इन वास्तु दोष का रखेंगे ध्यान तो बिजनेस/ व्यापार में नहीं होगा घाटा…

इन वास्तु दोष का रखेंगे ध्यान तो बिजनेस/ व्यापार में नहीं होगा घाटा..

प्रिय पाठकों/मित्रों, यदि आप सफल बिजनेसमैन बनना चाहते हैं तो इसमें सालों लग सकते हैं। वहीं आपकी एक छोटी सी गलती से बिजनेस को बड़ा घाटा हो सकता है। कई बार वास्तुदोष भी इसका कारण होता हैं |

वास्तुविद पंडित दयानन्द शास्त्री (MOB.—-0091–9669290067(M.P.)——Waataaap—0091–9039390067 )के अनुसार वास्तु शास्त्र के सिद्धांत सिर्फ घर पर ही नहीं बल्कि ऑफिस व दुकान पर भी लागू होते हैं। यदि दुकान या ऑफिस में वास्तु दोष हो तो व्यापार-व्यवसाय में सफलता नहीं मिलती। किस दिशा में बैठकर आप लेन-देन आदि कार्य करते हैं, इसका प्रभाव भी व्यापार में पड़ता है। दुनिया में बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों को मानते हैं और उसी हिसाब से अपना घर और कारोबार शुरू करते हैं। लोग घर और दुकानों के नक्शे वास्तुशास्त्र के अनुसार बनाते हैं।

वास्तु शास्त्र प्रकृति के साथ सामंजस्य एवं समरसता रखकर भवन निर्माण के सिद्धांतों का प्रतिपादन करता है। ये सिद्धांत मनुष्य जीवन से गहरे जुड़े हैं।

अथर्ववेद में कहा गया है-

 पन्चवाहि वहत्यग्रमेशां प्रष्टयो युक्ता अनु सवहन्त।

अयातमस्य दस्ये नयातं पर नेदियोवर दवीय ॥ 10 /8 ॥

सृष्टिकर्ता परमेश्वर पृथ्वी, जल, तेज (अग्नि), प्रकाश, वायु व आकाश को रचकर, उन्हें संतुलित रखकर संसार को नियमपूर्वक चलाते हैं। मननशील विद्वान लोग उन्हें अपने भीतर जानकर संतुलित हो प्रबल प्रशस्त रहते हैं। इन्हीं पांच संतुलित तत्वों से निवास गृह व कार्य गृह आदि का वातावरण तथा वास्तु शुद्ध व संतुलित होता है, तब प्राणी की प्रगति होती है।

 ऋग्वेद में कहा गया है-

ये आस्ते पश्त चरति यश्च पश्यति नो जनः।

तेषां सं हन्मो अक्षणि यथेदं हर्म्थ तथा।

प्रोस्ठेशया वहनेशया नारीर्यास्तल्पशीवरीः।

स्त्रिायो या : पुण्यगन्धास्ता सर्वाः स्वायपा मसि !!

हे गृहस्थ जनो ! गृह निर्माण इस प्रकार का हो कि सूर्य का प्रकाश सब दिशाओं से आए तथा सब प्रकार से ऋतु अनुकूल हो, ताकि परिवार स्वस्थ रहे। राह चलता राहगीर भी अंदर न झांक पाए, न ही गृह में वास करने वाले बाहर वालों को देख पाएं। ऐसे उत्तम गृह में गृहिणी की निज संतान उत्तम ही उत्तम होती है। वास्तु शास्त्र तथा वास्तु कला का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक आधार वेद और उपवेद हैं। भारतीय वाड्.मय में आधिभौतिक वास्तुकला (आर्किटेक्चर) तथा वास्तु-शास्त्र का जितना उच्चकोटि का विस्तृत विवरण ऋग्वेद, अथर्ववेद, यजुर्वेद में उपलब्ध है, उतना अन्य किसी साहित्य में नहीं।

वास्तु शास्त्र में इन्हीं पॉंच महाभूतों का अनुपात में तालमेल बैठाकर प्रयोग कर जीवन में चेतना का विकास संभव है।

(1) क्षिति/धरती/पृथ्वी (2) जल (3) पावक (4) गगन (5) समीरा अर्थात् , पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, और आकाश।

