कुछ प्रसिद्द राजनेतओं कि जन्मकुंडलियां एवं उनका विवेचन..

कुछ नमी गिरामी और प्रसिद्द राजनेतओं कि जन्मकुंडलियां एवं उनका विवेचन—

(लेखन एवं संकलन–पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री, मोब.-09669290067 )
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श्रीमती सोनिया गाँधी की जन्मकुंडली का विवेचन—-

श्रीमती सोनिया गाँधी का जन्म 9 दिसंबर, 1946 को रात्रि 9.15 बजे इटली के तुरीन में हुआ था। जन्म 9/12/1946 को इटली के वेनेटो क्षेत्र में पड़ने वाले विकैंजा नामक स्थान से 30 किमी. की दूरी पर स्थित एक छोटे से गांव लुसियाना में हुआ था।इनकी राशि मिथुन है। कर्क लग्न में हुआ था

इनकी कुंडली में मालव्य महापुरुष योग, बुधादित्य योग, सुनफा योग, उभयचर योग, काहल योग, अमर योग, धन योग और दान योग हैं।

सोनिया गांधी की कुंडली में कर्क लग्न है जिसे कुशल राजनीतिज्ञों का लग्न माना जाता है। लग्न में बैठा हुआ शनि भी जातक को कूटनीतिज्ञ तथा कुशल प्रशासक बनाता है।

चंद्र कुंडली से पंचम भाव में विराजमान गुरु व शुक्र ने भी इन्हें राजनीति का पंडित बनाया। यदि चर लग्न हो और गुरु, शुक्र तथा शनि केंद्रों में हों तो अंशावतार योग होता है। ऐसा जातक बहुत बड़ी शखिसयत होता है और उसे युग पुरुष माना जाता है।

सोनिया की जन्मकुंडली में शनि वक्री होकर लग्न में स्थित है। वर्तमान समय में वह बुध ग्रह कहीं महादशा में शनि ग्रह की अंतर्दशा से गुजर रही है। शनि सप्तमेश व अष्टमेश है। गुरु षष्टेश व भाग्येश है। ऐसे में इस अंतर्दशा में इनकी प्रतिष्ठा निरंतर बढ़ती नजर आती है।

इन्होंने अपनी किशोरावस्था के समय ट्यूरिन के समीप ओर बासानो नामक स्थान पर रोमन कैथोलिक स्कूल में पढ़ाई की। इनके पिता एक विल्डिंग कॉन्ट्रेक्टर थे जिनकी वर्ष 1983 में मृत्यु हो गई। इनकी मां और दो बहनें ओरवासानो के आस पास ही रहती हैं। वर्ष 1964 में वे इंग्लिश पढ़ने के लिए कैंब्रिज गई जहां सन् 1965 में इनकी मुलाकात राजीव गांधी से एक ग्रीक रेस्टॉरेंट में हुई। सोनिया और राजीव ने वर्ष 1968 में विवाह कर लिया और इस प्रकार इनका पदार्पण इनकी सास व तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रमति इंदिरा गांधी के घर हुआ। वर्ष 1970 में इन्होंने बेटे राहुल गांधी तथा 1972 में पुत्री प्रियंका गांधी को जन्म दिया।

सोनिया गाँधी की कुंडली में द्वितीय भाव का सिंह राशि का स्वामी सूर्य पंचम भाव में है। शुक्र ग्रह की दशम भाव पर पूर्ण दृष्टि है। नतीजतन, उन्हें वर्तमान समय में अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। आने वाले समय में उनके नेतृत्व में कांग्रेस को देश में और सफलता मिलेगी।

प्रभावशाली नेहरु परिवार के सदस्य होने के बावजूद भी सोनिया व राजीव गांधी ने अपने आपको राजनीति से पूर्णतया दूर रखा। राजीव गांधी एयरलाइन पायलट का कार्यभार संभाला व सोनिया गांधी ने घर की देख रेख का जिम्मा संभाला। 23 जून 1980 को एक हवाई हादसे में संजय गांधी की मृत्यु हो जाने पर सन् 1982 में राजीव गांधी ने राजनीति में प्रवेश किया। सोनिया ने परिवार की देखभाल करना जारी रखा और जनता से किसी भी प्रकार का संपर्क न रखा। सोनिया गांधी का भारतीय जनता से संपर्क शुरू हुआ उनकी सास श्रीमति इंदिरा गांधी की हत्या तथा पति के प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद। 1984 में सोनिया गांधी ने अपने पति के अमेठी से चुनाव लड़ने के समय राजीव गांधी का जोरदार चुनाव प्रचार किया। उस समय राजीव के विरूद्ध उनके स्वर्गीय भाई की पत्नी मेनका गांधी चुनाव में उतरी थी।

