शनिदेव पर लेख अलग अलग विषय पर

शनि का वाहन भी तय करता है आपका भविष्य जानें
कैसे–शनि के वाहन का साढ़ेसाती पर प्रभाव
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ज्योतिष एवं धार्मिक शास्त्रों में शनिदेव के रूप,
कार्यप्रणाली तथा कथाओं का वर्णन आता है।
शास्त्रों में ऐसा वर्णित है कि सूर्यपुत्र शनि का
कार्य प्रकृति में संतुलन पैदा करना तथा हर जीव का उसके कर्मो के अनुसार न्याय करना है। शनि मात्र पापियों और दुराचारियों को ही पीड़ित करते हैं।

ज्योतिष तथा दार्शनिक शास्त्र के कई नवीन
शोधकर्ताओं ने शनि कि गोचर अनुसार राशि
परिवर्तन कि तिथि, नक्षत्र में गोचर तथा नक्षत्र
परिवर्तन अनुसार शनिदेव के नौ वाहनों का उल्लेख किया है। पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार शनिदेव के हर वाहन का अलग अर्थ होता है तथा हर वाहन का शुभाशुभ फलादेश है। शास्त्रानुसार शनि जिस जातक कि कुंडली में जिस वाहन पर सवार होते हैं वह जातक उसी अनुसार फल पाता है।
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हमारे वेदिक शास्त्रो मे शनि के नौ वाहन कहे गये है. शनि की साढेसाती के दौरान शनि जिस वाहन पर सवार होकर व्यक्ति की कुण्डली मे प्रवेश करते है ।
उसी के अनुरुप शनि व्यक्ति को इस अवधि मे फल देते है ।। वाहन जानने के लिए निम्न विधि से शनि साढ़ेसाती के वाहन का निर्धारण करते हैं
शनि के वाहन निर्धारण का तरीका –
01–
व्यक्ति को अपने जन्म नक्षत्र की संख्या और शनि के राशि बदलने की तिथि की नक्षत्र संख्या दोनो को जोड कर योगफल को नौ से भाग करना चाहिए. शेष संख्या के आधार पर शनि का वाहन निर्धारित होता है ।।
शनि का वाहन जानने की एक अन्य विधि भी
प्रचलन मे है. इस विधि मे निम्न विधि अपनाते हैं
शनि के वाहन निर्धारण का तरीका —
0..2
शनि के राशि प्रवेश करने कि तिथि संख्या+ ऩक्षत्र
संख्या +वार संख्या +नाम का प्रथम अक्षर संख्या
सभी को जोडकर योगफल को 9 से भाग किया
जाता है. शेष संख्या शनि का वाहन बताती है.
दोनो विधियो मे शेष 0 बचने पर संख्या नौ समझनी चाहिए।

अगर शेष संख्या 1 होने पर शनि गधे पर सवार होते है । इस स्थिति मे मेहनत के अनुसार फल मिलते है।

शेष सँख्या 2 होने पर शनि घोडे पर सवार होते है. और व्यक्ति को शत्रुओ पर विजय दिलाते है।

शेष सँख्या 3 होने पर शनि को हाथी पर सवार कहा गया है ।। इस अवधि मे आशा के विपरित फल मिलते है ।।

शेष सँख्या 4 होने पर शनि को भैसे पर सवार बताया गया है । ऎसा होने पर व्यक्ति को मिले जुले फल मिलते है।।

शेष सँख्या 5 होने पर शनि सिंह पर सवार होते है.
व्यक्ति अपने शत्रुओ को हराता है।।

शेष सँख्या 6 होने पर शनि सियार पर सवार माने गये है। इस दौरान शनि अप्रिय समाचार देते है।।

शेष सँख्या 7 होने पर शनि का वाहन कौआ कहा गया है।। साढेसाती की अवधि मे कलह बढती है।।

शेष सँख्या 8 होने पर शनि को मोर पर सवार बताया गया है ।।व्यक्ति को शुभ फल मिलते है।

शेष सँख्या 9 होने पर शनि का वाहन हँस कहा गया है व शनि व्यक्ति को सुख देते है।

विशेष शेष संख्या 0 आने पर सँख्या 9 समझनी चाहिए और शनि का वाहन हँस समझना चाहिए।।

आइये जाने शनि की साढेसाती के फल (परिणाम) या वाहन के फल—-
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जिस व्यक्ति को शनि की साढेसाती के चरण के फल अशुभ मिल रहे है तथा शनि का वाहन भी शुभ नही है तो इस स्थिति मे साढेसाती के दौरान व्यक्ति को विशेष रुप से सावधान रहना
चाहिए।।

इस स्थिति मे व्यक्ति के सामने अनेक
चुनोतियाँ आती है जिनका व्यक्ति को हिम्मत के
साथ सामना करना चाहिए।।

पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति को साढेसाती के अशुभ फल मिल रहे हो तथा शनि का वाहन शुभ हो तो इस स्थिति मे साढेसाती के कष्टो मे कमी आती है और व्यक्ति को मिला जुला फल मिलता है ।।

