अपनाये इन वास्तु टिप्स को और पाइए खुशियां अपने जीवन में

अपनाये इन वास्तु टिप्स को और पाइए खुशियां अपने जीवन में—

भगवान शिव ने मनुष्य के कल्याण के लिए वास्तु विज्ञान को जन्म दिया है। वास्तुशास्‍त्र एक व‌िज्ञान है जो द‌िशा एवं आपके आस-पास मौजूद चीजों से उत्पन्न उर्जा के प्रभाव को बताता है। वास्तु व‌िज्ञान के अनुसार उर्जा अगर अनुकूल है तो आपकी प्रगत‌ि होगी और प्रत‌िकूल उर्जा होने पर परेशानी आती है और यह जीवन के हर क्षेत्र पर लागू होता है ।वास्तु जीवन का ऐसा विज्ञान है जो इस बात पर जोर देता है कि घर-परिवार कैसे सुखी, स्वस्थ और खुशहाल हों। यह प्रकृति की ऊर्जा, संसाधन और परिवार की ऊर्जा के सही व संतुलित उपयोग के गुर सिखाता है।

जो घर वास्तु के प्रति जितना अनुकूल होगा, वहां उतनी ही खुशियां और समृद्धि होंगी। लोग सुखी होंगे। वहीं, वास्तु के प्रतिकूल घर समृद्धि के बावजूद दुख का कारण बनते हैं। 

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार  इसी वास्तु विज्ञान में  ऐसी बातें बताई गई हैं जिनका ध्यान रखें तो आपको नौकरी एवं व्यवसाय में उन्नति के साथ धन का लाभ भी मिलता रहेगा। घर में रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। 

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार जानें वह वास्तु  टिप्स जो आपको हर तरफ से लाभ दिला सकते हैं..

* रात को सोते वक्त व्यक्ति का सिर हमेशा दक्षिण दिशा में होना चाहिए। कभी भी उत्तर दिशा की ओर सिर करके नहीं सोना चाहिए। इससे अनिद्रा रोग होने की संभावना होती है साथ ही व्यक्ति की पाचन शक्ति पर विपरीत असर पड़ता है।

* घर में सप्ताह में दो दफा फिटकरी और नमक के पानी से पोंछा लगाना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।

*घर से निकलते समय माता-पिता को विधिवत (झुककर) प्रणाम करना चाहिए। इससे बृहस्पति और बुध ठीक होते हैं। इससे व्यक्ति के जटिल से जटिल काम बन जाते हैं।

* आपके घर का प्रवेश द्वार एकदम स्वच्छ होना चाहिए। प्रवेश द्वार जितना स्वच्छ होगा घर में लक्ष्मी आने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।

* आपके प्रवेश द्वार के आगे स्वस्तिक, ॐ, शुभ-लाभ जैसे मांगलिक चिह्नों को उपयोग अवश्य करें।

* अपने घर के प्रवेश द्वार पर कभी ‍भी बिना सोचे-समझे गणेशजी न लगाएं। दक्षिण या उत्तरमुखी घर के द्वार पर ही गणेशजी लगाएं।

* विवाह पत्रिका कभी भूलकर भी न फाड़े क्योंकि इससे व्यक्ति को गुरु और मंगल का दोष लग जाता है।

* अपने घर में देवी-देवताओं की ज्यादा तस्वीरें न रखें और शयन कक्ष में तो बिलकुल भी नहीं।

* शयन कक्ष में टेलीविजन कदापि न रखें क्योंकि इससे शारीरिक क्षमताओं पर विपरीत असर पड़ता है।

* दफ्तर में काम करते समय उत्तर-पूर्व की ओर मुख करके बैठें तो शुभ रहेगा, जबकि बॉस (कार्यालय प्रमुख) का केबिन नैऋत्य कोण में होना चाहिए। 

* घर के भीतर शंख अवश्य रखें। इससे बजाने से 500 मीटर के दायरे में रोगाणु नष्ट होते हैं।

* पक्षियों को दाना खिलाने और गाय को रोटी और चारा खिलाने से गृह दोष का निवारण होता है।

* अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाएं। इससे परिवार में प्रेम बढ़ता है। तुलसी के पत्तों के नियमित सेवन से कई रोगों से मुक्ति मिलती है। 

* ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को हमेशा साफ-सुथरा रखें ताकि सूर्य की जीवनदायिनी किरणें घर में प्रवेश कर सकें।

* रसोई घर में भोजन बनाते समय गृहिणी का हमेशा मुख पूर्व की ओर होना चाहिए। इससे भोजन सुपाच्य और स्वादिष्ट बनता है। साथ ही पूर्व की ओर मुख करके भोजन करने से व्यक्ति की पाचन शक्ति में वृद्धि होती है।

* आपके घर के जो बच्चे में पढ़ने में कमजोर हैं, उन्हें पूर्व की ओर मुख करके अध्ययन करना चाहिए। इससे उन्हें लाभ होगा।

*आपके परिवार में जिन कन्याओं के विवाह में विलम्ब हो रहा है, उन्हें वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) के कमरे में रहना चाहिए। इससे उनका विवाह अच्छे और समृद्ध परिवार में होगा।

*वास्तु व‌िज्ञान के अनुसार व‌िवाह योग्य कुंवारे लड़कों  को दक्ष‌िण और दक्ष‌िण पश्च‌िम द‌िशा में नहीं सोना चाह‌िए। इससे व‌िवाह में बाधा आती है। माना जाता है क‌ि इससे अच्छे र‌‌िश्ते नहीं आते हैं।

ईशान कोण यानी भवन के उत्तर-पूर्वी हिस्से वाला कॉर्नर में पूजास्थल पवित्रता का प्रतीक है इसलिए यहां झाड़ू-पोंछा, कूड़ादान नहीं रखना चाहिए। 

प्रातःकाल नाश्ते से पूर्व घर में झाड़ू अवश्य लगानी चाहिए। 

संध्या समय जब दोनों समय मिलते हैं, घर में झाड़ू-पोंछे का काम नहीं करना चाहिए। 

घर में जूतों का स्थान प्रवेश द्वार के दाहिने तरफ न रखें। 

घर में टूटे दर्पण, टूटी टांग का पाटा तथा किसी बंद मशीन का रखा होना सुख-समृद्धि की दृष्टि से अशुभकारक है। 

ड्राइंग-हॉल को अपने बेडरूम की तरह उपयोग में लेने पर पति, पत्नी को प्यार करता है और दोस्तों से अच्छे संबंध रखता है। 

घर के मुख्य द्वार पर शुभ चिह्न अंकित करना चाहिए। इससे सुख-समृद्धि बनी रहती है। 

घर के पूजास्थल में एक जटा वाला नारियल रखना चाहिए। 

घर में सजावट में हाथी, ऊंट को सजावटी खिलौने के रूप में उपयोग शुभ होता है। ऐसे शयनकक्श जिनमें दंपति सोते हैं, वहां हंसों के जोड़े अथवा सारस के जोड़े के चित्र लगाना अति शुभ माना गया है। 

घर के ईशान कोण पर कूड़ा-करकट भी इकट्ठा न होने दें। घर में देवस्थल पर अस्त्र-शस्त्रों को रखना अशुभ है। 

घर में तलघर में परिवार के किसी भी सदस्यों के फोटो न लगाएं तथा वहां भगवान और देवी-देवताओं की तस्वीरें या मूर्तियां भी न रखें। 

तीन व्यक्तियों का एक सीध में एकाकी फोटो हो, तो उसे घर में नहीं रखें और न ही ऐसे फोटो को कभी भी दीवार पर टांगें।

—- दोपहर या रात्रि को जब विश्राम करें तो आपका बिस्तर दक्षिण-पश्चिम दिशा में तथा सिर दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। इससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह सही रहता है।

—-उखड़ा हुआ फर्श या खराब स्थिति में प्लास्टर घर में नकारात्मक ऊर्जा, अशांति और आर्थिक हानि लेकर आता है। इसलिए बेहतर होगा कि जल्द इसकी मरम्मत करवा लें।

—- बिस्तर के नीचे तेल, नमक, खाली मटका, झाडू़, जूते, कचरा और ओखली-मूसल जैसी चीजें न रखें। ये चीजें मानसिक अशांति के साथ ही भाग्योदय में बाधा लाती हैं।

— अगर घर की छत पर भी खाली मटके, पुराने गमले, खराब कूलर, पंखे या रद्दी का सामान पड़ा हो तो उसे वहां से हटा दें। खासतौर से उस कमरे की छत पर ये चीजें नहीं होनी चाहिए, जहां रात्रि को शयन करते हैं।

—- रोज अपने इष्ट देव के चित्र या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। उसके आसपास दवाई आदि न रखें। पूजा करते समय आपका मुख उत्तर-पूर्व या उत्तर-पश्चिम की तरफ होना चाहिए।

— भूखंड के बारे में वास्तु के जानकारों का मानना है कि उसकी लंबाई, चौड़ाई के दोगुने से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा होता है तो उस घर में आय से ज्यादा व्यय होता है और प्रगति में बाधा आती है।

इसके लिए घर के एक भाग में पक्षियों के लिए दाना-पानी आदि के स्थान का निर्माण करें। इससे घर में सुख-शांति आती है और बचत बढ़ती है।

— घर के दक्षिण-पश्चिम में अधिक दरवाजे या खिड़कियां हों तो चोरी, अग्नि और रोग पर अधिक व्यय को बढ़ावा मिलता है। अगर संभव हो तो इन्हें बंद कर दें। अगर ऐसा मुमकिन नहीं तो हर गुरुवार को गुड़, थोड़ी चने की दाल और चुपड़ी रोटी गाय को श्रद्धापूर्वक खिलाएं। गौ की कृपा से भी घर में लक्ष्मी का आगमन होता है। उसके सदस्यों की रक्षा होती है।

