जानिए की हत्था जोड़ी क्या है ? WHAT IS HATHA JODI & Its EFFECTS …

 WHAT IS HATHA JODI & Its EFFECTS …

जानिए की हत्था जोड़ी क्या है ?

जब रत्न कार्य करना बंद/ जब रत्न अपना प्रभाव कम कर दे, तब तांत्रिक वस्तुयें भाग्य वृद्धि/सुरक्षा के लिये प्रयोग में लायी जाती है। जैसे हत्था जोड़ी..

हत्था जोडी एक प्रभावशाली तांत्रिक वस्तु है, यह बहुत पुराने जंगलों में दाब नाम की घास के पेड की जड ( मुट्ठी बांधे एक हाथ की शक्ल) से निकलती है ।

जब व्यक्ति को जीवन मे कोई साधन/रास्ता न मिले, तो दीपावली की रात को यह मन्त्र पूजा से सिद्ध करके अपने पास में रखने से साधनो की प्राप्ति में सहायता मिलती है क्योकि इस दीपावली ( 30 अक्टूबर 2016 ) की विशेष रात्रि को मंत्रो द्वारा सिद्धि प्राप्त करने की विशेष योग है।

तांत्रिको के अनुसार दीपावली की रात को सिद्ध की गई हत्था जोड़ी जीवन भर संकटों, बाधाओं, ऊपरी हवा, किसी किये कराये या बुरे तांत्रिक प्रभाव से साधक की रक्षा करती है।  

प्रभु जी, आपको बिना पूजा वाली हत्था जोड़ी ₹ 5100/- रूपये की मिलेगी।। पूजा सहित, आपके नाम गोत्र से सिद्ध और प्राण प्रतिष्ठित ₹11000/- रूपये की मिलेगी।।

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प्रिय मित्रों/ पाठकों, 

तंत्र शास्त्र में हत्था जोड़ी एक विशिष्ट स्थान रखती है। ये साक्षात् माँ महाकाली और कामाख्या देवी का स्वरुप मानी जाती है। देखने में ये भले ही किसी पक्षी के पंजे या मनुष्य के हाथो के समान दिखे लेकिन असल में ये एक पौधे की जड़ है।

हत्था जोड़ी तांत्रिक प्रयोगों में काम आने वाली एक दुर्लभ एवं चमत्कारिक वस्तु है | ये एक प्रकार की वनस्पति बिरवा की जड़ है, लेकिन इसे दुर्लभ माना जाता है, क्योकि ये सहज उपलब्ध नहीं होती है |

इस जड़ की आकृति दो जुड़े हुए हाथों के रूप में होती है, इसलिए इसे हत्था जोड़ी कहा गया है | हत्था जोड़ी का प्रयोग दांपत्य जीवन में आ रही समस्यओं को दूर करने में, व्यापार वृद्धि में, धन प्राप्ति इत्यादि में की जाती है | इसे स्त्रियों को छूना मना होता है स्त्रियों के छूने से इसकी शक्ति ख़त्म हो जाती है.ऐसा शस्त्रों मे लिखा है.इसे पीले सिंदूर मे चाँदी की डिब्बी मे लौंग ,इलायची ,गुग्गूल,चाँदी आदि वस्तुओं के साथ आभिमंत्रित करके रक्खा जाता है| 

हत्था जोड़ी इंसान की भुजाओं के आकार की होती है। इसमें दो पंजे दिखाई देते हैं और उंगलियां भी साफ-साफ दिखाई देती हैं। पंजों की आकृति ठीक इसी प्रकार होती है, जैसे मुट्ठी बंधी हुई हो। ज्योतिषीय उपायों में इस जड़ का विशेष महत्व है। यह पौधा विशेष रूप से मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों में पाया जाता है। आमतौर वनवासी लोग इस जड़ को निकालकर बेचते हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री (मोब.–09039390067 ) के अनुसार यह जड़ बहुत चमत्कारी होती है और किसी कंगाल को भी मालामाल बना सकती है। इस जड़ के असर से मुकदमा, शत्रु संघर्ष, दरिद्रता से जुड़ी परेशानियों को दूर किया जा सकता है। इस जड़ से वशीकरण भी किया जाता है और भूत-प्रेत आदि बाधाओं से भी निजात मिल सकती है।

