आइये जाने लहसुन के महत्त्व,लहसुन के प्रभाव और लहसुन के लाभ-हानि को–

आइये लहसुन के महत्त्व,लहसुन के प्रभाव और लहसुन के लाभ-हानि को–

प्रिय पाठकों/मित्रों, लहसुन का नाम सुनते ही आपके दिमाग में एक तेज़ गंध दौड़ने लग जाती है. एक भारतीय होने के नाते आपकी निश्चित रूप से आयुर्वेद में पक्की आस्था होगी. कोई धार्मिक कारण आपको आयुर्वेद से दूर ले जाये, पर आपकी रसोई में चलने वाली कड़ाही की मसालेदार गंध से दूर नहीं ले जा सकता है. इन सब में लहसुन की महत्ता ख़ासतौर पर सामने निकल कर आती है |

लहसुन एक मल्टीबैनिफिसिअल चीज़ है. रसोई की पाक कला से लेकर कई रोगों की उपचार कला तक इसका उपयोग होता है. भारत में वैसे भी चीन के बाद दुनिया में सबसे ज़्यादा मात्रा में इसका उत्पादन किया जाता है. इसमें प्रोटीन, वसा, कार्बोज़, खनिज़ पदार्थ, चूना और आइरन पाया जाता है |

इसके अलावा भी विटामिन ए, बी, सी और सल्फ्यूरिक एसिड भी पाया जाता है. इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत तो इसमें पाया जाने वाला तत्व एलीसिन है. एलीसिन को एक अच्छा एंटी-बैक्टीरिअल, एंटी-फंगल और एंटी-ओक्सिडेंट के रूप में जाना जाता है |लहसुन (Garlic) प्याज कुल (एलिएसी) की एक प्रजाति है। इसका वैज्ञानिक नाम एलियम सैटिवुम एल है। इसके करीबी रिश्तेदारो में प्याज, इस शलोट और हरा प्याज़ शामिल हैं। लहसुन पुरातन काल से दोनों, पाक और औषधीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग किया जा रहा है। इसकी एक खास गंध होती है, तथा स्वाद तीखा होता है जो पकाने से काफी हद तक बदल कर मृदुल हो जाता है। लहसुन की एक गाँठ (बल्ब), जिसे आगे कई मांसल पुथी (लौंग या फाँक) में विभाजित किया जा सकता इसके पौधे का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला भाग है। पुथी को बीज, उपभोग (कच्चे या पकाया) और औषधीय प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी पत्तियां, तना और फूलों का भी उपभोग किया जाता है आमतौर पर जब वो अपरिपक्व और नर्म होते हैं। इसका काग़ज़ी सुरक्षात्मक परत (छिलका) जो इसके विभिन्न भागों और गाँठ से जुडी़ जड़ों से जुडा़ रहता है, ही एकमात्र अखाद्य हिस्सा है। इसका इस्तेमाल गले तथा पेट सम्बन्धी बीमारियों में होता है। इसमें पाये जाने वाले सल्फर के यौगिक ही इसके तीखे स्वाद और गंध के लिए उत्तरदायी होते हैं। जैसे ऐलिसिन, ऐजोइन इत्यादि। लहसुन सर्वाधिक चीन में उत्पादित होता है उसके बाद भारत में।

लहसुन में रासायनिक तौर पर गंधक की अधिकता होती है। इसे पीसने पर ऐलिसिन नामक यौगिक प्राप्त होता है जो प्रतिजैविक विशेषताओं से भरा होता है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन, एन्ज़ाइम तथा विटामिन बी, सैपोनिन, फ्लैवोनॉइड आदि पदार्थ पाये जाते हैं।

इतने सारे पोषक तत्व होने की वजह से यह काफ़ी गुणवान बन जाता है. ख़ासतौर पर यह लीवर से होने वाली बीमारियों से हमारी रक्षा करता है. इसके साथ ही यह गंजेपन को रोकने, धमनियों को साफ रख कर खून को साफ रखने, सर्दी-जुखाम से दूर रखने और रेस्पीरेटरी प्रॉब्लम दूर करने में भी मदद करता है|

