उत्तर प्रदेश चुनाव 2017 की संभावित भविष्यवाणी (गूगल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार)

उत्तर प्रदेश चुनाव 2017 की संभावित भविष्यवाणी
(गूगल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार)
 
प्रिय  पाठकों, अगले वर्ष उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और आम लोगों के बीच देश के नेताओं और उनके भविष्य के बारे में जानने की उत्सुकता रहती है. चुनावी घमासान और राजनीतिक दांवपेचों के बीच आम आदमी में यह जानने की इच्छा रहती है कि हमारे प्रिय नेता के साथ भविष्य में क्या होने वाला है ? 
 
पेशे से एक ज्योतिष होने के कारण मुझे (उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री) लगा कि वैदिक ज्योतिष और नक्षत्रों की गणनाओं के जरिये (गूगल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार ) यह पता लगाना चाहिए. इस क्रम में मैंने पहले नेता के तौर पर यूपी के वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को चुना है | मैं इसी क्रम में आगे भी उत्तर प्रदेश के सभी संभावित प्रमुख नेताओं की कुंडलियों को इसी लेख में आपके सामने प्रस्तुत करूँगा —
 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार यूपी, पंजाब और उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव 2017 में सिर्फ कमल  खिलेगा और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरेगी। यदि 9 से 18 फरवरी 2017 के बीच अगर चुनाव हुये तो बीजेपी का कमल खिलेगा। लेकिन अगर 18 फरवरी के बाद चुनाव होने पर समाजवादी पार्टी बाज़ी मार सकती है। यूपी में ही एसपी और बीएसपी का इतना जनाधार है कि वो सत्ता पर काबिज हो सकती है। सभी पार्टियां कमर कसके के मैदान में उत्तर चुकी है तो कई पार्टियां अपने पत्ते छुपाये हुए हैं । भाजपा को छोड़ सभी प्रमूख पार्टियों के सीएम उम्मीदवारों के नाम सबको मालूम हैं ।
 
देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश (यूपी) में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष  फरवरी 2017 में होने हैं, किन्तु सभी बड़े दलों ने इसकी तैयारियों का बिगुल अभी से फूंक दिया है l सत्ताधारी समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने 150 से अधिक प्रत्याशियों के नामों की सूची जारी कर दी है l प्रमुख विपक्षी दल बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की नेता मायावती अपनी पार्टी से बगावत कर गए बड़े नेताओं स्वामी प्रसाद मौर्या और आर.के. चौधरी से हुए नुकसान की भरपाई के प्रयासों में जुटी हुई हैं l

 

 

 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार उत्तरप्रदेश की स्थापना कुंडली 1 अप्रैल 1937 को धनु लग्न और वृश्चिक राशि की है। इस कुंडली में वर्तमान में शनि की साढ़े- सती का तीव्र प्रभाव तथा राहु में गुरु की संवेदनशील दशा चलने से साम्प्रदायिक हिंसा का योग बन रहा है। बाद में जनवरी 2017 में शनि धनु राशि में पहुंच कर उत्तरप्रदेश की कुंडली के दशम भाव में गोचर कर रहे गुरु को दृष्टि दे कर सत्ता परिवर्तन का योग बन देंगे।
 
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) एक बार फिर से प्रदेश में हिंदुत्व को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है, तो वहीं हाशिए पर गयी कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को मैदान में उतार कर अपनी खोई विरासत को बचाने के लिए एक बड़ा दाव खेला है l इन सभी बड़े दलों की जोरआजमाइश को देख कर राजनीतिक पंडितों ने आगामी यूपी चुनावों को 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों का सेमीफाइनल करार दे दिया है। ज्योतिषशास्त्र के दृष्टिकोण से देखे तो यूपी के विधानसभा चुनाव राजनीतिक कारणों से रोमांचक किन्तु सांप्रदायिक हिंसा से प्रभावित भी हो सकते हैं।
 
दूसरी ओर भाजपा की कुंडली में बन रहा गुरु-चांडाल योग उनके कुछ बड़े नेताओं को विवादों में फंसा सकता है, जिसके कारण उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों में इस दल को कुछ निराशा प्राप्त होगी। 
 
कांग्रेस पार्टी की मीन लग्न की कुंडली में यूपी विधान सभा चुनावों के समय गुरु में शुक्र की विंशोत्तरी दशा चलेगी। इसके प्रभाव से इस पार्टी के प्रदर्शन में कुछ सुधार होगा।
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अखिलेश यादव की कुंडली —
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार अखिलेश यादव की गूगल पर उपलब्ध जन्म पत्रिका के अनुसर अखिलेश यादव  का जन्म 1 जुलाई 1973 को वृश्चिक लग्न कर्क राशि में हुआ। वृश्चिक राशि स्थिर राशि होकर लग्नस्थ भी है। मंगल पृथ्वी पुत्र है। पराक्रम का प्रतीक है।  यही वजह है कि अखिलेश ने जमीन से जुड़ कर शानदार सफलता हासिल की। अखिलेश यादव की पत्रिका में विशेष बात यह है कि नवांश में बुध उच्च का है और शुक्र नीच का, जो‍ कि नीच-भंग योग का निर्माण कर रहा है। शनि उच्च का है, मंगल स्वराशि वृश्चिक का है। चन्द्र कर्क स्वराशि का है।
 