वास्तुविद पंडित दयानन्द शास्त्री (MOB.—-0091–9669290067(M.P.)——Waataaap—0091–9039390067 )के अनुसार चुंबकीय उत्तर क्षेत्र कुबेर का स्थान माना जाता है जो कि धन वृद्धि के लिए शुभ है। यदि कोई व्यापारिक वार्ता, परामर्श, लेन-देन या कोई बड़ा सौदा करें तो मुख उत्तर की ओर रखें। इससे व्यापार में काफी लाभ होता है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है कि इस ओर चुंबकीय तरंगे विद्यमान रहती हैं जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएं सक्रिय रहती हैं और शुद्ध वायु के कारण भी अधिक ऑक्सीजन मिलती है जो मस्तिष्क को सक्रिय करके स्मरण शक्ति बढ़ाती हैं। 

सक्रियता और स्मरण शक्ति व्यापारिक उन्नति और कार्यों को सफल करते हैं। व्यापारियों के लिए चाहिए कि वे जहां तक हो सके व्यापार आदि में उत्तर दिशा की ओर मुख रखें तथा कैश बॉक्स और महत्वपूर्ण कागज चैक-बुक आदि दाहिनी ओर रखें। इन उपायों से धन लाभ तो होता ही है साथ ही समाज में मान-प्रतिष्ठा भी बढ़ती है।

वास्तुविद पंडित दयानन्द शास्त्री (MOB.—-0091–9669290067(M.P.)——Waataaap—0091–9039390067 )के अनुसार वास्तुशास्त्र में पूर्व,पश्चिम,उत्तर,दक्षिण तथा अग्रेय,नैऋत्य,वायव्य एवं ईशान्य-इन आठों ही दिशाओं-उपदिशाओं का महत्व है। वास्तुशास्त्र के आधार पर किसी को प्लॉट,बंगला,मकान या बड़ी इमारत बनानी हो या रहने के लिए जाना हो तो सर्वप्रथम उस जगह की दिशाओं को विचार करना आवश्यक है। प्लॉट,बंगला,इमारत या इमारत के अंदर के ब्लॉक का प्रवेशद्वार किस दिशा में है-इसका विचार करना चाहिए। पूर्व दिशा आमतौर पर सूर्योदयवाली मानी जाती है किंतु केवल सूर्योदय की दिशा को पूर्व दिशा न मानकर दिशाबोधक यंत्र के माध्यम से ही दिशा निश्चित करनी चाहिए। पृथ्वी सूर्य के इर्द-गिर्द घूमती रहने से उदित सूर्य की पूर्व दिशा में थोड़ा अंतर हो सकता है। किंतु चुंबकीय गुणोंवाले दिशाबोधक यंत्र के उपयोग से पूर्व,पश्चिम,उत्तर,दक्षिण के संबंध में अचूक अनुमान लगाया जा सकता है।

—दुकान या ऑफिस या कोई भी व्यापारिक संस्थान पूर्व दिशा में है तो यह बहुत उत्तम है ||

—यदि  पश्चिम दिशा में है तो व्यवसाय में कभी तेजी और कभी मंदी रहेगी ||

—उत्तरमुखी दुकान या ऑफिस या कोई भी व्यापारिक संस्थान से  धन-धान्य की वृद्धि होती है १ मान सम्मान बढ़ता है 

—दक्षिण  दिशा में दुकान या ऑफिस या कोई भी व्यापारिक संस्थान हो तो जातक की दशायें अगर ख़राब हों तो व्यापार में बाधाएं आती हैं १ लेकिन अगर जातक की कुंडली में राहु बलिष्ट या शुभ हो तो दक्षिण  दिशा में दुकान या ऑफिस या कोई भी व्यापारिक संस्थान अत्यंत लाभ देता है ||

—अगर आपकी दुकान या ऑफिस या  व्यापारिक संस्थान में  वास्तु दोष हो अर्थात दुकान की दीवारें तिरछी हों, एक छोटी और एक बड़ी दीवार हो तो मालिक को अशांति बनी रहेगी, व्यापार नहीं चलेगा || इसके लिए वास्तुविज्ञ से परामर्श करके विधि पूर्वक श्रीयंत्र की स्थापना करा लेनी चाहिए ||

—दुकान या ऑफिस के प्रवेश द्वार पर कोई अवरोध नहीं होना चाहिए, यदि है तो  समतल होना चाहिए || ढलान वाला अवरोध है तो लक्ष्मी स्थिर नहीं रहेगी ||