आयुर्वेद और रसोई दोनों के दृष्टिकोण से लहसुन एक बहुत ही महत्वपूर्ण फसल है। भारत का चीन के बाद विश्व में क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से दूसरा स्थान है जो क्रमशः 1.66 लाख हेक्टेयर और 8.34 लाख टन है। लहसुन में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्त्व पाये जाते है जिसमें प्रोटीन 6.3 प्रतिशत , वसा 0.1 प्रतिशत, कार्बोज 21 प्रतिशत, खनिज पदार्थ 1 प्रतिशत, चूना 0.3 प्रतिशत लोहा 1.3 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम होता है। इसके अतिरिक्त विटामिन ए, बी, सी एवं सल्फ्यूरिक एसिड विशेष मात्रा में पाई जाती है। इसमें पाये जाने वाले सल्फर के यौगिक ही इसके तीखे स्वाद और गंध के लिए उत्तरदायी होते हैं। इसमें पाए जाने वाले तत्वों में एक ऐलीसिन भी है जिसे एक अच्छे बैक्टीरिया-रोधक, फफूंद-रोधक एवं एंटी-ऑक्सीडेंट के रूप में जाना जाता है। अगर लहसुन को महीन काटकर बनाया जाये तो उसके खाने से अधिक लाभ मिलता है। यदि रोज नियमित रूप से लहसुन की पाँच कलियाँ खाई जाएँ तो हृदय संबंधी रोग होने की संभावना में कमी आती है। लहसुन, सेलेनियम का भी अच्छा स्त्रोत होता है। गर्भवती महिलाओं को लहसुन का सेवन नियमित तौर पर करना चाहिये।

लहसुन बवासीर, कब्ज़ और कान दर्द के उपचार में भी सहायक है। यदि आप बवासीर और कब्ज़ के उपचार में इसका प्रयोग करना चाहते हैं तो कुछ पानी उबालें तथा इसमें अच्छी मात्रा में लहसुन डालें।

-हाई बीपी से बचाए लहसुन —– कई लोगों का मानना है कि लहसुन खाने से हाइपरटेंशन के लक्षणों से आराम मिलता है। यह न केवल रक्त के प्रवाह को नियमित करता है बल्कि यह हृदय से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है तथा लीवर और मूत्राशय को भी सुचारू रूप से काम करने में सहायक होता है।

-डायरिया दूर करता हैं लहसुन  — पेट से संबंधित समस्याओं जैसे डायरिया आदि के उपचार में भी लहसुन प्रभावकारी होता है। कुछ लोग तो यह दावा भी करते हैं कि लहसुन तंत्रिकाओं से संबंधित बीमारियों के उपचार में बहुत प्रभावकारी होता है, परंतु केवल तभी जब इसे खाली पेट खाया जाए।

—भूख बढाता हैं लहसुन — यह पाचन प्रक्रिया को उत्तेजित करता है तथा भूख भी बढ़ाता है। लहसुन आपके तनाव को भी कम करने में सहायक होता है। जब भी आपको घबराहट होती है तो पेट में एसिड बनता है। लहसुन इस एसिड को बनने से रोकता है।

—--वैकल्पिक उपचार में लहसुन का प्रयोग –— जब डिटॉक्सीफिकेशन की बात आती है तो वैकल्पिक उपचार के रूप में लहसुन बहुत प्रभावी होता है। लहसुन इतना अधिक शक्तिशाली है कि यह शरीर को परजीवियों और कीड़ों से बचाता है, विभिन्न बीमारियों जैसे डाइबिटीज़, ट्युफ्स, डिप्रेशन तथा कुछ प्रकार के कैंसर की रोकथाम में सहायक सहायक होता है।

—मलगम मिटाये— : मौसम का बदलाव वातावरण, प्रकृति और स्वास्थ्य सभी में बदलाव लाता है जिसके कारण कुछ समय तक अनेक बीमारियों के होने का खतरा रहता है और उनमें से सबसे आम है खांसी जुखाम और मलगम. इस समस्या से लगभग हर व्यक्ति गुजर चुका है. इससे निजात पाने के लिए आप सब्जी में लहसुन का इस्तेमाल करें. अगर गर्मी का मौसम है और लू लगने की संभावना है तो आप लहसुन को अपने साथ रखें |