यह एक जंगली पौधे की जड़—-

हत्था जोड़ी यह बहुत ही शक्तिशाली व प्रभावकारी वस्तु है यह एक जंगली पौधे की जड़ होती है। मुकदमा ,शत्रु संघर्ष ,दरिद्रता ,व दुर्लभ आदि के निवारण में इसके जैसी चमत्कारी वस्तु आज तक देखने में नही आई। इसमें वशीकरण को भी अदुभूत टकक्ति है , भूत दृप्रेत आदि का भय नही रहता यदि इसे तांत्रिक विधि से सिध्द कर दिया जाए तो साधक निष्चित रूप से चामुण्डा देवी का कृपा पात्र हो जाता है। यह जिसके पास होती है उसे हर कार्य में सफलता मिलती है धन संपत्ति देने वाली यह बहुत चमत्कारी साबित हुई है तांत्रिक वस्तुओं में यह महत्वपूर्ण है | इसके  पौधे प्रायः मध्यप्रदेश के जंगलों में होते हैं।

हत्ता जोडी बहुत ही प्रभावकारी और शक्तिशाली वस्तु है यह एक जंगली पौधे की जड़ होती है। इसका चमत्कार मुकदमा, शुत्रु संघर्ष, दरिद्रता को दूर करने व दुर्लभ व्याधियों आदि के निवारण में इसकी जैसी चमत्कारी वस्तु आज तक देखने में नही आई इसमे वशीकरण को भी अद्भुत शक्ति है। इसको पास मे रखने से भूत, प्रेत आदि का भय नहीं रहता है यदि इसे तांत्रिक विधि से सिद्ध कर दिया जाए तो साधक निश्चित पद्यमावति का कृपा पात्र हो जाता है। यह जिसके पास होती है उसे हर कार्य मे सफलता मिलती है धन संपत्ति देने वाली यह बहुत चमत्कारी साबित हुई है। तंत्र मे इसका महत्वपूर्ण स्थान है। सिद्ध और प्राण प्रतिष्ठित हत्था जोडी प्राप्त करने के लिए हमे संपर्क करें।।मोब.–09039390067 .

हत्ता जोड़ी में अद्भुत प्रभाव निहित रहता है, यह साक्षात पद्यमावति का प्रतिरूप है यह जिसके पास भी होगा वह अद्भुत रूप से प्रभावकारी होगा, सम्मोहन, वशीकरण, अनुकूलन, सुरक्षा मे अत्यंत गुणकारी होता है, इससे प्रयोग से भी शीघ्र ही धन लाभ होने लगता है। मंत्र से पूजने के बाद इलायची तथा तुलसी के पत्तों के साथ एक चांदी की डिब्बी मे रख दें। इससे धन लाभ होता है। हत्था जोडी जो की एक महातंत्र में उपयोग में लायी जाती है और इसके प्रभाव से शुत्रु दमन तथा मुकदमों में विजय हासिल होती है।

मेहनत और लगन से काम करके धनोपार्जन करते है फिर भी आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड रहा है तो आपको अपनी आर्थिक स्थिती सुधारने के लिए उपाय करना चाहिए। इसके लिए किसी भी शनिवार अथवा मंगलवार के दिन हत्ता जोडी घर लाएं। इसे लाल रंग के कपडे में बांधकर घर मे किसी सुरक्षित स्थान मे अथवा तिजोरी मे रख दें। इससे आय में वृद्धि होगी एवं धन का व्यय कम होगा। तिजोरी में सिन्दुर युक्त जोडी रखने से आर्थिक लाभ में वृद्धि होने लगती है। सिद्ध और प्राण प्रतिष्ठित हत्था जोडी प्राप्त करने के लिए हमे संपर्क करें।।मोब.–09039390067 .

नेपाल में इसे स्थानीय लोग विरूपा या विरुपात और भारत में बिरवा नाम से पहचानते है। ये अति दुर्लभ वनस्पति है और भारत में मध्य प्रदेश के अमरकंटक, झारखण्ड के नेपाल के सीमावर्ती जंगलों में, उत्तराखंड में स्वर्ग की सीढ़ी के पास के जंगलों में और नेपाल में कई स्थानों पर पाई जाती है।

यह हैं हत्था जोड़ी पूजा विधि :—

जब आपको हत्था जोड़ी मिले तो उसे निकाल कर एक साफ़ कटोरी में रख कर उसमे इतना तिल का तेल डालें की हत्था जोड़ी पूरी भीग जाये, और अगर तेल काम हो जाये तो फिर से तेल डालें, ऐसा करने से हत्था जोड़ी तेल सोखती है और इसे तब तक उसी कटोरी में रखे जब तक की प्रयोग न करना हो |