पाठकों, उत्तरप्रदेश के कद्दावर नेता व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के इंजीनियर पुत्र अखिलेश यादव उत्तरप्रदेश के किंग मेकर के रूप में उभरे।  उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार अखिलेश यादव की गूगल पर उपलब्ध जन्म पत्रिका में लग्न व षष्टम (शत्रु भाव) का स्वामी मंगल पंचम भाव में है। वहीं पंचमेश गुरु वक्री होकर तृतीय भाव में है। वहीं से भाग्य के स्वामी चन्द्रमा पर पूर्ण सप्तम दृष्टि पड़ रही है, यह गजकेसरी नामक राजयोग बना रहा है। अखिलेश को राजसुख तो मिलना ही है लेकिन सफलता के मार्ग सहज नहीं है।दशम भाव राजनीति व पिता का है। वैसे पिता की स्थिति का अंदाजा नवम भाव से भी लगाया जाता है। यहां यानी भाग्य भाव नवम में अखिलेश की कुंडली में बुध, शुक्र व चन्द्र है। इसी वजह से पिता का भरपूर सहयोग रहा।  सूर्य की स्थिति अष्टम भाव में होकर मित्र राशि मिथुन में है। अष्टम भाव ठीक नहीं, दशम राजनीति भाव का स्वामी अष्टम में आ जाने से थोड़ी कठिनाई आएगी।  यहां शनि केतु के साथ है। वैसे शनि मित्र राशि मिथुन का है लेकिन केतु नीच का है। दो ग्रह मित्र राशि में है, एक शत्रु का। बहुमत के आधार पर अष्टम भाव में केतु नगण्य-सा है।फिर भी अखिलेश को दुर्घटना से बचना होगा।     
 
अखिलेश यादव की कुंडली में  11 अगस्त के बाद से जब से गुरु ने राशि बदली है, इसके बाद मिथुन राशि से गुरु चतुर्थ हो गया है और अखिलेश की परेशानियां बढ़ गई हैं।
 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार अखिलेश यादव की कुंडली में बुध की महादशा चल रही है। इसी कारण उन्हें पिता की वजह से राजगद्दी की प्राप्ति हुई है। अब बुध में गुरु का अंतर चल रहा है। गुरु उनकी कुंडली में नीच का है। इसी कारण जब से यह समय शुरु हुआ है, उनके लिए स्थितियां विपरीत बनी हुई हैं। आगे भी यह सब जारी रहेगा। गोचर में गुरु चतुर्थ होने से भी परेशानी बढ़ने वाली हैं। आने वाले चुनाव में भी इन्हें बाहरी समस्याओं के साथ ही आंतरिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री ने  यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए यह बताया कि इस बार के चुनाव में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है | उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार  अखिलेश की कुंडली से यह जाहिर हो रहा है कि कई ग्रह और नक्षत्र उनके हो गए हैं. जो चुनाव में उन्हें भारी पड़ सकता हैं.
 
अखिलेश यादव की कुंडली के अनुसार मार्च 2017 में उनकी बुध की महादशा समाप्त हो रही है. उनकी जन्म कुंडली में बुध का बहुत ही महत्व है. यह उनके कर्म भाव तथा लग्न का स्वामी है तथा कुंडली में जो राजयोग है वह भी बुध और चन्द्रमा के स्थान परिवर्तन के कारण ही निर्मित हुआ था| जब सन् 2000 में बुध की महादशा प्रारम्भ हुई थी उसी समय अखिलेश ने पहली बार राजनीतिक सुख का उपभोग किया था परन्तु अब वह अपनी पूर्णता की ओर है. इसके साथ ही उनके राजयोग का यह चरण मार्च 2017 में समाप्त होगा | जिस चंद्रमा और बुध के स्थान परिवर्तन के कारण अखिलेश के राजयोग का निर्माण हुआ था उसी चंद्रमा के अस्त होने के कारण जब भी उनके हाथ सत्ता की बागडोर आएगी तो साथ में मानसिक उलझने भी साथ लाएगी. सपा सरकार और पार्टी के अन्दर चल रही यह उलझने उसी का परिणाम हैं. 15 नवंबर के बाद यह खुद ब खुद यह उठापटक शांत होने लगेंगी. सत्ता पर अखिलेश की पकड़ मजबूत हो जाएगी |
 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार अखिलेश यादव की गूगल पर उपलब्ध जन्म पत्रिका में भले ही उनकी कुंडली में ग्रह और नक्षत्र विपरीत चल रहे हैं लेकिन इससे उन्हें कोई निजी नुकसान नहीं होगा बल्कि उनकी पार्टी को इससे फर्क पड़ सकता है |

 
 
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ज्योतिषाचार्य डॉ जेएन त्रिपाठी ने भी उत्तर प्रदेश के सीएम की कुंडली का अध्ययन कर अपना आकलन दिया.
 
डॉ त्रिपाठी के अनुसार उन्होंने शुक्रवार को सीएम अखिलेश यादव की कुंडली का अवलोकन किया और उसमें छिपी बारीकियों को देखने का प्रयास किया. उन्होंने बताया कि विभिन्न श्रोतों से प्राप्त डिटेल्स के आधार पर उनका जन्म 24 अक्टूबर को प्रातः 5:53 बजे इटावा जिले के सैफई गांव में हुआ था. इस तिथि अनुसार इनकी कुंडली तुला लग्न की बनती है.  इनकी कुंडली को केंद्र बनाकर अध्ययन करतें है तो विश्लेषणात्मक अध्ययन में यह सामने आता है कि उनके लग्न का स्वामी शुक्र है जो सूर्य के घर में है और लग्न में 11वें का स्वामी सूर्य नीच का होकर बैठा है. राहु और गुरु से दृष्ट है, राहु तीसरे भाव में स्वग्रही गुरु के साथ है, गोचर में गुरु 13 अगस्त 2016 तक ग्यारहवें घर में था, तब तक तो उसने संबंधों को संभल कर रखा परंतु 13 अगस्त के बाद कन्या अर्थात 12वें घर में चला गया, इसके चलते संबंधों की दरार पर जो पर्दा था वह फट गया क्योकि बारहवां भाव दूरी का है. चाचा से संबंधों के लिए सूर्य को एवं करक मंगल को भी देखना चाहिए, मंगल 12वें भाव में दूर चला गया है। चौथा स्वामी  शनि है जो कि लोकतंत्र का कारक है , वह अष्टम में है. इस तरह लग्नेश, तीसरे, चौथे व 11वें भाव तथा करक मंगल सभी पीड़ित है. नवमांश में भी लग्न तुला ही है। इसमें  तीसरे भाव में राहु, शुक्र, सूर्य, चंद्र हैं जिस पर केतु और बुध की नज़र है, तीसरे का स्वामी  गुरु, नीच मंगल के साथ दशम भाव में  बैठा है, यहाँ भी 11वें भाव का स्वामी  सूर्य ,राहु से ग्रसित है। कारक मंगल नीच का होकर चौथे घर में है.
अब आते है दशमांश कुंडली पर यह भी तुला लग्न है ,शुक्र अष्टम में ,तीसरे का स्वामी गुरु छठे घर में केतु के साथ, जो की राहु और शनि से दृष्ट है, दसवें  का स्वामी  शनि बारहवें घर में राहु के साथ और छठे के स्वामी  गुरु से दृष्ट है. गोचर के अनुसार  तुला लग्न लेतें हैं तो शुक्र बारहवें भाव में नीच का, गुरु के साथ  जो तीसरे और छठे का स्वामी  है और  बारहवें भाव में है, चौथे घर का स्वामी शनि मंगल के साथ दूसरे घर में है. ग्यारहवें का स्वामी  सूर्य, राहु और बुध के साथ अपने ही भाव में है और पांचवें में बैठे चंद्र को भी राहु देख रहा है.
इस प्रकार हम देख रहे है कि कुटुंब की समस्याओं का उदय होगा ही और अनेक संबंधों में बिखराव आने के पूरी सम्भावना है , क्योंकि लग्न के दोनों ओर ग्रह (द्वितीय, तृतीय, ग्यारहवें और बारहवें भाव में हैं) अपनी नकारात्मक अवस्था में हैं। उनका असर आना स्वाभाविक है.
 