—- दुकान या ऑफिस या किसी  भी व्यापारिक संस्थान का मुहूर्त स्थिर लगन में करना चाहिए १ ज्योतिषाचार्य से चन्द्र और नक्षत्र आदि का विचार करके मुहूर्त निकलवाना चाहिए ||

—-शुभ मुहूर्त में सबसे पहले अपने कुलदेवता, स्थान देवता, इष्ट देवता का ध्यान करते हुए विघ्न नाशक भगवन गणपति की स्थापना करनी चाहिए ||

—-गौमुखी दुकान धन और लाभ की दृष्टि से उत्तम होती है ||

—किसी बीम के नीचे ऑफिस या दुकान नहीं होनी चाहिए, यह जातक के लिए प्रतिकूल परिस्थिति पैदा करेगा और चलते कम में रूकावट देगा, अगर संभव नहीं है तो बीम के दोनों ओर  हरे रंग के गणपति लगायें || 

—-कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री (बिल्डर) के लिए वास्तु टिप्स बिल्डिंग की वेस्ट या ईस्‍ट डायरेक्शन में अपना साइट ऑफिस बनाएं प्लॉट के नॉर्थ-ईस्ट दिशा में रॉ-मैटेरियल ना रखें।

—– दक्षिण-पश्चिम में अधिक खुला स्थान घर के पुरूष सदस्यों के लिए अशुभ होता है, उद्योग धंधों में यह वित्तीय हानि और भागीदारों में झगड़े का कारण बनता है।

—-घर या कारखाने का उत्तर-पूर्व (ईशान) भाग बंद होने पर ईश्वर के आशीर्वाद का प्रवाह उन स्थानों तक नहीं पहुंच पाता। इसके कारण परिवार में तनाव, झगड़े आदि पनपते हैं और परिजनों की उन्नति विशेषकर गृह स्वामी के बच्चों की उन्नति अवरूद्ध हो जाती है। ईशान में शौचालय या अग्नि स्थान होना वित्तीय हानि का प्रमुख कारण है ।

—-व्यापार में आने वाली बाधाओं और किसी प्रकार के विवाद को निपटाने के लिए घर में क्रिस्टल बॉल एवं पवन घंटियां लटकाएं।

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वास्तुविद पंडित दयानन्द शास्त्री (MOB.—-0091–9669290067(M.P.)——Waataaap—0091–9039390067 )के अनुसार  कहाँ हो तहखाना और पार्किंग—-

तहखाना :—- आजकल शहरों में स्थानाभाव के कारण लोग मकान में अंडर ग्राउण्ड तहखाने का निर्माण कर रहे हैं। तलधर अथवा तहखाना कहाँ होना चाहिए। यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है। वास्तु शास्त्र के अनुसार तलधर का निर्माण भूमि के पूर्व में या उत्तर दिशा में करें, तो शुभ है। लेकिन यह भी सुनिश्चित करें कि तलधर आवासीय कदापि न हो अर्थात्‌ उसमें आप तथा आपका परिवार निवास नहीं करता हो। अन्यथा आप हमेशा कष्ट में रहेंगे। तहखाने का निर्माण इस प्रकार करें कि उसके चारों ओर बराबर खाली भूमि छोड़ें। मध्य भाग में निर्माण कार्य करवाएँ। यदि तहखाने का आकार विशाल वस्तु आकार का हो अथवा चूल्हे के आकार का हुआ, तो यकीन मानें आपके तथा आपके परिवार के लिए कतई शुभ नहीं है। भवन का विनाश निश्चित है।

पार्किंग :—- भवन में पार्किंग वास्तु के अनुसार दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम दिशा में ही बनवाएँ।

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वास्तुविद पंडित दयानन्द शास्त्री (MOB.—-0091–9669290067(M.P.)——Waataaap—0091–9039390067 )के अनुसार  छत पर नहीं रखें कबाड़ा, क्यों?