और जिस दिन इसका प्रयोग करना हो ( प्रायः शुक्रवार से प्रारम्भ करना चाहिए ) इसको तेल से निकाल कर इसके ऊपर सिन्दूर लगाए और बचा तेल पीपल के वृक्ष पर अर्पित कर दे , अगर तिल का तेल न हो तो आप सरसो का तेल भी प्रयोग कर सकते है |

इसके बाद एक चांदी की डिबिया लेकर उसमे सिन्दूर भरकर हत्था जोड़ी को उसमे रख दे और डिबिया को बंद करके जहा रखना चाहते है रख सकते है |

प्रातः काल स्नान ध्यान से निवृत्त होकर अपने घर के मंदिर के समीप गंगा जल या गौ मूत्र से स्थान शुद्धि कर ले और उत्तर या पूर्व की दिशा की तरफ मुख करके सफ़ेद ऊनी या सूती आसन पर बैठे एक लकड़ी के ऊपर लाल वस्त्र रख कर हत्था जोड़ी की डिब्बी खोलकर इसपर रखे |

तथा यदि धन के लिए पूजा करना चाहते है तो माता लक्ष्मी, अगर दांपत्य जीवन के लिए चाहते है तो माँ कामाख्या और अगर शिक्षा के लिए चाहते है तो माता सरस्वती को ध्यान में रख कर दिए गए मंत्रो में से उस मंत्र का उच्चारण 108 बार करे |

मुकदमो में विजय हेतु हत्था जोड़ी का प्रयोग—-

हत्था जोड़ी में अद्भुत प्रभाव निहित रहता है, यह साक्षात चामुंडा देवी का प्रतिरूप है. यह जिसके पास भी होगा वह अद्भुत रुप से प्रभावशाली होगा. सम्मोहन, वशीकरण, अनुकूलन, सुरक्षा में अत्यंत गुणकारी होता है, हत्था जोड़ी। हत्था जोड़ी जो की एक महातंत्र में उपयोग में लायी जाती है और इसके प्रभाव से शत्रु दमन तथा मुकदमो में विजय हासिल होती है !

मेहनत और लगन से काम करके धनोपार्जन करते हैं फिर भी आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो आपको अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उपाय करना चाहिए। इसके लिए किसी भी शनिवार अथवा मंगलवार के दिन हत्था जोड़ी घर लाएं। इसे लाल रंग के कपड़े में बांधकर घर में किसी सुरक्षित स्थान में अथवा तिजोरी में रख दें। इससे आय में वृद्घि होगी एवं धन का व्यय कम होगा। सिद्ध और प्राण प्रतिष्ठित हत्था जोडी प्राप्त करने के लिए हमे संपर्क करें।।मोब.–09039390067 .

तिजोरी में सिन्दूर युक्त हत्था जोड़ी रखने से आर्थिक लाभ में वृद्धि होने लगती है। हाथा जोड़ी एक जड़ है। गायत्री मंत्र से पूजने के बाद इलायची तथा तुलसी के पत्तों के साथ एक चांदी की डिब्बी में रख दें। इससे धन लाभ होता है।हाथा जोड़ी को इस मंत्र से सिद्ध करें-

ऊँ किलि किलि स्वाहा।

हत्था जोड़ी मंत्र अगर आप दांपत्य जीवन के लिए इसका प्रयोग कर रहे हो :—-

ॐ हाँ ग़ जू सः अमुक में वश्य वश्य स्वाहा |

हत्था जोड़ी मंत्र अगर आप धन और व्यापार के लिए इसका प्रयोग कर रहे हो :—

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री महालक्ष्मयै नमः |

हत्था जोड़ी मंत्र अगर आप शिक्षा और नौकरी के लिए इसका प्रयोग कर रहे हो :—-

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सरस्वतये नमः 

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हत्था जोड़ी को इस विधि से करें सिद्ध :–