गणना के अनुसार यह लगता है कि यह बिखराव अभी बढ़ेगा और इसका प्रभाव 2017 में आने वाले चुनावों में जरूर दिखेगा और सत्ता में बदले हुए चेहरे दिखाई देंगे.
 
(लेखक ज्योतिषाचार्य डॉ जेएन त्रिपाठी ज्योतिषीय विशेषज्ञ हैं, ऊपर लिखे विचार उनके अपने हैं)
 
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शीला दीक्षित की कुंडली—
 
Name: Sheila Dikshit
Date of Birth: Thursday, March 31, 1938
Time of Birth: 13:20:00
Place of Birth: Kapurthala
 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च 1938 को तदनुसार उत्तरा भाद्रपद के तृतीय चरण कर्क लग्न एवं मीन राशि में  कपूरथला में हुआ। शीला ने कपूरथला से दिल्ली की मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने का सफर चमकदार सितारों के साथ किया।दशमेश मंगल द्वादश भाव में मिथुन राशि में है व मिथुन राशि का स्वामी बुध दशम भाव में मेष राशि का है। इसी राशि परिवर्तन राजयोग ने शीला को राजसुख दिया। कर्क लग्न वालों के लिए वैसे भी मंगल राजयोगकारी होता है। शीला की पत्रिका के दशम भाव में मंगल की मेष राशि है व दूसरी वृश्चिक राशि पंचम में है और वहीं पर शनि विराजमान है। शनि मंगल की राशि में ठीक नहीं रहता। वैसे भाग्य पर गुरु की कृपा दृष्टि अवश्य रहेगी। चतुर्थ भाव से शनि की सप्तम दृष्टि दशम यानी राज्य भाव पर नीच की पड़ रही है। यह योग सत्ता के सुख से वंचित कर सकते हैं। 
 
इस कारण शीला कांग्रेस को लज्जा से बचाने में समर्थ तो होंगी लेकिन सत्ता का स्वाद चखने में शनि बाधक रहेगा। शीला के जन्म के समय शनि नीचाभिलाषी है। गोचर का शनि भी ठीक नही है। जो मंगल की राशि से भ्रमण कर रहा है। इस प्रकार देखा जाए तो शीला का यूपी में सीएम बनना असंभव है।शीला की पत्रिका में भाग्य का स्वामी अष्टम में है व वर्तमान में व्यय भाव से गोचरीय भ्रमण कर रहा है। अष्टम पर विराजमान गुरु पर इसकी नवम दृष्टि पड़ रही है जो अनुकूल नहीं है।  
 
शीला दीक्षित दिल्ली की 15 सालों तक मुख्यमंत्री रहीं। इसका कारण है दिल्ली की नाम राशि मीन है वहीं शीला की जन्म राशि मीन है, लेकिन बाद में मेष नाम राशि वाले अरविन्द केजरीवाल के सामने वो नहीं टिक सकीं।
 
अब शीला को कांग्रेस ने सबसे बड़े राज्य यूपी के सीएम के रूप में उतारा है, अब देखना यह है कि शीला कांग्रेस की नैया पार लगाती है या फिर दिल्ली वाली घटना फिर से ताजा होंगी। क्योंकि यहां पर भी सूबे के मौजूदा सीएम अखिलेश यादव उनके विपक्षी होंगे। अगर मेष राशि के जातक वाले नाम को देखें तो अखिलेश यादव उनके सबसे बड़े दुश्मन होंगे। दिल्ली में अरविंद और यूपी में अखिलेश। यानी यह कहना ठीक होगा कि यूपी में भी शीला दीक्षित कुछ खास नहीं कर पाएंगी।
 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार यूपी में इस वर्ष के अंत तक चुनाव होने है व राजनीति का कारक शनि गोचरीय भ्रमण मंगल की राशि से वृश्चिक में जनवरी 2017 तक करेगा। शीला के जन्म लग्न से शनि पंचम भाव से भ्रमण करेगा। गुरु भी अगस्त में कन्या से भ्रमण करेगा, राहु सिंह में ही वर्ष भर रहेगा।
 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार वर्तमान में मंगल की स्थिति सिंह में होकर शीला के द्वितीय यानी वाणी भाव में चल रही है। शनि उच्च का होकर चतुर्थ भाव से गोचरीय भ्रमण कर रहा है। अत: इन दिनों शीला को ज्यादातर चुप ही रहना चाहिए।   

 
शीला दीक्षित पर राहु की महादशा—-
शीला दीक्षित पर 30 फरवरी 2013 से 30 फरवरी 2031 के बीच में राहु की महादशा लगी हुई है। साथ ही 12 नवम्बर 2015 से 6 अप्रैल 2018 के बीच गुरु की अंतर दशा भी है। जोकि साथ मिलकर गुरु चांडाल योग बनाता है। जो कि शुक्र ग्रह की प्रत्यंतर दशा 6 अक्टूबर 2016 से 17 जनवरी 2017 तक थोड़ी राहत देती है।
 