वास्तु शास्त्र हमेशा इस बात पर अधिक ध्यान देता है कि घर में किसी भी तरह से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश न हो। नकारात्मक ऊर्जा परिवार के सदस्यों को प्रभावित करती है, जिसके कई दुष्परिणाम हो सकते हैं।

नीचे कुछ वास्तु टिप्स दिए गए हैं जिनसे आप घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक ऊर्जा को रोक सकते हैं-

1- घर की छत पर कबाड़ा अथवा फालतू सामान न रखें। यदि जरुरी हो तो एक कोने में रखें। कबाड़ा व फालतू सामान रखने से परिवार के सदस्यों के मन-मस्तिष्क पर दबाव पड़ता है। इससे पितृ दोष भी लगता है।

2- घर जितना प्राकृतिक लगेगा उतना ही उसका आभामंडल उन्नत होगा। घर का प्राकृतिक रूप देने के लिए आस-पास पेड़-पौधे, चारों ओर खुला हुआ स्थान, दूर से दिखने वाली दीवारों पर प्राकृतिक पत्थर, गमले आदि का उपयोग करें।

3- घर की आभा को कायम रखने के लिए जरुरी है कि घर का प्लास्टर उखड़ा हुआ न हो। यदि कहीं से थोड़ा सा भी प्लास्टर उखड़ जाए तो तुरंत उसे दुरुस्त करवाएं।

4- घर में कलर करवाते समय इस बात का ध्यान रखें कि पेंट एक सा हो। शेड एक से अधिक हो सकते हैं लेकिन शेड्स का तालमेल ठीक होना चाहिए।

5- घर के आस-पास कोई गंदा नाला, गंदा तालाब, शमशान घाट या कब्रिस्तान नहीं होना चाहिए। इससे भी आभामंडल को अधिक फर्क पड़ता है।6- घर कितना ही पुराना हो, समय-समय पर उसकी मरम्मत, रंग-रोगन आदि कार्य करवाते रहना चाहिए ताकि नयापन व ताजगी बनी रहे।

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वास्तुविद पंडित दयानन्द शास्त्री (MOB.—-0091–9669290067(M.P.)——Waataaap—0091–9039390067 )के अनुसार  बंद घड़ी घर में नहीं रखें, क्यों?

फेंगशुई वास्तु शास्त्र का ही एक रूप है। फेंगशुई से मिलती-जुलती कई बातें भारतीय वास्तु शास्त्र में भी है।

फेंगशुई बिना तोड़-फोड़ आपके घर को वास्तु सम्मत बना देता है। फेंगशुई की कुछ टिप्स नीचें दी गई हैं।

इनसे आप सुख-समृद्धि पा सकते हैं-

1- घर में जो घडिय़ां बंद पड़ी हों, उन्हें या तो घर से हटा दें या चालू करें। बंद घडिय़ां हानिकारक होती हैं। इनसे नकारात्मक ऊर्जा निकलती है।

2- फेंगशुई के अनुसार घर के पूर्वोत्तर कोण में तालाब या फव्वारा शुभ होता है। इसके पानी का बहाव घर की ओर होना चाहिए न कि बाहर की ओर।

3- घर को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त रखने के लिए पूर्व दिशा में मिट्टी के एक छोटे से पात्र में नमक भर कर रखें और हर चौबीस घंटे के बाद नमक बदल दें।

4- अपने ऑफिस में पूर्व दिशा में लकड़ी से बनी ड्रैगन की एक मूर्ति रखें। इससे ऊर्जा एवं उत्साह प्राप्त होगा।

5- घर या दफ्तर में झाड़ू का जब इस्तेमाल न हो रहा हो, तब उसे नजऱों के सामने से हटाकर रखें।

6- यदि घर का मुख्य द्वार उत्तर, उत्तर-पश्चिम या पश्चिम में हो तो उसके ऊपर बाहर की तरफ घोड़े की नाल लगा देना चाहिए। इससे सुरक्षा एवं सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

7- कमरों में पूरे फर्श को घेरते हुए कालीन आदि बिछाने से लाभदायक ऊर्जा का प्रवाह रुकता है।

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ऐसे मिटाएं ऑफिस का वास्तु दोष—

वास्तुविद पंडित दयानन्द शास्त्री (MOB.—-0091–9669290067(M.P.)——Waataaap—0091–9039390067 )के अनुसार  ऑफिस वह स्थान होता है जहां अनेक कर्मचारी एक ही स्थान पर मिलकर एक-दूसरे से सामंजस्य बनाकर कार्य करते हैं। यदि ऑफिस में वास्तु दोष हो तो उसके कर्मचारियों तथा कंपनी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

ऑफिस के वास्तु दोषों को नीचे लिखे उपायों से दूर किया जा सकता है-

1- कार्यालय के मुख्य प्रभारी का कक्ष सबसे पहले नहीं होना चाहिए। प्रवेश द्वार के समीप किसी ऐसे सहायक का कक्ष हो जो आगन्तुकों को जानकारी उपलब्ध करवा सके।