सर्व प्रथम हत्था जोड़ी को इस मंत्र से सिद्ध करें-

ॐ किलि किलि स्वाहा।

वेसे तो नवरात्री पर इसका पूजन करना श्रेष्ठ रहता है अत: इसे नवरात्री से पहले ही उपलब्ध कर रख लेना चाहिए। शुभ दिन एवं शुभ योग में हत्ता जोड़ी लेकर उसे शुद्ध जल से स्नान कराये। धुप दीप देकर उसकी शुद्धि करे। एक डिब्बी में सिंदूर, कपूर एवं लौंग के साथ इसे रखे। इस प्रकार यह मंत्र चेतन्य सिद्ध हत्था जोड़ी कही जायेगी। तिजोरी में सिन्दूर युक्त हत्था जोड़ी रखने से आर्थिक लाभ में वृद्धि होने लगती है. हाथा जोड़ी एक जड़ है। होली के पूर्व इसको प्राप्त कर स्नान कराकर पूजा करें तत्पश्चात तिल्ली के तेल में डूबोकर रख दें।दो हफ्ते पश्चात निकालकर गायत्री मंत्र से पूजने के बाद इलायची तथा तुलसी के पत्तों के साथ एक चांदी की डिब्बी में रख दें। इससे धन लाभ होता है। सिद्ध और प्राण प्रतिष्ठित हत्था जोडी प्राप्त करने के लिए हमे संपर्क करें।।मोब.–09039390067 .

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इस प्रकार सिद्ध करें हत्था जोड़ी को :—

होली से पहले हत्था जोड़ी अपने घर ले आएं। होली के दिन स्वयं स्नान आदि कर्मों से पवित्र हो जाएं। होली पर श्रेष्ठ मुहूर्त में हत्था जोड़ी को पवित्र जल से स्नान कराएं, पूजन करें। मंत्र जप करें। इसके बाद इस जड़ को दो हफ्तों के लिए तिल्ली के तेल में डुबोकर रख दें।

दो हफ्तों के बाद जड़ निकाल लें। इसके बाद गायत्री मंत्र जप करते हुए जड़ का पूजन करें। इलायची तथा तुलसी के पत्तों के साथ एक चांदी की डिब्बी में बंद करके घर में धन स्थान पर रखें। ऐसा करने पर धन लाभ होता है।

रवि पुष्य नक्षत्र में पंचामृत से स्नान कराकर विधिवत पूजन कर निम्नलिखित मंत्र का १२५०० जप कर के इसको सिद्ध कर लें. रक्त आसन उत्तरभिमुख बैठ कर लाल चन्दन की माला से जप करें

मूल मंत्र :—

हाथा जोड़ी बहु महिमा धारी कामण गारी, खरी पीयारी.

राजा प्रजा मोहन गारी, सेवत फल, नर नारी,

केशर कपूर से मैं करी पूजा, दुश्मन के बल को तुं भुजा,

मन इछंत मांगूं ते देवे-कहण कथन मेरा ही रवे,

जोड़ी मात दुहाई रख जे मेरी बात सवाई,

मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरो मन्त्र इश्वारोवाचा.

विधि : रवि पुष्य नक्षत्र में पंचामृत से स्नान कराकर विधिवत पूजन कर उपरोक्त मंत्र का १२५०० जप कर के इसको सिद्ध कर लें. रक्त आसन उत्तरभिमुख बैठ कर लाल चन्दन की माला से जप करें. लाल फूल चढाएं व लाल वस्त्र पहने. सामने चक्रेश्वरी व भैरव की   मूर्ती या चित्र स्थापन करें. व उनकी पूजा करें. भैरव की पूजा तेल और सिन्दूर व लाल फूल से करनी है तथा चक्रेश्वरी की पूजा की अष्ट प्रकार से पूजा करनी है.

ऋद्धि :  ऊं ह्रीं अर्हं णमों सव्वोसवाण (जेन mantra )

मन्त्र :  ऊं नमो नामिऊण विसहर विस प्रणाशन रोग शोक दोष ग्रह कप्प्दुमच्चा यई सुहनाम गहण सकल सुह दे ऊं नमः स्वाहा.

उपरोक्त मूल मंत्र के अतिरिक्त ऊपर दिए गए ऋद्धि और मंत्र से भी पूजा करें. इस प्रकार साधना करने के पश्चात एक चांदी की डिबिया में शुद्ध सिन्दूर के साथ कृष्णपक्ष के पहले दिन ही सुबह इसको उल्टा करके (यानि पंजे नीचे की तरफ ) रख दें. फिर शुक्लपक्ष के पहले दिन सुबह सीधा करके (यानी पंजे ऊपर) रख दें. इस तरह तीन कृष्णपक्ष व तीन ही शुक्लपक्ष उल्टा सीधा करके रखते रहें. आखिर के शुक्लपक्ष में वो उल्टा ही रहेगा फिर हमेशा के लिये उसे उल्टा ही रखना है. उस चांदी की डिबिया को अपनी तिजोरी में रख दें. परन्तु कभी भी कोई औरत उस डिबिया को भूल से भी खोल कर न देखे.  नहीं तो प्रभाव समाप्त हो जायेगा.  यह बहुत ही सुंदर लक्ष्मी वर्धक प्रयोग है | सिद्ध और प्राण प्रतिष्ठित हत्था जोडी प्राप्त करने के लिए हमे संपर्क करें।।मोब.–09039390067 .