कांग्रेस पार्टी का स्वामी मंगल ग्रह और नंबर 9 है जोकि शीला दीक्षित के अनुकूल ग्रह है। उसकी उम्र का नंबर 7, भाग्य संख्या 1, किस्मत संख्या 4, चुनाव वर्ष 1 है। जबकि पार्टी की किस्मत संख्या 1 और भाग्यांक 8 है। सूर्य, चन्द्रमा और शनि के साथ बैठकर विष योग बना रहा है। जिसकी वजह से गुरु चंडाल योग संघर्ष के समय अनुकूल हो सकता है। इस प्रकार यदि शीला दीक्षित की कुंडली की ग्रहों की स्थिति देखी जाए तो सत्ता का स्वाद चखना जरा मुश्किल ही है।  
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राज बब्बर की कुंडली के सितारे—
 
Name: Raj Babbar
Date of Birth: Monday, June 23, 1952
Time of Birth: 12:00:00
Place of Birth: Tundla
 
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर का जन्म 23 जून 1952 में टुंडला में मिथुन राशि लग्न में हुआ। जन्म के समय सूर्य, शुक्र, बुध व चन्द्र साथ होने से राज बब्बर फिल्म जगत के सितारे रहे, वहीं मिथुन का शुक्र होने से राज बब्बर की दो पत्नियां हुईं। अनुभव में आया है कि मिथुन का शुक्र बहुविवाह कराता है। कुंडली में शुक्र केंद्र में बैठा होने के कारण उनकी दोस्ती श्रेष्ठ लोगों के साथ है एवं उन्हें अच्छी भावनाओं वाले दोस्त मिलते हैं।कभी स्मिता पाटिल से अपने प्रेम-प्रसंग की वजह से चर्चा में रहने वाले राज बब्बर ने दो शादियां की हैं। उनकी पहली पत्नी का नाम नादिरा जहीर है। नादिरा से राज बब्बर के दो बच्चे हैं आर्य बब्बर और जूही बब्बर। 
 
राज बब्बर ने दूसरी शादी अपनी प्रेमिका स्मिता पाटिल से की लेकिन यह शादी अधिक दिनों तक टिक नहीं पाई और अपने पहले बच्चे को जन्म देने के कुछ ही घंटों में स्मिता पाटिल की मौत हो गई। स्मिता पाटिल के बेटे का नाम प्रतीक बब्बर है।

 
राज बब्बर ने हिन्दी और पंजाबी फिल्मों के एक सफल अभिनेता के तौर पर काफी लोकप्रियता हासिल की। राज बब्बर ने अपनी ग्रेजुएशन आगरा कॉलेज से पूरी की और 1975 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में बाकी पढ़ाई की। वह नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के एक होनहार छात्र थे।नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली के कई थियेटरों में अपनी किस्मत आजमाई और अपने अभिनय में निखार लाने की कोशिश की। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के 1975 बैच में से एक ऐसा कलाकार निकला जो बॉलीवुड के उन अभिनेताओं में शुमार हो गया, जिन्होंने रंगमंच की दुनिया से निकलकर हिंदी फिल्मों में अपनी सफल पारी खेली।राज बब्बर ने अपने कॅरियर की शुरुआत 1977 की ‘किस्सा कुर्सी का’ से की। यह फिल्म सफल तो नहीं रही पर इससे उनके रुके हुए कॅरियर को धक्का जरुर मिला। आगे जाकर राज बब्बर ने निकाह, आज की आवाज, आप तो ऐसे ना थे, कलयुग, हम पांच, दाग, जिद्दी जैसी फिल्मों में काम किया।अक्सर खलनायकों की भूमिका में दिखने वाले राज बब्बर ने पॉजिटिव रोल भी बखूबी निभाए हैं.
 
अभी 64 वर्षीय यूपी कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर पुरे जोश खरोश के साथ अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे हैं | राज बब्बर का जन्म जिस समय हुआ सूर्य मिथुन राशि में विराजमान था, जिसके फलस्वरूप राज बब्बर आर्थिक संपन्नता को प्राप्त कर सुखी है। सूर्य राज को क्रोधी एवं गर्म स्वभाव का बनाता है। केंद्र में चर्तुग्रही होने से जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए। 14वें लोकसभा चुनाव में वह फिरोजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद चुने गए किंतु 2006 में समाजवादी पार्टी से निलंबित होने के पश्चात उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। कांग्रेस के प्रवक्ता रह चुके राज बब्बर ने 2014 लोकसभा चुनाव में गाजियाबाद से अपनी किस्मत फिर आजमाई, लेकिन इस दफा जनता ने उन्हें नकार दिया।  
 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार उनकी जन्म कुंडली में शुक्र मिथुन राशि का विराजमान है जोकि धनी बनाता है परंतु कहीं-कहीं हीन भावना उत्पन्न करता है। अत: ध्यान रखना चाहिए। कुंडली में शनि की स्थिति अनुसार व्यक्ति अपनी पैतृक जगह से दूर निवास करता है। राज बब्बर की कुंडली में गुरु मेष राशि पर विराजमान है, इसलिए वह धन से परिपूर्ण एवं क्षमाशील भी है। गुरु एकादश भाव में विराजमान होने से भी हर प्रकार का सुख-वैभव प्राप्त होता है, बुद्धि तेजस्वी एवं चतुर रहती है। यही प्रभाव परोपकारी भी बनाता है। राज बब्बर ने हमेशा स्वयं के निर्णय पर ही ध्यान देना चाहिए।    
 