गांधी की हत्या होने के पश्चात् सोनिया ने प्रधानमंत्री पद को स्वीकार करने की पेशकश को ठुकरा दिया और परिणामस्वरूप पी. वीनरिसम्हा राव को कांग्रेस का नेता बना दिया गया जो कालांतर में प्रधानमंत्री बने। आने वाले कुछ वर्षों में कांग्रेस का भाग्य टूटने लगा और बहुत से वरिष्ठ नेताओं जैसे माधवराव सिंधिया, राजेश पायलट, नारायण दत्त तिवारी, अर्जुन सिंह, ममता बैनर्जी, जी. केमूथनार, पी. चिदंबरम व जयंती नटराजन आदि ने सीताराम केसरी के विरूद्ध जंग छेड़ दी और कांग्रेस को छोड़कर इसके कई टुकड़े बना दिए।

कांग्रेस पार्टी का पुनरूद्धार करने के उद्देश्य से इन्होंने 1997 में कांग्रेस पार्टी में प्रवेश किया और 1998 में कांग्रेस की नेता बन गई। कांग्रेस पार्टी में एक प्राइमरी मेंबर के रूप में प्रवेश के मात्र 62 दिन पश्चात् इन्हें कांग्रेस अध्यक्ष के पद की पेशकश की गई जिसे इन्होंने स्वीकार कर लिया। इन्होंने बेल्लारी कर्नाटक व अमेठी उत्तर प्रदेश से 1999 में चुनाव लड़ा। बेल्लारी में इन्होंने बी. जे.पी. की सुषमा स्वराज को पराजित किया। सन् 2004 व 2009 में इनका रायबरेली उत्तरप्रदेश से लोकसभा के लिए पुननिर्वाचन हुआ। 1999 में इन्हें 13वीं लोकसभा में विरोधी दल का नेता चुना गया। इन्होंने वर्ष 2003 में वाजपेई की एन डी ए सरकार के विरूद्ध नो कान्फिडेंस मोशन बुलाया। इनके खाते में लगातार दस वर्षों तक कांग्रेस की अध्यक्षा बने रहने का रिकार्ड है।

वर्ष 2004 के आम चुनावों में एन डी ए की अप्रत्याशित हार के बाद सोनिया जी का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय हो गया। 16 मई को सोनिया जी को बिना किसी विरोध के 15 दलीय कोएलिशन गवर्नमेंट का नेतृत्व करने के लिए चुन लिया गया और इस कोएलिशन गवर्नमेंट को यूनाइटेड प्रॉग्रेसिव एलांयस (यू. पी. ए.) का नाम दिया गया। चुनाव के पश्चात् एन डी ए ने इनके विदेशी मूल के होने का मुद्दा उठाया तथा वरिष्ठ बी. जे. पी. नेता सुषमा स्वराज ने सोनिया जी के प्रधानमंत्री बनने की स्थिति में अपना सिर मुंडवाने व जमीन पर सोने की धमकी दे डाली। एन डी. ए. ने दावा किया कि सोनिया को सत्ता से अलग रखने के लिए कानूनी कारण भी है। एन. डी. ए. ने इंडियन सिटिजनशिप एक्ट 1955 के अनुच्छेद 5 का विशेष रूप से हवाला दिया। परंतु सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और सोनिया का प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया।

चुनाव के कुछ दिन पश्चात् सोनिया जी ने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के पद के लिए चुना। सोनिया के समर्थकों ने इनके इस फैसले की तुलना कांग्रेस की त्याग की पुरानी परंपरा से की जबकि विरोधियों ने इसे राजनैतिक कालाबाजी बताया। नेशनल एडवाइजरी कमेटी और यू. पी. ए. के चेयरपर्सन के रूप में उन्होंने नेशनल रूरल एम्पलायमेंट गारंटी स्कीम और द राइट टू इन्फॉमेशन एक्ट बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। 2 अक्तूबर 2007 को महात्मा गांधी की जयंती पर इन्होंने यूनाइटेड नेशन्ज़ को संबोधित किया। महात्मा गांधी जयंती को यूनाइटेड नेशन्ज़ ने 15 जुलाई 2007 को पारित प्रस्ताव के अनुसार अहिंसा के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