–हृदय वाहिनी तंत्र —– : क्योकि लहसुन में सल्फाइड की भी भरपूर मात्रा होती है तो ये हृदय की  रक्त वाहिनियों को खोलता है, हार्ट अटैक की संभावना को कम करता है. एक शोध के दौरान ये भी सामने आया है कि लहसुन खाने से 8 प्रतिशत तक कोलेस्ट्रोल कम होता है, जिसका मतलब है कि रक्त वाहिनियों के जाम होने, उनके संकरा होने की संभावाना भी खत्म होती है. इस तरह लहसुन से हृदय की रक्षा भी होती है|

-फेफड़े की बीमारी के लिये लहुसन का प्रयोग-– यदि आपको ब्रोंकाइनल बीमारी से संबंधित किसी उपचार की आवश्यकता है तो यह अर्क बनायें। 7 औंस / 200 ग्राम लहसुन, 24 औंस / 700 ग्राम ब्राउन शुगर और 33 औंस/ 1लीटर पानी। पानी को लहसुन के साथ उबालें तथा फिर शक्कर मिलाएं। दिन में तीन चम्मच इसका सेवन करें।

–श्वसन तंत्र में मजबूती लाए लहसुन–– श्वसन तंत्र के लिए लहसुन बहुत लाभदायक होता है: यह ट्यूबरक्लोसिस (तपेदिक), अस्थमा, निमोनिया, ज़ुकाम, ब्रोंकाइटिस, पुरानी सर्दी, फेफड़ों में जमाव और कफ़ आदि रोकथाम तथा उपचार में बहुत प्रभावशाली होता है।

-घाव ठीक करना-–चोट की वजह से होने वाला घाव को आसानी से ठीक करता है लहसुन। लहसुन की कलियों को पीसकर सरसों के तेल में उबाल कर घावों पर लगाएं। इस उपाय से घाव तुरंत ठीक होते हैं।

ट्यूबरक्लोसिस में लाभकारी होता हैं लहसुन-— ट्यूबरक्लोसिस (तपेदिक) में लहसुन पर आधारित इस उपचार को अपनाएँ। एक दिन में लहसुन की एक पूरी गाँठ खाएं। इसे कुछ भागों में बाँट लें तथा आपको जिस प्रकार भी पसंद हो इसे खाएं। यदि आप इसे कच्चा या ओवन में हल्का सा भूनकर खायेंगे तो अधिक अच्छे परिणाम मिलेंगे।

–कैंसर से रक्षा —–: आपको ये जानकर हैरानी होती कि लहसुन में कैंसर से लड़ने की शक्ति होती है, वो कैंसर से प्रतिरोध करने में सक्षम रहता है. इसका निरोधी तत्व कैंसर के बढ़ने की विपरीत दिशा में कार्य करता है और इस तरह इसका सेवन 70 % तक कैंसर को खत्म करता है | लहसुन की कच्ची कली खाना प्रोस्टेट कैंसर में फायदेमंद है। यह ब्रेस्ट कैंसर को भी रोकता है।

— गर्भवती महिलाओं के लिए –— : जब कोई स्त्री गर्भधारण करती है तो उनके रक्त चाप में बढ़ने की काफी शिकायते सामने आती है जिससे उनके और उनके गर्भ में स्थित बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता इसलिए हर गर्भवती स्त्री को गर्भावस्था के समय खाने में लहसुन जरुर लेना चाहिएं |

-रोगाणुनाशक–— : लहसुन एक एंटी बायोटिक की तरह भी काम करता है और इसीलिए इसे दवाओं में भी मिलाया जाता है. किसी भी तरह के इन्फेक्शन के होने पर या घाव पर आप लहसुन का रस में पानी मिलाकर साफ़ करें. इससे घाव भी तुरंत भरने लगेगा और कोई इन्फेक्शन भी नहीं होगा |

–दांत का दर्द ठीक करता है-–दांत के दर्द में लहसुन का सेवन फायदेमंद है। यदि कीड़ा लगने से दांत में दर्द हो तो आप लहसुन के टुकड़ों को गर्म करें और उन टुकड़ों को दर्द वाले दांत पर रखकर कुछ देर तक दबाएं। एैसा करने से दांत का दर्द ठीक हो जाता है।

