चन्द्र ग्रहण 08 अक्टूबर 2014 (बुधवार) पर क्या करें …क्या ना करें..???

चन्द्र ग्रहण 08 अक्टूबर 2014 (बुधवार) पर क्या करें …क्या ना करें..???
इस चन्द्र ग्रहण का किन राशियों पर होगा क्या प्रभाव..???

8 अक्टूबर 2014 (बुधवार) को चन्द्रग्रहण के रूप में होगा। इस दिन आश्विन मॉस की शुक्ल पक्षीय पूणिमा रहेगी..यह चन्द्रग्रहण भारत में देखा जा सकेगा।
पंजाब,पश्चिमी राजस्थान,संपूण गुजरात,कर्नाटक,केरल के पश्चिमी भाग,पश्चिमी मध्य प्रदेश एवं पश्चिमी महाराष्ट्र में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा..

पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार ( मोब.–09024390067 ) यह ग्रहण मीन राशि और उत्तरा भाद्रप्रद नक्षत्र पर प्रभावी रहेगा..इस राशि और नक्षत्र के जातक विशेष सावधानी रखें..इस पर दुष्प्रभाव/कुप्रभाव अधिक होगा..

इस दिन ग्रहण का स्पर्श दिन में दोपहर दो बजकर ५० मिनट से शुरू होगा..
मध्यकाल दिन में दोपहर चार बजकर तीस मिनट तक रहेगा..
मोक्ष काल सायंकाल ०६ बजकर ०५ मिनट पर होगा..
==ध्यान देवें–जिन स्थानो पर यह चन्द्र ग्रहण दिखाई देगा उन शहरों में यम, नियम एवं सूतक प्रातः ०५ बजकर ४५ मिनट से लागु होन्गटे..

नई दिल्ली में खण्डग्रास चन्द्र ग्रहण का समय—

चन्द्र ग्रहण प्रारम्भ (चन्द्रोदय के साथ) – १८:०१:५१
चन्द्र ग्रहण समाप्त – १८:०४:२०

स्थानीय ग्रहण की अवधि – ०० घण्टे ०२ मिनट २९ सेकेंड
चन्द्रोदय – १८:०१:५१

उपच्छाया से पहला स्पर्श – १३:४५:३३
प्रच्छाया से पहला स्पर्श – १४:४४:४८
खग्रास प्रारम्भ – १५:५५:१०
परमग्रास चन्द्र ग्रहण – १६:२४:३६
खग्रास समाप्त – १६:५३:५९
प्रच्छाया से अन्तिम स्पर्श – १८:०४:२०
उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श – १९:०३:४२

खग्रास की अवधि – ०० घण्टे ५८ मिनट ४९ सेकेंड
खण्डग्रास की अवधि – ०३ घण्टे १९ मिनट ३३ सेकेंड
उपच्छाया की अवधि – ०५ घण्टे १८ मिनट १० सेकेंड

हिंदू धर्म के मतानुसार चंद्र ग्रहण का प्रभाव शुभ नहीं माना जाता। ग्रहण के अशुभ प्रभावों से निजात पाने के लिए ग्रहण के दिन गरीबों को दान दें, भोजन कराएं, गायत्री मंत्र का जाप करें। अपने ईष्‍ट देव की आराधना करें और उपवास रखें। ग्रहण के उपरांत स्‍नान कर भोजन ग्रहण करें।

पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार ( मोब.–09024390067 ) इस चन्द्र ग्रहण 08 अक्टूबर 2014 (बुधवार) का इन राशियों पर यह होगा प्रभार/असर—-

मेष राशि –दुर्घटना की संभावना,
वृषभ–लाभ होगा,
मिथुन–लाभ होगा,
कर्क राशि–मानहानि की संभावना,
सिंह राशि–अपमान की संभावना,
कन्या राशि–दुःख भरे समाचार की संभावना,
तुला–सुख मिलेगा,
वृश्चिक राशि–चिंता बढ़ेगी,
धनु राशि– व्यथा-परेशानी बढ़ेगी,
मकर राशि–धन लाभ होगा,
कुम्भ राशि–हानि की संभावना,
मीन राशि–हानि की संभावना….
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क्या सावधानियां रखें ग्रहण के दोरान..???