उनके नेतृत्व में यू. पी. ए. ने 2009 के आम चुनाव पुनः जीत लिए और मनमोहन सिंह फिर से प्रधानमंत्री बना दिए गए। अकेली कांग्रेस को 206 सीटें प्राप्त हुई जो 1991 के बाद अब तक की अवधि में किसी भी पार्टी द्वारा जीती गई सीटों में सर्वाधिक है।

वर्तमान समय में गुरु व शनि के गोचरीय प्रभाव से इनके पराक्रम तथा व्यक्तिगत, सामाजिक व राजनीतिक प्रभाव में निरंतर अभिवृद्धि होगी और भाग्य भी इनका साथ देता रहेगा। अगले वर्ष के अप्रैल महीने से इनके मान सम्मान में और अधिक वृद्धि होगी तथा नवंबर 2011 व 2012 में इन्हें अपार प्रतिष्ठा व यश प्राप्ति के ग्रह योग बन रहे हैं और साथ ही अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में भी इनकी पकड़ और मजबूत होंगी।

2014 के उत्तरार्द्ध में इनकी प्रतिष्ठा तेजी से बढ़ेगी क्योंकि उस समय इनकी कुंडली में पंचमस्थ केतु की दशा चल रही होगी और गोचर में इनके जन्म लग्न में उच्चराशिस्थ गुरु होंगे तथा शनि उच्च के होकर भाग्येश व सुखेश पर गोचर कर रहे होंगे। ग्रह योग के अनुसार उस समय श्रीमति सोनिया गांधी भारतीय राजनीति में और अधिक आदरणीय व प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में उभरेंगी।

ज्योतिष शिक्षा चर लग्न में जन्म हो और गुरु, शुक्र, शनि केंद्रस्थ हों तो अंशावतार योग होता है तथा ऐसा जातक युग प्रवर्त्तक होता है। लग्नस्थ शनि सफल कूटनीतिज्ञ, प्रशासक और राजनीतिज्ञ बनाता है। चतुर्थ भाव व चतुर्थेश की श्रेश्ठस्थिति अपार जनसमर्थन जुटाती है। एकादशस्थ राहु अचानक भाग्य के द्वार खोलता है और राजनीतिज्ञ का कारक होने से राजनीतिक गलियारों में अनायास ही प्रभावशाली बना देता है। अंशावतार योग, लग्नस्थ शनि व एकादशस्थ राहु जीवन में किसी भी ऊंचाई तक पहुंचाने में सक्षम होता है। जैमिनी ज्योतिष के अनुसार पंचम भाव राजयोग कारक होता है।

सोनिया की कुंडली में पंचम भाव में आत्मकारक सूर्य चंद्र लग्नेश बुध व केतु के साथ स्थित है तथा राहु से दृष्ट है। पंचम भाव पर चार ग्रहों का प्रभाव होने से पंचम भाव बली हो गया है। कारकांश कुंडली में श्रेष्ठ राजयोग सफलतादायक सिद्ध होगा।
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डॉ. मनमोहन सिंह की जन्मकुंडली का विवेचन—-

इनका जन्म 26 सितंबर, 1932 को दोपहर दो बजे पाकिस्तान के झेलम में धनु लग्न में हुआ। इनकी राशि कर्क है।

देश में कर्क राशि वाले कई प्रधानमंत्री हो चुके हैं। इनकी कुंडली में भद्रक महापुरुष योग, सुनफा योग, शंख योग, नीच भंग राज योग, श्रीनाथ योग, बुधादित्य योग, हर्ष योग, धन योग और पूर्ण आयु योग है। वर्तमान समय में डॉ. मनमोहन सिंह राहु की महादशा और शुक्र की अंतर्दशा से गुजर रहे हैं।