— घर के खिड़की-दरवाजों को खोलते-बंद करते वक्त अगर वे आवाज करते हैं तो यह शुभ संकेत नहीं है। कहा जाता है कि इससे घर के लोगों का स्वास्थ्य खराब होता है। बोलते दरवाजे सुनसान या खामोशी का प्रतीक होते हैं। इसलिए उनके जोड़ (जहां से वे दीवार से जुड़े हैं) में तेल आदि लगाकर दुरुस्त करें। दरवाजों का आसानी से खुलना-बंद होना ही शुभ होता है।

— घर के मुख्य द्वार के सामने कोई कंटीला पौधा या फूल न लगाएं। द्वार सुंदर और मन को प्रसन्नता देने वाला होना चाहिए। उसके सामने गंदा पानी इकट्ठा नहीं होना चाहिए। मुख्य द्वार पर कोई शुभ प्रतीक चिह्न, ऊं, गणपति, शुभ-लाभ या जिस देव में आप श्रद्धा रखते हैं, लिखना चाहिए।

–स्वागतम या स्थानीय भाषा में अभिवादन स्वरूप इस्तेमाल होने वाले वाक्य भी लिखे जा सकते हैं। ये भी शुभ माने जाते हैं और गृहस्वामी की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं। मुख्य द्वार पर- कुत्तों से सावधान, जैसे वाक्य नहीं लिखने चाहिए। किसी जंगली व हिंसक जानवर का चित्र भी अशुभ माना गया है।

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मकान के वास्तु टिप्स – मकान निर्माण के समय ध्यान रखने वाली मुख्य बातें :

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार  पूर्व और उत्तर दिशा मे मकान का मुख्य प्रवेश द्वार सामान्तया सभी के लिए अच्छा होता हैं, पश्चिम एवं दक्षिण दिशा के स्थित प्रवेश द्वार भी व्यक्ति के काम और जन्म कुंडली के अनुसार अनुसार अच्छा हो सकता हें.

मकान के उत्तर एवं पूर्व मे अपेक्षाकृत अधिक खाली स्थान रखना चाहिए.

मकान का दक्षिण एवं पश्चिमी हिस्सा अपेक्षाकृत भारी एवं ऊचा होना चाहिए.

मकान का मध्य स्थान जिसे ब्रह्म स्थान कहा जाता हें, हमेशा खाली रहना चाहिए.

भगवान की मूर्तिया या तस्वीरों को इस तरह स्थापित करे, जिससे की पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की और हो.

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दिशाए एवं उनके उपयुक्त प्रयोग:-

दिशा       उपयुक्त कक्ष एवं        उपयोग

पूर्व        बच्चों का कमरा, लिविंग रूम

पश्चिम      भोजन कक्ष / डाइनिंग एरिया, बच्चो का कमरा

उत्तर        बैठक / ड्राईंग रूम,  धन रखने का स्थान

दक्षिण        शयन कक्ष / बेड रूम

उत्तर-पूर्व               पूजा घर, अध्धयन / स्टडी रूम, बोरिंग, पानी का होद, खुला स्थान

उत्तर-पश्चिम          मेहमान कक्ष

दक्षिण-पश्चिम         मास्टर बेड रूम / सीडिया, भारी सामान

दक्षिण-पूर्व             रसोई घर एवं जेनेरटर, इन्वर्टर

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जानिए आपके ऑफिस के लिए वास्तु टिप्स – 

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार  आप का ऑफिस यानी कार्यालय आपके पेशे या व्यापार के लिए सोचने, काम के क्रियान्वन, व्यापार में वृध्दि और धन सृजन की जगह है | 

इस स्थान पर आप और ऑफिस में कम करने वाले आपके अन्य सहयोगी अपनी आजीविका कमाने, अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने और पेशे या व्यवसाय में सफलता प्राप्त करने के लिए अपने उत्पादक समय का एक बड़ा हिस्सा व्यतीत करते हैं| 

आपके कार्यालय का आकार और डिजाइन कर्मचारियों को सकारात्मक ऊर्जा देने वाला और कार्य में समृद्धि देने वाला होना चाहिए |

कुछ जरुरी वास्तु सुझाव आपके कार्यालय के लिए —-

कार्यालय की इमारत के लिए प्लॉट चौकोर या आयताकार होना चाहिए. अनियमित आकार के भूखंडों से बचा जाना चाहिए|

ऑफिस के मुखिया या मालिक के बैठने का स्थान,  दक्षिण पश्चिम कोने में होना चाहिए और बैठते समय उत्तर की तरफ का सामना करना चाहिए|

अन्य वरिष्ठ सदस्यों को दक्षिण या पश्चिम में बैठना वास्तु सम्मत हें जब वे दक्षिण में बैठे हो तो उत्तर का सामना करना चाहिए और पश्चिम में बैठते समय पूर्व का सामना करना चाहिए|

पूर्व और उत्तरी पक्षों की जगह जूनियर स्तर के कर्मचारियों के लिए हैं |

ऑफिस के अन्य विभागों के लिए यहाँ हैं उपयुक्त जगह—

स्वागत कक्ष उत्तर पूर्व में उपयुक्त होगा और आगंतुकों से मिलने के लिए कक्ष उत्तर पूर्व या उत्तर पश्चिम दिशा में बनाया जा सकता है|

कार्यालय में जल निकायों के लिए उपयुक्त स्थान उत्तर पूर्व या पूर्व की ओर है, लेकिन छत पर रखी  पानी की टंकीया पश्चिम या दक्षिण पश्चिम में होनी चाहिए|

वित्त विभाग के लिए दक्षिण पूर्व दिशा और बिक्री एवं मार्केटिंग की टीम के लिए कार्यालय में उत्तर पश्चिमी दिशा उत्तम हैं|

कैफेटेरिया / कैंटीन दक्षिण पूर्व या उत्तर पश्चिम की ओर में होना चाहिए|

शौचालय के लिए पश्चिम और उत्तर पश्चिम दिशा उपयुक्त हैं|

छत की बीम के नीचे किसी भी बैठने की व्यवस्था नहीं करनी चाहिए|

कार्यालय के केंद्रीय क्षेत्र को खाली रखा जाना चाहिए|

ऐसे मिटाएं ऑफिस का वास्तु दोष——

ऑफिस वह स्थान होता है जहां अनेक कर्मचारी एक ही स्थान पर मिलकर एक-दूसरे से सामंजस्य बनाकर कार्य करते हैं। यदि ऑफिस में वास्तु दोष हो तो उसके कर्मचारियों तथा कंपनी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार ऑफिस के वास्तु दोषों को नीचे लिखे उपायों से दूर किया जा सकता है-

1- कार्यालय के मुख्य प्रभारी का कक्ष सबसे पहले नहीं होना चाहिए। प्रवेश द्वार के समीप किसी ऐसे सहायक का कक्ष हो जो आगन्तुकों को जानकारी उपलब्ध करवा सके।

2- कार्यालय में किसी भी कमरे के दरवाजे के ठीक सामने टेबल नहीं होना चाहिए।

3- ऑफिस में हरे या गहरे रंग का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यह रंग रोशनी अधिक खाता है। सफेद, क्रीम या पीला जैसे हल्के रंग का उपयोग करना चाहिए।

4- कार्यालय में पानी की व्यवस्था ईशान कोण में करनी चाहिए। ईशान में पानी तब ही शुभ होगा, जब उसका संबंध जमीन से हो। यदि धरातल से ऊंचे स्थान पर पानी रखना हो तो अपनी सुविधानुसार किसी भी स्थान पर रख सकते हैं।

5- कैशियर को ऐसे स्थान पर नहीं बैठाना चाहिए, जहां से उसे कार्य करते हुए अधिकाधिक कर्मचारी देखें। 6

– कुबेर का वास उत्तर दिशा में माना गया है इसलिए जहां तक संभव हो कैशियर को उत्तर दिशा में ही बैठाएं।

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बेड रूम के लिए वास्तु टिप्स—-

– बेड रूम (शयन कक्ष) के स्थान और सामान के लिए वास्तु टिप्स—

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार बेडरूम आपका वह स्थान जहां आप  अपना सबसे ज्यादा समय बिताते हें| पुरे दिन काम करने के बाद यह स्थान आपके शरीर और दिमाग को आराम और शांति प्रदान करता है| यहाँ वास्तु शास्त्र के अनुसार शयन कक्ष के स्थान और चीजों के रखरखाव  के लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं |

बेड रूम के लिए उपयुक्त दिशाये:

मुख्य  शयन कक्ष, जिसे मास्टर बेडरूम भी कहा जाता हें, घर के दक्षिण पश्चिम या उत्तर पश्चिम की ओर होना चाहिए | अगर घर में एक मकान की ऊपरी मंजिल है तो मास्टर ऊपरी मंजिल मंजिल के दक्षिण पश्चिम कोने में होना चाहिए |

बच्चों का कमरा उत्तर – पश्चिम या पश्चिम में होना चाहिए और मेहमानों के लिए कमरा (गेस्ट बेड रूम) उत्तर पश्चिम या उत्तर – पूर्व की ओर होना चाहिए | पूर्व दिशा में बने कमरा  का अविवाहित बच्चों या मेहमानों के सोने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है |

उत्तर – पूर्व दिशा में देवी – देवताओं का स्थान है  इसलिए इस दिशा में कोई बेडरूम नहीं  होना चाहिए | उत्तर – पूर्व में  बेडरूम होने से  धन की हानि , काम में रुकावट और बच्चों की शादी में देरी हो सकती  है |

दक्षिण – पश्चिम का बेडरूम  स्थिरता और महत्वपूर्ण मुद्दों को हिम्मत से हल करने में सहायता प्रदान करता है |

