जानिए वास्तु और घडी का सम्बन्ध

जानिए वास्तु और घडी का सम्बन्ध–

( जानिए अच्छा समय लाने हेतु अपने घर में  कहां और कैसे लगाये घड़ी)…

प्रिय पाठकों, हमारे जीवन में बहुत ही अहम होती है घड़ी। घड़ी आपके बुरे समय को अच्छे समय में बदल सकती है यदि आप वास्तु में बताए गए इन उपायों को मानते हैं तो। कहते हैं ना यदि समय ठीक है तो सब कुछ ठीक है।

आपने अक्सर लोगों को आपने ये कहते हुए सुना होगा कि ” यार , मेरा टाइम ही ख़राब चल रहा है “. या फिर किसी को ये कहते जरुर सुना होगा कि ” मेरा समय ठीक नहीं चल रहा “.

ज्योतिष और वास्तु की बात करें, तो ये अद्वितीय शास्त्र हमें ये ज्ञान देते हैं कि चाहे कैसी भी विपरीत परिस्थितियाँ क्यूँ ना हों, ज्योतिष और वास्तु की सहायता से इन दोषों को कम किया जा सकता है और अपने विपरीत परिस्थितयों को अपने अनुकूल बनाया जा सकता है .

प्रिय पाठकों, हमारे घर की प्रत्येक वस्तु का हमारे जीवन में महत्व होता है, इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण वस्तु है घड़ी। हम घर में हो या बाहर समय देखने के लिये घड़ी का प्रयोग करते हैं। वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार घड़ी जहां हमें समय की सही जानकारी देती है वहीं इससे वास्तु के अनुसार हमारे परिवार के सदस्यों पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव पड़ता है। घड़ी भी वातावरण में बहती हुई सकारात्मक ऊर्जा को संकलित करती है जिसका प्रभाव घर के सदस्य पर पड़ता है। वही बंद घड़ी को फेंगशुई के अनुसार अशुभ माना जाता है। 

आज के समय में दीवार घड़ी का चलन सर्वत्र और सर्वमान्य हो गया है। छोटे या बड़े कमरे की किसी न किसी दीवार पर लंबी चौड़ी घड़ी टांग दी जाती है। घड़ी टांगने का संबंध समय देखने के अलावा घर की साज-सज्जा से भी है। तीसरी बात यह है कि उचित और वास्तु सम्मत स्थान पर घड़ी टांगने से उस कमरे या घर के लोगों का जीवन जहां अनुशासित रहता है, वहीं समय की गति के साथ उनका जीवन भी क्रियाशील यानी एक्टिव रहता है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में घड़ी लगाते समय अगर इन बातों का ध्यान रखा जाये तो ये आपके परिवार के लिये लाभदायक रहेगा।प्राचीन काल से लेकर आज तक घड़ी के स्वरूप में अनेक बदलाव हो चुके हैं लेकिन एक चीज कभी नहीं बदली। वो है – समय। यह हमेशा अपनी नियमित गति से चलता है। यह कभी किसी का इंतजार नहीं करता।

भारतीय वास्तु और चीन के फेंगशुई में भी बताया गया है कि घड़ी मनुष्य के लिए कैसे अच्छा और बुरा समय लेकर आ सकती है। घर में घड़ी से संबंधित कौनसी बातों का ध्यान रखना चाहिए, इस बारे में अनेक नियम हैं। 

आइये जानते हैं घड़ी से जुड़े हुए वास्तु नियम को—

(जानिए क्या करें और क्या न करें ?)

घड़ी को कभी दक्षिण दिशा में ना लगाएं—

वास्तुशास्त्र के अनुसार इंसान को घर में घड़ी को दक्षिण दिशा की तरफ नहीं लगानी चाहिए। इस दिशा को ठहराव माना जाता है। इस दिशा में घड़ी होने से घर के मुखिया की सेहत पर बुरा असर पड़ता है।दक्षिण दिशा यम का रास्ता मानी जाती है। दूसरे शब्दों में कहें तो मृत्यु की दिशा। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के दक्षिणी हिस्से में कभी घड़ी नहीं लगानी चाहिए। दक्षिण में लगाई हुई घड़ी परिजनों की आयु और सौभाग्य के लिए अशुभ मानी जाती है।

— वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार घड़ी पूर्व या उत्तर की दीवार पर लगाएं। कभी भी दक्षिण दिशा की दीवार पर घड़ी न लगाएं। यदि घड़ी दक्षिण दिशा की दीवार पर लगी होगी तो कार्य प्रारंभ करने से पहले व दिन में कई बार आपका ध्यान दक्षिण दिशा की ओर जाएगा। इस तरह आप बार-बार दक्षिण दिशा की ओर से आने वाली नकारात्मक ऊर्जा ही प्राप्त करती रहेंगी।

—-घड़ी लगाने के लिए उत्तर, पूर्व तथा पश्चिम दिशा को उत्तम माना जाता है। इनमें से किसी एक दिशा में घड़ी लगाने से घर में शुभ समय आता है।

—- वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार घडिय़ों के प्रयोग में एक दूसरी विशेष सावधानी यह भी रखनी चाहिए कि किसी भी तरह की घड़ी चाहे वह टाइम पीस हो या फिर दीवार घड़ी इन्हें रात को सोते समय सिरहाने से थोड़ी दूरी पर ही रखें, क्योंकि रात केसन्नाटे में घड़ी की टिक-टिक से नींद में विघ्न पड़ेगा। साथ ही आजकल घडिय़ां प्राय: इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत पर कार्य करती हैं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जो इलेक्ट्रो-मैग्नेनिटक रेडिएशन निकलते हैं वे मस्तिष्क व हृदय के आसपास एक नकारात्मक ऊर्जा क्षेत्र बना देते हैं। इसके प्रभाव में सोना या लेटना आपके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।

—वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार घड़ी को हमेशा पूर्व दिशा की तरफ लगाना चाहिए। इससे घर पर धन की कृपा बनती है और घर का माहौल शुभ बनता है। यदि आप घर में घड़ी को पश्चिम दिशा में लगाते हैं तो इससे घर के लोगों के विचार सकारात्मक होते हैं और नए अवसर उन्हें प्राप्त होते हैं।

—दरवाजे के उपर घड़ी–-दरवाजे के उपर भी कभी घड़ी नहीं टांगनी चाहिए। वास्तु के अनुसार दरवाजे पर लगी घड़ी तनाव को बढ़ाती है और घर पर आने जाने वाले लोगों पर इसका नकारात्मक उर्जा का प्रभाव पड़ता है। यही नहीं एैसा करने से पैसों का नुकसान भी होता है।

—- घड़ी का समय बिल्कुल सही या दो-तीन मिनट आगे रखना चाहिए। निर्धारित समय से पीछे रखने से जीवन में बाधाएं आती हैं। ऐसा व्यक्ति परिश्रम का फल तथा प्रसन्नता प्राप्त करने में पीछे रहता है। वहीं, इससे दैनिक कार्यों में भी परेशानी हो सकती है।

शुभ होती है ये वाली घड़ी– घडियां भी कई तरह की होती हैं। वास्तु के अनुसार पेंडुलम वाली घड़ी सबसे अधिक शुभ होती है। इस घड़ी को लगाने से इंसान के तरक्की होती है। पेंडुलम वाली घड़ी को उत्तर, पूर्व या पश्चिम वाली दिशा में लगाना चाहिए।

बंद घड़ी— घर जितनी भी पुरानी या बंद पड़ी घड़ियों हों उन्हें घर से बाहर निकाल दें। वास्तु शास्त्र के अनुसार इस प्रकार की घड़ियां इंसान के विचारों और स्वभाव में नकारात्मकता लाती है। यही नहीं घड़ियों की साफ सफाई भी समय समय पर जरूर करें। वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार बंद घड़ी को हानिकारक माना जाता है। बंद घड़ी नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है और पॉजीटिव एनर्जी का प्रभाव कम करती है। घर में बंद घड़ी नहीं रखनी चाहिए। यदि कोई घड़ी बंद है तो उसे तुरंत ही चालू करें अन्यथा उसे घर से हटा दें। फेंगशुई की मान्यता है बंद घड़ी से घर में धन की आवक भी प्रभावित होती है।अगर आपके घर में बहुत दिनों से बंद घड़ी है तो उसे हटा दें बंद घड़ी घर में आते हुए पैसों को रोक देती है।

—-घड़ी ऐसी जगह लगानी चाहिए जहां से सभी को आसानी से दिखाई दे सके।

घड़ी किस रंग की हो— घड़ी का रंग भी बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। घर या आॅफिस में गाढ़े नीले रंग, काले रंग और केसर रंग की घड़ियों को नहीं लगाना चाहिए। इस तरह के रंग नकारात्मक उर्जा फैलाते हैं।

