क्या उचित हें रसोई(किचन) में पूजा स्थान (पूजाघर )बनाना..???

क्या उचित हें रसोई(किचन) में पूजा स्थान (पूजाघर )बनाना..???

सभी प्राणियों के जीवन में वास्तु का बहुत महत्व होता है। तथा जाने व अनजाने में वास्तु की उपयोगिता का प्रयोग भलीभांति करके अपने जीवन को सुगम बनाने का प्रयास करते रहतें है। प्रकृति द्वारा सभी प्राणियों को भिन्न-भिन्‍न रूपों में ऊर्जायें प्राप्त होती रहती है। इनमें कुछ प्राणियों के जीवन चक्र के अनुकूल होती है तथा कुछ पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। अतः सभी प्राणी इस बात का प्रयास करते रहते है कि अनुकूल ऊर्जाओं का अधिक से अधिक लाभ लें तथा प्रतिकूल ऊर्जा से बचें।

शहरी जीवन और तड़क-भड़क की जिन्दगी में हम नियमों को ताक में रखकर मनमाने ढंग से घर या मकान का निर्माण कर लेते हैं। जब भारी लागत लगाने के बावजूद भी घर के सदस्यों का सुख चैन गायब हो जाता है, तब हमें यह आभास होता है कि मकान बनाते समय कहां पर चूक हुई है।

वास्तुविद एवं ज्योतिषाचार्य पंडित “विशाल”दयानंद शास्त्री(मोब..-09669290067 ) के अनुसार अपने घर में हम सभी एक पूजास्थल अवश्य बनाते हैं और अपने अराध्य ईष्ट देवता की पूजा करना चाहते हैं| जिससे हमारे घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे| वहीँ यदि पूजा स्थल वास्तुनुरूप सटीक जगह पर न हो, तो हम कितनी भी श्रद्धा भाव से पूजा कर लें तब भी मनोवांछित फल की प्राप्ति नहीं हो पाती है बल्कि कई बार तो जीवन समस्यों से भी घिर जाता है| और यह समस्या आजकल महानगरों में तेजी से बढ़ी है क्योंकि वहां जगह की कमी के कारण वास्तु का अक्षरशः पालन कर पाना कठिन होता है|
आइए जानते हैं कि वास्तुशास्त्री के अनुसार घर में पूजास्थल कहां होना चाहिए और यदि जगह की कमी है और वास्तुदोष लग रहा है तो इसके लिए क्या उपाय किये जाने चाहिए|

वास्तुविद एवं ज्योतिषाचार्य पंडित “विशाल”दयानंद शास्त्री(मोब..-09669290067 ) के अनुसार जब कोई व्यक्ति घर बनाता है या घर का नवीनीकरण करता है, तो चाहता है कि उसका घर वास्तु के अनुसार बने। इसलिए चार बातों का ध्यान विशेष रूप से रखा जाता है कि घर में पूजा का स्थान ईशान कोण में, रसोई घर आग्नेय कोण में, मास्टर बेडरूम नैर्ऋत्य कोण में और लड़कियों व मेहमानों का कमरा वाचब्य कोण में होना चाहिए। यदि ये चारों सही जगह बन जाएं तो यह समझा जाता है कि मकान वास्तु सिद्धान्तों के अनुरूप बना है।

किसी घर में यदि इनमें से कोई एक भी सही जगह पर न बना हो तो वास्तु के अनुसार घर को दोषपूर्ण मान लिया जाता है।
वास्तुविद एवं ज्योतिषाचार्य पंडित “विशाल”दयानंद शास्त्री(मोब..-09669290067 ) के अनुसार घर की गृहिणी का किचन से विशेष नाता रहता है। गृहणियां हमेशा इस बात का खयाल रखती हैं कि उनका किचन आग्नेय कोण में हो और यदि ऐसा नहीं हो तो किसी भी परेशानी का कारण किचन के वास्तुदोष पूर्ण होने को ही मान लिया जाता है, जो उचित नहीं है।
यह सही है कि घर के आग्नेय कोण में किचन का स्थान सर्वोत्तम है पर यदि संभव हो तो उसे किसी अन्य स्थान पर बनाया जा सकता है। जानिए कि कहाँ -कहाँ पर बने रसोई घर/किचन के दिशा अनुसार क्या क्या प्रभाव होते हें—

