वास्तु का मतलब केवल तोड़फोड़ ही नहीं होता।। यह एक सम्पूर्ण विज्ञानं हैं।।

वास्तु का मतलब भवन में तोड़फोड़ नहीं होता।।।    

यह एक विज्ञानं हैं जो वेदिक कल से प्रचलन में किन्तु पिछले कुछ समय मिडिया के कारण वास्तु शास्त्र काफी चर्चा में है। इसे लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां फैलायी जा रही है। कुछ धंधेबाजों ने इसे पूजा पाठ और कर्मकांड से जो़ड़कर अपने यजमानों को डराना-धमकाना नियम सा बना लिया है।

                                   

वास्तु दोष का भय दिखाकर वह दोहन तो करते हैं ही भवन में तरह-तरह की तोड़फोड़ भी कराते रहते हैं। वास्तु की चर्चा के दौरान ऐसे लोगों का ध्यान वास्तु शास्त्र की जटिलता पर कम, सामने वाली की जेब पर ज्यादा होता है। उन्हें सही मायने में यह भी पता नहीं होता कि वास्तु शास्त्र धर्म है, कला है अथवा विज्ञान। इस सवाल पर वे बगलें झांकने लगते है।

वास्तु के बारे में उनकी अधकचरी जानकारी ने इस एक सार्वभौम और सार्वकालिक वैज्ञानिक पद्यति को लेकर जनमानस में तरह-तरह का भ्रम पैदा कर दिया है।

वास्तुशास्त्र को लेकर मे मन में भी तमाम तरह की जिज्ञासा थी। इस दिशा मैं अपने को वास्तुविद् बताने वाले तथा वास्तु समाधान की दुकान खोलकर बैठे कई महानुभावों से मिला लेकिन सबने पण्डे-पुजारियों जैसी बातें की। इसी दौरान मेरी मुलाकात पंडित दयानन्द शास्त्री हुई ।

दयानन्द शास्त्री जी ने ज्योतिषीय अनुभव लेने के बाद वास्तु शास्त्र में रुचि ली, तो गहरे उतरते गये। उन्होंने वड़ोदरा में 2004 में जितेन भट्ट से पायरा वास्तु का प्रशिक्षण प्राप्त किया।। 

मेरठ में डॉक्टर संजीव अग्रवाल से विधिवत अनुभव और प्रशिक्षण प्राप्त किया।।

 

उन्होंने इस दिशा में गहन शोध किया। देश के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण कर वहां वास्तु शास्त्र से संबंधित विषय वस्तु का अध्ययन किया तथा स्वदेशी मूल के आर्किटेक्चरल इंजीनियर भिलाई से आनंद वर्मा जी, मुम्बई से अशोक सचदेवा जी,उज्जैन से कुलदीप सलूजा जी, उदयपुर से निरंजन भट्ट जी, डॉक्टर श्री कृष्ण जुगनू जी, जयपुर से सतीश शर्मा जी, श्री प्रह्लाद राय काबरा जी, गाजियाबाद से कर्नल त्यागी, पंडित शिव कुमार शर्मा जी, दिल्ली से आइफास संस्थान, सूरतगढ़ से एस.के.सचदेवा जी, दिल्ली से श्री अरुण वंसल जी, पंडित गोपाल शर्मा,डॉक्टर आनन्द भारद्वाज, इंदौर से पंकजअग्रवाल, मुम्बई से नितिन गोठी जी, पुणे से दिलीप नाहर जी और डॉक्टर पाठक, औरंगाबाद से मग्गिरवार सर और लखनऊ से श्री गणेश ताम्रकार जी के साथ साथ अन्य अनेक वास्तु विद्वानों का सानिध्य मिला जिनका वास्तु पर भी बेहतर काम है , के सम्पर्क में रहे तथा उनसे काफी कुछ सीखा।

वास्तु को लेकर पंडित दयानन्द शास्त्री ने कई प्रयोग किये जो समय की कसौटी पर खरे उतरे। 

यहां प्रस्तुत है वास्तु के विविध पहलुओं पर उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश-                        

  –वास्तु शास्त्र क्या है?             

यह बहस का मुद्दा हो सकता है कि वास्तु विज्ञान है अथवा कला लेकिन मेरी दष्टि पूर्ण विज्ञान भी है और कला भी। यह हमारी उस वैदिक अवधारणा पर आधारित है जिसमें भारतीय मनीषियों ने समाज में “सर्वे भवंतु सुखिन, सर्वे संतु निरामया” की कल्पना की है। यह एक ऐसा विज्ञान है जिसका उपयोग व्यक्ति के सुखी और स्वास्थ्य जीवन के लिए किया जाता है। यह उर्जा का विज्ञान है जिसमें भवन, उसमें निवास करने वालों तथा उसके परिवेश की उर्जाओं में संतुलन बैठाने की कोशिश की जाती है। वास्तु अंतरिक्ष, भूमि व क्वांटम ऊर्जा में संतुलन बनाने की प्रक्रिया का नाम है। यह संतुलन ही व्यक्ति को सुखी और सम्पन्न बनाता है।               

वास्तु जैसा कोई प्रयोग या विद्या भारत के अतिरिक्त अन्य देशों में है?                             