यदि आप गर्भवती हैं, या आपके घर में कोई महिला गर्भवती है या फिर आप इस साल फेमिली प्‍लानिंग करने जा रहे हैं, तो इन तिथियों को कैलेंडर में जरूरनोट कर लें।
इसके अलावा नया मकान, या नई दुकान लेने जा रहे हैं, तो इन ति‍थियों पर लेने से बचें।
इन तिथियों पर आपकी करियर लाइव, निजी जीवन, आय के स्रोत, परिवार, प्रेम-संबंध, आदि में व्‍यापक परिवर्तन हो सकते हैं। खुशियां आ सकती हैं या हो सकता है दु:ख घर कर जाये, लिहाजा आपको इन तिथियों पर विशेष सावधानी बरतनी होगी।
बेहतर होगा यदि उन सभी बातों का पालन करें, जो बड़े बुजुर्ग बताते हैं।

गर्भवती स्त्रियों के लिये सावधानी——
पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार ( मोब.–09024390067 ) गर्भवती स्त्री को सूर्य एवं चन्द्रग्रहण नहीं देखना चाहिए, क्घ्योकि उसके दुष्घ्प्रभाव से शिशु अंगहीन होकर विकलांग बन जाता है । गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है । इसके लिए गर्भवती के उदर भाग में गोबर और तुलसी का लेप लगा दिया जाता है, जिससे कि राहू केतू उसका स्घ्पर्श न करें ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्री को कुछ भी कैंची, चाकू आदि से काटने को मना किया जाता है , और किसी वस्घ्त्र आदि को सिलने से मना किया जाता है । क्घ्योंकि ऐसी मान्घ्यता है कि ऐसा करने से शिशु के अंग या तो कट जाते हैं या फिर सिल (जुड़) जाते हैं ।

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पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार ( मोब.–09024390067 ) क्या सावधानियां रखे ग्रहण के समय..???
====ग्रहण के सोने से रोग पकड़ता है किसी कीमत पर नहीं सोना चाहिए।
===ग्रहण के समय मूर्त्दृ त्घ्यागने से घर में दरिद्रता आती है ।
====शौच करने से पेट में क्रीमी रोग पकड़ता है । ये शार्स्घ्त्की बातें हैं इसमें किसी का लिहाज नहीं होता।
===ग्रहण के समय संभोग करने से सूअर की योनी मिलती है ।
===ग्रहण के समय किसी से धोखा या ठगी करने से सर्प की योनि मिलती है ।
==== जीव-जन्घ्तु या किसी की हत्घ्या करने से नारकीय योनी में भटकना पड़ता है ।
====ग्रहण के समय भोजन अथवा मालिश किया तो कुष्घ्ठ रोगी के शरीर में जाना पड़ेगा।
===ग्रहण के समय बाथरूम में नहीं जाना पड्रे ऐसा खायें।
===ग्रहण के दौरान मौन रहोगे, जप और ध्घ्यान करोगे तो अनंत गुना फल होगा।

पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार ( मोब.–09024390067 ) ग्रहण विधि निषेध ===
===सूर्यग्रहण मे ग्रहण से चार प्रहर पूर्व और चंद्र ग्रहण मे तीन प्रहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिये । बूढे बालक और रोगी एक प्रहर पूर्व तक खा सकते हैं ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चंद्र, जिसका ग्रहण हो, उसका शुध्द बिम्बदेख कर भोजन करना चाहिये । (१ प्रहर = ३ घंटे)
=== ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोडना चाहिए । बाल तथा वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहियेव दंत धावन नहीं करना चाहिये ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मल मूत्र का त्याग करना, मैथुन करना औरभोजन करना – ये सब कार्य वर्जित हैं ।
===.ग्रहण के समय मन से सत्पात्र को उद्दयेश्य करके जल मे जल डाल देना चाहिए । ऐसा करने से देनेवालेको उसका फल प्राप्त होता है और लेनेवाले को उसका दोष भी नहीं लगता।
===कोइ भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये और नया कार्य शुरु नहीं करना चाहिये ।
===ग्रहण वेध के पहले जिन पदार्थाे मे तिल या कुशा डाली होती है, वे पदार्थ दुषित नहीं होते । जबकि पके हुएअन्न का त्याग करके गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिये ।
===ग्रहण वेध के प्रारंभ मे तिल या कुशा मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यावश्यक परिस्थिति मे ही करना चाहिये और ग्रहण शुरु होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिये ।
====ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरुरतमंदों को वस्त्र दान से अनेक गुना पुण्य प्राप्तहोता है ।
====तीन दिन या एक दिन उपवास करके स्नान दानादि का ग्रहण में महाफल है, किंतु संतानयुक्त ग्रहस्थको ग्रहणऔर संक्रान्ति के दिन उपवास नहीं करना चाहिये।
==== स्कन्द पुराण के अनुसार ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से बारह वर्षाे का एकत्र किया हुआसब पुण्यनष्ट हो जाता है ।
===. देवी भागवत में आता है कि भूकंप एवं ग्रहण के अवसर पृथ्वी को खोदना नहीं चाहिये ।
====देवी भागवत में आता हैः सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुतुन्द नामक नरक में वास करता है। फिर वह उदर रोग से पीड़ित मनुष्य होता है फिर गुल्मरोगी, काना और दंतहीन होता है। ग्रहण के अवसर पर पृथ्घ्वी को नहीं खोदना चाहिए ।
=====पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार ( मोब.–09024390067 ) सूर्यग्रहण में ग्रहण से चार प्रहर (12 घंटे) पूर्व और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर ( 9 घंटे) पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बूढ़े, बालकक और रोगी डेढ़ प्रहर (साढ़े चार घंटे) पूर्व तक खा सकते हैं। ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो, उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए।
==ग्रहण वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। जबकि पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए।
===ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जररूतमंदों को वस्त्र और उनकी आवश्यक वस्तु दान करने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।
====ग्रहण के समय कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।
===ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से सूअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है। गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए।

पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार ( मोब.–09024390067 ) ग्रहण के समय केसे करें मंत्र सिद्धि .???
1. ग्रहण के समय “ घ् ह्रीं नमः “ मंत्र का 10 माला जप करें इससे ये मंत्र सिद्धि हो जाता है । फिर अगर किसी का स्वभाव बिगड़ा हुआ है …. बात नहीं मान रहा है …. इत्यादि ….. ।
तो उसके लिए हम संकल्घ्प करके इस मंर्त्का उपयोग कर सकते हैं ।
2. श्रेष्ठ साधक उस समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके श्घ् नमो नारायणायश् मंत्र का आठ हजार जप करने के पश्चात ग्रहणशुद्ध होने पर उस घृत को पी ले। ऐसा करने से वह मेधा (धारणाशक्ति), कवित्व शक्ति तथा वाक सिद्धि प्राप्त कर लेता है।
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===पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार ( मोब.–09024390067 ) चन्द्र ग्रहण के दौरान पूजा और स्नान मान्यता है कि चन्द्र ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, अनुष्ठान, दान आदि का अत्यधिक फल मिलता है। मत्स्य पुराण के अनुसार ग्रहण काल के दौरान जातक को श्वेत पुष्पों और चन्दन आदि से चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए।
चन्द्र ग्रहण के खत्म होने पर जातक को स्नान और दान (विशेषकर गाय का दान) करना चाहिए।हिंदू धर्म की मान्‍यता के अनुसार चंद्र ग्रहण अच्‍छा नहीं माना जाता है। ग्रहण के कुप्रभाव से बचने के लिये इन तिथियों पर आप गरीबों को दान दें। गरीबों को भोजन करायें, मंत्रों का उच्‍चारण करें, जिनमें गायत्री मंत्र सर्वश्रेष्‍ठ फल देगा। अपने ईष्‍ट देव का ध्‍यान करें। भोजन नहीं करें।

ग्रहण के बाद स्‍नान करें और ताज़ा भोजन करें। साथ ही यदि आप गर्भवती हैं तो आपके होने वाले बच्‍चे पर ग्रहण के प्रभाव से बचाने के लिये एकांत स्‍थान पर बैठ जायें और ईश्‍वर का ध्‍यान करें। यह काम आप सूर्य ग्रहण के समय भी करें।
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ग्रहण काल में चन्द्र के प्रभावों को शुभ करने के लिये चन्द्र की वस्तुओं का दान किया जाता है –

पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार ( मोब.–09024390067 ) शुभ प्रभाव प्राप्त करने के लिए निम्न उपाय करे –
—ग्रहण में बालक, वृद्ध और रोगी के लिए कोई नियम शास्त्रों में नहीं बताया गया है ।
—-चिटियों को पिसा हुआ चावल व आट्टा डाले ।
— चन्द्र की दान वस्तुओं में मोती, चांदी, चावल, मिसरी, सफेद कपड़ा,सफेद फूल, शंख, कपूर,श्वेत चंदन, पलाश की लकड़ी, दूध, दही, चावल, घी, चीनी आदि का दान करना शुभ रहेगा ,
—कुंडली के अनुसार चन्द्रमा को मन और माँ का कारक माना गया है जन्म कुंडली में चन्द्रमा जिस भाव में हो उसके अनुसार दान करना चाहिए . चन्द्र वृष राशी में शुभ और वृश्चिक राशी में अशुभ होता है , जब चन्द्र जन्म कुण्डली मे उच्च का या अपने पक्के भाव का हो तब चन्द्र से सम्बन्धित वस्तुऑ का दान नही करना चाहिए, अगर चन्द्र दितीय चतुर्थ भाव मे हो तो चावल चीनी दुध का दान न करे , यदि चन्द्र वृश्चिक राशी में हो तो चन्द्र की शुभता प्राप्त करने के लिए मन्दिर,मस्जिद, गुरुद्धारा, शमशान या आम जनता के लिए प्याउ( पानी की टंकी ) बनवाए या किसी मिटटी के बर्तन में चिड़ियों के लिये पानी रखे .