-इन्फलुएन्जा-–फ्लू यानी इन्फलुएन्जा में सुबह उठकर गर्म पानी के साथ लहसुन और प्याज का रस पीने से फ्लू से निजात मिलता है।

-कान में कीड़ा जाना––यदि कान में कीड़ा घुस गया हो तो आप लहसुन की दो कलियों को सूरजमुखी के तेल में डालकर गर्म कर लें और इस तेल की कुछ बूंदे कान में डालने से कान का कीड़ा बाहर आ जाता है।

–बदन दर्द-–लहसुन के तेल से मालिश करने से बदन की अकड़न और दर्द दोनों दूर होते हैं।

-बालों को काला करने में भी सक्षम होता है लहुसन–दस ग्राम शहद में लहसुन की पांच कलियों को पानी के साथ पीसकर इसके पेस्ट को रोज सुबह और शाम में लेते रहें।लहसुन एक औषधिय दवा के रूप में काम में लाई जाती है इसमें मौजूद औषधीय और चिकित्सीय गुण कैल्शियम, जिंक और कई अन्य खनिज जैसे यौगिकों का संचार करता है।जिससे शरीर में मौजूद विभिन्न जीवाणु संक्रमण के खिलाफ लड़ने में मदद मिलती है। बालों की जड़ो पर लगाने से ये बालों के ब्लड प्रवाह को बढ़ाते है। इससे सिर के बालों की जड़े मजबूत होती है और बालों का झड़ना कम हो जाता है। इससे बाल घनें और लंबे होने लगते है। 

—-लहसुन के उपयोग बालों में पड़ रही जूं और रूसी भी दूर हो जाती है अपने यही गुणों के कारण लहसून बालों के लिए एक वरदान साबित हुआ है | औषधिय और पौष्टिक तत्वों से भरपूर लहसुन के प्राकृतिक गुणों से आपको बाल सुंदर मुलायम और घने होते है। इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व बालों को घना बनाते हैं. बाल झड़ने की समस्या को दूर करने के लिए लहसुन के तेल को बालों और जड़ों में लगाए. पूरी रात इसे रहने दें और सुबह उठकर किसी अच्छी क्वालिटि के शैंपू से अपने बालों को धो लें. इससे बालों की ग्रोथ बढ़ेगी और झड़ना बंद हो जाएंगे।

—-झड़ते हुये बालों की जड़ो को मजबूत बनाने के लिये लहसुन के कई फायदे देखे जा सकते है। लहसुन में पाये जाने वाले तत्व बालों को सुंदर और चमकदार बनाते है। लहसुन के निकाले गये रस में शहद मिलाकर एक पतला पेस्ट तैयार करें और बालों को हल्के हाथों से सहलाते हुए पूरी जड़ों पर लगाये। करीब 1से 2 घटें लगाने के बाद इसे धो ले इसकी तीखी गंध से छुटकारा पाने के लिए आप कुछ खुश्बूदार चीजों का उपयोग कर सकती है।

—आपके बालों में आ रही असमय सफेदी से मुक्ति पाने के लिये आप लहसुन की फल्लियों को जैतुन का तेल के साथ मिलाकर गर्म करे जब यह पूरी तरह से उसमें मिल जाये तो उसे उतारकर ठंडा होने के लिये रख दे। फिर इसे अपने बालों पर लगाएं। आपके बालों में पूरी तरह से इसका सही असर दिखा सके इसलिए आप इसे पूरी रात यूं ही लगा रहने दें इसके बाद दूसरे दिन अपने बालों को ठंडे पानी से धो ले बाल का झड़ना रुक जायेगा और धीरे धीरे आपके बाल घने होने के साथ उनका तेजी के साथ विकास होना शुरू हो जायेगा।

—-बालों में आ रही सफेद बालों की समस्या से छुटकारा पाने के लिए, नारियल तेल में लहसुन का रस और काली मिर्च डालकर एक पतला पेस्ट तैयार करें। इसे गर्म होने के लिये रख दे फिर गुनगुने तेल से अपने सिर की मालिश करते है इससे पका रक्त स्त्राव सही रूप से काम करने लगेगा और आपके बाल तेजी के साथ बढ़ेगे।

—-लहसुन की 8 कलियों को एक कप तिल के तेल में डालकर इसे गर्म कर लें। और इसे ठंडा करके कमर और जांघों पर इसकी मालिश करें। यह उपाय सइटिका के दर्द को ठीक करता है।