2- कार्यालय में किसी भी कमरे के दरवाजे के ठीक सामने टेबल नहीं होना चाहिए।

3- ऑफिस में हरे या गहरे रंग का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यह रंग रोशनी अधिक खाता है। सफेद, क्रीम या पीला जैसे हल्के रंग का उपयोग करना चाहिए।

4- कार्यालय में पानी की व्यवस्था ईशान कोण में करनी चाहिए। ईशान में पानी तब ही शुभ होगा, जब उसका संबंध जमीन से हो। यदि धरातल से ऊंचे स्थान पर पानी रखना हो तो अपनी सुविधानुसार किसी भी स्थान पर रख सकते हैं।

5- कैशियर को ऐसे स्थान पर नहीं बैठाना चाहिए, जहां से उसे कार्य करते हुए अधिकाधिक कर्मचारी देखें। 6

– कुबेर का वास उत्तर दिशा में माना गया है इसलिए जहां तक संभव हो कैशियर को उत्तर दिशा में ही बैठाएं।

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दुकान के लिए उपयोगी वास्तु टिप्स——

वास्तुविद पंडित दयानन्द शास्त्री (MOB.—-0091–9669290067(M.P.)——Waataaap—0091–9039390067 )के अनुसार वास्तु के सिद्धांत सिर्फ घर को ही नहीं अपितु दुकान आदि को भी प्रभावित करते हैं। दुकान में भी वास्तु का विशेष महत्व है। यदि दुकान वास्तु सम्मत हो तो शुभ साबित होती है।

इसलिए दुकान में नीचे लिखे वास्तु नियमों का पालन करना चाहिए-

1- दुकान का ईशान कोण खाली या हल्का रखें और स्वच्छता बनाएं रखें।

2- दुकान में पीने के पानी की व्यवस्था ईशान कोण, उत्तर या पूर्व में रखें।

3- भारी सामान दक्षिण या पश्चिम में रखें। 4- पूजा स्थल ईशान, उत्तर या पूर्व में बनाएं।

5- दुकान में तराजू पश्चिमी या दक्षिणी दीवार के साथ रखें।

6- आलमारी, शो-केस, फर्नीचर आदि दक्षिण-पश्चिम या नैऋत्य में लगाएं।

7- पूर्वी व उत्तरी क्षेत्र ग्राहकों के आने-जाने के लिए खाली छोड़ें।

– दुकान में माल का स्टोर दक्षिण, पश्चिम या नैऋत्य में कर सकते हैं।

9- विद्युत उपकरण मीटर, स्विच बोर्ड, इनवर्टर आदि आग्नेय कोण में स्थापित करें।

10- दुकान के सामने कोई सीढ़ी, बिजली या फोन का खंबा अथवा पेड़ नहीं होना चाहिए।

वास्तु के सिद्धांत सिर्फ घर को ही नहीं अपितु दुकान आदि को भी प्रभावित करते हैं। दुकान में भी वास्तु का विशेष महत्व है। यदि दुकान वास्तु सम्मत हो तो शुभ साबित होती है।

इसलिए दुकान में नीचे लिखे वास्तु नियमों का पालन करना चाहिए

1- दुकान का ईशान कोण खाली या हल्का रखें और स्वच्छता बनाएं रख

2- दुकान में पीने के पानी की व्यवस्था ईशान कोण, उत्तर या पूर्व में रखें।

3- भारी सामान दक्षिण या पश्चिम में रखें।

4- पूजा स्थल ईशान, उत्तर या पूर्व में बनाएं।

5- दुकान में तराजू पश्चिमी या दक्षिणी दीवार के साथ रखें।

6- आलमारी, शो-केस, फर्नीचर आदि दक्षिण-पश्चिम या नैऋत्य में लगाएं।

7- पूर्वी व उत्तरी क्षेत्र ग्राहकों के आने-जाने के लिए खाली छोड़ें।

8- दुकान में माल का स्टोर दक्षिण, पश्चिम या नैऋत्य में कर सकते हैं।

9- विद्युत उपकरण मीटर, स्विच बोर्ड, इनवर्टर आदि आग्नेय कोण में स्थापित करें।

10- दुकान के सामने कोई सीढ़ी, बिजली या फोन का खंबा अथवा पेड़ नहीं होना चाहिए।

11 — यदि दुकान में चोरी होती है तो दुकान की चौखट के पास पूजा करके मंगल यंत्र स्थापित करें।

