हनुमान जयंती 2014 इस बार विशेष संयोग के साथ मानेगी

हनुमान जयंती 2014 इस बार विशेष संयोग के साथ मानेगी–

इस बार हनुमान जयंती पर विशेष संयोग बन रहा है। इस संयोग के दौरान हनुमान भक्तों की सारी परेशानियां दूर तो होंगी। इसके साथ जातकों के लिए यह संयोग श्रेष्ठ मंगलमयी साबित होगा। शास्त्रानुसार रुद्रावतार हनुमानजी का जन्म चैत्र शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार को हुआ था।

इस वर्ष 15 अप्रैल 2014 के मंगलवार के दिन मनाई जाएगी. चैत्र पूर्णिमा और हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान और दान इत्यादि करने का विधान बताया गया है. चैत्र पूर्णिमा और जयंती के अवसर पर रामायण का पाठ, भजन-किर्तन संध्या जैसे धार्मिक कृत किए जाते हैं.

महादेव के 11वें रूद्रावतार हनुमानजी का जन्म चैत्र शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार को हुआ था। संयोग से इस बार हनुमान जयंती पर 15अप्रेल 2014 ,हनुमानजी के वार मंगलवार ही आ रहा है। ऎसा सयोग पांच साल बाद बन रहा है। इससे पहले 30 मार्च 2010 को तथा आगे सात साल बाद 27 अप्रेल 2021 को बनेगा।

ज्योतिषियों के अनुसार हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए यह सयोग अद्भूत व श्रेष्ठ मंगलदायी रहेगा। हनुमानजी के भक्त इस दिन जो भी मनोकामना लेकर हनुमानजी की आराधना करेंगे वे बलबुद्धि व विद्या से परिपूर्ण होंगे। संयोग से सूर्योदय से दोपहर 1.12 बजे तक राजयोग भी संयोग बनेगा। ऎसे समय में आराधना करने पर बेरोजगार व्यक्ति को रोजगार एवं राजयोग से विमुख व्यक्ति को राजयोग की प्राप्ति की प्रबल संभावना बनेगी।

प्रात: काल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर अपने नित्य कर्मों से निवृत होकर श्री राम-सीता जी और हनुमान जी का स्मरण करना चाहिए. हनुमान जी की प्रतिमा की प्रतिष्ठा करते हुए षोडशोपचार पूजन करना चाहिए. हनुमाजी पर सिंदूर एवं चोला चढा़ना चाहिए. प्रसाद रूप में गुड़, चना, बेसन के लड्डू का भोग लगाना चाहिए.

“ऊँ हनुमते नम:”मंत्र का उच्चारण करते रहना चाहिए इस दिन रामायण एवं सुंदरकाण्ड का पाठ करना चाहिए व संभव हो सके तो श्री हनुमान चालिसा के सुंदर काण्ड के अखण्ड पाठ का आयोजन करना चाहिए. हनुमान जी का जन्म दिवस उनके भक्तों के लिए परम पुण्य दिवस है.
इस दिन हनुमान जी की प्रसन्नता हेतु उन्हें तेल और सिन्दुर चढ़ाया जाता है. हनुमान जी को मोदक बहुत पसंद है अत: इन्हें मोदक का भी भोग लगाना चाहिए. हनुमान जयन्ती पर हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक, बजरंग वाण एवं रामायण का पाठ करने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है.

पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री के अनुसार मंगलवार को हनुमान जयंती के दिन बनने वाला यह संयोग राजनेताओं के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। यानि यह संयोग इनके लिए सोने पे सुहागा है। खासकर इन चुनावी मौसम में राजनेताओं को मारूतिस्त्रोत, वाल्मीकि सुन्दरकाण्ड, रामचरित मानस, हनुमान चालीसा पाठ करना श्रेष्यकर होगा।

हनुमत आराधना का विशेष समय—
चौघडियां व मुहूर्त के अनुसार–

सुबह 10.52 से दोपहर 2.02 तक– लाभ-अमृत के चौघडिये में

दोपहर 1.37 से शाम 5.12 तक—- शुभ के चौघडिये में

दोपहर 12.01 से 12.52 बजे तक– अभिजीत मुहूर्त में पूज करना श्रेष्ठ व शुभफलदायी होगा।

इनके लिए खास—-

हनुमान जंयती पर हनुमानजी की पूजा करना उस व्यक्ति के लिए विशेष लाभदायी है जिस जातक की कुण्डली में मंगल की महादशा व अन्तरदशा चल रही हो। वह व्यक्ति उसके शुभ फल की प्राप्ति के लिए तथा इसके अलावा कर्क लग्न व सिंह लग्न के कारक ग्रह मंगल होते हैं इसलिए इस लग्न में जन्मे जातकों को विशेष रूप से इस दिन हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए।

हनुमान जयंती पर इस बार चन्द्रग्रहण का साया रहेगा लेकिन देश और प्रदेश के किसी भी हिस्से में ग्रहण दिखाई नहीं देने से ग्रहण का सूतक नहीं माना जाएगा। गत वर्ष भी हनुमान जयंती पर चन्द्रग्रहण था। ज्योतिषी पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री के अनुसार जिन क्षेत्रों में सूर्य या चन्द्रग्रहण दिखाई नहीं देता वहां ग्रहण से जुडें नियम मानने आवश्यक नहीं है और न ही ग्रहण का दुष्प्रभाव या दोष रहता है।