—–एंटीबैक्टिरियल तत्व होने की वजह से लहसुन बुखारए दस्त और घावों आदि रोगों को ठीक करता है।

आपको शायद पता हो फिर भी हम बता देते हैं कि कच्चे लहसुन के छोटे-छोटे टुकड़े खाना काफ़ी फायदेमंद रहता है. इसके फायदों को देखते हुए मिस्त्र के पिरामिड बनाने वाले कारीगर और मजदूर तो इसे जेब में लेकर ही घूमते थे|

लहसुन खाने में रखें सावधानी —-यदि आपको लहसुन से किसी प्रकार की एलर्जी है तो दो महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें: कभी भी इसे कच्चा न खाएं तथा फिर भी यदि आपको त्वचा से संबंधित कोई समस्या आती है, बुखार आता है या सिरदर्द होता है तो इसका सेवन करना छोड़ दें। लहसुन की अधिक मात्रा आपके स्‍वास्‍थ्‍य को हानिकारक प्रभाव भी दे सकती हैं। 

मुंह से लेने पर लहसुन ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित होता है। ल‍ेकिन लहसुन सांस में बदबू, मुंह, पेट या सीने में जलन, गैस, मतली, उल्टी, शरीर में गंध और दस्त का कारण बन सकता है।

 

अक्‍सर कच्चा लहसुन स्थिति को और भी खराब कर देता हैं। लहसुन से रक्तस्राव का खतरा भी बढ़ सकता है। सर्जरी के बाद लहसुन का सेवन से अन्य एलर्जी प्रतिक्रियाओं और ब्‍लीडिंग की शिकायत हो सकती है | 

कुछ लोग त्‍वचा पर लहसुन का पेस्‍ट बना कर लगता है। लेकिन त्‍वचा पर लहसुन का इस्‍तेमाल संभवतः असुरक्षित होता है। लहसुन के गाढ़े पेस्ट का त्‍वचा पर उपयोग त्‍वचा को जलने की तरह नुकसान पहुंचा सकता है। 

आमतौर पर भोजन में निश्‍चित मात्रा में लिया गया लहसुन गर्भावस्था में सुरक्षित होता है। लेकिन लहसुन संभवतः असुरक्षित होता है, अगर गर्भावस्था और स्तनपान में औषधीय मात्रा में प्रयोग किया जाता है। जब आप गर्भवती है या स्तनपान करा रही हैं, तो त्वचा पर लहसुन के उपयोग की सुरक्षा के बारे में पर्याप्त विश्वसनीय जानकारी नहीं है। इसलिए सुरक्षित पक्ष में रहने के लिए इसके उपयोग से बचें। 

ध्यान रखें, बच्‍चों को मुंह से और उचित रूप से लहसुन की थोड़ी सी मात्रा सुरक्षित होती है। लेकिन अधिक मात्रा में मुंह से खिलाने पर यह संभवतः असुरक्षित होता है।  कुछ सूत्रों के अनुसार, लहसुन की उच्च खुराक बच्चों के लिए खतरनाक या घातक भी हो सकती है। हालांकि, इस चेतावनी के लिए कारण ज्ञात नहीं है।

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जानिए लहसुन को तकिये के नीचे रख कर सोने के फायदे—-

लहसुन महाराज की लीला यहीं पर समाप्त नहीं हो जाती है. दुनिया के कई क्षेत्रों में लहसुन की कली को रात को सोते समय अपने तकिये के नीचे रखा जाता है. इस चीज़ के पीछे तथ्य है कि ऐसा करने से रात को नींद अच्छी आती है. इसके साथ ही आपका भाग्य भी अच्छा-खासा निखर जाता है |

इसके साथ ही सोते समय इसे साथ रखने से यह हमें नेगेटिव एनर्जी से भी बचाता है. अब आप भी जिन-जिन लोगों से प्यार करते हैं आज से ही उनके तकिये के नीचे लहसुन की एक कली रखना शुरू कर दीजिए, बाकी तो भगवान् मालिक और हां इस लेख  को लाइक और शेयर करना मत भूलिएगा |

 

 

 

 

 

 

 

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