12- दुकान में मन नहीं लगता तो श्वेत गणपति की मूर्ति विधिवत्‌ पूजा करके मुख्य द्वार के आगे और पीछे स्थापित करना चाहिए। 

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ऐसे दूर करें फैक्ट्री का वास्तु दोष—————-

वास्तुविद पंडित दयानन्द शास्त्री (MOB.—-0091–9669290067(M.P.)——Waataaap—0091–9039390067 )के अनुसार घर की तरह ही फैक्ट्री व कारखाना आदि में भी वास्तु शास्त्र बहुत उपयोगी है। यदि फैक्ट्री वास्तु सम्मत हो तो बेहद सफल साबित होती है और यदि वास्तु सम्मत न हो तो नुकसानदायक भी हो जाती है।

नीचे लिखे वास्तु नियमों को अपनाकर आप भी फैक्ट्री को वास्तु सम्मत बना सकते हैं-

1- फैक्ट्री का उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र भारी नहीं होना चाहिए। यह नकारात्मक ऊर्जा देता है।

2- पड़ोस की फैक्ट्री का मुख्य द्वार यदि आपकी फैक्ट्री के मुख्य द्वार की ठीक विपरीत दिशा में हो, तब भी नकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

3- यदि उत्तर की सड़क में पूर्व से पश्चिम की ओर ढलान हो या नैऋत्य क्षेत्र का दक्षिणी भाग खुला हो तो भी नकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

4- फैक्ट्री के दक्षिण या वायव्य कोण में ऊर्जा उत्पादन या ऊर्जा-गमन संबंधी उपकरण नहीं लगाए जाने चाहिए। लेबर कैंटीन या रसोई घर भी इन क्षेत्रों में नहीं बनाएं।

5- फैक्ट्री(कारखाना) लगाने से पहले बाउण्ड्री वॉल बनवानी चाहिए फिर मशीन आदि का फाउण्डेशन बनवाएं।

6- वर्षा का पानी दक्षिण-पश्चिम से उत्तर या ईशान कोण में निकलना चाहिए।

7- भारी मशीनें पश्चिम-दक्षिण में, भट्टी, बॉयलर, जनरेटर सेट, ट्रांसफार्मर, बिजली मीटर आदि आग्नेय कोण में लगाएं।

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सही दिशा में रखें धन तो होगी तेजी से वृद्धि ———-

वास्तुविद पंडित दयानन्द शास्त्री (MOB.—-0091–9669290067(M.P.)——Waataaap—0091–9039390067 )के अनुसार  उत्तर दिशा को वास्तु शास्त्र के अनुसार धन के देवता कुबेर का स्थान माना जाता है। उत्तर दिशा का प्रभाव गृहस्वामी के धन की सुरक्षा और समृद्धि देने वाला माना जाता है। मतलब वास्तु शास्त्र के अनुसार गृहस्वामी को अपने नकद धन को उत्तर दिशा में रखना चाहिए। नकद धन के लिए अलग से कमरा बनाना आज के जमाने में तो संभव नहीं है। यह तो सिर्फ पुराने जमाने में राजे रजवाड़ो के लिए संभव था। इसलिए गृहस्थ को अपना धन उत्तर दिशा के बेडरुम में रखना चाहिये। नकद, गहनों एवं अन्य किमती चीजों को उत्तर दिशा में किसी स्थान पर रखना बहुत शुभ फल देने वाला होता हैं लेकिन उत्तर दिशा के पूजा स्थान के आसपास मे इसका स्थान उत्तम होता है धन को इस स्थान पर रखने से धन में तेजी से वृद्धि होने लगती है। 

इसमें एक अलग मत और भी है कुछ वास्तुशास्त्रीयों के अनुसार नकद धन को उत्तर में रखना चाहिए और रत्न, आभुषण आदि दक्षिण में रखना चाहिये। ऐसा इसलिए माना जाता है क्योंकि नकद धन आदि हल्के होते है इसलिए इन्हे उत्तर दिशा में रखना वृद्धिदायक माना जाता है। रत्न आभुषण में वजन होता है इसलिए उन्हे कहीं भी नहीं रखा जा सकता है। इसके लिए तिजोरी या अलमारी की आवश्कता होती है और ये काफी भारी होती है। इसलिए दक्षिण दिशा में रख उसमें आभुषण आदि रखने को उतम माना जाता है।

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गृह प्रवेश से पहले जरूरी है———

क्या आप नए घर में प्रवेश करने जा रहे हैं? 