पूरी दुनिया की सभी विकसित परम्पराओं में वास्तु उर्जा विज्ञान का प्रयोग भिन्न-भिन्न रूपों में हो रहा है। जर्मन, फ्रांस सहित कई देशों में वास्तु शास्त्र को ‘विल्डिंग बायोलॉजी’ के नाम से जाना जाता है। वहां इस दिशा में निरंतर शोध हो रहे हैं। यूरोपीय देशों में इसे ‘जिओमेंसी’ चीन में इसे ‘फेंगशुई’ तथा रूस ब्रिटेन में इसे ‘सेक्रेड ज्यामेट्री’ के नाम से पुकारते हैं। प्राय: सभी देशों में इस विद्या का मूल उद्देश्य है भूमि, प्रकृति व अंतरिक्ष की उर्जा के साथ भवन का इस प्रकार संतुलन बनाना कि वह अपने निवासियों के अनुकूल हो। इस भवन में रह रहे लोग सुखी तथा भौतिक व आध्यात्मिक रूप से समृद्ध हों।

दरअसल दिशा वास्तु, उर्जा वास्तु, वनस्पति वास्तु, भूमि वास्तु, तथा मानव वास्तु मिलकर वास्तुशास्त्र का निर्माण करते हैं। इन सभी के संतुलन में ही मानव कल्याण निहित है।                               

आप व्यक्ति, भवन अथवा वातावरण की ऊर्जा को कैसे मापते हैं?                         

प्रत्येक आदमी का अपना एक आभामंडल होता है। यह अंगूठे के निशान की भांति नीजी होता है। इसे व्यक्ति की इलेक्ट्रो डायेनेमिक फिल्ड भी कहते हैं। यह फिल्ड या आभामंडल आसपास की ऊर्जा को प्रभावित करता है अथवा प्रभावित होता है। इस आभामंडल को घर अथवा कार्यालय जहां व्यक्ति रहता है वहां की ऊर्जा उद्वेलित करती है। यह उद्वेलन सकारात्मक और नकारात्मक दोनों हो सकता है। इस तरह की ऊर्जा को मापने के यंत्र भी हैं। जर्मनी वैज्ञानिकों द्वारा आविष्कृत लेकर एंटीना एक ऐसा ही यंत्र है जो मानव शरीर की विभिन्न प्रकार की उर्जाओं की प्रकृति तथा उनकी माप को निर्धारित करता है। वास्तु व्यक्ति, भवन तथा वातावरण की उर्जाओं में समन्वय स्थापित करने का विज्ञान है ताकि व्यक्ति सुखी हो।।                                            

वास्तु दोष निवारण के नाम पर मकान में प्राय: तोडफ़ोड़ की बात सामने आती है। क्या यह उचित है?                   

वास्तु शास्त्र को लेकर लोगों में बहुत भ्रांतियां हैं। दरअसल वैज्ञानिक रूप से भवन में सकारात्मक उर्जा का संतुलन तथा नकारात्मक उर्जा का रोध ही वास्तु दोष निवारण है। जो वास्तु को सही ढंग से नहीं समझते वह वास्तु दोष निवारण के लिए तोडफ़ोड़ कराते हैं। सच तो यह है कि ऐसा करके वे एक नया वास्तु दोष पैदा कर देते हैं। गहन जानकारी के बिना तोडफ़ोड़ करके वास्तु सुधार ठीक वैसे ही है जैसे किसी सामान्य आदमी से कोई जटिल ऑपरेशन कराना। वास्तु में उर्जा की शुद्धि अथवा सकारात्मक उर्जा की आपूर्ति के लिए किसी तरह के तोडफ़ोड़ की जरूरत नहीं पड़ती।

सच तो यह है कि मकान में तोडफ़ोड़ करने से लाभ की जगह अधिकांश मामलों में हानि होती है। सामान्यतया कास्मिक, ग्लोबल तथा टेल्युरिक उर्जाओं का संतुलन गृहस्थ जीवन के लिए आवश्यक है। इसके लिए किसी प्रकार की तोडफ़ोड़ की जरूरत नहीं होती।।                          

वास्तु सुधार को लेकर इतना आग्रह क्यों?                      

दरअसल वास्तु शास्त्र व्यक्ति की प्रगति और समृद्धि का विज्ञान है। यह अनुकूल है तो जीवन में सब शुभ-शुभ वरना तरह-तरह की परेशानियां पैदा होती रहती हैं। इसका समय रहते इलाज भी हो जाना चाहिए वरना बढ़ते घाव की तरह उपेक्षा करने पर यह भी नासूर बन जाता है। भवन के आकार , उसकी भौगोलिक तथा देशिक स्थिति, उसका उपयोग करने वालों के कारण उर्जा विशेष प्रकार का रूप तथा गुण धारण कर लेती है। यह भवन का उपयोग करने वालों के अनुकूल या प्रतिकूल हो सकती है। अनुकूलता तो सुखद होती है, लेकिन प्रतिकूलता जीवन के समस्त कारोबार को प्रभावित करती है।

                                        

प्रतिकूल या अनुकूल उर्जा का आंकलन कैसे करेंगे?             

विदेशों खासकर जर्मनी में इस दिशा में निरंतर शोध हो रहा है। ऐसे-ऐसे यंत्र विकसित हो गये हैं जो भवन की नकारात्मक व सकारात्मक उर्जा के मापन में सक्षम हैं। यह उर्जा सर्वत्र विद्यमान है। इन्हें आकर्षित करने का गुण हमारे अंदर है। हम सकारात्मक उर्जा का आह्वान कर अपने घर का वास्तु दोष दूर कर सकते हैं.

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