गौरतलब है कि इस देश के अधिकांश प्रधानमंत्री राहु दशा के प्रभाव में बने हैं। इनमें इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी और अटल बिहारी वाजपेयी का नाम शामिल है। यह मनमोहन सिंह का अत्यंत अच्छा समय नहीं कहा जा सकता परंतु जन्मकुंडली में लग्न से तृतीय भाव में राहु कुंभ राशि में पराक्रम भाव में है। शुक्र ग्रह अकारक लग्न से अष्टम भाव में चंद्र के साथ स्थित है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की वर्तमान दशा एवं अंतर्दशा तथा गोचरीय स्थिति के आधार पर प्रतीत होता कहा जा सकता है कि उनकी स्थिति में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं होगा। प्रधानमंत्री के रूप में उनकी यह अंतिम पारी होगी।
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श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा की जन्मकुंडली का विवेचन—-
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राजीव गांधी व सोनिया गांधी की बिटिया प्रियंका गांधी वाड्रा का जन्म 12 जनवरी 1972 को दिल्ली में वृषभ लग्न वृश्चिक राशि शनि के नक्षत्र अनुराधा में हुआ।

प्रियंका के लग्न का स्वामी बली है व दशम भाव में शनि की कुंभ राशि में है इसीलिए प्रियंका का जन्म एक संपन्न परिवार में हुआ।दशम भाव का स्वामी, भाग्येश होकर लग्न में वक्री है, यह राशि परिवर्तन राजयोग भी बनाता है। लेकिन प्रियंका अब तक राजनीति में नहीं आई है क्योंकि दशम भाव का स्वामी शनि वक्री है।

दशमेश का दशम भाव पर दशम दृष्टि से देखने के कारण ही वे किसी न किसी वजह से राजनीति से जुड़ीं रहीं।
चन्द्रमा सुख व मन का कारक है जो नीच का होकर सप्तम भाव में है। चन्द्र की उच्च दृष्टि लग्न यानी स्वयं पर होने से प्रियंका की स्थिति मजबूत है। संभव है कि प्रियंका इस वर्ष राजनीति में प्रवेश कर जाए व चुनाव लड़ें।
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राहुल गाँधी की जन्मकुंडली का विवेचन—-

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राहुल गाँधी का जन्म 19 जून, 1970 को प्रातः 5.50 पर दिल्ली में मिथुन लग्न में हुआ है।
राहुल का जन्म वृषभ लग्न, वृश्चिक राशि एवं मेष नवांश में हुआ।
वृश्चिक राशि वाले उत्तम कदकाठी के हष्ट-पुष्ठ होते हैं।
इनकी राशि वृश्चिक है। राहुल की कुंडली में सशक्त राजयोग के अलावा अनफा योग, उभयचर योग, शुभ कर्तरी योग, कलानिधि योग, धन योग, सुमुख योग, बुद्धि चातुर्य योग और पूर्णायु योग भी हैं। एक मात्र ग्रह नीच के शनि इनकी कुंडली में हैं लेकिन इनसे भी नीच भंग राज योग बन रहा है। वर्तमान समय में उनकी कुंडली शक्तिशाली हो गई है। भविष्य में वे और शक्तिशाली होंगे।

राहुल की कुंडली में लग्न में सूर्य और मंगल, द्वितीय भाव में शुक्र, तृतीय एवं भाग्य भाव में केतु और राहु, पंचम में गुरु, एकादश में नीच के शनि, षष्ट भाव में नीच का चंद्र और द्वादश भाव में बुध है। वृषभ लग्न वृश्चिक राशि मेष नवांश में हुआ। वृश्चिक राशि वाले उत्तम कदकाठी के हष्ट-पुष्ठ होते हैं। अभी आप 43 वसंत पार करने जा रहे है अभी तक आपको दांपत्य सुख नहीं मिला। इसका एक कारण सप्तम भाव के स्वामी मंगल पर शनि की दृष्टि पड़ रही है।

शनि भाग्य व दशम भाव का स्वामी होने के बावजूद दाम्पत्य सुख से अभी तक वंचित रखा और आगे भी अभी विवाह के योग नहीं है।

राहत की बात यह है की शनि का गोचर भ्रमण उच्च का होकर षष्ट भाव से भ्रमण कर रहा है। इस कारण शत्रुओं पर (राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों) पर प्रभाव बना रहेगा। अन्य मामलों यह वर्ष उत्तम रहेगा। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी समय ठीक ही कहा जा सकता है।

अभी एकादश लाभ भाव का स्वामी गुरु जो अष्टमेश होकर द्वितीय भाव से भ्रमण कर रहा है, यह आपकी वाणी को प्रभावी बनाएगा। द्वितीय भाव में जन्म के समय सूर्य व मंगल भी है। इस प्रकार गुरु को बल मिलेगा।