दक्षिण – पूर्व में शयन कक्ष अनिद्रा , चिंता , और वैवाहिक समस्याओं को जन्म देता है | दक्षिण पूर्व दिशा अग्नि कोण हें जो मुखरता और आक्रामक रवैये  से संबंधित  है | शर्मीले  और डरपोक बच्चे इस कमरे का उपयोग करें और विश्वास प्राप्त कर सकते हैं | आक्रामक और क्रोधी स्वभाव के  जो लोग है इस कमरे में ना रहे  |

उत्तर – पश्चिम दिशा वायु द्वारा शासित है और आवागमन से  संबंधित  है | इसे विवाह योग्य लड़किया के शयन कक्ष के लिए एक अच्छा माना गया है | यह मेहमानों के शयन कक्ष लिए भी एक अच्छा स्थान है |

शयन कक्ष घर के मध्य भाग में नहीं होना चाहिए, घर के मध्य भाग को वास्तु में बर्हमस्थान  कहा जाता है | यह बहुत  सारी ऊर्जा को आकर्षित करता  है जोकि  आराम और नींद के लिए लिए बने शयन कक्ष के लिए उपयुक्त नहीं है |

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार  बेड रूम में रखे सामान के लिए उपयुक स्थान:–

सोते समय एक अच्छी नींद के  नंद के लिए सिर पूर्व या दक्षिण की ओर होना  चाहिए |

वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार, पढ़ने और लिखने की  जगह पूर्व या शयन कक्ष के पश्चिम की ओर होनी चाहिए  | जबकि पढाई करते समय मुख पूर्व दिशा में होना चाहिए |

ड्रेसिंग टेबल के साथ दर्पण पूर्व या उत्तर की दीवारों पर तय की जानी चाहिए |

अलमारी शयन कक्ष के उत्तर पश्चिमी या दक्षिण की ओर होना चाहिए | टीवी, हीटर और एयर कंडीशनर को दक्षिण पूर्वी के कोने में स्थित होना चाहिए |

बेड रूम के साथ लगता बाथरूम, कमरे के पश्चिम या उत्तर में होना चाहिए |

दक्षिण – पश्चिम , पश्चिम कोना  कभी खाली नहीं रखा जाना चाहिए|

यदि आप कोई सेफ या तिजोरी, बेड रूम में रखना चाहे तो उसे दक्षिण कि दिवार के साथ रख सकते हें, खुलते समय उसका मुंह धन की दिशा, उत्तर की तरफ  खुलना चाहिए ..

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घर का वास्तु आपके आपसी संबंधों को भी प्रभावित करता है। वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार घर में वास्तु दोष हो, तो यह पति-पत्नी के आपसी संबंधों के साथ-साथ सास और बहू के बीच क्लेश भी बढाता है। अगर आपके घरमें भी यह समस्या है, तो एक नजर अपने घर के वास्तु पर डालें। 

वास्तु दोष का प्रभाव —– 

घर की रसोई नॉर्थ-ईस्ट यानी उत्तर-पूर्व में होगी, तो वहां भी सास-बहू केआपसी क्लेश, मनमुटाव और हमेशा स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं रहेंगी। किचन कभी भी घर के सेंटर में ना हो, यह आपसी संबंधों के लिए बेहद घातक है।

सास-ससुर का कमरा दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए और बेटे-बहू का कमरा पश्चिमी या दक्षिण दिशा में।

अगर बेटे-बहू का कमरा साउथ-वेस्ट में है, डॉमिनेटिंग दिशा होने के कारण यहां घर के बडों को ही रहना चाहिए। 

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार  गैस केऊपर बने कैबिनेट काले ना हों। काले रंग से निकलनेवाली अल्फा रेडिएशन हेल्थ के लिए अच्छी नहीं होंती और चूंकि महिलाओं का ही अधिकतम समय किचन में बीतता है, इसलिए सबसे ज्यादा असर इन्हीं को हेल्थ पर पडता है। 

वास्तु के उपाय — 

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार आजकल लोगों के घर छोटे-छोटे होते हैं, पैसे और समय की कमी होती है, इसलिए लोगों के लिए अपने घर को वास्तु के हिसाब से बनवाना संभव नहीं होता। 

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार  जैसा घर मिला, उसकी में गुजारा करना पडता है। अपने घर के वास्तु दोष आप इस तरह ठीक कर सकती हैं-घर की दीवारों पर मल्टीकलर ना कराएं। खसकर लाल और काले रंग को कम से कम यूज में लाएं। 

घर के बडों का कमरा अगर साउथ-वेस्ट में ना हो, तो वे अपना कमरा बदल लें। अगर ऎसा करना संभव ना हो, तो उन्हें अपना बेड इस दिशा में खिसका लेना चाहिए। 

पानी उत्तर दिशा में रखें। इसमें किचन का सिंक, पाने का पानी सभी शामिल हैं। किचन में नीला रंग ना कराएं यह स्वास्थ्य की नजर से ठीक नहीं है, क्योंकि नीला रंग जहर का चिह्न है।

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार  पूरे परिवार के आपसी संबंधों को अच्छा बनाने के लिए पूरे परिवार फोटो लाल रंग के फ्रेम में अपने-अपने बेडरूम में लगाएं। अगर गैस पूर्व में रखना संभव ना हो, तो पश्चिम दिशा में छोटा सा आईना लगाएं। जिसमें गैस का रिफ्लेक्षन दिखायी पडे।

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हरियाली से वास्तु दोष निवारण—

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार वास्तु शास्त्र में हरियाली को खास महत्व दिया गया है। इसके अनुसार यदि घर के आस-पास कोई बगीचा हो तो यह बहुत से दोषों का निवारण स्वतः ही हो जाता है। सामान्य वास्तु दोषों को मिटाने के लिए आप भी अपने घर में बगीचा बना सकते हैं। यह हरियाली आपको प्रकृति के बेहद नजदीक होने का अनुभव देगी।

घर में बगीचा बनाते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें-

1- घर में बगीचा बनाने केलिए सबसे पहले उसकी जगह तय कर लें।

2- गार्डन घर के हिसाब से बनाएं। यानि बड़े घर के हिसाब से बड़ा व छोटे घर के हिसाब से छोटा। इससे घर का लुक अच्छा लगेगा।

3- अब सीजन के हिसाब से अपने मन पसंद फूल चुन लीजिए।

4- गार्डन को अपनी इच्छानुसार 2 या 3 भागों में भी बांट सकते हैं।

5- इन भाग में अलग-अलग तरह के सुंदर फूलों के पौधे लगाइए।

6- गार्डन के बीच में गुलमोहर, नीम या आम जैसा बड़ा पेड़ भी लगा सकते हैं। यह पेड़ स्वास्थ के लिए अच्छे तो होते ही हैं, साथ ही साथ गर्मियों में ताजी हवा के लिए इससे बढिय़ा कोई उपाय नहीं है।

7- क्यारियों की सुंदरता बढ़ाने के लिए स्टार, सर्कल या कोई और शेप भी दे सकते हैं।

8- बीजों को यूं ही नहीं बिखेरना चाहिए। बल्कि इन्हें ठीक से लगाइए जिससे पौधे बड़े होने पर व्यवस्थित और सुंदर दिखे। 9- हमेशा पौधों के बीच परस्पर दूरी अवश्य छोड़ें। इससे पौधों की जड़ों को फैलने में आसानी रहेगी और उनकी सुंदरता बनी रहेगी।

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दुकान के लिए उपयोगी वास्तु टिप्स——

दुकान के लिए उपयोगी टिप्स वास्तु के सिद्धांत सिर्फ घर को ही नहीं अपितु दुकान आदि को भी प्रभावित करते हैं। दुकान में भी वास्तु का विशेष महत्व है। यदि दुकान वास्तु सम्मत हो तो शुभ साबित होती है।

इसलिए दुकान में नीचे लिखे वास्तु नियमों का पालन करना चाहिए-

1- दुकान का ईशान कोण खाली या हल्का रखें और स्वच्छता बनाएं रखें।

2- दुकान में पीने के पानी की व्यवस्था ईशान कोण, उत्तर या पूर्व में रखें।

3- भारी सामान दक्षिण या पश्चिम में रखें। 4- पूजा स्थल ईशान, उत्तर या पूर्व में बनाएं।

5- दुकान में तराजू पश्चिमी या दक्षिणी दीवार के साथ रखें।

6- आलमारी, शो-केस, फर्नीचर आदि दक्षिण-पश्चिम या नैऋत्य में लगाएं।

7- पूर्वी व उत्तरी क्षेत्र ग्राहकों के आने-जाने के लिए खाली छोड़ें।

– दुकान में माल का स्टोर दक्षिण, पश्चिम या नैऋत्य में कर सकते हैं।

9- विद्युत उपकरण मीटर, स्विच बोर्ड, इनवर्टर आदि आग्नेय कोण में स्थापित करें।

10- दुकान के सामने कोई सीढ़ी, बिजली या फोन का खंबा अथवा पेड़ नहीं होना चाहिए।

वास्तु के सिद्धांत सिर्फ घर को ही नहीं अपितु दुकान आदि को भी प्रभावित करते हैं। दुकान में भी वास्तु का विशेष महत्व है। यदि दुकान वास्तु सम्मत हो तो शुभ साबित होती है।

इसलिए दुकान में नीचे लिखे वास्तु नियमों का पालन करना चाहिए—

1- दुकान का ईशान कोण खाली या हल्का रखें और स्वच्छता बनाएं रख

2- दुकान में पीने के पानी की व्यवस्था ईशान कोण, उत्तर या पूर्व में रखें।

3- भारी सामान दक्षिण या पश्चिम में रखें।

4- पूजा स्थल ईशान, उत्तर या पूर्व में बनाएं।

5- दुकान में तराजू पश्चिमी या दक्षिणी दीवार के साथ रखें।

6- आलमारी, शो-केस, फर्नीचर आदि दक्षिण-पश्चिम या नैऋत्य में लगाएं।

7- पूर्वी व उत्तरी क्षेत्र ग्राहकों के आने-जाने के लिए खाली छोड़ें।

8- दुकान में माल का स्टोर दक्षिण, पश्चिम या नैऋत्य में कर सकते हैं।

9- विद्युत उपकरण मीटर, स्विच बोर्ड, इनवर्टर आदि आग्नेय कोण में स्थापित करें।

10- दुकान के सामने कोई सीढ़ी, बिजली या फोन का खंबा अथवा पेड़ नहीं होना चाहिए।

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घर में सीढिय़ां कैसी हों?