ये होंगे प्रभाव :—
माना जाता है कि कण-कण में प्रभु श्रीराम विराजमान है, पूरी सृष्टि उनके इशारों पर चल रही है, बिना प्रभु इच्छा के एक पत्ता भी नहीं हिल सकता, आस्थावान व्यक्ति कर्म के बल पर सभी इच्छित चीजें प्राप्त कर सकता है।

हनुमान जयंती के दिन भगवान राम और उनके परम भक्त की साधना से आपके जीवन में आनेवाली हर तरह की बाधाएं दूर होकर सफलता आसानी से प्राप्त होगी। हनुमान जयंती पर पूजा-पाठ करने से मानसिक तनाव से मुक्ति, कानूनी मामलों में सफलता, भूमि-भवन का लाभ, खोई प्रतिष्ठा की प्राप्ति, क्लेश की निवृत्ति व अर्थ सिद्घि की प्राप्ति होगी।
इस दिन विशेष में की गई हनुमान आराधना रोग, शोक व दुखों को हरकर विशिष्ट फल देने वाली होगी।

ज्योतिषाचार्य पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री के अनुसार हनुमानजी रुद्र अवतार स्वरूप माने जाते हैं। सतयुग से कलयुग तक प्रथम चरण विशेष में हनुमानजी की आराधना सकल मनोरथ पूर्ण करने वाली हैं। धर्मशास्त्र के अनुसार रुद्र तथा रुद्र अवतार की साधना विशेष दिन करने से इच्छित फल की प्राप्ति होती है।

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य, शनि तथा राहु के दोषों के निवारण के लिए हनुमान की आराधना विशेष मानी गई है।
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इस हनुमान जयंती का विशेष टोटका :—-
बजरंगबली चमत्कारिक सफलता देने वाले देवता माने गए हैं। हनुमान जयंती पर उनका यह टोटका ‍विशेष रूप से धन प्राप्ति के लिए किया जात‍ा है। साथ ही यह टोटका हर प्रकार का अनिष्ट भी दूर करता है।

टोटका 1. –
कच्ची धानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। संकट दूर होगा और धन भी प्राप्त होगा।
टोटका 2. –
अगर धन लाभ की स्थितियां बन रही हो, किन्तु ‍फिर भी लाभ नहीं मिल रहा हो, तो हनुमान जयंती पर गोपी चंदन की नौ डलियां लेकर केले के वृक्ष पर टांग देनी चाहिए। स्मरण रहे यह चंदन पीले धागे से ही बांधना है।
टोटका 3. –
एक नारियल पर कामिया सिन्दूर, मौली, अक्षत अर्पित कर पूजन करें। फिर हनुमान जी के मन्दिर में चढ़ा आएं। धन लाभ होगा।
टोटका 4. –
पीपल के वृक्ष की जड़ में तेल का दीपक जला दें। फिर वापस घर आ जाएं एवं पीछे मुड़कर न देखें। धन लाभ होगा।
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हनुमानजी रुद्र अवतार स्वरूप माने जाते हैं। सतयुग से कलयुग तक प्रथम चरण विशेष में हनुमानजी की आराधना सकल मनोरथ पूर्ण करने वाली हैं। धर्मशास्त्र के अनुसार रुद्र तथा रुद्र अवतार की साधना विशेष दिन करने से इच्छित फल की प्राप्ति होती है।

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य, शनि तथा राहु के दोषों के निवारण के लिए हनुमान की आराधना विशेष मानी गई है।

ग्रहों की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए निम्न राशि के जातक हनुमान जयंती पर इन उपायों का प्रयोग कर सकते हैं।

मेष- हनुमान चालीसा का पाठ, वानरों को मीठा रोट खिलाएं।

वृषभ- एकमुखी हनुमंत कवच का पाठ, हनुमान मंदिर में पीले पेड़े अर्पित करें।

मिथुन- तीन मुखी हनुमान कवच, लाल रंग से मिलती रंग की गाय को हरी घास खिलाएं।

कर्क- हनुमान अष्टक का पाठ, हनुमान मंदिर में ध्वज अर्पित करें।

सिंह- पंचमुखी हनुमंत कवच, भिक्षुकों को भोजन कराएं।

कन्या- सुंदरकांड का पाठ, हनुमान मंदिर में 11 दीपक लगाएं।

तुला- हनुमंत बाहुक का पाठ, बच्चों को मिष्ठान खिलाएं।

वृश्चिक- रामचरित मानस के बालकांड का पाठ, बच्चों को भोजन कराएं।

धनु- अयोध्याकांड का पाठ, घर के बुजुर्गों के नाम से वृद्घाश्रम में भोजन।

मकर- सुंदरकांड तथा एकमुखी हनुमंत कवच का पाठ, मछलियों को आटे की गोली डालें।

कुंभ व मीन- हनुमान अष्टक व हनुमान कवच तथा सुंदरकांड का पाठ करें।

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