राज बब्बर की जिंदगी में चन्द्र राशि से राज्य-दशम भाव का स्वामी गुरु एकादश-लाभ भाव में है अत: राज बब्बर को राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से नवाजा गया। फिलहाल उनकी कुंडली में गुरू की स्थिति पराक्रम भाव से राहु के साथ चल रही है, जो हानिकारक बनता है।
 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार अक्सर ऐसा देखा वैसे देखा गया है कि तृतीय भाव का राहु प्रबल शत्रुहंता भी होता है। लेकिन गुरु के साथ चांडाल योग बन रहा है और आपको चांडाल योग में ही यूपी की कमान सौंपी गई है, जो निश्चित रूप से हानिकारक रहेगी। कहने का मतलब राज बब्बर कांग्रेस को यूपी में बड़ी सफलता नहीं दिला पाएंगे।कुंडली में राहु की जो स्थिति है। उसके कारण वायु अथवा रक्त संबंधी रोग होने की संभावना बनती है। अत: स्वास्थ्‍य का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए एवं राहु शांति कराना चाहिए। केतु भी लगभग इसी प्रकार का फल दे रहा है। अत: ध्यान रखें।   
 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार वर्तमान में राज बब्बर की कुंडली में बुध की महादशा (13/10/2010 के बाद) के बाद केतु की महादशा 6 वर्ष अर्थात 13/10/2017 तक रहेगी। राज के लिए गुरुवार एवं सोमवार आर्थिक दृष्टि से शुभ रहेंगे।  
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केशव प्रसाद मौर्य की कुंडली —
 
केशव प्रसाद मौर्य भारत की सोलहवीं लोकसभा के सांसद हैं। २०१४ के चुनावों में वे उत्तर प्रदेश की फूलपुर सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर निर्वाचित हुए श्री केशव प्रसाद मौर्य का जन्म सिराथू जनपद कौशाम्बी के एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उन्होंने जीवन के हर संघर्ष का सामना किया है। 
 
वह अपने माता पिता के साथ कृषि कार्यों को करते हुए चाय की दुकान भी चलायी और समाचार पत्र का विक्रय भी किया। श्री केशव प्रसाद ने गरीबी का सामना करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सम्पर्क में आने के बाद विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल और भाजपा के अनेक दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वाह किया। साथ ही श्रीराम जन्म भूमि और गोरक्षा व हिन्दू हित के लिए अनेकों आन्दोलन किया और इसके लिए जेल भी गये। 
 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार श्री केशव प्रसाद की छवि संघर्षशील जननेता की है। आपने सिराथू विधानसभा से वर्ष 2012 एवं लोकसभा चुनाव 2014 में वर्ष 2012 एवं लोकसभा चुनाव 2014 में फूलपुर क्षेत्र से आजादी के 60 वर्श बाद पहली बार कमल खिलाया। फूलपुर से भाजपा प्रत्याषी के रूप में तीन लाख आठ हजार तीन सौ आठ (308308) वोटो से ऐतिहासिक जीत हासिल की।
 
इस समय वो उत्तर प्रदेश के वो BJP के अध्यक्ष बन चुके है | उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार केशव प्रसाद मौर्य को 8 अप्रैल दिन शुक्रवार को लगभग अपरान्ह 3 बजकर 20 मिनट पर भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस समय पृथ्वी पर सिंह लग्न उदित हो रही थी। सिंह लग्न एक स्थिर राशि है, जिसका स्वामी सूर्य अष्टम भाव में अपने विरोधी शुक्र के साथ संग्रस्थ है। राजनीति का मुख्य कारक सूर्य होता है। सूर्य के सहयोग के बिना राजनैतिक सत्ता को हासिल करना मुश्किल होता है।
 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार उन्हें सावधान रहना चाहिए वरना मुश्किल होगी | भाग्येश मंगल केन्द्र में अपनी वृश्चिक राशि में बैठकर राजयोग का निर्माण कर रहा है। यूपी की नाम राशि वृष है, जो तात्कालिक कुण्डली में दशम भाव में पड़ी है। दशम भाव राज्य का संकेतक स्थान है। यह एक शुभ संकेत है। लग्न में वक्री गुरू व राहु की युति है, जो चाण्डाल योग का निर्माण कर रही है। इसलिए आपको दलाल, महिलायें, भौतिक भोग वादी लोगों से विशेष कर सावधान रहना होगा अन्यथा छवि में दाग लग सकता है।
 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार सफलता मिलने के आसार भाग्य भाव में चन्द्र व बुध की युति है। यह संयोग आपके भाग्य पक्ष को मजबूत कर रहा है। यदि आप मठाधीशों को ज्यादा तवज्जों न देकर कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़ने का प्रयास करेंगे तो बेहतर सफलता मिलने के आसार है। क्योंकि शनि ग्रह चतुर्थ भाव में अपने धुर विरोधी मंगल के साथ बैठा है। शनि कार्यकर्ताओं का संकेतक है, मंगल मठाधीशों का प्रतिनिधित्व करता है। अतः आपको यूपी में भाजपा की सत्ता लाने के लिए सीधे कार्यकर्ताओं से जुड़ना होगा।
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वरुण गाँधी की कुंडली—
 
Name: Varun Gandhi
Date of Birth: Thursday, March 13, 1980
Time of Birth: 22:08:00
Place of Birth: Delhi
 
वरुण गाँधी का जन्म 1३ मार्च 1980 को हुआ। संजय और मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी हैं। तुला लग्न और मकर राशि में जन्में वरुण जन्मजात प्रतिभा के धनी हैं। उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार वरुण गांधी की कुंडली में ग्यारहवें भाव में अंगारक योग बन रहा है। इस योग के कारण ही वरुण को भविष्य में बहुत ऊंचाइयां प्राप्त होंगी। कुंडली के व्यय भाव में कन्या राशि का शनि है जो उन्हें थोड़ा विवादग्रस्त व्यक्तित्व बनाता है। 

 
— वरुण साइंस में पोस्ट ग्रैजुए हैं और उनकी हायर स्टडी लंदन में हुई है।
— उन्होंने 2004-2005 में यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से एमएससी की है। जबकि 2001-2002 में यहीं से बीएससी इन इकोनॉमिक्स की पढ़ाई पूरी की है।
 