अभी आपको पराक्रम भाव तृतीय चन्द्र की महादशा में अंतर भाग्य व राज्य भाव का अंतर चल रहा है, यह लाभदायक रह सकता है। आगामी चार राज्यों के चुनाव होने जा रहे हैं। यदि आपने अपनी नीतियों को जनहित के लिए चुना तो आप इस वर्ष लाभ पा सकते है। आने वाले समय में ग्रहों के उत्तम योग के कारण राहुल कांग्रेस पार्टी को सशक्त एवं सफल नेतृत्व प्रदान करेंगे।
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के लिए आगामी वर्ष कुछ राहत भरा रहकर सुकून का रहेगा।
फरवरी2008 से 2018 तक उनकी कुंडली में चन्द्रमा की महादशा चल रही है। लेकिन चन्द्रमा मारकेश भी है। चन्द्रमा की महादशा में 2017 तक काफी उतार-चढ़ाव रहेंगे क्योंकि चन्द्रमा नीच राशि का होकर छठे भाव में बैठा हुआ है।
प्रधानमंत्री बनना अभी तय नहीं है लेकिन साम दाम दंड भेद की राजनीति से वे वर्ष 2012 -13 में पारंगत हो जाएंगे। यह भी जरूरी नहीं है कि अगले आम चुनाव में राहुल गांधी का कोई विशेष जादू चल पाएगा। हां, जहां जाएंगे वहां भीड़ इकट्ठी होती रहेगी और लोग उनकी सभाओं में धीरे-धीरे आक्रोश के स्वर भी उठाते रहेंगे।

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लाल कृष्ण आडवाणी की जन्मकुंडली का विवेचन—-

आडवाणी का जन्म 8 नवंबर, 1927 को सुबह नौ बजकर 16 मिनट पर पाकिस्तान के हैदराबाद में वृश्चिक लग्न में हुआ है।

इनका जन्म नक्षत्र अश्विनी और राशि मेष है। जन्मकुंडली में प्राप्त राजयोगों के द्वारा ही आडवाणी निरंतर पाँच दशक तक महत्वपूर्ण पदों पर बने रहे। इनकी कुंडली में बुधादित्य योग, उभयचर योग, नीच भंग राज योग, भारती योग, केंद्र त्रिकोण राज योग, हर्ष योग, सरल योग, धन योग, बुद्धि चातुर्य योग और पूर्णायु योग विद्यमान है।
लालकृष्ण आडवाणी के जन्म के समय अश्विनी नक्षत्र चल रहा था। इस प्रभाव से आडवाणी भाग्यशाली, कुशल राजनीतिज्ञ है।
आडवाणी की पत्रिका के अनुसार जन्म के समय चंद्र की स्थिति लोभी स्वभाव का बनाती है। मंगल की स्थिति से ही लालकृष्ण प्रबल पराक्रमी होते हुए भी विफलता से दुखी एवं चिंतित रहते हैं।

जन्म के समय में गुरु मीन राशि पर परिभ्रमण कर रहा था। कुंडली में बैठे शुक्र क‍ी स्थिति सुख प्रदान करती है। शुक्र के कारण आडवाणी अपने बयानों के कारण विवादों में आते रहे हैं। अपने गुण व कीर्ति का ह्रास करते हैं। पार्टी के खास और नज‍दीकी लोगों को अपना बैरी बना लेते हैं।

कुंडली में शनि की स्थिति आडवाणी को कटुभाषी बनाती है।

लालकृष्ण आडवाणी को वर्तमान में शनि की महादशा चल रही है। इसकी अवधि 19 वर्ष है। यह 20-10-2009 से आरंभ हुई है और 20-10-2028 तक रहेगी। शनि की महादशा में वर्तमान बुध की अंतर्दशा 19-9-2011 से 20-5-2014 तक रहेगी। इसके बाद केतु की अंतर्दशा भी 20-5-2014 से 6-6-2015 तक रहेगी।

वर्तमान समय में आडवाणी शनि ग्रह की महादशा और इसी ग्रह की अंतर्दशा से गुजर रहे हैं। उन्हें प्रधानमंत्री का पद प्राप्त करने में हमेशा अड़चन रही है और हमेशा रहेगी। हालाँकि वे पार्टी के प्रमुख पंक्ति के नेता बने रहेंगे।
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मायावती की जन्मकुंडली का विवेचन—-