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार यदि मकान बहुमंजिला है तो उसमें सीढिय़ा अवश्य होती है। वर्तमान समय में डिजाइनर सीढिय़ों (लोहे की या घुमावदार) का चलन भी है। सीढिय़ां भी घर के वास्तु को प्रभावित करती हैं।

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार  मकान में सीढिय़ां बनवाते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें—–

1- वास्तु सम्मत सीढिय़ां भवन के पूर्व या दक्षिण दिशा में बनवाई जानी चाहिए।

2- सीढिय़ों का उतार-चढ़ाव ढलान के अनुसार ही होना चाहिए। यानि सीढिय़ों पर पूर्व से पश्चिम या उत्तर से दक्षिण की तरफ चढ़ाई हो सकती है।

3- यदि सीढिय़ां बीच में घुमावदार हों तो यह घुमाव चढ़ते समय क्लॉकवाइज यानि बाएं से दाएं होनी चाहिए। चूंकि पृथ्वी भी इसी दिशा में घूमती है और चढ़ते समय एनर्जी भी अधिक खर्च होती है इसलिए क्लॉकवाइज घूमते हुए ही चढऩा चाहिए ताकि अतिरिक्त ऊर्जा न लगानी पड़े।

4- चूंकि उतरते समय कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए एण्टी-क्लॉकवाइज घूमते हुए भी उतरा जा सकता है। बड़े भवनों में नीचे से दो तरफ से सीढिय़ां चढ़ाई जाती हैं और घुमाव के स्थान पर मिलाते हुए ऊपर ही कर दी जाती है अथवा नीचे से एक सीढ़ी चढ़ाते हुए घुमाव के स्थान पर उस दो स्थानों पर उसे दो भागों में दो तरफ चढ़ा दी जाती है, इससे चढ़ते व उतरते समय क्लॉक वाइज घूमा जा सकता है।

5- यदि सीढिय़ां बिल्कुल सीधी हैं, बीच में कोई घुमाव नहीं है तब भी छत पर प्रवेश करते समय घड़ी की सूइयों की दिशा में ही दरवाजा होना चाहिए ताकि छत के कमरे में प्रवेश करते समय क्लॉकवाइज घूमना पड़े। एण्टी-क्लॉकवाइज घुमाव वाला दरवाजा न रखें। यदि सीढिय़ां सीधे ही छत के कमरे में प्रवेश करती हों तब किसी परिवर्तन की आवश्यकता नहीं है।

6- भवन के मध्य भाग में कोई पिलर अथवा सीढिय़ां नहीं बनवाई जानी चाहिए।

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क्या आसानी से मिलेगा मकान?

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार सभी का सपना होता है कि उसका एक सुंदर सा घर हो। इसके लिए वह दिन-रात मेहनत करता है। कई बार ऐसा भी होता है कि कोई जीवन भर मेहनत कर स्वयं का मकान नहीं बना पाता जबकि किसी को बिना मेहनत के ही कई मकान मिल जाते हैं। नीचे कुछ योग दिए गए हैं। जिनके भाग्य में यह योग होते हैं उन्हें सहजता के भवन की प्राप्ति होती है-

1- पहले व सातवें भाव का स्वामी पहले (लग्न) भाव में हो तथा चौथे भाव पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो व्यक्ति को बिना प्रयास के ही भवन प्राप्त हो जाता है।

2- जन्मकुण्डली के चौथे भाव का स्वामी उच्च, मूलत्रिकोण या स्वराशि में हो तथा नौवें भाव का स्वामी केंद्र (1, 4, 7, 10) में हो तो ऐसे जातक को सरलता से भवन की प्राप्ति हो जाती है।

3- जन्मकुण्डली के पहले और सातवें भाव का स्वामी पहले या चौथे भाव में हो और शुभ ग्रहों से युक्त हो, नौवें भाव का स्वामी केंद्र (1, 4, 7, 10) भाव में हो और चौथे भाव का स्वामी उच्च, मूल त्रिकोण या स्वराशि का हो तो ऐसा व्यक्ति अल्प प्रयास से अच्छा भवन प्राप्त कर लेता है। शुभ होता है घर के सामने बगीचा वास्तु ऐसा माध्यम है जिससे आप जान सकते हैं कि किस प्रकार आप अपने घर को सुखी व समृद्धशाली बना सकते हैं।

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार यहाँ वास्तु सम्मत ऐसी ही जानकारी दी जा रहीं है जो आपके लिए उपयोगी होगी——

1- ऐसे मकान जिनके सामने एक बगीचा हो, भले ही वह छोटा हो, अच्छे माने जाते हैं, जिनके दरवाजे सीधे सड़क की ओर खुलते हों क्योंकि बगीचे का क्षेत्र प्राण के वेग के लिए अनुकूल माना जाता है। घर के सामने बगीचे में ऐसा पेड़ नहीं होना चाहिए, जो घर से ऊंचा हो।

2- वास्तु नियम के अनुसार हर दो घरों के बीच खाली जगह होना चाहिए। हालांकि भीड़भाड़ वाले शहर में कतारबद्ध मकान बनाना किफायती होता है लेकिन वास्तु के नियमों के अनुसार यह नुकसानदेय होता है क्योंकि यह प्रकाश, हवा और ब्रह्माण्डीय ऊर्जा के आगमन को रोकता है।

3- आमतौर पर उत्तर दिशा की ओर मुंह वाले कतारबद्ध घरों में तमाम अच्छे प्रभाव प्राप्त होते हैं जबकि दक्षिण दिशा की ओर मुंह वाले मकान बुरे प्रभावों को बुलावा देते हैं। हालांकि पूर्व और पश्चिम की ओर मुंह वाले कतारबद्ध मकान अनुकूल स्थिति में माने जाते हैं क्योंकि पश्चिम की ओर मुंह वाले मकान सामान्य ढंग के न्यूट्रल होते हैं।

4- पूर्व की ओर मुंह वाले घर लाभकारी होते हैं। कतार के आखिरी छोर वाले मकान लाभकारी हो सकते हैं यदि उनका दक्षिणी भाग किसी अन्य मकान से जुड़ा हो या पूरी तरह बंद हो। ऐसी स्थिति में जहां कतारबद्ध घर एक-दूसरे के सामने हों, वहां सीध में फाटक या दरवाजे लगाने से बचना चाहिए।

5- यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दक्षिण की ओर मुंह वाले घर यदि सही तरीके से बनाए जाएं तो लाभकारी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

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कैसी तस्वीर लगाएं घर में?

घरों में तस्वीर या चित्र लगाने से घर सुंदर दिखता है। परंतु बहुत कम ही लोग यह जानते हैं कि घर में लगाए गए चित्र का प्रभाव हमारे जीवन पर भी पड़ता है—–

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में श्रृंगार, हास्य व शांत रस उत्पन्न करने वाली तस्वीरें ही लगाई जानी चाहिए।

1- फल-फूल व हंसते हुए बच्चों की तस्वीरें जीवन शक्ति का प्रतीक है। उन्हें पूर्वी व उत्तरी दीवारों पर लगाएं।

2- लक्ष्मी व कुबेर की तस्वीरें भी उत्तर दिशा में लगानी चाहिए। ऐसा करने से धन लाभ होने की संभावना है।

3- पर्वत आदि प्राकृतिक दृश्यों को दक्षिण व पश्चिम में लगा सकते हैं।

4- नदियों-झरनों आदि की तस्वीरें उत्तरी व पूर्वी दिशा में लगा सकते हैं।

5- उजड़े शहर, खण्डहर, वीरान दृश्य, सूखी नदियां, सूखी झीलों, हिंसक युद्ध, अस्त्र-शस्त्र, महाभारत, बाघ, शेर, कौआ, उल्लू, भालू, चील, गिद्ध या रेगिस्तान का चित्र घर में नहीं लगाना चाहिए। इससे घर में अशांति फैलती है तथा परिवार के सदस्यों में मनमुटाव होता है।

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घर में क्यों न लगाएं कांटेदार पौधे ?

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार  भवन की सीमा में आने वाली प्रत्येक वस्तु घर के वास्तु को प्रभावित करती है। इसके कई नकारात्मक व सकारात्मक प्रभाव भी होते हैं। घर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लगाए गए पेड़-पौधे भी घर के वास्तु को प्रभावित करते हैं।

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार  घर में पौधे लगाते समय इन बातों का ध्यान अवश्य रखें-

1- वास्तु के अनुसार घर में कांटेदार व दूध वाले पौधे नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि कांटे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। गुलाब जैसे कांटेदार पौधे लगाए जा सकते हैं।

2- बोनसाई पौधे भी घर में तैयार नहीं करने चाहिए और न ही बाहर से लाकर लगाने चाहिए। बोनसाई पौधे घर वालों का विकास रोकते हैं।

3- घर या कार्यस्थल की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए ताजा फूल आवश्यक है। फूलों के गुलदस्ते ताजगी व सौभाग्य की वृद्धि करते हैं। मुरझाए फूल व पत्तियां नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करती हैं।

4- प्लास्टिक या रेशम के फूल भी घर में सजा सकते हैं किंतु इनकी साफ-सफाई समय पर होती रहनी चाहिए।

5- शयन कक्ष में पौधे नहीं लगाने चाहिएं। डाइनिंग व ड्रॉइंग रूम में गमले रखे जा सकते हैं।

6- यदि किसी दीवार में पीपल उग आए तो उसे पूजा करके हटाते हुए गमले में लगा देना चाहिए। पीपल को बृहस्पति गृह का कारक माना जाता है।

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कैसी हो आपके घर की बाउण्ड्री वॉल?