उन्होंने ग्राफिक डिजाइनर यामिनी रॉय से शादी की है। दोनों की पहली मुलाकात 2004 में न्यूयॉर्क में हुई थी, इसके 7 साल बाद 6 मार्च 2011 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शादी की थी। वरुण और यामिनी की एक बेटी भी है। उसका नाम अनसुया गांधी है।सूत्रों के मुताबिक वरुण की होने वाली पत्नी यामिनी की शादी कराने के लिए तैयार हुए काची पीठ के शकाराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने कन्या की कुंडली देखने के बाद ही विवाह कराने को लेकर अपनी संस्तुति दी है।कन्या की कुंडली से आने वाले समय में वरुण गाधी के जीवन में कई और अच्छे योग बनने की भी चर्चा की जा रही है। कहा जा रहा है कि इस कन्या के ग्रह-नक्षत्र से वरुण के लिए शुभ लगन की कड़ी स्थापित होगी, जिससे उनका राजनीतिक व सामाजिक जीवन ऊंचाई के एक नए सोपान तक जाएगा।
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सुश्री मायावती की कुंडली  —
 
उत्तर प्रदेश में प्रमुख पार्टी बसपा की प्रमुख सुश्री मायावती का जन्म 15 जनवरी सन् 1950 को रात्रि 7 बजकर 50 मि0 पर दौलतपुर(उत्तर प्रदेश) में हुआ था।
 
सुश्री मायावती कर्क लग्न एवं मकर राशि में जन्म लेने वाली जातक हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार जो घनिष्ठा नक्षत्र एवं सिद्धि योग में जन्म लेते हैं वे जीवन में शून्य से शिखर तक पहुंचते हैं।
 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार 15 जनवरी 1956 को कर्क लग्न में जन्मी मायावती की कुंडली देखने से मालूम होता है क‌ि आने वाले समय में दशा और गोचर उनके अनुकूल चलने वाला है। वर्तमान समय में वह अपनी पार्टी में हो रही बगावत से परेशान हैं, लेक‌िन जल्द ही उनको अपने  विपक्षियों पर हमले करने का मौका मिलेगा। बुध की महादशा में चल रही मायावती को लाभेश शुक्र की अन्तर्दशा अक्टूबर 2016 से मिलेगी।9 फरवरी तक सुश्री मायावती जी का राजयोग रहेगा इसलिये अगर 9 फरवरी से पहले चुनाव हुये तो जनता गजराज के साथ जायेगी और बीएसपी को भारी सफलता मिल सकती है। 
 
इंसान की किस्मत में यदि सितारे उसके साथ हो तो वह बुलंदियों को हासिल कर ही लेता है। इसी एक मिसाल है यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती। सुश्री मायावती की कुंडली में कई प्रबल और दुर्लभ योग हैं। इनकी ही वजह से वह आने वाले लोक सभा चुनाव में गहरी छाप छोड़ेंगी। दस से ऊपर शानदार ग्रहीय योग और महा दशाओं के चलते आने वाले समय में राजनीति की धूरी इनके पास ही घूमेगी। 
 
उज्जैन (मध्यप्रदेश) के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने इनकी कुंडली का गहन अध्यन किया और उसके परिणाम निम्न रहे–

 

 

 
शुश्री मायावती की कुंडली में भाग्येश गुरु की सिंह राशि में स्थिति घोषित एवं अघोषित दोनों तरह की संपत्ति का स्वामी बनाता है। नीचस्थ केतु का एकादश भाव में स्थित होना इसे और भी बल देता है। पंचम स्थान में स्थित राहु, शनि एवं मंगल जातक को बेहद महत्वाकांक्षी बना देता है और लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में नैतिकता आड़े नहीं आती है।मायावती की कुंडली में मंगल कर्म स्थान का मालिक है। मंगल, शनि और राहु के साथ स्वग्रही होकर पंचम स्थान में स्थित है। सप्तम स्थान में मकर राशि का सूर्य और चंद्रमा गृहस्थ जीवन के सुखों से अलग कर देता है। 
 
लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भागवत होकर लग्न पर दृष्टि निक्षेप कर रहा है। लग्नेश चन्द्रमा को 1.55 षड्बल प्राप्त है। लाभ भाव का स्वामी शुक्र भी चलित चक्र में चन्द्रमा से सप्तम भाव में संयुक्त है और लग्न पर दृष्टिपात कर रहा है। धनेश सूर्य के साथ, लग्नेश चन्द्रमा की युति तथा दद्दशेष बुद्ध के साथ सप्तम भाव में परस्पर युति से संबंध के कारण ही मायावती अविवाहित हैं।सप्तमेश शनि स्व नक्षत्र अनुराधा में स्थित है। शनि को 1.36 षड्बल प्राप्त है। अतः शनि कृत विवाह अवरोध सम्पुष्टि हो रही है।
 
पिछले विधानसभा निर्वाचन के समय सुश्री मायावती की कुंडली में शनि की महादशा में मंगल की अंतरदशा चल रही थी।
 
 
सुश्री मायावती की कुण्डली में इस समय बुध की महादशा में केतु का अन्तर चल रहा है। बुध पराक्रमेश व द्वादशेश होकर सप्तम भाव में सूर्य व चन्द्रमा के साथ स्थित है। केतु लाभ भाव में शुक्र की राशि में वृष में बैठा है किन्तु केतु की यह स्थिति नीच की है। कुण्डली का एकादश भाव मित्रों व प्रशंसको का प्रतिनिधित्व करता है। केतु की नीचता के कारण ही बसपा के प्रबल समर्थक व शुभ चिंतक स्वामी प्रसाद मौर्य व आरके चौधरी जैसे लोगों ने पार्टी को छोड़ दिया। 18 अक्टूबर तक बुध में केतु की दशा अभी दशा चलेगी। 
 
यह कार्यकाल सुश्री मायावती के लिए संकटों से घिरा रहेगा। अगर मायावती ने सीधे संवाद का अभाव रखा तो पार्टी में पिछले कई वर्षो से घुटन महसूस कर रहे कुछ और खास लोग पार्टी का बहिष्कार कर सकते है। अष्टम का शुक्र लाभकारी 20 अक्टूबर से बुध की महादशा में शुक्र का अन्तर प्रारम्भ हो जायेगा। यह समय मायावती व बसपा दोनों के लिए समय अनुकूल रहेगा। शुक्र चतुर्थेश व लाभेश होकर अष्टम भाव में अपने मित्र की राशि कुम्भ में बैठा है। 
 