—-आग्नेय कोण:—-
किचन की यह स्थिति बहुत शुभ होती है । आग्नेय कोण में किचन होने पर घर की स्त्रियां खुश रहती हैं। घर में समस्त प्रकार के सुख रहते हैं।
—-दक्षिण दिशा:—-
इस दिशा में किचन होने से परिवार में मानसिक अशांति बनी रहती है। घर के मालिक को क्रोध अधिक आता है और उसका स्वास्थ्य साधारण रहता है।
—- नैर्ऋत्य कोण:—
जिस घर में किचन दक्षिण या नैर्ऋत्य कोण में होता है उस घर की मालकिन ऊर्जा से भरपूर उत्साहित एवं रोमैंटिक मिजाज की होती है।
—- पश्चिम दिशा:—
जिस घर में किचन पश्चिम दिशा में होता है, उस घर का सारा कार्य घर की मालकिन देखती है। उसे अपनी बहू बेटियों से काफी खुशियां प्राप्त होती हैं। घर की सभी महिला सदस्यों में आपसी तालमेल अच्छा बना रहते हैं, परंतु खाद्यान्न की बर्बादी जरूर ज्यादा होती है।
—-वायत्य कोण:—
जिस घर का किचन वायत्य कोण में होता है, उसका मुखिया रोमैंटिक होता है। उसकी कई महिला मित्र होती हैं, किन्तु बेटी को गर्भाशय की समस्या और कभी कभी उसकी बदनामी भी होती है।
——उत्तर दिशा —
जिस घर में किचन उत्तर दिशा में होता है, उसकी स्त्रियां बुद्धिमान तथा स्नेहशील होती हैं। उस परिवार के पुरूष सरलता से अपना कारोबार करते हैं और उन्हें धनार्जन में सफलता मिलती है।
—- ईशान कोण:—-
ईशान कोण में किचन होने पर परिवार के सदस्यों को सामान्य सफलता मिलती है। परिवार की बुजुर्ग महिला पत्नी, बड़ी बेटी या बड़ी बहु धार्मिक प्रवृति की होती है, परंतु घर में कलह भी होती है।
—-पूर्व दिशा:—-
जिस घर में पूर्व दिशा में किचन होता है, उसकी आय अच्छी होती है। घर की पूरी कमान पत्नी के पास होती है। पत्नी की खुशियों में कमी रहती है। साथ ही उसे पित्त गर्भाशय स्नायु तंत्र आदि से संबंधित रोग होने की संभावना रहती है।

रसोई(किचन) से जुड़ी कुछ अन्य जानकारियां निम्नलिखित हैं, जिनका किचन बनाते समय ध्यान रखना चाहिए—-

—- वास्तुविद एवं ज्योतिषाचार्य पंडित “विशाल”दयानंद शास्त्री(मोब..-09669290067 ) के अनुसार जिस घर में किचन के अंदर ही स्टोर हो, तो गृहस्वामी को अपनी नौकरी या व्यापार में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन कठिनाइयों से बचाव के लिए किचन व स्टोर रूम अलग-अलग बनाने चाहिए।
—- किचन व बाथरूम का एक सीध में साथ-साथ होना शुभ नहीं होता है। ऐसे घर में रहने वालों को जीवन यापन करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता। ऐसे घर की कन्याओं के जीवन में अशांति रहती है।
—-वास्तुविद एवं ज्योतिषाचार्य पंडित “विशाल”दयानंद शास्त्री(मोब..-09669290067 ) के अनुसार किचन में पूजा स्थान बनाना भी शुभ नहीं होता है। जिस घर में किचन के अंदर ही पूजा का स्थान होता है, उसमें रहने वाले गरम दिमाग के होते हैं। परिवार के किसी सदस्य को रक्त संबंधी शिकायत भी हो सकती है।
— घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने किचन नहीं बनाना चाहिए। मुख्य द्वार के एकदम सामने का किचन गृहस्वामी के भाई के लिए अशुभ होता है।

–वास्तुविद एवं ज्योतिषाचार्य पंडित “विशाल”दयानंद शास्त्री(मोब..-09669290067 ) के अनुसार यदि किचन भूमिगत पानी की टंकी या कुएं के साथ लगा हो तो भाइयों में मतभेद रहते हैं। घर के स्वामी को धन कमाने के लिए बहुत यात्राएं करनी पड़ती हैं।
—घर की बैठक में भोजन बनाना या बैठक खाने के ठीक सामने किचन का होना अशुभ होता है। ऐसे में रिश्तेदारों के मध्य शत्रुता रहती है एवं बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाइयां आती हैं।
—- जिस घर में किचन मुख्य द्वार से जुड़ा हो, वहां प्रारंभ में पति-पत्नी के मध्य बहुत प्रेम रहता है घर का वातावरण भी सौहार्दपूर्ण रहता है, किन्तु कुछ समय बाद बिना कारण आपस में मतभेद पैदा होने लगते हैं।
—-घर में उत्तर-पूर्व के कमरे यानी ईशान कोण में पूजास्थल बनाना सबसे शुभ माना गया है| पूजा स्थल में यदि आप कोई मंदिर रखना चाहते हैं तो उसे ईशान कोण में रखें और प्रतिमाएं पश्चिमाभिमुख होनी चाहिए|
——वास्तुविद एवं ज्योतिषाचार्य पंडित “विशाल”दयानंद शास्त्री(मोब..-09669290067 ) के अनुसार वास्तुशास्त्र में ईशान कोण को देवताओं के गुरु बृहस्पति और मोक्षकारक केतु का स्थान बताया गया है| साथ ही वैदिक शास्त्रों में ईशान कोण को आध्यात्मिक कार्यों के लिए सबसे उत्तम और प्रभावशाली दिशा बताया गया है साथ ही ईशान कोण में पूजास्थल बनाने से घर में शांति, सुकून, स्वास्थ्य, धन और प्रसन्नता की प्राप्ति होती है|
—–पूजा करते समय हमारा मुख ईशान, पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए ऐसा संभव न होने पर पूजास्थल को किसी भी कमरे के ईशान कोण में स्थापित कर अकते हैं| साथ ही यह भी ध्यान रहे कि पूजास्थल रसोई और शयन कक्ष में समीप कदापि नहीं होना चाहिए| पूजाघर को पीला या सफेद रंग से रंगवाना शुभ माना जाता है|