किस आकर की घड़ी लगाएं—वास्तु के अनुसार घड़ी हमेशा गोलाकार और चैकोर आकार की घड़ी लगाने चाहिए। इससे प्रेम और शांति आती है।वास्तु शास्त्र के अनुसार गोल, चौकोर, अंडाकार या आठ या छः भुजाओं वाली घड़ी सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाती है। तो घड़ी खरीदते समय आप आगे से आकार का जरूर ख्याल रखें।

—– इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि घर में मौजूद सभी घडिय़ां सही ढंग से चलती रहें। कोई भी घड़ी बंद नहीं होनी चाहिए।

— यह भी याद रखें कि कोई भी घड़ी अपने समय से पीछे न चले। हो सके तो अपनी घड़ी को सही समय से पांच-दस मिनट आगे ही रखें क्योंकि वक्त के साथ चलने में ही जीवन की गति, उन्नति व विकास का रहस्य छिपा है।

—-खराब घड़ी को शीघ्र ही ठीक करवाएं एवं बैटरी खराब होने पर उसे यथाशीघ्र बदलवा लें।

—- वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार आजकल कुछ घडियां हर एक घंटे के बाद संगीत या मधुर ध्वनियां उत्पन्न करती हैं। ऐसी घडियों को घर केब्रह्म स्थान स्थित लॉबी में लगाएं। इससे सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है व परिवार के सभी सदस्यों के जीवन में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होते हैं।

— यह ध्यान रखें कि घड़ी कभी भी किसी दरवाजे के ऊपर न हो क्योंकि हर बार दरवाजे से अंदर बाहर आते-जाते समय आपका आभामंडल इससे दुष्प्रभावित होगा। परिणामस्वरूप आप तनावग्रस्त हो सकते हैं। यहां तक कि ऐसे दरवाजे से बाहर निकलने के बाद भी मन खिन्न रहेगा।

—दीवार घडी पर धूल-मिट्टी जमा न होने दें। नियमित रूप से उसकी सफाई करती रहें।अक्सर दीवार पर लगी घड़ियों पर एक-दो दिन बाद धूल जम ही जाती है। इन्हें निरंतर साफ करते रहें।

—यह ध्यान रखें कि किसी भी घड़ी का शीशा टूटा हुआ न हो। ऐसी टूटी हुई घड़ी को बदल देना चाहिए क्योंकिइसका परिवार के सदस्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

—वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार घड़ियों के संदर्भ में वास्तु शास्त्र एक अच्छी राय यह देता है कि यदि आप घड़ियों से लाभ पाना चाहते हैं तो जितना संभव हो सके घर में मधुर ध्वनि उत्पन्न करने वाली घड़ियों को ही रखें। इसकी अच्छी आवाज़ से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

—- बहुत पुरानी, बार-बार खराब होने वाली और धुंधले शीशे वाली घड़ियां भी शुभ नहीं मानी जातीं। ये परिवार की सफलता में बाधक होती हैं। इससे परिश्रम का उचित फल नहीं मिलता।

समय का हिसाब—

घड़ी का समय सटीक होना चाहिए। समय से आगे या पीछे चलने वाली घड़ियां शुभ नहीं मानी जाती हैं। इससे इंसान को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। इसलिए समय को एकमद सटीक ही रखें।

—– कार्यस्थल पर ऐसी घड़ी होनी चाहिए जो आकार में कुछ बड़ी, साफ और दिखने में सुंदर हो। बहुत पुरानी और रुक-रुक कर चलने वाली घड़ी कार्यालय में नकारात्मक ऊर्जा तथा सुस्ती लाती हैं।

—– वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार कार्यस्थल (ऑफिस/दुकान/फेक्ट्री आदि में ) पर बंद घड़ी भी नहीं रखनी चाहिए। वास्तव में बंद घड़ी ठहराव और पतन का सूचक होती हैं। घर में भी बंद घड़ी शुभ नहीं मानी जाती। अगर ऐसी घड़ी चलने लायक न हो तो उसे उतारकर पुराने सामान के साथ रख देना चाहिए।

—वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार घड़ी को कभी भी अपने तकिये के नीचे रखकर ना सोएं। वास्तु के अनुसार यह गलत होता है। इंसान की सेहत और उर्जा पर इसका गलत असर पड़ता है। ऐसा करने से घडी से निकलने वाली इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंगें हमारे सिर एवं हृदय पर बुरा प्रभाव करती हैं।