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हत्था जोड़ी को इस विधि से करें सिद्ध :-

आजकल अनेक लोगो के पास हत्था जोड़ी होगी किन्तु यदि हमको सिद्ध करना ही न आये तो हम भला कैसे लाभ प्राप्त कर सकते है ?

तो आज मैं आप सब के समक्ष उस विधि पर प्रकाश डाल रहा हु जिसको करने से आप के पास जो हत्था जोड़ी है वो पूर्णतया सिद्ध और चैतन्य हो जाएगी तत्पश्चात यदि इस हत्था जोड़ी पर आप कोई भी प्रयोग संपन्न करेगे तो आप का प्रयोग पूर्ण फलदायी होगा और यदि कोई प्रयोग नहीं भी करते है सिर्फ अपने धन के स्थान पर स्थापित भी कर लेते है तो भी यह पूर्ण फलदायी होगा !

हत्था जोड़ी प्राप्त होने पर इसको तेल शोधन से सर्व प्रथम सिद्ध किया जाता है इसके लिए आप पहले किसी पात्र में हत्था जोड़ी को रख कर जल से फिर दूध – दही- घी – शहद – शक्कर पुनः जल से शुद्ध कर साफ़ वस्त्र से पोछकर किसी अन्य पात्र ( कटोरी ) में इसको रखे और ऊपर से तिल का इतना तेल भर दे कि हत्था जोड़ी उसमें पूरी डूब जाय ! 

इस पात्र को सावधानी पूर्वक ऐसे स्थान पर रख दे जहाँ कोई छेड़छाड़ न करे ! सिद्ध और प्राण प्रतिष्ठित हत्था जोडी प्राप्त करने के लिए हमे संपर्क करें।।मोब.–09039390067 .

कुछ दिन के अंतराल के उपरान्त हत्थाजोड़ी वाले पात्र का निरिक्षण करते रहे ! यदि तेल कम हो जाता है तो पुनः उस पात्र में तेल भर दे ! ऐसा मैंने देखा है कि हत्था जोड़ी तेल सोखती है ! हत्थाजोड़ी जब तेल सोखना बंद कर दे तो उसे निकाल ले ! इसके उपरान्त चाँदी कि डिब्बी में सिंदूर भरकर उसमें रखे !

बसंत पंचमी, महाशिवरात्रि या होली दहन की रात पूर्व दिशा की और मुह कर लाल आसन पर बैठ जाय एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर 250 ग्राम अक्षत की ढेरी बनाकर उसके ऊपर चाँदी की डिब्बी हत्था जोड़ी सहित रखे पास में ही माता लक्ष्मी का चित्र और ताम्र लोटे में जल भरकर पास में रखे और सर्वप्रथम गणेश – गुरु पूजन करने के बाद हत्था जोड़ी का गंध – अक्षत – लाल पुष्प – से पूजन कर केसर एक जोड़ी लौंग अर्पित करे और धुप – दीप से पूजन कर लाल रंग की मिठाई का भोग लगाये और नेत्र बंद कर अपनी समस्त कामनाओ की पूर्ति करने के लिए तथा सुख समृद्धि प्रदान करने का निवेदन करे , इसके बाद लाल चन्दन कि माला से मात्र एक माला पूर्ण एकाग्रता से निम्न मंत्र का जप करे !

मंत्र –

“हत्थाजोड़ी अति महिमाधरी कामणगारी , खरी प्यारी , राज-प्रजा सब मोहनगारी सेवतफल पावे सब नरनारी , केसर कर्पूर से करू मैं पूजा, दुश्मन के बल को तू दे बुझा , मनइश्चित मांगू जो देवे , कहना कथन ही मेरा रखे , हत्थाजोड़ी मातु दुहाई , रखजे मेरी बात सवाई , मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरो मंत्र ईश्वर वाचा ” !!

मंत्र जप पूर्ण होने के बाद कर्पूर द्वारा माता लक्ष्मी की आरती करे ! तत्पश्चात प्रसाद ग्रहण कर ले ! 