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार  घर चाहे छोटा हो या बड़ा, गांव में हो या शहर में बाउण्ड्री वॉल यानि चारदीवारी अवश्य बनाई जाती है।

घर की बाउण्ड्री वॉल बनवाते समय इन बातों का ध्यान अवश्य रखें-

1- बाउण्ड्री की नींव तो गहरी ही खुदवाएं। नीचे से डेढ़ या दो फुट मोटी पत्थर की दीवार बनवाएं किंतु प्लींथ से ऊपर दीवार की चौड़ाई कम से कम रखें।

2- भवन निर्माण से पूर्व ही बाउण्ड्री वॉल की नींव भर देनी चाहिए ताकि नकारात्मक प्रभाव को भूखण्ड में आने से रोका जा सके। 3- आगे की बाउण्ड्री वॉल पर लोहे की, सीमेंट की अथवा पत्थर की रैलिंग लगवाई जा सकती है। बाउण्ड्री वॉल व रैलिंग का शिल्प भवन के शिल्प से मेल खाता हुआ होना चाहिए।

4- सामने की बाउण्ड्री वॉल की ऊंचाई अधिक नहीं रखनी चाहिए ताकि हवा व प्रकाश अवरुद्ध न हो सके।

5- चारदीवारी घर की सुरक्षा के साथ-साथ घर में अतिरिक्त ऊर्जा के प्रवाह को रोकने में भी मदद करती है।

6- चारदीवारी टूटी-फूटी न हो, टूट-फूट या प्लास्टर उखडऩे पर तुरंत मरम्मत करवा दें।

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वास्तु: ऐसे होगी हर इच्छा पूरी———–

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार आपकी सभी मनोकामना पूर्ति के लिए भवन के अलग-अलग स्थान उत्तरदायी होते हैं।

अगर आप भी अपनी मनोकामनाएं पूरी करना चाहते हैं तो इन वास्तु नियमों का पालन अवश्य करें-

1- वास्तु शास्त्र के अनुसार वायव्य कोण वायुदेवता का स्थान है। अत: विवाह योग्य कन्या को वायव्य कोण( उत्तर-पश्चिम) में स्थित कमरा देना चाहिए। इससे उसका विवाह शीघ्र हो जाता है।

2- यदि आप स्थान परिवर्तन चाहते हैं तो भी वायव्य कोण के कमरे में रहना ठीक होता है। इससे शीघ्र ही स्थान परिवर्तन हो जाता है।

3- लेकिन अगर आप स्थान परिवर्तन नहीं चाहते हो तो वायव्य कोण में स्थित कमरे में नहीं रहना चाहिए इससे जीवन में अस्थिरता आ जाती है।

4- दक्षिण-पूर्व में स्थित कमरे में रहने वाला परिवार का सदस्य झगड़ालू प्रवृत्ति का हो जाता है तथा वह असंतुष्ट रहने लगता है। अत: इस स्थान पर कमरा न बनाकर किसी अन्य उपयोग में ले सकते हैं।

5- दक्षिण-पश्चिम में स्थित कमरा स्थायित्व प्रदान करता है। अत: यह गृह स्वामी के रहने का उपयुक्त स्थान होता है।

6- उत्तर-पूर्व के कमरे में रहने वाले परिवार के सदस्य का स्वास्थ्य खराब रहता है। इसलिए यह स्थान खुला ही छोड़ दें।

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कैसी हो घर की बॉलकोनी?

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार बॉलकोनी होने से भवन की भव्यता में चार-चांद लग जाते हैं। बॉलकोनी ऐसे स्थान पर निर्मित करवानी चाहिए जहां प्रात:कालीन सूर्य का प्रकाश एवं प्राकृतिक हवा सहज सुलभ हो। बॉलकोनी से हवा व प्रकाश घर में भी प्रवेश करना चाहिए।

बॉलकोनी बनवाते समय इन बातों का ध्यान रखें-

1- यदि भूखण्ड पूर्वोन्मुखी या उत्तोन्मुखी हो तो वास्तु के अनुसार भवन के ईशान कोण में बॉलकोनी बनवाएं।

2- यदि भूखण्ड पश्चिममुखी हो तो बॉलकोनी वायव्य कोण में व दक्षिणोन्मुखी हो तो आग्नेय कोण में बनवाएं।

3- बॉलकोनी के फर्श की ऊंचाई भवन की सामान्य छत से थोड़ी नीची होनी चाहिए।

4- यदि भवन बहुमंजिला हो तो प्रत्येक लिविंग रूम के साथ बॉलकोनी भी होना चाहिए। मच्छर मक्खी आदि बॉलकोनी के माध्यम से घर में प्रवेश कर जाते हैं इसलिए आजकल बॉलकोनी को वायरगेज आदि से कवर्ड करने का भी प्रचलन है। इससे हवा व प्रकाश तो पूरा मिलता है, कीट-पतंग भी अंदर नहीं आते।

5- बॉलकोनी में सीमेंट, पत्थर, मार्बल, लोहा या लकड़ी की रैलिंग लगाई जा सकती है। पैराफिट वॉल पूरी तरह ईंट की न बनाएं अन्यथा हवा रुक जाएगी। डेढ़ फीट तक ईंट की दीवार बनवाई जा सकती है। इसके ऊपर रैलिंग लगवा लें।

6- बॉलकोनी के ऊपर की पूरी छत या आधी छत को ढलान देते हुए उस पर खपरैल की डिजाइन दी जा सकती है।

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कैसा हो स्टोर रूम?

बदलते समय के साथ स्टोर रूम घर का जरुरी हिस्सा हो गया है। आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक अथवा कार्यालयीन भवन, इन सभी में स्टोर रूम बेहद उपयोगी है।स्टोर रूम वह स्थान होता है जहां घर में उपयोग न वाली वस्तुएं रखी जाती हैं।

स्टोर रूम बनवाते समय इन बातों का ध्यान रखें—-

1- नियमित रूप से काम में आने वाली वस्तुओं को छोड़कर शेष प्रकार की वस्तुओं को सामान्यत: स्टोर रूम में ही रखना चाहिए ताकि घर खुला-खुला लगे और घर में अनावश्यक कबाड़ा भी नजर न आए।

2- खाद्य सामग्री के लिए यदि अलग से स्टोर रूम का निर्माण करवाना हो तो रसोई घर के पूर्व की ओर अथवा आग्नेय कोण के मध्य पूर्वी दीवार के सहारे या ईशान कोण में बनवाया जा सकता है।

3- स्टोर रूम में प्रकाश की व्यवस्था पर्याप्त होनी चाहिए। साथ ही रोशनदान की भी व्यवस्था हो ताकि नमी न रहे।

4- स्टोर रूम की छत की ऊंचाई भवन के अन्य भाग के बराबर रखी जा सकती है। चाहें तो मुख्य छत से तीन फुट नीचे दुछत्ती का निर्माण करवा दें ताकि स्टोर रूम की क्षमता बढ़ सके।

5- स्टोर रूम में एक ही दरवाजा रखें। खिड़की न हो तो ज्यादा बेहतर होगा लेकिन रोशनदान अवश्य होना चाहिए।

6- स्टोर का रंग-रोगन हल्का रखें ताकि अंदर अंधेरा नहो। वैसे दीवारों पर हल्का ऑयल/वॉटर बेस पेंट करवाना चाहिए।

7-स्टोर रूम में दीमक आदि भी लग सकती है इसलिए नींव भरते समय ही ट्रीटमेंट करवा लें।

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दाम्पत्य सुख बढ़ाता है मनी प्लांट——

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का हर हिस्सा तथा हर वस्तु उसमें रहने वाले लोगों के जीवन को किसी न किसी तरह से प्रभावित करती है। यहां तक कि घर में रखे फूल व पौधे भी परिवार के सदस्यों पर अपना असर डालते हैं।

नीचे ऐसे ही कुछ पौधों के बारे में जानकारी दी गई है-

1- घरों की सुंदरता बढ़ाने के लिए मनी प्लांट्स लगाए जाते हैं। ये शुक्र के कारक हैं। मनी प्लांट लगाने से पति-पत्नी के संबंध मधुर होते हैं।

2- फैंगशुई के अनुसार बांस के पौधे सुख व समृद्धि के प्रतीक होते हैं।

3- परिवार में यदि कोई बीमार हो तो उसके आस-पास ताजा फूल रखना शुभ है किंतु रात को वहां से हटा देना चाहिए।

4- गुलाब, चंपा व चमेली के पौधे मानसिक तनाव व अवसाद में कमी लाते हैं। इन्हें लगाना अच्छा होता है।

5- शयन कक्ष के नैऋत्य कोण में टेराकोटा या चीनी मिट्टी के फूलदानों में सूरजमुखी के फूल लगाए जा सकते हैं। सूरजमुखी का पौधा मन में उल्लास पैदा करता है।

6- पौधे व फूलों का उपयोग घर के नुकीले कोणों व उबड़-खाबड़ जमीन को ढकने के लिए भी किया जा सकता है।

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ड्रैगन करता है घर की सुरक्षा——

फेंगशुई चीन का वास्तु शास्त्र है। वस्तुत: फेंगशुई चीन की दार्शनिक जीवन शैली है जो ताओवादी धर्म पर आधारित है। फेंग यानि वायु और शुई यानि जल अर्थात फेंगशुई शास्त्र जल व वायु पर आधारित है। फेंगशुई के कुछ उपयोगी टिप्स नीचे लिखे गए हैं-

