जानिए वास्तु अनुसार आपका किचन/रसोईघर केसा और कहाँ हो ??

जानिए वास्तु अनुसार आपका किचन/रसोईघर केसा और कहाँ हो ??

घर का किचन/रसोईघर कैसा होना चाहिए, इस संबंध में हमारे रिपोर्टर ने प्रसिद्ध वास्तुशास्त्री पंडित श्री दयानन्द शास्री जी से विस्तार से बातचीत की। 

वास्तुशस्त्री श्री दयानन्द शास्त्री ने बताया, “रसोईघर यानी किचन, घर का एक सबसे अहम स्थान है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, यहां अग्निदेव, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी अन्नपूर्णा के रूप में निवास करती हैं।”

उहोंने बताया, “वास्तुशास्त्र की प्राचीन पुस्तकों में किचन को सुव्यवस्थित और लाभकारी बनाने के लिए काफी व्यवहारिक सुझाव दिए गए हैं, जिन्हें अपनाकर सहज रूप रूप से घर की सुख, शान्ति और समृद्धि में अभिवृद्धि की जा सकती है।”

किसी भी आग्नेय मुखी भवन का निर्माण और वास्तुदोष का सीधा प्रभाव इसमें रहने वाली संतानों और महिलाओं पर पड़ता है।। जिस कारण इसके निर्माण में वास्तु का स्थान और महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। आग्नेय से तात्पर्य आग से होता है, इसलिए इसमें वास्तुदोष रह जाने से भयंकर परिणामों को झेलना पड सकता है।। वास्तुशास्त्र में माना जाता है कि आग्नेय मुखी भवन के प्रतिनिधि शुक्र ग्रह है किन्तु इसके स्वामी भगवान शिव के पुत्र श्री गणेश है।।

कई बार ऐसा देखा गया है कि घर में रसोईघर गृहिणी के अनुरूप बना हुआ है फिर भी रसोईघर में खाना बनाकर ही खुश नही होती है या खाना बनाने के बाद उसमे कोई बरकत नहीं होता है बल्कि घट जाता है । उसका मुख्य कारण है रसोईघर का वास्तु सम्मत नहीं होना अर्थात वास्तुदोष का होना।


आप सभी की जानकारी हेतु प्रस्तुत है, वास्तुशास्त्री पंडित श्री दयानन्द जी शास्त्री से हुई बातचीत पर आधारित किचन/रसोईघर से जुड़े कुछ चुने हुए वास्तु टिप्स, जो आज के आधुनिक संदर्भ में संकलित की गई हैं:—


—- कभी भी घर के मेन गेट के सामने नहीं बनाना चाहिए किचन।।

— भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर के मेन गेट के ठीक सामने किचन नहीं बनाना चाहिए। मेन गेट के एकदम सामने का किचन घर के सदस्यों के लिए अशुभ माना गया है।

— जिस घर में किचन और मंदिर आस पास होता है या किचन के अंदर ही

मंदिर होता है,वहां रहने वाले लोग गरम दिमाग के होते हैं। यह देखा गया है कि ऐसा होने पर परिवार के सदस्यों को रक्त-विकार या इससे जुड़ी कोई बीमारी हो जाती है।

— जिस घर में किचन मेन गेट से जुड़ा होता है, वहां अक्सर पति-पत्नी के बीच अकारण मतभेद बना रहता है या अकारण कलह होता है।

किचन और बाथरूम एक सीध में होता है अशुभ

— जिस भवन में किचन और बाथरूम (टॉयलेट) एक सीध में होते हैं, उस घर के लोगों का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है। कहा गया है कि खाना और पखाना कभी पास-पास नहीं होना चाहिए। यह भी माना गया है कि वैसे भवन में कन्याओं के जीवन में उथल-पुथल रहती है।

— जिस घर में किचन के अंदर ही स्टोर होता है, उस घर के गृहस्वामी को उनके नौकरी या अपने व्यापार में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

— किचन में अग्नि और पानी की व्यवस्था निश्चित स्थान पर होनी बहुत जरूरी है। यह सुव्यवस्थित नहीं होने पर घर के सदस्य तनाव में रहते हैं।

—–—घर की बैठक में भोजन बनाना या बैठक खाने के ठीक सामने किचन का होना अशुभ होता है। ऐसे में रिश्तेदारों के मध्य शत्रुता रहती है एवं बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाइयां आती हैं।।

—-भूलकर भी/कभी भी पूजास्थल रसोई में और रसोईघर के समीप नहीं होना चाहिए।।

— भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार यूं तो किसी को भी बिना स्नान किए किचन में प्रवेश नहीं करना चाहिए, लेकिन यह बात घर की गृहिणी/गृहलक्ष्मी (घर की स्वामिनी) पर सबसे अधिक लागू होती है। इसकी अवहेलना करने पर घर के सदस्यों में चिड़चिड़ापन और आलस बढ़ता है।