मायावती का जन्म 15 जनवरी, 1956 को सायं 7.50 मिनट पर गाजियाबाद के बादलपुर में कर्क लग्न में हुआ है। इनकी जन्मराशि मकर है। जन्मकुंडली में प्राप्त उत्तम राजयोगों के कारण यह उत्तर प्रदेश की चौथी बार मुख्यमंत्री बनीं। इनकी कुंडली में बुधादित्य योग, केदार योग, केंद्र त्रिकोण राजयोग, महाभाग्य योग, चंद्रिका योग, सुनफा योग और शंख योग आदि हैं।

अगले लोकसभा चुनाव में भी वह खुद को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करेंगी लेकिन इनके सहयोगी ही इनकी राह में रोड़ा अटकाएँगे।
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फिल्म अभिनेता और राजनेता संजय दत्त की जन्मकुंडली का विवेचन—-

संजय दत्त का जन्म 29 जुलाई 1959 को दोपहर 2.45 बजे मुंबई में हुआ था। सुनील दत्त और नरगिस दत्त की वे पहली संतान हैं। उनकी दो बहनें हैं। कांग्रेस सांसद प्रिया दत्त और नम्रता गौरव।
उनका जन्म कृत्तिका नक्षत्र के द्वितीय चरण में हुआ जिसमें चंद्र के उच्च के होने के कारण उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में ख्याति अर्जित की।
आजकल संजय दत्त को जेल होने के बारे ज्योतीषी बहुत बाते कर रहे है , संजय दत्त की कुण्डली के अनुसार समय संजय दत्त को गुरु की महादशा चल रही है जो की २-०४ -१ ९ ९ ८ से २ ४ – ० ४ -२ ० १ ४ तक चलेगी
लग्न वृश्चिक (८ ) शनी २रे भाव में , केतू ५ वे भाव , चन्द्रमा ७ वे भाव में , सूर्य +बुध ९ वे भाव में , शुक्र+मंगल १ ० वे भाव में , राहू १ १ वे भाव में , गुरु १ २ वे भाव में
इनकी कुण्डली में गुरु १ २ भाव में है , तथा २ ८ :५ ८ :० २ डीग्री का अत्यंत ही कमजोर होकर स्थीत है , साथ ही चन्द्रमा से भी ८ भाव का स्वामी होकर ६ थे भाव में है ,

यदि संजयदत्त की कुंडली पर दृष्टि डाली जाये तो लग्न (शरीर) का स्वामी मंगल 9 अंश का मजबूत होकर दशम भाव में बैठा है। इस कारण उनका शरीर हृष्ट-पुष्ट रहेगा। पर सप्तम भाव में चंद्र उच्च का होकर मात्र 1 अंश का और कमजोर होने के कारण वे भावुक हृदय के रहेंगे। संजय दत्त का जन्म वृश्चिक लग्न में हुआ है। उनका लग्न उन्हें अदम्य साहस प्रदान कर रहा है।

गुरु जो की पिता, राज्य, धर्म, आध्यात्म, मानसीक शांति आदि का कारक है , अतः कुंडली में कमजोर होने से संजय दत्त को पिता, राज्य और अधीकारीयो की कृपा से परेशान/ वंचित होना , दुराचारी जेसे आरोपों का सामना करना होगा और वायुजनीत रोगों से सामना करना होगा…

जन्म के ग्रहों में चंद्र मात्र 1 अंश और बुध तथा महादंडनायक शनि वक्री हैं। जन्म के वक्री ग्रह या गोचर के वक्री ग्रह या उनकी दशा, अंतर्दशा अथवा प्रत्यंतर्दशा आ जाए तो भी जातक को महाकष्ट एवं बंधन योग प्राप्त होता है। यह सूत्र पराशर होरा शास्त्र में वर्णित है और अनुभूत है।

संजय दत्त ने 1987 में ऋचा शर्मा के साथ विवाह किया। शर्मा की ब्रेन ट्यूमर (मस्तिष्क की गाँठ) के कारण 1996 में मृत्यु हो गई। इस दम्पति के घर में 1988 में एक लड़की ने जन्म लिया जिसका नाम त्रिशाला है और वो दत्त की पत्नी की मृत्यु और उनकी हिरासत के बाद अपने नाना-नानी के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका में रहती है।
संजय दत्त ने दूसरा विवाह मॉडल रिया पिल्लई के साथ 1998 में हुआ।
2005 में उनका तलाक हो गया।

संजय दत्त ने दो वर्ष डेटिंग करने के बाद 2008 में गोवा में एक निजी दावत में मान्यता (जन्म का नाम: दिलनवाज़ शेख) के साथ विवाह किया। 21 अक्टूबर 2010 वो दो जुड़वा बच्चों के पिता बने जिनमें लड़के का नाम शहरान और लड़की का नाम इक़रा रखा..