जब दीपक ठंडा हो जाय तब पुष्प – केसर – और लौंग सहित डिबिया को लाल वस्त्र के एक रुमाल में बाँध कर अपनी तिजोरी – गल्ला या अलमारी में सुरक्षित रख दे ! माता लक्ष्मी के चित्र को पूजा स्थान में रख दे , लाल वस्त्र सहित अक्षत को उठा ले जो चौकी पर बिछा था और 251 रूपए के साथ किसी ब्राह्मण को दान कर दे ! ऐसा करने से हत्थाजोड़ी अभिमंत्रित होकर आपके लिए कार्य सिद्धि प्रदायक हो जाती है !

“”शुभम भवतु””

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हत्थाजोड़ी के अन्य प्रयोग : 

किसी भी व्यक्ति से वार्ता करने में साथ रखे तो वो बात मानेगा |

जिसको भी वश में करना हो, उसका नाम लेकर जाप करें तो इसके प्रभाव से वह व्यक्ति वशीभूत होगा |

त्रि – धातु के तावीज में गले में धारण करने से बलशाली से बलशाली व्यक्ति भी डरता है | सभी कार्यों में निरंतर निर्भय होता है |

प्रयोग के बाद चांदी की डिबिया में सिन्दूर के साथ ही तिजोरी में रख दें |

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हमारे तंत्र शास्त्र तथा तन्त्र का प्रयोग करने वालो के लिये एक महत्वपूर्ण वन की औषिधि के नाम से जाना जाता है। यह प्राय: पंसारियो के पास या राशि रत्न बेचने वालो के पास मिल जाती है इसे तांत्रिक सामान बेचने वाले भी अपने पास रखते है। हत्थाजोडी को कर जोडी हस्ताजूडी के नाम से भी जाना जाता है उर्दू मे इसे’बखूर इ मरियम’ कहा जाता है ईरान मे इसे चबुक उशनान के नाम से जाना जाता है लेटिन मे इसे सायक्लेमेन परसीकम कहा जाता है। यह वन की औषिधि है और यह ईरान मे अधिक पैदा होती है पिछले कुछ समय से भारत मे भी इसकी जैसी औषिधि मिलने लगीहै। इस औषिधि के पत्ते हरे रंग के होते है साथ ही यह भी देखा जाता है इन पत्तो के नीचे के हिस्से मे सफ़ेद रंग की परत होती इअ और इस सफ़ेद हिस्से पर बाल जैसे मुलायम रोंये होते है।इसके ऊपर गुलाब की तरह का फ़ूल आता है कही कही पर फ़ूल मे नीला रंग भी दिखाई देता है। इस वनोषधि की उपज किसी भी पेड की छाया मे तथा नम जमीन मे होती है इसकी जड गोल होती है और रंग काला होता है इसी जड मे हत्था जोडी बनती है।

यह निर्माण कार्य कुदरती होता है.चालाक लोग इसे पीस कर चूर्ण बना लेते है और अपनी दुकानदारी चलाने क एलिये किसी व्यक्ति विशेष को किसी भी भांति यह चूर्ण खिला देते है इस चूर्ण का प्रभाव यह होता है कि अधिक गर्म होने से व्यक्ति को चक्कर आने लगते है और प्यास भी लगने लगती है तथा जंभाइयां भी आने लगती है इस प्रकार से वे कहने लगते है कि भूत आ गया है या कोई छाया आ गयी है। लेकिन होता कुछ नही है केवल इसका नशा कुछ समय तक उसी प्रकार से रहता है जैसे कोई तम्बाकू नही खाता हो और उसे तम्बाकू भूल से खिला दी जाये तो कुछ समय तक माथा घूमता रहेगा और बाद मे अपने आप ठीक हो जा

होली की रात को कुंए के पास जाकर थोड़ी मिट्टी खोद कर उसकी एक गणेशजी की मूर्ति बनाएं। उसके ऊपर सिंदूर से लेपन कर रातभर उसका अभिषेक-पूजन करें। सुबह आरती के बाद विसर्जन कर दें। इससे प्रयोग से भी शीघ्र ही धन लाभ होने लगता है।

हत्था जोड़ी जो की एक महातंत्र में उपयोग में लायी जाती है और इसके प्रभाव से शत्रु दमन तथा मुकदमो में विजय हासिल होती है ! 

मेहनत और लगन से काम करके धनोपार्जन करते हैं फिर भी आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो आपको अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उपाय करना चाहिए। इसके लिए किसी भी शनिवार अथवा मंगलवार के दिन हत्था जोड़ी घर लाएं। इसे लाल रंग के कपड़े में बांधकर घर में किसी सुरक्षित स्थान में अथवा तिजोरी में रख दें। इससे आय में वृद्घि होगी एवं धन का व्यय कम होगा।

तिजोरी में सिन्दूर युक्त हत्था जोड़ी रखने से आर्थिक लाभ में वृद्धि होने लगती है.