1- फेंगशुई के अनुसार घर की रक्षा ड्रैगन करता है इसलिए घर में ड्रैगन की मूर्ति या चित्र अवश्य रखें।

2 – भारतीय बाजारों में विण्ड चाइम (हवा से हिलने वाली घंटी) उपलब्ध है। हवा चलने से जब यह टकराती हैं तो बहुत ही मधुर ध्वनि उत्पन्न करती है जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

3- फेंगशुई के अनुसार कंपनी के कान्फ्रेंस हॉल में धातु की सुंदर मूर्ति रखना आवश्यक अच्छा होता है।

4- कार्य स्थल(ऑफिस) पर प्रकाश की उचित व्यवस्था होना चाहिए।5- पलंग, सोफा या कुर्सी के ऊपर कोई झुकी हुई वस्तु न हो।

6- घर या फर्नीचर में लंबा चौड़ा व बड़ा फर्नीचर नहीं होना चाहिए। फर्नीचर कम जगह घेरने वाला होना चाहिए।

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ऐसे दूर करें फैक्ट्री का वास्तु दोष—————-

घर की तरह ही फैक्ट्री व कारखाना आदि में भी वास्तु शास्त्र बहुत उपयोगी है। यदि फैक्ट्री वास्तु सम्मत हो तो बेहद सफल साबित होती है और यदि वास्तु सम्मत न हो तो नुकसानदायक भी हो जाती है।

नीचे लिखे वास्तु नियमों को अपनाकर आप भी फैक्ट्री को वास्तु सम्मत बना सकते हैं-

1- फैक्ट्री का उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र भारी नहीं होना चाहिए। यह नकारात्मक ऊर्जा देता है।

2- पड़ोस की फैक्ट्री का मुख्य द्वार यदि आपकी फैक्ट्री के मुख्य द्वार की ठीक विपरीत दिशा में हो, तब भी नकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

3- यदि उत्तर की सड़क में पूर्व से पश्चिम की ओर ढलान हो या नैऋत्य क्षेत्र का दक्षिणी भाग खुला हो तो भी नकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

4- फैक्ट्री के दक्षिण या वायव्य कोण में ऊर्जा उत्पादन या ऊर्जा-गमन संबंधी उपकरण नहीं लगाए जाने चाहिए। लेबर कैंटीन या रसोई घर भी इन क्षेत्रों में नहीं बनाएं।

5- फैक्ट्री(कारखाना) लगाने से पहले बाउण्ड्री वॉल बनवानी चाहिए फिर मशीन आदि का फाउण्डेशन बनवाएं।

6- वर्षा का पानी दक्षिण-पश्चिम से उत्तर या ईशान कोण में निकलना चाहिए।

7- भारी मशीनें पश्चिम-दक्षिण में, भट्टी, बॉयलर, जनरेटर सेट, ट्रांसफार्मर, बिजली मीटर आदि आग्नेय कोण में लगाएं।

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बेडरूम में लगाएं बालकृष्ण की तस्वीर———

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार शयन कक्ष(बेडरूम) किसी भी घर का सबसे खास हिस्सा होता है। यहां रखी हर एक वस्तु का दाम्पत्य जीवन पर प्रभाव पड़ता है जैसे- तस्वीर, गुलदस्ता आदि। यदि आप भी चाहते हैं कि आपका दाम्पत्य जीवन सफल रहे तो यह उपाय करें-

1- ऐसे नवदम्पत्ति जो संतान सुख पाना चाहते हैं वे श्रीकृष्ण का बाल रूप दर्शाने वाली तस्वीर अपने बेडरूम में लगाएं।

2- ध्यान रखें कि कृष्ण का फोटो स्त्री के लेटने के समय बिल्कुल मुख के सामने की दीवार पर रहे।

3- यूं तो पति-पत्नी के कमरे में पूजा स्थल बनवाना या देवी-देवताओं की तस्वीर लगाना वास्तुशास्त्र में निषिद्ध है फिर भी राधा-कृष्ण की तस्वीर बेडरूम में लगा सकते हैं।

4- भवन में महाभारत के युद्ध दर्शाने वाली तस्वीर वास्तुशास्त्र के अनुरूप नहीं माना जाता इसलिए ऐसे चित्र घर में न लगाएं।

5- भगवान श्रीकृष्ण का चित्र आवासीय एवं व्यावसायिक दोनों ही स्थानों पर रखा जाना चाहिए, इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

6- भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला के दृश्यों की तस्वीरों को भवन की पूर्व दिशा पर लगाया जा सकता है।

7- वसुदेव द्वारा बाढग़्रस्त यमुना से श्रीकृष्ण को टोकरी में ले जाने वाली झांकी समस्याओं से उबरने की प्रेरण

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घर में न आए नकारात्मक ऊर्जा——

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार वास्तु शास्त्र सकारात्मक व नकारात्मक ऊर्जा के सिद्धांत पर कार्य करता है। यदि घर में या घर के आस-पास कोई ऐसी वस्तु हो जिससे नकारात्मक ऊर्जा निकलती हो तो यह गंभीर वास्तु दोष की श्रेणी में आता है। ऐसे दोषों को इस प्रकार दूर किया जा सकता है-

1- घर के आंगन में सूखे एवं भद्दे दिखने वाले पेड़ जीवन के अंत की ओर इशारा करते हैं। ऐसे पेड़ों या ठूंठ को शीघ्र ही कटवा देना चाहिए।

2- इंटीरियर डेकोरेशन के लिए कुछ ऐसी कलाकृतियों का प्रयोग होता है जो सूखे ठूंठ या नकारात्मक आकृति के होते हैं। ये सभी मृतप्राय: सजावटी वस्तुएं वास्तु शास्त्र में अच्छे नहीं माने जाते हैं अत: इनके प्रयोग से भी बचें।

3- यदि ड्रॉइंगरूम में फूलों को सजाते हैं तो ध्यान दें कि उन्हें प्रतिदिन बदलते रहना जरुरी है। चूंकि जब ये फूल मुरझा जाते हैं तो इनसे नकारात्मक ऊर्जा निकलने लगती है।

4- कभी-कभी बेडरूम की खिड़की से नकारात्मक वस्तुएं दिखाई देती हैं जैसे- सूखा पेड़, फैक्ट्री की चिमनी से निकलता हुआ धुआं आदि। ऐसे दृश्यों से बचने के लिए खिड़कियों पर परदा डाल दें।

5- किसी भी भवन के मुख्य द्वार के पास या बिल्कुल सामने बिजली के ट्रांसफार्मर लगे होते हैं जिनसे चिंगारियां निकलती हैं । ऐसे दृश्य भी नकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं।

6- पुराने भवन के भीतर कमरों की दीवारों पर सीलन पैदा होने से बनी भद्दी आकृतियां भी नकारात्मक ऊर्जा का सूचक होती हैं। ऐसी दीवारों की तुरंत रिपेयरिंग करवा लें।

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लवबर्ड का जोड़ा रखें बेडरूम में——

यदि आपका दाम्पत्य जीवन सुखमय है तो अन्य परेशानियां स्वयं ही समाप्त हो जाती हैं। पति-पत्नी के बीच मधुरता बढ़ाने के लिए कुछ फेंगशुई सिद्धांतों का भी उपयोग किया जा सकता है।

नीचे ऐसे ही कुछ फेंगशुई टिप्स दी गई है जिनसे आप अपना दाम्पत्य जीवन सुखमय बना सकते हैं-

1- लवबर्ड, मैंडरेन डक जैसे पक्षी प्रेम के प्रतीक हैं इनकी छोटी मूर्तियों का जोड़ा अपने बेडरूम में रखें।

2- बेडरूम में दक्षिण-पश्चिम दिशा में दिल की आकृति का रोज क्वाट्र्ज रखें।

3- पति-पत्नी के प्रतीक के रूप में बेडरूम में दो सुंदर सजावटी गमले रखें।

4- बेडरूम में पानी की तस्वीर वाली पेंटिंग न लगाएं इसके स्थान पर रोमांटिक कलाकृति, युगल पक्षी की तस्वीर लगाएं।

5- यदि आपको लगे कि आपका प्यार छिन रहा है तो आप अपने कमरे में शंख या सीपी अवश्य रखें। इससे आपका प्यार आपसे दूर नहीं जाएगा।

6- यदि आपकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और इसी वजह से दांपत्य जीवन सुखमय नहीं है तो सुंदर से बाउल में पवित्र क्रिस्टल को चावल के दानों के साथ मिलाकर रखें। इन नुस्खों को आजमाने पर निश्चित ही कुछ ही समय में आपको सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगेंगे। आपका दांपत्य जीवन खुशियों भरा और सुखी होगा।

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इन उपायों से दूर करें वास्तु दोष———

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार वास्तु न सिर्फ आपके घर को बल्कि आपके जीवन को भी प्रभावित करता है। जीवन में आने वाली परेशानियों का कारण घर का वास्तु दोष भी हो सकता है।

नीचे लिखे कुछ सरल उपाय कर इन वास्तु दोषों को दूर किया जा सकता है-

1- स्वस्तिक, मंगल कलश, ओम, 786 आदि मंगल चिन्हों की तस्वीरें घर में अवश्य लगाएं। इनसे घर में सुख-शांति बढ़ती है।

2- पूर्वजों के चित्र, देवी-देवताओं के साथ कभी न लगाएं।

3- शयन कक्ष में सदैव सुंदर, कलात्मक फूलों या हंसते हुए बच्चों की तस्वीरें लगाने से नींद भी बेहतर आती है।

4- डाइनिंग हॉल की दीवारों का रंग हल्का व शांत व शीतलता प्रदान करने वाला हो। भारी सजावट से भी बचें।

5- डाइनिंग हॉल की दीवारों पर फल-फूलों व प्राकृतिक दृश्यों के अच्छे चित्र लगाए जा सकते हैं।

6 – अनुपयोगी वस्तुएं घर में न रखें। उन्हें घर से निकालते रहें।

7- यदि जनरेटर सेट अथवा इन्वर्टर ईशान में हो तो उसे वहां से हटाकर आग्नेय कोण में स्थापित करें।

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दरवाजे की आवाज अशुभ क्यों?