— यदि किचन पानी की टंकी या कुएं के साथ लगा हो, तो भाइयों में मतभेद होने की संभावना अधिक रहती है। गृहस्वामी को धन कमाने में परेशानियां होती हैं।

— किचन में भोजन बनाने का काम अग्नि से होता है इसलिए किचन के लिए सबसे उत्तम दिशा दक्षिण पूर्व यानी आग्नेय कोण माना गया है। इस दिशा में किचन होने पर घर की महिलाएं प्रसन्न और स्वस्थ रहती हैं। किचन के अंदर महिलाओं की हुकूमत चलती है। परिवार में आपसी तालमेल बढ़ता है।


वास्तु विज्ञान के अनुसार दक्षिण दिशा में किचन का होना शुभ नहीं होता है। यह यम की दिशा है। दक्षिण में किचन होने पर परिवार में छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव बना रहता है। घर के मालिक की सेहत में उतार-चढ़ाव बना रहता है। इनके क्रोध की वजह से परिवार में आपसी सामंजस्य में कमी आती है।


किचन की दिशा पश्चिम में होने पर घर की महिलाओं में आपसी तालमेल अच्छा रहता है। घर की मालकिन का पूरे घर पर प्रभाव होता है। बहू-बेटियों से इनके अच्छे संबंध होते हैं एवं इनसे भरपूर सहयोग मिलता है। लेकिन इस दिशा में किचन का बुरा प्रभाव यह होता है कि अन्न धन की बर्बादी होती है। इससे घर में बरकत नहीं आती है।


जिनके घर में किचन वायव्य कोण यानि उत्तर पश्चिम में होता है उस घर में पति-पत्नी के संबंध मधुर नहीं रहते। इसका कारण घर के मालिक का जरूरत से अधिक रोमांटिक होना होता है। घर के मालिक की कई महिला मित्र होती है। बेटियों के लिए भी यह दिशा अच्छी नहीं मानी जाती है। इससे बेटियों की बदनामी होती है।


किचन उत्तर दिशा में होना आय की दृष्टि से अच्छा रहता है। जिस घर में किचन उत्तर दिशा में होता है उस घर की महिला बुद्घिमान होती है। घर की मालकिन सभी से स्नेह रखती है। लेकिन परिवार की महिलाओं के बीच आपसी तालमेल की कमी रहती है।


उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण में किचन होना दांपत्य सुख के लिए अनुकूल नहीं होता है। इस दिशा में किचन होने पर घर की महिलाएं धर्म-कर्म में अधिक रूचि रखने वाली होती है। दांपत्य एवं पारिवारिक विषयों के प्रति इनमें उदासीनता रहती है। इसका प्रभाव दांपत्य जीवन पर पड़ता है।


जिनके घर में किचन पूर्व में होता है उनके घर में धन का आगमन अच्छा रहता है लेकिन घर की पूरी कमान पत्नी के हाथ में होता है। बावजूद इसके पत्नी खुश नहीं रहती है, स्त्री रोग, पित्त रोग एवं नाड़ी संबंधी रोग का इन्हें सामना करना पड़ता है।


यदि आप चाहती हैं की आपके घर पर हमेशा महालक्ष्मी की कृपा बनी रहे निम्न सावधानी रखें तो भाग्य चमक जाएगा। साथ ही घर में कभी भी धन की कमी नहीं होगी। साथ ही आपके परिवार का स्वास्थ्य भी सही रहेगा, साथ ही शांति का निवास होगा। जानिए रात को सोने से पहले कौन से काम करना चाहिए।

**** जब भी रात को आप सोने जा रही हो तो उससे पहले किचन में पड़े हुए झूठे बर्तन धो लें और किचन को भी साफ कर लें। ऐसा करने से आपके घर पर हमेशा लक्ष्मी का वास होता है। जिससे आपके घर पर हमेसा वैभव, सम्पन्नता और शांति आती है।

**** आप जब भी सोने जा रही हो उससे पहले अपने घर की झाडू को दक्षिण-पश्चिम दिशा में छिपा कर रख दें। इससे आपको धन लाभ होगा।


****सूर्यास्त होने के बाद अगर कोई बाहर का व्यक्ति यानी की आपका पड़ोसी या फिर कोई और आपसे दूध अथवा दही मांगे तो उसे मना कर दें। क्योंकि इन चीजों के साथ घर की लक्ष्मी भी उसके साथ चली जाएगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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