिलाए और हरे वस्त्र पहनें।
तुला- जरूरतमंद को हरे वस्त्र दान दें।
वृश्चिक- कुल देवी देवता को कांसे का दीपक लगांए।
धनु- जीवनसाथी को आभूषण या पन्ना रत्न पहनाएं।
मकर- किसी को ऋण दें या ऋण दिलाने में मदद करें।
कुंभ- किसी वृद्ध को हरे वस्त्र का दान दें।
मीन- गणेश जी को दूर्वा चढ़ाए।

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