दरवाजे घर का मुख्य भाग होते हैं क्योंकि नकारात्मक व सकारात्मक ऊर्जा यहीं से घर में प्रवेश करती व बाहर निकलती है। वास्तु शास्त्र में दरवाजों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

नीचे दरवाजे से संबंधित कई उपयोगी वास्तु टिप्स दिए गए हैं-

1- दरवाजे खोलते व बंद करते समय आवाज नहीं आना चाहिए । इससे एकाग्रता भंग होती है।

2- दरवाजा स्वत: खुलने व बंद होने वाला नहीं होना चाहिए।

3- मुख्य द्वार पर कोई मांगलिक या शुभ चिन्ह बनवाया जा सकता है।

4- घर के कुल दरवाजों की संख्या यदि सम संख्या में हो तो शुभ माना जाता है।

5- दो भवनों के मुख्य द्वार एक-दूसरे के ठीक सामने न हो।

6- दरवाजे उत्तर व पूर्व दिशा में अधिक रखने चाहिए ताकि हवा प्रकाश व ऊर्जा का संचार पर्याप्त हो सके।

7- प्रवेश द्वार अंदर की ओर खुलना चाहिए।

8- पूर्व अथवा उत्तरमुखी भवनों में चारदीवारी की ऊंचाई पूर्व या उत्तर में मुख्य द्वार से कम होनी चाहिए तथा पश्चिम या दक्षिणमुखी भवनों की चारदीवारी भवन के मुख्य द्वार से ऊंची, बराबर अथवा नीची रखी जा सकती है।

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आमदनी पर असर डालती है उत्तर दिशा———————

घर की बनावट का प्रभाव घर में निवास करने वालों की आर्थिक, शारीरिक, मानसिक स्थिति आदि पर पड़ता है।

परिवार के सदस्यों का दिशाओं और कोणों से संबंध इस प्रकार रहता है-

1- उत्तर दिशा के शुभ-अशुभ का प्रभाव घर की महिलाओं एवं परिवार की आमदनी पर पड़ता है।

2- ईशान कोण के शुभ-अशुभ का प्रभाव घर के मालिक एवं वहां रहने वाले अन्य पुरुषों एवं उनकी संतानों पर पड़ता है। संतान में विशेषकर प्रथम पुत्र पर इसका प्रभाव ज्यादा पड़ता है।

3- पूर्व दिशा के शुभ-अशुभ का प्रभाव भी संतान पर ही पड़ता है ।

4- आग्नेय कोण के शुभ-अशुभ का प्रभाव घर की स्त्रियों, बच्चों विशेषकर द्वितीय संतान पर पड़ता है।

5- दक्षिण दिशा के शुभ-अशुभ का प्रभाव घर की स्त्रियों पर विशेष रूप से पड़ता है।

6- नैऋत्य कोण के शुभ-अशुभ का प्रभाव परिवार के मुखिया व उनकी पत्नी एवं बड़े पुत्र पर पड़ता है।

7- पश्चिम दिशा के शुभ-अशुभ का प्रभाव घर के पुरुषों पर पड़ता है।

8- वायव्य कोण के शुभ-अशुभ का प्रभाव घर की महिलाओं एवं तीसरी संतान पर पड़ता है।

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घर में कहां बनवाएं गैराज?

जिस तरह दिनों-दिन वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। उसी तरह वाहनों को रखने की भी समस्या भी आम बात हो चुकी है। बड़े शहरों में वाहनों को रखने के लिए गैराज बनाए जाते हैं जिनका मुख्य उपयोग वाहन रखने के लिए किया जाता है।

गैराज बनवाते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें-

1- गैराज घर के पश्चिमी वायव्य (उत्तर-पश्चिम) या आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में अति उत्तम माना गया है। दक्षिण या पश्चिम दिशा में उत्तम तथा ईशान (उत्तर-पूर्व) में वर्जित माना गया है।

2- गैराज के लिए अगर अलग से कोई शेड बनाना हो तो यह मुख्य भवन को टच नहीं करना चाहिए।

3- गैराज में उत्तर व पूर्व की दीवारों पर कम वजन होना चाहिए।

4- यदि गैराज को किराए पर देना हो तो उसमें रसोई व बाथरूम भी अवश्य बनवाएं।

5- यदि गैराज को भविष्य में दुकान के रूप में उपयोग करने का विचार हो तो निर्माण के समय ही गैराज में तीन तरफ दीवारों पर कोटा स्टो/मार्बल आदि की सैल्फ लगवाएं ताकि दुकान के लिए अलग से लकड़ी आदि की सैल्फ बनवाने की आवश्यकता नहीं पड़े।

6- गैराज का उपयोग स्टोर रूम के रूप में भी कर सकते हैं। इसके लिए पीछे के हिस्से में दुछत्ती भी बनवाई जा सकती है ताकि अधिक सामान रखा जा सके।

7- स्टोर रूम के लिए गैराज में शटर लगवाने की आवश्यकता नहीं है। करीब चार फुट चौड़ा दरवाजा लगवा लें। प्रकाश के लिए सामने खिड़की रखें।

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सोच-विचार कर बनाएं घर का मुख्य द्वार———

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार भवन के मुख्य द्वार का उसके वास्तु शास्त्र पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। यदि मुख्य द्वार में ही दोष हो तो इसे दूर करना अति आवश्यक होता है। मुख्य द्वार बनवाते समय नीचे लिखी बातों का ध्यान रखें-

1- वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार काफी महत्वपूर्ण होता है इसे सिंह- द्वार भी कहते हैं।

2- वास्तु के अनुसार चारों दिशाओं के 32 देवताओं के शुभ-अशुभ फलों को देखते हुए ही मुख्य द्वार बनवाना चाहिए।

3- यदि भूखण्ड पूर्वोन्मुखी हो तो पूर्व की ओर के मध्य से ईशान कोण तक का भाग मुख्य द्वार बनवाने के लिए एकदम उपयुक्त होता है।

4- दक्षिणोन्मुखी भूखण्ड की भुजा के मध्य बिंदु से आग्नेय कोण तक का भाग मुख्य द्वार के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

5- पश्चिमोन्मुखी भूखण्ड की पश्चिमी भुजा के मध्य से वायव्य कोण तक का भाग मुख्य द्वार के लिए उच्च कोटि का माना गया है। साथ ही मध्य भाग से नैऋत्य कोण के बीच भी मुख्य द्वार रखा जा सकता है।

6- उत्तोन्मुखी भूखण्ड की उत्तरी भुजा के मध्य से ईशान तक का भाग मुख्य द्वार के लिए उत्तम माना गया है।

7- वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार के लिए उत्तरी ईशान, पूर्वी ईशान, दक्षिणी आग्नेय व पश्चिमी वायव्य कोण अधिक शुभ माने जाते हैं।

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कैसी हो आपके घर की विद्युत व्यवस्था?

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार घरों में विद्युत व प्रकाश व्यवस्था काफी महत्वपूर्ण होती है। अगर प्रकाश व्यवस्था ठीक नहीं होगी तो इसका नकारात्मक प्रभाव घर में रहने वाले सदस्यों पर पड़ेगा। विद्युत फिटिंग व प्रकाश व्यवस्था करते समय इन बातों का ध्यान रखें-

1- घर चाहे बड़ा हो या छोटा, कच्चा हो या पक्का, गांव में हो या शहर में विद्युत कनेक्शन आवश्यक है।

2- वास्तु शास्त्र के अनुसार बिजली का मीटर, जनरेटर, इनवर्टर आदि घर के आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में ही स्थापित करवाने चाहिए। ऐसा करना संभव नहीं हो तो वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में भी लगाए जा सकते हैं।

3- आपके घर का प्रवेश द्वार जिस दिशा में हो, सामान्यत: बिजली का मीटर भी उसी दिशा में लगाया जाता है। वैसे अपनी सुविधानुसार मीटर बोर्ड आदि लगवा सकते हैं।

4- प्रत्येक कमरे में प्रवेश करते समय दाईं तरफ स्विच बोर्ड लगवाने चाहिएं।

5- बिजली फिटिंग हेतु निर्माण कार्यों के साथ-साथ ही आवश्यक कार्य करवाते रहें ताकि बाद में तोड़-फोड़ व खुदाई न करनी पड़े।

6- विद्युत फिटिंग हेतु अच्छी किस्म के तार व अन्य सामग्री का प्रयोग करें। विद्युत फिटिंग व एसेस

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किस दिशा में हो फैक्टरी का स्टोर रूम ?