हाथा जोड़ी एक जड़ है। होली के पूर्व इसको प्राप्त कर स्नान कराकर पूजा करें तत्पश्चात तिल्ली के तेल में डूबोकर रख दें। दो हफ्ते पश्चात निकालकर गायत्री मंत्र से पूजने के बाद इलायची तथा तुलसी के पत्तों के साथ एक चांदी की डिब्बी में रख दें। इससे धन लाभ होता है।हाथा जोड़ी को इस मंत्र से सिद्ध करें-

ऊँ किलि किलि स्वाहा।

प्रसव की सुगमता के लिये ग्रामीण इलाको मे इसे चन्दन के साथ घिस कर प्रसूता की नाभि पर चुपड देते है इससे बच्चा आराम से हो जाता है।

इसे गर्भपात करवाने के लिये भी प्रयोग मे लाया जाता है लेकिन इसके आगे के लक्षण बहुत खराब होते है जैसे हिस्टीरिया जैसा मरीज हो जाना आदि भी देखने को मिलता है.

जब कभी पेशाब रुक जाती है तो इसे पानी के साथ घिसकर पेडू पर लगाने से पेशाब खुल जाता है.

पेट मे कब्ज रहने पर इसको पानी के साथ घिस कर पेट पर चुपडने से कब्जी दूर होने लगती है.

मासिक धर्म के लिये इसके चूर्ण की पोटली बनाकर योनि मे रखने से शुद्ध और साफ़ मासिक धर्म होने लगता है लेकिन इस कार्य के लिये किसी योग्य डाक्टर या वैद्य की सहायता लेनी जरूरी होती है.

हत्थाजोडी का चूर्ण पीलिया के बहुत उपयोगी है पीलिया के मरीज को हत्थाजोडी के चूर्ण को शहद के साथ किसी वैद्य की सहायता लेकर चटाने से दूर हो जाता है.लेकिन इसका चूर्ण शहद के साथ खिलाने के बाद रोगी को कपडा औढा देना जरूरी होता है जिससे पीलिया का पानी पसीने से निकलने लगेगा,पसीना बहुत निकलता है और पीले रंग का होता है कुछ समय बाद पसीने को तौलिया से साफ़ कर लेना चाहिये,इससे यह समूल रोग नष्ट करने मे सहायक होती है.

जो लोग पारा जमाने वाले होते है वे हत्थाजोडी को प्रयोग मे लाते है वे हत्थाजोडी के चूर्ण को पारे के साथ खरल करते है धीरे धीरे पारा बंधने लगता है,मनचाही शक्ल मे पारे को बनाकर गलगल नीबू के रस मे रख दिया जाता है कुछ समय मे पारा कठोर हो जाता है लेकिन पारा और हत्था जोडी असली ही हो तभी सम्भव है.

हत्थाजोडी को सिन्दूर मे लगाकर दाहिनी भुजा मे बांधने से कहा जाता है कि वशीकरण भी होता है लेकिन अंजवाने पर यह नही दिखाई दिया.

हत्थाजोडी बहुत सस्ती होती है लेकिन ईरान से भारत मंगाने पर खर्चा होने और मंगाने पर प्रतिबन्ध होने पर लोग दाब घास की जड को कृत्रिम रूप से हत्थाजोडी का रूप देकर सिन्दूर मे लगाकर बेचते हुये देखे जा सकते है,कुछ चालाक लोग मरे हुये चूजों के पंजो को भी मोड कर सिन्दूर आदि मे लगाकर बेचते हुये देखे जा सकते है.

बिल्ली की आंवर हत्थाजोडी और सियारसिंगी (सियार के मरने के स्थान पर उगी एक गोल आकार की बालो वाली जडी) को सिन्दूर मे मिलाकर एक साथ रखने से कहा जाता है कि भाग्य मे उन्नति होती है लेकिन मैने कई लोगो को देखा है कि उन्हे कोई सफ़लता नही मिली है.