जिस व्यक्ति के लिए शनि का वाहन शुभ हो तथा
साढेसाती के चरण के फल भी शुभ हो तो इस स्थिति मे शुभता बढ जाती है पर साढेसाती का चरण शुभ तो और वाहन का फल अशुभ आ रहा हो तो व्यक्ति को मिल जुले फल मिलते है।।
शनि का वाहन कुछ व्यक्तियो के लिए शुभ फलकारी है तथा कुछ के लिए अशुभ फल देने वाला होता है ।।

ध्यान रखें प्रत्येक व्यक्ति के लिए शनि के फल अलग अलग हो सकते है ।।

शनि वाहन :— गधा —
व्यक्ति के लिए शनि का वाहन गधा होने पर शनि
की साढेसाती मे मिलने वाले शुभ फलो मे कमी
होती है. शनि के इस वाहन को शुभ नही कहा गया है ।। शनि की साढेसाती की अवधि मे व्यक्ति को कार्यो मे सफलता प्राप्त करने के लिए काफी प्रयास करना होता है । व्यक्ति को मेहनत के अनुरुप ही फल मिलते है इसलिए व्यक्ति का अपने कर्तव्य का पालन करना हितकर होता है।।

शनि वाहन :– घोडा–
शनि का वाहन घोडा होने पर व्यक्ति को शनि की
साढेसाती मे शुभ फल मिलते है। इस दौरान व्यक्ति समझदारी व अक्लमंदी से काम लेते हुए अपने शत्रुओ पर विजय हासिल करता है व व्यक्ति अपने बुद्धिबल से अपने विरोधियों को परास्त करने मे सफल रहता है ।। घोडे को शक्ति का प्रतिक माना गया है इसलिए इस अवधि मे व्यक्ति के उर्जा व जोश मे बढोतरी होती है ।।

शनि वाहन :— हाथी —
जिस व्यक्ति के लिए शनि का वाहन हाथी होता
है. उस व्यक्ति के लिए शनि के वाहन को शुभ नही
कहा गया है । इस दौरान व्यक्ति को अपनी उम्मीद से हटकर फल मिलते है। इस स्थिति मे व्यक्ति को साहस व हिम्मत से काम लेना चाहिए तथा विपरित परिस्थितियों मे भी घबराना नहीं चाहिए ।।

शनि वाहन : –भैसा —
शनि का वाहन भैंसा आने पर व्यक्ति को मिले-जुले फल मिलते है. शनि की साढेसाती की अवधि मे व्यक्ति को संयम व होशियारी से काम करना
चाहिए. इस समय मे बातो को लेकर अधिर व व्याकुल होना व्यक्ति के हित मे नही होता है। व्यक्ति को इस समय मे सावधानी से काम करना चाहिए। अन्यथा कटु फलो मे वृ्द्धि होने की संभावना होती है ।।

शनि वाहन : –सिंह–
शनि का वाहन सिँह व्यक्ति को शुभ फल देता है-
सिँह वाहन होने पर व्यक्ति क समझदारी व चतुराई से काम लेना चाहिए। ऎसा करने से व्यक्ति अपने शत्रुओ पर विजय प्राप्त करने मे सफल होता है। अतः इस अवधि मे व्यक्ति को अपने विरोधियोँ से घबराने की जरुरत नही होती है ।।

शनि वाहन : —सियार—
शनि की साढेसाती के आरम्भ होने पर शनि का
वाहन सियार होने पर व्यक्ति को मिलने वाले फल
शुभ नही होते है। इस स्थिति मे व्यक्ति को साहस व हिम्मत से काम लेना चाहिए क्योकि इस दौरान
व्यक्ति को अशुभ सूचनाएं अधिक मिलने की
संभावनाएं बनती है ।।

शनि वाहन : —कौआ—
व्यक्ति के लिए शनि का वाहन कौआ होने पर उसे
शान्ति व सँयम से काम लेना चाहिए। परिवार मे
किसी मुद्दे को लेकर विवाद व कलह की स्थिति को टालने का प्रयास करना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा बातचित कर बात को बढने से रोकने की कोशिश करनी चाहिए ।। इससे कष्टो मे कमी होती है।।

शनि वाहन :– मोर–
शनि का वाहन मोर व्यक्ति को शुभ फल देता है- इस समय मे व्यक्ति को अपनी मेहनत के साथ साथ भाग्य का साथ भी मिलता है।। शनि की साढेसाती की अवधि मे व्यक्ति अपनी होशियारी व समझदारी से परेशानियों को कम करने मे सफल होता है। इस दौरान व्यक्ति मेहनत से अपनी आर्थिक स्थिति को भी सुधार पाता है।।