1. वास्तुविद एवं ज्योतिषाचार्य पंडित “विशाल”दयानंद शास्त्री(मोब..-09669290067 ) के अनुसार पूजाघर के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान ईशान कोण हाता है। पूजागृह को पूर्व या उत्तर दिशा में स्थापित किया जा सकता है। पूजा करते समय हमारा मुख ईशान, पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए। ऐसा संभव न होने पर किसी भी कमरे के ईशान कोण में स्थापित करें।
2. पूजागृह रसोई और शयन कक्ष में कदापि नहीं होना चाहिए।
3. पूजाघर में पीला या सफेद रंग करवाना ठीक रहता है।
4. पूजाघर के ऊपर पिरामिड होना चाहिए साथ ही ध्यान रखना चाहिए कि मंदिर के ऊपर कोई सामान नहीं रखा हो।
5. पूजाघर में दो शिवलिंग, दो शालिग्राम, दो शंख, तीन दुर्गा और तीन गणेश रखने का शास्त्रों में निषेध है।
6. आराधना स्थल में देवी-देवताओं की प्रतिमा या मूर्तिया एक-दूसरे के आमने-सामने होने चाहिए।
7. बहुमंजिले मकान में पूजा मंदिर निर्माण भूतल पर करें।
8. पूजा स्थल पर पितृ-मृतकों की तस्वीर न रखें।
9. पूजागृह शौचालय से सटा अथवा उसके सामने न हो।
10. पूजाघर के समीप तिजोरी बिल्कुल न रखें।
11. यथासंभव स्थिर प्रतिमाओं को घर में स्थापित करने से बचना चाहिए। इसे शास्त्र सम्मत नहीं माना जाता।
12. सीढि़यों के नीचे पूजा स्थल न बनाएं। अन्यथा पूजा निष्फल हो जाती है।
13. पूजाघर साधक के सम्मुख होना चाहिए। न ज्यादा ऊंचा और न ज्यादा नीचा होना चाहिए।
14. पूजाघर में सदैव प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए। रात्रि में पट बंद करें।

वास्तुविद एवं ज्योतिषाचार्य पंडित “विशाल”दयानंद शास्त्री(मोब..-09669290067 ) के अनुसार अनुभव में पाया गया है कि जिनके घरों में किचन में भोजन बनाने के साधन जैसे गैस, स्टोव, माइक्रोवेव ओवन इत्यादि एक से अधिक होते हैं, उनमें आय के साधन भी एक से अधिक होते हैं। ऐसे परिवार के सभी सदस्यों को कम से कम एक समय भोजन साथ मिलकर करना चाहिए। ऐसा करने से आपसी संबंध मजबूत होते हैं तथा साथ मिलकर रहने की भावना भी बलवती होती है ।

वास्तुशास्त्र के साथ ज्योतिष का ज्ञान होना आवश्यक है। आजकल ज्योतिष और वास्तुशास्त्र एक आकर्षक व्यवसाय के रूप में उभर कर आ रहे हैं। वास्तुविद एवं ज्योतिषाचार्य पंडित “विशाल”दयानंद शास्त्री(मोब..-09669290067 ) के अनुसार अधकचरे वास्तुशास्त्री अजीबो-गरीब उपाय बतलाते हैं। अतः वास्तुशास्त्री का चुनाव सावधानी से करिए। लोगों की परेशानियों से आनन-फानन छुटकारा दिलवाने का बढ़-चढ़कर दावा करने वालों से हमेशा सावधान रहें।

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One thought on “क्या उचित हें रसोई(किचन) में पूजा स्थान (पूजाघर )बनाना..???

  1. निवृत्ती व्ही काळे

    गुरूजी
    मेरा घर उत्तरमुखी है! किचन आग्नेय कोण में है! पूजाघर किचन में है! और शौचालय से सटा हुआ है!
    अब पूजाघर शौचालय से सटा ना हो इसलिए क्या करना चाहिए?

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