—बेड के सिरहाने वाली दीवार पर घड़ी, फोटो फ्रेम आदि नहीं लगायें, इससे सिर में दर्द बना रहता है। अच्छा होगा यदि आप बेड के ठीक सामने वाली दीवार पर कुछ मत लगायें। इससे मन की शांति बनी रहती है।

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जानिए आपके घर में घडी का उपयुक्त स्थान—

—-बेडरूम में सदैव उत्तर या उत्तरपूर्व दिशा में ही घड़ी लगानी चाहिए। वैसे, यहां अधिक खटपट करने वाली क्लॉक नहीं लगानी चाहिए और न ही अलार्म रहित घड़ी। हां, प्रत्येक घंटे चेतावनी देने वाली टबिल क्लॉक बेड रूम में लगाना अच्छा नहीं रहेगा। इससे नींद में खलल पड़ेगा।

—स्टडी रूम में पूर्व या वायव्य कोण में घड़ी लगाना सर्वोत्तम रहेगा। इससे जहां वहां कार्यरत अध्ययनकर्ता की एकाग्रता बनी रहेगी, वहीं उनका समय भी फालतू कार्यों और दिमागी उलझनों में बर्बाद नहीं होगा।

—यदि ड्राइंग रूम के उत्तर की ओर दीवार घड़ी लगाते हैं, तो आर्थिक कार्य समय पर बनते रहेंगे। घर में धन की आवक समय पर होगी, लेकिन उत्तर की ओर पितर और देवताओं का वास होता है। अत: किसी देवी-देवता की चित्र या फोटो प्रतीक लगी हुई दीवार घड़ी लगाई जाए, तो ड्राइंग की साज-सज्जा में चार चांद लग जाएंगे।

—ड्राइंग रूम के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने ही अच्छा सुंदर और बड़े अक्षरों वाली दीवार घड़ी लगाना चाहिए। टाइमपीस लगाने की उत्तम दिशाएं हैं

 – उत्तरपूर्व या ईशान कोण, दूसरा महत्वपूर्ण स्थान और दिशा है पूर्व यानी सनराइज एंगल और तीसरा शुभ स्थान है वायव्य कोण यानी उत्तर पश्चिम। 

तीनों स्थानों में से सर्वोत्तम स्थान ईशान कोण ही है, क्योंकि यह वास्तु देवता के सिरोभाग को स्पर्श करता है। अगर वास्तु देवता का सिरोभाग सही रहेगा, तो घर में रहने वाले सदस्यों को भी मानसिक और शारीरिक सुख शांति का आभास होगा। उनके सभी काम समयानुसार बनते जाएंगे और किसी भी निरर्थक कार्य पर समय नष्ट नहीं होगा। इस प्रकार से घर के विभिन्न अवयवों पर दिशा और उसके भावनात्मक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ही दीवार घड़ी का चुनाव किया जा सकता है।

—-ड्राइंग रूम में पूर्व या वायव्य कोण में दीवार घड़ी लगाने से घर के सदस्यों की शारीरिक और मानसिक ऊर्जा गतिमान रहेगी। उनके जीवन में नवीनता और गतिशीलता आएगी। पूर्व दिशा में लगाई गई दीवार घड़ी उनको सदैव समय पर जागृत रखेगा और किसी भी आकस्मिक घटना-दुर्घटना के प्रति वे समय रहते सचेत हो जाएंगे।

—-यह भी ध्यान रहे कि जहां भी घड़ी लगाई जा रही है, वहां या उसके आसपास शेर, भालू, सियार गिद्द, सुअर, घडि़याल, बाघ, चीता या सांप आदि परभक्षी व खतरनाक प्राणियों के चित्र नहीं लगाने चाहिए। इससे जहां समय की धारा विरुद्ध हो जाती है, वहीं अन्य प्रकार के वास्तु-दोष घर के सदस्यों की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं।

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यदि आप उपरोक्त  उपायों/कथनों का सही सही क्रियान्वन करेंगें , तो सौभग्य आपके घर के घर को छोड़ के जा ही नहीं सकता | आपके घर में सकारात्मक माहौल हमेशा व्याप्त रहेगा | इसलिए ज्योतिष और वास्तु के घड़ी से जुड़े   इन नियमो का पालन करें और अपने लाभ हमसे और अपने शुभचिंतकों और मित्रों से अवश्य शेयर करें | 

 

 

 

 

 

 

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