सुश्री मायावती की कुंडली में विपरीत राजयोग है, उनके समर्थक और दुश्मन बराबर बराबर की संख्या में हैं। दलित उत्थान की जो परिपाटी मायावती ने रखी है उसके आगे काशीराम और आम्बेडकर के मूल विचार एक सजीव होकर प्रकट हुए हैं। लेकिन यह भी आश्चर्य है कि मायावती ने सिर्फ दलितों को ही नहीं सभी जातियों को भी राजनैतिक प्रश्रय देकर आने वाले समय के लिए अपनी गद्दी को मजबूत किया है।
 
चूँकि अष्टम का शुक्र लाभकारी होता है। इस भाव का शुक्र साझेदारी व गठबंधन से लाभ करवाता है। सम्भावना है कि दिसम्बर तक बसपा और कांग्रेस का गठबंधन हो जायेगा। दोनों पार्टियॉ मिलकर उत्तर प्रदेश के आगामी विधान सभा का चुनाव लड़ेंगी। इस गठबंधन से दोनों का फायदा होगा लेकिन सबसे अधिक लाभ बसपा को ही प्राप्त होगा। त्रिशंकु विधानसभा बनने की स्थिति में मायावती यूपी में मुख्यमंत्री बनने की सबसे प्रबल दावेदार होंगी।
 
सुश्री मायावती का संयोजन मार्च 2017 में सबसे अधिक अनुकूल है लेकिन उनकी उम्र के अंक के साथ शनि जुड़ा हुआ है और उनकी साढ़े सती शुरू हो रही है जिसके कारन बसपा को पूर्ण बहुमत मिलने में बढ़ा आ सकती है और मायावती किसी अन्य पार्टी के साथ सत्ता में आ सकती है । भाजपा के साथ चुनाव बाद गठबंधन संभव है ।
सुश्री मायावती की जन्म कुंडली की कुछ मुख्य बातें–
 
1. चंद्र कुंडली ज्यादा लग्न कुंडली से अधिक शक्तिशाली है। दूसरे घर में ग्यारहवें और दसवें प्रभु शुक्र लग्न में भगवान शनि एक शक्तिशाली राज योग बना सकते हैं।
2. चलित भाव कुंडली, शनि और बृहस्पति दोनों ऊंचा राशि पर हैं जोकि उनकी दशाओं को ऊंच ग्रहों के परिणाम दे देंगे।
3. शनि और मंगल ग्रह जो अनुकूल परिणाम देने के लिए उनकी क्षमता को बढ़ाता है पुष्कर नवांस में रखा जाता है।
4. सूर्य वर्गोत्तम लग्न में है, लेकिन पूरी तरह से मजबूत नहीं। यह समय-समय पर सामने आते वित्तीय मुद्दों को इंगित करता है। प्रभु बृहस्पति दूसरे घर में कुछ समस्याए उत्पन कर सकता है।
5. जन्म चार्ट में, आठवें घर में प्रभु वीनस वित्तीय सफलता के लिए अच्छा नहीं है।
6. योग कारक मंगल ग्रह मजबूत है लेकिन पांचवें घर में भगवान शनि और राहु के साथ बैठें हैं।  यह योग मंगल ग्रह के अच्छे परिणाम देने की क्षमता कम कर देता है। पंचधा मैत्री चक्र में, शनि और मंगल ग्रह जानी दुश्मन हैं।
7. मंगल अन्य ग्रहों पर भारी है अच्छे परिणाम देगा। यह योग भगवान शनि और राहु के साथ मिलकर राज योग बनाता है।
 
8. दूसरे घर में प्रतिगामी बृहस्पति वित्त से संबंधित अच्छे परिणाम नहीं देगा।
9. प्रभु शनि मंगल और राहु के साथ पांचवें घर में विराजमान है जो वैवाहिक जीवन में खुशी से बचाता है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओ को उत्पन करता है। 
 
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राम दास अठावले की कुंडली—
 
रामदास आठवले रिपबल्किन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के अध्यक्ष हैं।
उनका जन्म 25 दिसम्बर 1959 (उम्र  58 वर्ष ) को हुआ था |
अगलगांव, जिला-सांगली ( महाराष्ट्र) 
पत्नी का नाम–सीमा अठावले 
पुत्र– जीत अठावले 
उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार महाराष्ट्र के कद्दावर दलित नेता रामदास अठावले को  मंत्रिमंडल में स्‍थान देकर प्रधानमंत्री मोदी ने दोहरा दांव खेला है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, अठावले को मंत्री बनाकर बीजेपी ने न सिर्फ महाराष्ट्र में आरपीआई से अपनी दोस्ती को और आगे बढ़ाया है बल्कि यूपी विधानसभा चुनाव में बाबा आंबेडकर की विचारधारा से जुड़े इस नेता को ‘दलित कार्ड’ खेलने वाली बीएसपी से मुकाबले के लिए तैयार किया है।आरपीआई अध्‍यक्ष को कैबिनेट में जगह देकर बीजेपी ने अपने को दलितों के हितों का ध्‍यान रखने वाली पार्टी के रूप में पेश किया है। 
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गूगल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार कांग्रेस को 2012 में 28 सीटें मिली थीं जिनमें 13 सीटों का नुकसान हो सकता है। राज्‍य में बहुमत के लिए 202 सीटों की जरूरत है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का जिक्र करते हुए सर्वेक्षण में कहा गया है कि 39 फीसदी मतदाताओं ने उनके प्रदर्शन को खराब या बहुत खराब बताया है जबकि 33 फीसदी ने उनके कार्य को औसत बताया है। लेकिन 28 फीसदी मतदाताओं का कहना है कि उनका काम बढ़‍िया या बहुत अच्छा रहा है जिसका मतलब है कि इस मामले में सत्ता विरोधी लहर नहीं होगी। सत्‍तारूढ़ समाजवादी पार्टी को करीब 150 सीटों का नुकसान हो सकता है और इसका फायदा बीजेपी और बीएसपी को समान तौर पर मिल सकता है। सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि 403 सदस्‍यों वाली यूपी विधानसभा में बीएसपी के वर्तमान 80 सीटों में 89 और सीटें जुड़ सकती हैं वहीं बीजेपी की 47 सीटों में 88 सीटें और जुड़ने की संभावना है।
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उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार वर्तमान में उत्तर प्रदेश में सत्तारुढ़ सपा के सरकार की 2017 में सत्ता में वापसी नहीं होगी। चुनाव में बसपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आएगी और भाजपा के समर्थन से उत्तर प्रदेश में नई सरकार का गठन होगा। ज्‍योति‌ष शास्‍त्री सतीश शर्मा के अनुसार 2017 में यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव में बीएसपी-भाजपा के गठबंधन की सरकार बनने की भविष्यवाणी की है। भाजपा किसी महिला नेता को आगे करके पूरा चुनाव लड़ेगी। इस चुनाव में अपना दल या पीस पार्टी जैसे छोटे दलों को काफी फायदा होगा। वे किसी बड़े दल से अपनी शर्तों पर गठजोड़ या विलय करेंगे। हालांकि, उनका ये भी कहना है कि इस चुनाव में कांग्रेस को बहुत ज्यादा फायदा होता नहीं दिख रहा है।
 
भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री उम्मीदवार की घोषणा के पश्चात यह गणना बदल भी सकती है हालाँकि इसकी सम्भावना काफी काम हैं क्योंकि अभी भाजपा की ओर मुख्यमंत्री पद के लिए जो भी नाम सामने आ रहे हैं उनके सितारे मायावती के सितारों के सामने काफी मद्धिम है। महागुरु ने मौजूद सपा सरकार और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बारे में कहा कि वहां अंकों के हिसाब से संघर्ष की स्थिति दिख रही रही है । कांग्रेस के बारे में महागुरु ने कहा कि शीला दीक्षित के सितारों से कांग्रेस के लिए संघर्ष का समय अनुकूल हो सकता है ।
 
ज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में सपा को भारी नुकसान हो सकता है।4 अक्टूबर 1992 को अस्तित्व में आई समाजवादी पार्टी की कुंडली देखें तो धनु लग्न और धनु राशि से प्रभावित इस पार्टी को भी शनि की साढ़ेसाती लगी हुई है। किन्तु योगकारक मंगल की महादशा में लाभेश शुक्र की प्रबल विंशोत्तरी दशा के बल पर इस पार्टी की चुनावों में दूसरे स्थान पर रहने के अच्छे योग बन रहे हैं।  इसमें मुख्य लड़ाई बसपा और भाजपा के बीच में होगी। बसपा सत्ता के काफी नजदीक होगी।   इस बार के चुनाव में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है |अखिलेश की कुंडली से यह जाहिर हो रहा है कि कई ग्रह और नक्षत्र उनके शत्रु हो गए हैं  जो चुनाव में उन्हें भारी पड़ सकता हैं | भले ही उनकी कुंडली में ग्रह और नक्षत्र विपरीत चल रहे हैं लेकिन इससे उन्हें कोई निजी नुकसान नहीं होगा बल्कि उनकी पार्टी को इससे फर्क पड़ सकता है |अखिलेश की कुंडली में मंगल और शनि के एक साथ आने के वजह से ही समाजवादी पार्टी में गृह कलह छिड़ा हुआ है|  इस वजह से अखिलेश सत्ता से दूर भी हो सकते हैं |
 
यूपी विधानसभा चुनाव में दिल्ली के सीएम और आप नेता अरविंद केजरीवाल भी छाए रहेंगे। वे भाजपा के लिए काफी मुश्किलें खड़ी करने का काम करेंगे।
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उज्जैन के पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार अगर 9 फरवरी 2017 से पहले यूपी विधानसभा के चुनाव होते हैं तो सुश्री मायावती जी की पार्टी बीएसपी को अप्रत्याशित सफलता मिल सकती है। अगर 9 फरवरी 2017 से 18 फरवरी 2017 के बीच यूपी में चुनाव होते हैं तो बीजेपी को भारी बहुमत मिल सकता है और वो राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभर सकती है। अगर 18 फरवरी 2017 के बाद चुनाव की तारीखों का ऐलान होता है तो यूपी के वर्तमान मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव, लगातार दूसरी बार यूपी के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। एसपी के लिये ये एक बहुत बड़ी सफलता होगी लेकिन चुनाव 18 फरवरी के बाद होंगे तभी सायकिल बुलेट ट्रेन जैसी रफ्तार ले सकती है।9 फरवरी से 18 फरवरी के बीच अगर चुनाव होते हैं तो बीजेपी को भारी सफलता मिलेगी क्योंकि उत्तर प्रदेश की स्थापना अप्रैल 1937 में धनु लग्न और वृश्चिक राशि में हुई थी और 25 जनवरी 2017 से 23 जनवरी 2020 तक शनिदेव का विचरण धनु राशि में रहेगा। ये ग्रहीय स्थितियां यूपी और पंजाब दोनों में सत्ता परिवर्तन के संकेत दे रही हैं, जो कि बीजेपी के लिये काफी अच्छा रहेगा। लेकिन अगर यूपी में विधानसभा चुनाव 18 फरवरी 2017 के बाद हुये तो यूपी के माननीय मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव जी की समाजवादी पार्टी के लिये रिकॉर्ड तोड़ सफलता के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि इस तिथि के बाद अखिलेश जी के ग्रह काफी अच्छे स्थान पर जाने वाले हैं।
 
यूपी में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभरेगी और उसे 184 या फिर उससे ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। वहीँ समाजवादी पार्टी और बहजन समाजवादी पार्टी को मिलने वाली सीट में भी भारी अंतर रहेगा। जैसे अगर एसपी को 48 सीट मिल रही है तो बीएसपी को 6131 सीट मिल सकती है। कांग्रेस के खाते में सिर्फ 22 या फिर उससे भी कम सीटें आ सकती हैं और लोकसभा चुनाव की तरह यहां भी जनता कांग्रेस का हाथ एक बार फिर छोड़ सकती है।
 
यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में ‘कुर्सी’ की संभावित कुंडली–
बीजेपी-184
एसपी-48
बीएसपी-131
कांग्रेस-22
अन्य-18

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