तंत्र विद्या में हत्थाजोडी अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है। वास्तव में यह एक पौधे की जड है। परन्तु अपनी अदभुत रूपाकृति और विचित्र संरचना के कारण साधको के मन को मोह लेती है। इसके निर्माण में बारीकी के साथ सौंदर्य का पूर्ण समावेद्गा है। यह वस्तु वनस्पति श्रेणी में आती है। इसकी उत्पति भारत, ईरान, इराक, फ्रांस, ्जर्मनी, पाकिस्तान, एद्गिाया महाद्वीप में सभी जगह होती है। वनस्पति होने के कारण यह औषधीय गुणो मे प्रभावकारी मानी गई है। परन्तु तांत्रिको द्धारा बहुत मान्यता प्राप्त तंत्र है। तंत्र शास्त्र में इसके अनेक अद्भुत् प्रयोग वर्णित है

हत्थाजोडी तंत्र जगत की शीघ््रा प्रभावी चमत्कारी विचित्र वस्तु है। जिस व्यक्ति के पास असली सिद्ध हाथाजोडी होती है उसके भाग्य को चमका देती है। उसके खिलाफ कोई भी व्यक्ति कुछ नही कर पाता है। कोर्ट के मुकदमे में विजय प्राप्ति तथा शत्रु को वशीभूत करने में कमाल दिखाती है। इसे पास रखने से राजा व अधिकारी भी वंद्गाीभूत हो जाते हैं। हाथाजोडी को स्टील की डिब्बी में लौंग, इलायची व सिन्दूर के साथ ही रखना चाहिए। असली प्रमाणिक हाथाजोडी प्राप्त कर प्रयोग करके लाभ उठावें। यदि किसी का बच्चा रोता अधिक है एवं जल्दी-जल्दी बीमार हो जाता है तो शाम के समय, हत्थाजोडी के साथ रखे लौंग-इलायची को लेकर धूप देना चाहिए। यह शनिवार के दिन अधिक लाभ देता है।

हत्थाजोडी के तांत्रिक टोटका प्रयोग 1-क्क हत्थाजोडी मम् सर्व कार्य सिद्ध कुरू-कुरू स्वाहाः’ मंत्र से पीपल के पते पर अपना नाम लिखकर हत्थाजोड़ी को पत्ते पर रखें। रुद्राक्ष – माला से रोजाना तीन माला पांच दिन तक जाप करें। 

इसे सिद्ध-अभिमंत्रित होने पर पूजा-स्थल पर रखें। साधक के सभी कार्य करने हेतु जागृत हो जाती है।

ॐ ऐं हीं क्ली चामुण्डायै विच्चे

इस मंत्र द्वारा सिद्ध की गई हाथाजोडी जीवन के विभिन्न क्षेत्रो में साधक को सफलता प्रदान करती है। जिस घर में विधिवत सिद्ध की गई असली हाथाजोडी की पूजा होती है, वह साघक सभी प्रकार से सुरक्षित और श्री सम्पन्न रहता है। इसका प्रभाव अचूक होता है। इसका प्रयोग कोई भी साधक स्त्री-पुरूष कर सकता है। यह जिसके पास भी होगी वह व्यक्ति अवश्य ही अद्भूत रूप से प्रभावद्गााली होगा। उसमे सम्मोहन, वशीकरण, सुरक्षा और सम्पत्तिवर्द्धन की चमत्कारी शक्ति आ जाती है। यात्रा, विवाद, प्रतियोगिता, साक्षात्कार, यु़द्ध क्षेत्र आदि मे साघक की रक्षा करके उसे विजय प्रदान करती है। भूत-प्रेत, वायव्य आत्माओं का कोई भय नही रहता है, धन सम्पति देने मे बहुत चमत्कारिक व प्रामाणिक सिद्ध हुई है। हत्थाजोडी के साथ चान्दी का सिक्का या एक नेपाली रुपया रख देना चाहिए। दैनिक पूजन-दर्द्गान करना बहुत ही लाभकारी होता है। इसकी शक्ति को उतरोतर बढाने के लिए नर-मादा सिंयारसिगी को सामने आक के पते पर रखकर उपरोक्त मंत्र से हवन करना चाहिए। होली, दीपावली ्नवरात्र को मंत्र जाप से तीव्र वंद्गाीकरण प्रयोग सम्पन्न किये जा सकते हैं!

2 thoughts on “जानिए की हत्था जोड़ी क्या है ? WHAT IS HATHA JODI & Its EFFECTS …

    1. आपके प्रश्न का समय मिलने पर में स्वयं उत्तेर देने का प्रयास करूँगा…
      यह सुविधा सशुल्क हें…
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      Pt. DAYANAND SHASTRI, LIG- 2/217,
      INDRA NAGAR ( NEAR TEMPO STAND),
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