वास्तुविद पंडित दयानन्द शास्त्री (MOB.—-0091–9669290067(M.P.)——Waataaap—0091–9039390067 )के अनुसार आप चाहते हैं कि नए घर में आपका जीवन खुशियों से भर जाए,हर परेशानी आपके जीवन को अलविदा कह जाए तो गृह प्रवेश से पहले नीचे लिखे सभी उपाय जरुर करें इससे आपका नया घर सकारात्मक उर्जा से भर जाएगा।

– वास्तु शांति कराएं, विधिवत वास्तु पूजन कराएं।

– गृह प्रवेश करें जिससे उन्नति होगी एवं समृद्धि होगी।

विधिवत गृह प्रवेश कराएं, वास्तु जप जरूर कराएं।

– देवी दुर्गा की अक्षत, लाल पुष्प, कुमकुम से पूजा करें। प्रसाद चढ़ाएं, धूप, दीप दिखाएं एवं जप करें। निश्चित ही घर में सुख, शांति एवं समृद्धि होगी। – दुर्गासप्तशती का नौ दिन तक पाठ विधिवत घी का अखंड दीपक लगाकर, उपरांत नौ कन्याओं का भोजन (2-10 वर्ष की कन्या) करवाने से जीवन सुखद होता है। –

महामृत्युंजय मंत्र का जप करें, इससे भी लाभ प्राप्त होता है।

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नहीं आएगी कभी आर्थिक परेशानी——

वास्तुविद पंडित दयानन्द शास्त्री (MOB.—-0091–9669290067(M.P.)——Waataaap—0091–9039390067 )के अनुसार आजकल इस बढ़ती महंगाई के जमाने में अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवारों को पैसों की तंगी का सामना करना पड़ता है। अगर आप भी आर्थिक रूप से परेशान है। पैसों की तंगी से जीवन मुश्किल हो गया है।

कुछ वास्तुटिप्स ऐसे हैं जो आपको पैसों की कमी से छूटकारा दिलवा सकते हैं।

– घर में लक्ष्मी का निर्बाध आगमन होता रहे इसके लिए हो सके तो घर की पूर्व दिशा में बांस का पेड़ लगाएं, अगर ऐसा करना संभव न हो तो मुख्य द्वार के दोनों तरफ छह इंच लंबी बांस की लकड़ी लटकाएं। जीवन में आर्थिक परेशानियां कभी नहीं आएगी।

– घर के मुख्यद्वार के पर श्री गणेश की मूर्ति लगाएं।

– तिजोरी में मोती शंख लाल कपड़े में बांधकर जरूर रखें।

– शनिवार के दिन घर की विशेष रुप से साफ-सफाई जरूर करें।

– अग्रिकोण में यदि कोई जलस्त्रोत हो तो उसे तुरंत वहां से हटवाएं।

– आपके फ्लैट का मुख्य द्वार यदि लिफ्ट के सामने खुलता है तो ऐसे परिवार के मुखिया का भाग्य और भविष्य दुर्भाग्य की गर्त में चला जाता है। इस विषम परिस्थिति से बचने के लिए मुख्य द्वार पर अष्टकोणीय दर्पण को लगवाएं।

– घर का मुख्य द्वार किसी निर्माण की वजह से ढक जाए या दूर से दिखाई न दे तो इस दुष्प्रभाव से बचने के लिए घर के मुख्य द्वार के नीचे छह सुनहरे सिक्के पंक्तिबद्ध होकर गाडें।

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उपरोक्त के अतिरिक्त अनेकों वास्तु दोष और उनका निवारण है जो यहाँ लिखना संभव नहीं है || 

आप आधिक (सशुल्क) जानकारी के लिए आप मेरे ई -मेल एड्रेस/वाट्सअप या मोबाइल  पर कांटेक्ट कर सकते हैं —

—-पंडित ”विशाल” दयानन्द शास्त्री,

मेरा कोंटेक्ट नंबर हे—-

MOB.—-0091–9669290067(M.P.)—

—Waataaap—0091–9039390067…

मेरा Email:—-

—-vastushastri08@gmail.com;

—-vastushastri08@hotmail.com;

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