—-चन्द्र का वैदिक मंत्र :-

चंद्रमा के शुभ प्रभाव प्राप्त करने हेतु चंद्रमा के वैदिक मंत्र का 11000 जप करना चाहिए।.

—–”””ऊँ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः “””या “””ऊँ सों सोमाय नमः “”

—-चन्द्र दोष दूर करने के लिए सोमवार, अमावस्या का दिन बहुत ही शुभ होता है। किंतु चन्द्र दोष से पीडि़त के लिए चन्द्रग्रहण के दौरान चन्द्र उपासना बहुत ही जरूरी होती है। शिव जी की आराधना करें। अपने श्री इष्ट देवताये नम:, का जाप करे….

इस चंद्रग्रहण पर करें यह प्रयोग, बिजनेस में जरुर मिलेगी सफलता—-

पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार ( मोब.–09024390067 ) यदि आपका बिजनेस ठीक नहीं चल रहा है तो घबराईए बिल्कुल मत क्यों की चन्द्र ग्रहण 08 अक्टूबर 2014 (बुधवार) को आने वाला चंद्र ग्रहण इस समस्या से छुटकारा पाने का श्रेष्ठ अवसर है। बिजनेस की सफलता के लिए चंद्रग्रहण के दिन यह प्रयोग करें-

ऐसे करें प्रयोग—–

पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार ( मोब.–09024390067 ) चन्द्र ग्रहण 08 अक्टूबर 2014 (बुधवार) पर ग्रहण से पहले नहाकर लाल या सफेद कपड़े पहन लें। इसके बाद ऊन व रेशम से बने आसन को बिछाकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। जब ग्रहण काल प्रारंभ हो तब चमेली के तेल का दीपक जला लें। अब दाएं हाथ में रुद्राक्ष की माला लें तथा बाएं हाथ में 5 गोमती चक्र लेकर नीचे लिखे मंत्र का 54 बार जप करें-

—-मन्त्र “”””ऊँ कीली कीली स्वाहा”””

पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार ( मोब.–09024390067 ) अब इन गोमती चक्रों को एक डिब्बी में डाल दें और फिर क्रमश: 5 हकीक के दाने व 5 मूंगे के दाने लेकर पुन: इस मंत्र का 54 बार उच्चारण करें। अब इन्हें भी एक डिब्बी में डालकर उसके ऊपर सिंदूर भर दें। अब दीपक को बुझाकर उसका तेल भी इस डिब्बी में डाल दें।

इस डिब्बी को बंद करके अपने घर, दुकान या ऑफिस में रखें। आपका बिजनेस चल निकलेगा।

—-इस चंद्रग्रहण पर करें यह उपाय/टोटका, होगा अचानक धन लाभ—-

चन्द्र ग्रहण 08 अक्टूबर 2014 (बुधवार) पर तंत्र शास्त्र के अनुसार ग्रहण के दौरान किया गया प्रयोग बहुत प्रभावशाली होता है और इसका फल भी जल्दी ही प्राप्त होता है। इस मौके का लाभ उठाकर यदि आप धनवान होना चाहते हैं तो नीचे लिखा उपाय करने से आपकी मनोकामना शीघ्र ही पूरी होगी और आपको अचानक धन लाभ होगा।

ऐसे करें उपाय/टोटका —-

पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार ( मोब.–09024390067 ) चन्द्र ग्रहण 08 अक्टूबर 2014 (बुधवार) पर ग्रहण के पूर्व नहाकर साफ पीले रंग के कपड़े पहन लें। ग्रहण काल शुरु होने पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके ऊन या कुश के आसन पर बैठ जाएं। अपने सामने पटिए(बाजोट या चौकी) पर एक थाली में केसर का स्वस्तिक या ऊँ बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र स्थापित करें। इसके बाद उसके सामने एक दिव्य शंख थाली में स्थापित करें।अब थोड़े से चावल को केसर में रंगकर दिव्य शंख में डालें। घी का दीपक जलाकर नीचे लिखे मंत्र का कमलगट्टे की माला से ग्यारह माला जप करें-

ये हें मंत्र—-

सिद्धि बुद्धि प्रदे देवि मुक्ति मुक्ति प्रदायिनी।
मंत्र पुते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।।

पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार ( मोब.–09024390067 ) मंत्र जप के बाद इस पूरी पूजन सामग्री को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में आपको अचानक धन लाभ होगा।

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