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार किसी फैक्टरी में कच्चा तथा तैयार माल रखने के लिए स्टोर रूम अवश्य होते हैं। यदि तैयार माल रखने वाला स्टोर रूम वास्तु सम्मत नहीं है तो इसका प्रभाव फैक्टरी की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।

फैक्टरी व कारखानों में इन बातों का भी ध्यान रखें-

1- तैयार माल का भण्डारण (स्टोर) वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम)में करें। किसी अन्य दिशा में स्टोर रूम बनाने से फैक्टरी की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

2- अर्द्ध निर्मित माल का भण्डारण पश्चिमी भाग में करें।

3 – कमरे के मुख्य द्वार के सामने बैठक कदापि न करें।

4- भारी मशीनों की स्थापना दक्षिण अथवा नैऋत्य कोण (पश्चिम-दक्षिण) में करनी चाहिए। हल्की मशीनें उत्तर या वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में लगाई जा सकती है।

5- यदि नैऋत्य (पश्चिम-दक्षिण) में भण्डारण करना पड़े तो उसे सदैव भरा हुआ रखें।

6- फैक्ट्री के भूखण्ड के पूर्व में ऊंचे-ऊंचे टीले अथवा दक्षिण-पश्चिम में ठीक न की जा सकने वाली खाइयां नहीं होनी चाहिए।

7- जल व्यवस्था के लिए कुआं, बोरिंग, ट्यूब वैल, स्वीमिंग पुल आदि उत्तर, पूर्व या ईशान (उत्तर-पूर्व) में खुदवाना चाहिए।

8- बोरिंग व बाउण्ड्री वॉल के बीच कम से कम तीन फुट का फासला होना चाहिए।

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जानिए वास्तु अनुसार आपके मुख्य दरवाजे के सामने क्यों न हो धार्मिक स्थल ?

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार  घर के वास्तु में मुख्य द्वार के साथ ही अन्य द्वारों का अहम योगदान होता है। अगर घर के द्वार में ही वास्तु दोष हो तो यह घर के साथ ही उसमें रहने वाले परिवार के सदस्यों को भी प्रभावित करते हैं। द्वार बनवाते समय इन बातों का ध्यान रखें-

1- वास्तु शास्त्रियों के अनुसार घर के मुख्य द्वार के सामने मंदिर या अन्य कोई धार्मिक स्थल नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर घर के वास्तु पर इसका असर पड़ता है। मुख्य द्वार के ठीक सामने कोई लेंप पोस्ट, खंभा, पिलर या वृक्ष आदि भी नहीं होने चाहिए।

2- मुख्य द्वार के संबंध में वास्तु शास्त्र के विद्वानों के विभिन्न मत हैं किंतु व्यावहारिक दृष्टि से मुख्य द्वार ऐसे स्थान पर रखा जाना चाहिए, जहां से पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो सके व परिवार के लिए सुविधाजनक हो।

3- यदि मुख्य द्वार पश्चिम में हो तो पूर्वी दिशा में भी एक द्वार बनवाया जा सकता है। यदि मुख्य द्वार दक्षिण में हो तो उत्तर में भी एक द्वार बनवा लेना चाहिए। इससे घर वालों की गति पूर्वोन्मुखी अथवा उत्तरोन्मुखी रहेगी, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से आवश्यक है।

4- कमरे के किसी भी कोने में दीवार से करीब चार इंच की दूरी पर द्वार बनवाया जा सकता है।

5- मुख्य द्वार के अतिरिक्त अन्य दरवाजों पर एक पल्ले वाला(सिंगल डोर) किवाड़ ही लगवाना चाहिए।

6- दरवाजे दीवार की तरफ खुलने चाहिएं ताकि अनावश्यक जगह न घिरे।

7- जिस दीवार के सहारे किंवाड़ खुलता हो, उसे दीवार में किंवाड़ के पीछे नीचे की तरफ छोटी-छोटी आलमारियां दी जा सकती हैं।

8- भवन के चारों ओर द्वार बनाए जा सकते हैं किंतु ध्यान रखें कि द्वार शुभ स्थानों पर ही बनवाया जाए।

9- जहां तक संभव हो, कमरे दरवाजा दीवार के मध्य न बनाएं अन्यथा कमरे का सही-सही उपयोग नहीं हो सकेगा।

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वास्तु उपायों द्वारा ऐसे आएं परीक्षा में अव्वल—

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार  आजकल अभिभावक बच्चों की पढ़ाई के लिए अत्यधिक चिंतित रहते हैं। अधिक अंक लाने के लिए बच्चों में शिक्षा के प्रति एकाग्रता का होना आवश्यक होता है। अगर आप भी चाहते हैं कि आपके बच्चे परीक्षा में अव्वल नंबरों से पास हों तो

नीचे लिखे वास्तु टिप्स का उपयोग करें-

1- बच्चों का अध्ययन कक्ष हमेशा पश्चिम या दक्षिण दिशा में बनाना चाहिए क्योंकि इससे स्थायित्व रहता है।

2- बच्चों के अध्ययन कक्ष में अध्ययन करने की मेज कभी भी कोने में नहीं होनी चाहिए। अध्ययन के लिए मेज कक्ष के मध्य (दीवार के मध्य) में होनी चाहिए। दीवार से कुछ हटकर होनी चाहिए।

3- पढ़ाई करते समय बच्चे का मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में रहना चाहिए। इससे अध्ययन में एकाग्रता बनी रहती है।

4- पुस्तकों को हमेशा दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण या पश्चिम दीवार के साथ आलमारी में रखनी चाहिए। पूर्व, पूर्व-उत्तर या उत्तर दिशा में पुस्तकें नहीं रखनी चाहिए।

5- पुस्तकों को कभी भी खुला तथा इधर-उधर नहीं रखना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।

6- अध्ययन के लिए मेज पर भी अधिक अनावश्यक पुस्तकें नहीं होनी चाहिए। जिस विषय का अध्ययन करना हो, उससे संबंधित पुस्तक को निकालकर पढ़े और बाद में उसे यथास्थान रख दें।

7- भारतीय परंपरा के अनुसार पढ़ाई की मेज के सामने मां सरस्वती और गणेशजी की तस्वीर होनी चाहिए।

8- फेंगशुई के अनुसार मेज पर अमेथिस्ट या क्रिस्टल का एज्युकेशन टॉवर रखें, जिससे ऊपर उठने की प्रेरणा मिलती रहती है और एकाग्रता बढ़ती है।

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स्मरण शक्ति बढ़ाता है पिरामिड——

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार भारतीय वास्तु शास्त्र में पिरामिड के आकार का विशेष महत्व है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के किसी एक हिस्से की छत को पिरामिड का आकार देना चाहिए। इसके नीचे बैठने से स्मरण शक्ति बढ़ती है तथा और भी मानसिक समस्याएं पिरामिड के नीचे बैठने से दूर होती है।

पिरामिड के कुछ और फायदे नीचे बताए गए हैं-

1- यदि घर को पिरामिड की अद्भुत शक्तियों का लाभ दिलवाना हो तो घर के मध्य भाग को अथवा किसी लिविंग रूम को ऊपर से पिरामिड की आकृति का बनवाएं।

2- यदि घर के किसी भाग में पिरामिड का निर्माण करवाना हो तो उसका एक त्रिभुज उत्तर दिशा की ओर रखें, शेष त्रिभुज स्वत: ही दिशाओं के अनुरूप हो जाएंगे।

3- मस्तिष्क की सक्रियता के लिए पिरामिड के नीचे बैठना लाभप्रद रहता है। मानसिक थकावट दूर होगी और अनिद्रा, सिरदर्द, पीठदर्द आदि में लाभ मिलेगा।

4- लंबी बीमारी व शल्य क्रिया के बाद पिरामिड के नीचे बैठने से जल्दी आराम मिलता है।

5- पिरामिड के नीचे रखी दवाइयां कई दिनों तक खराब नहीं होती, साथ ही उनका असर भी बढ़ जाता है।

6- घर में पिरामिड का चित्र कभी नहीं लगाना चाहिए, यह नकारात्मक ऊर्जा देता है।

7- यदि आपका ईशान ऊंचा हो और नैऋत्य नीचा हो तो नैऋत्य में छत पर पिरामिड की आकृतिनुमा निर्माण करते हुए नैऋत्य को ईशान से ऊंचा किया जा सकता है।

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जानिए की क्यों लगाएं रसोई घर में वास्तु अनुसार आईना?

वास्तुविद पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार आजकल किसी भी घर में छोटे-छोटे वास्तु दोष होना आम बात है। घर में कुछ मामूली परिवर्तन कर इन दोषों को दूर किया जा सकता है या उसके नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है।

नीचे वास्तु दोष मिटाने के ऐसे ही कुछ उपाय सुझाये गए  हैं-

1- खाना बनाते समय गृहिणी की पीठ रसोई के दरवाजे की तरफ न हो, यदि ऐसा हो तो गृहिणी के सामने दीवार पर एक आईना लगाकर दोष दूर किया जा सकता है।

2- यदि रसोई का सिंक उत्तर या ईशान में न हो और उसे बदलना भी संभव न हो तो लकड़ी या बांस का पांच रोड वाला विण्ड चिम सिंक के ऊपर लगाएं।

3- चूल्हा मुख्य द्वार से नहीं दिखना चाहिए। यदि ऐसा हो और चूल्हे का स्थान बदलना संभव नहीं हो तो पर्दा लगा सकते हैं।

4- यदि घर में तुलसी का पौधा न हो तो अवश्य लगाएं। कई रोगों व दोषों का निवारण अपने आप हो जाएगा।

5- यदि नैऋत्य कोण की छत ईशान से नीची हो तो नैऋत्य में एक टी.वी. एण्टिना लगाकर दोष दूर सकते हैं।

6- रसोई में यदि पानी व चूल्हा एक सीध में हो और उन्हें बदलना संभव न हो तो दोनों के बीच में एक छोटा सा पौधा रख सकते हैं।

7- यदि घर की सीढिय़ां घर के उत्तर या पूर्व दिशा में हों तो सीढिय़ों के दक्षिण या पश्चिम में एक कमरा और बनवा दें। दोष नहीं रहेगा।

8- अगर आप किसी मेहमान से परेशान हो गए हों तो उसका कमरा बदल दें या उसके पलंग की दिशा बदल दें। मेहमान स्वत: ही चला जाएगा। वास्तु शास्त्र के अनुसार वायव्य कोण में अतिथि कक्ष होने से अतिथि अधिक समय नहीं ठहरता है

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