शनि वाहन :–हंस—
जिस व्यक्ति के लिए शनि का वाहन हँस होता है
उनके लिए शनि की साढेसाती की अवधि बहुत शुभ होती है । इस मे व्यक्ति बुद्धिमानी व मेहनत से काम करके भाग्य का सहयोग पाने मे सफल होता है । यह वाहन व्यक्ति के आर्थिक लाभ व सुखो को बढाता है । शनि के सभी वाहनो मे इस वाहन को सबसे अधिक अच्छा कहा गया है ।।
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इन सरल उपाय से कीजिये शनिदेव को प्रसन्न—-
शनिवार को यह उपाय करने से शनिदेव के सभी दोष समाप्त हो जाते हैं ।।

पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार यदि किसी की राशि में शनि की साढ़ेसाती या ढय्या चल रही है तो शनि को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के उपाय बताए हैं। इन उपायों में अधिकांश उपाय शनिवार के दिन किए जाते हैं। शनिवार शनिदेव का खास दिन है और इस दिन जो भी व्यक्ति शनि को प्रसन्न के लिए पूजन करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।

पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार शनिदेव सूर्य पुत्र हैं और वे अपने पिता सूर्य को शत्रु भी मानते हैं। शनि देव का रंग काला है और उन्हें नीले तथा काले वस्त्र आदि विशेष प्रिय हैं। हमारी वेदिक ज्योतिष में शनि देव को न्यायाधीश बताया गया है। व्यक्ति के सभी कर्मों के अच्छे-बुरे फल शनि महाराज ही प्रदान करते हैं। साढ़ेसाती और ढय्या के समय में शनि व्यक्ति को उसके कर्मों का फल प्रदान करते हैं।।

*** इन उपायों से होगा लाभ—
*****शनि की साढ़ेसाती और ढय्या या अन्य कोई शनि दोष हो तो हर शनिवार को किसी भी पीपल के वृक्ष को दोनों से स्पर्श करें। स्पर्श करने के साथ ही पीपल की सात परिक्रमाएं करें। परिक्रमा करते समय शनिदेव का ध्यान करना चाहिए। किसी शनि मंत्र (ऊँ शंशनैश्चराय नम:) का जप करें या ऊँ नम: शिवाय का जप करें। इस प्रकार हर शनि को करें।
**** शनि को मनाने का एक और सबसे अच्छा उपाय है कि हर मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
*****हनुमानजी के दर्शन और उनकी भक्ति करने से शनि के सभी दोष समाप्त हो जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार शनि किसी भी परिस्थिति में हनुमानजी के भक्तों को परेशान नहीं करते हैं।
******इन उपायों के साथ ही हर सप्ताह में केवल एक ही दिन शनिवार को शनिदेव के निमित्त तेल का दान करना चाहिए। तेल का दान करने से पहले व्यक्ति को एक कटोरी में तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखना चाहिए। इसके बाद तेल का दान कर देना चाहिए। इस उपाय से भी शनि के दोष समाप्त हो जाते हैं।

*****उक्त प्रयोग का अलग अलग राशी और कुंडली में शनि की स्थिति अनुसार परिणाम भिन्न हो सकते हैं।।। किसी भी पूजा पाठ और आराधना का परिणाम आपकी आस्था और विश्वास पर संभव हैं।।
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जानिए की शनि कैसे बनाता हैं इंजिनियर या चार्टेड एकाउंटेंट???

शनि गणितज्ञों को विशेष लाभकारी होता है।
यदि किसी जातक की कुंडली में शनि यदि उच्च का, स्वराशि या मित्र की राशि में कर्म, लग्न, चतुर्थ, पंचम या सप्तम हो तो जातक इंजीनियर या चार्टर्ड एकाउंटेंट होता है।

ठीक वेसे ही यदि जातक की कुंडली में शनि कमजोर हो तो इन्हीं लोगों का सहयोगी होता है या इसी क्षेत्र में अधिनस्थ होकर कार्य करता है। शनि का धनात्मक या ऋणात्मक प्रभाव ही आपको इन क्षेत्रों में सफलता दिला सकता है।

पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार यदि किसी जातक की कुंडली में शनि मकर या कुंभ राशि में स्थित होकर एकादश भाव में स्थित हो तो तब शनि की महादशा साढ़ेसाती या ढैय्या लगता है तो जातक का गणित की तरफ अत्यधिक रुझान होता है और उसकी यही रुची उसे इन पदों पर सफलता के साथ विराजित करती है। शनि प्रभाव वाले जातक मानसिक रूप से सुदृढ़ होते हैं। गणितीय पहेलियों को सुलझाना तथा उसको समझना भी उनके लिए काफी आसान होता है

जिस की सभी जानते हैं शनि को न्याय का देवता माना गया है। शनि को decision making माना गया है। यह ग्रह जिस पर अनुकूल होता है उसमें भी यही गुण अधिक मात्रा में विकसित होता है।

इंजीनियरिंग(अभियांत्रिकी) शिक्षा में आसानी से प्रवेश शनि के अनुकूल होने से हो जाता है। यदि कोई जातक इंजीनियरिंग (अभियांत्रिकी) में प्रवेश चाहता हो और उसमें बाधा आ रही हो तो उसे शनि ग्रह के प्रसन्न करने के उपाय करने चाहिए।।।

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