गुरु भी संजय की कुंडली में विपरीत ग्रह शुक्र के घर, 12वें भाव में बैठा है जो बंधन योग का मुख्य कारक होता है। उस समय इस भाव में बैठे बृहस्पति ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया था। उन्हें विभिन्न कष्टों का सामना करना पड़ेगा।

कई बार उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। पर गुरु के मार्गी तथा शुक्र के अस्त होने पर उन्हें आने वाले दिनों में कुछ राहत मिलने के आसार हैं। संजय दत्त को वक्री ग्रहों ने व्यूह में फांस रखा है उस व्यूह से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा अनुष्ठान की आवश्यकता है, तभी लाभ हो सकता है…
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अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म कुंडली का विवेचन—-

हमारे भूतपूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी का जन्म २५ दिसम्बर १९२४ को दोपहर दो बजे ग्वालियर (मध्यप्रदेश _नामक स्थान पर हुआ था.उनकी कुंडली मेष लगन की है और लगनेश मंगल का स्थान बारहवे भाव मे है.

लगनेश से ग्यारहवे केतु है और लगनेश से दसवें सूर्य गुरु वक्री बुध है,लगनेश से नवे भाव में शुक्र चन्द्र है,लगनेश से अष्टम में शनि है..पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता कृष्णा देवी की संतान अटल बिहारी वाजपेयी को विरासत में कविता और साहित्य मिले।इसीलिए खुद अटल जी भी कहते हैं कि कविता उन्हें घुट्टी में मिली थी।
अटल जी के पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी संस्कृत भाषा और साहित्य के अच्छे विद्वान थे। उनके घर की बैठक पुरानी किताबों से भरी हुई थी। वे जहां भी जाते वहां से अच्छी-अच्छी किताबें लेकर आते थे। वह ज्योतिष के भी अच्छे जानकार थे। दूर-दूर से लोग उनको अपनी जन्मपत्री दिखाने के लिए आते थे।

कुंडली के अनुसार केतु ही राज्य को देने वाला है,तथा केतु से तीसरे भाव में लगनेश मंगल का होना पद के रूप में सर्वोच्च पद का देने वाला भी माना जाता है। गुरु का स्वराशि में होना और सूर्य के साथ होना धर्म और कानून की रक्षा करने वाला भी माना जाता है।

आपने शादी ही नही की। मंगल के बाद वाले त्रिकोण में राहु का होना आपकी एक छोटी बहिन को भी बताता है,आपके पिता के भाई बहिनो की संख्या कुल तीन मिलती है जिनमें दो भाई तो मिलते है लेकिन बुध के वक्री होने के कारण होना नही मिलता है.माता के स्थान मे राहु के होने से माता का पिता से जल्दी परलोक सिधारना मिलता है,पिता का बाद में जाना मिलता है,आखिरी वक्त में रहने वाले स्थान से उत्तर दिशा में उनके इलाज का कारण भी मिलता है।

सूर्य का नवे भाव मे होना और गुरु के साथ मे होना पिता को शिक्षक के रूप में भी जाना जा सकता है। पिता से नवे भाव मे सिंह राशि का होना आपके दादा के लिये अपनी स्थिति को बताता है,जो संख्या में दो की गिनती में मिलते है,आपके दादा की हैसियत पुजारी और पूजा पाठ वाले काम धार्मिक कृत्य तथा कथा भागवत को पढना भी मिलता है,बारहवे राहु होने के कारण एक ज्योतिषी के रूप में भी उनकी औकात को माना जा सकता है।

राहु शुक्र चन्द्र की युति होने से आपकी रुचि कविता करने में भी मानी जाती है,शुक्र का वृश्चिक राशि मे चन्द्रमा के साथ होने से दादा और पिता की सम्पत्ति का त्याग भी माना जा सकता है।

भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक हैं और १९६८ से १९७३ तक उसके अध्यक्ष भी रहे। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होने लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ किया था और देश के सर्वोच्च पद पर पहुँचने तक उस संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया। वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के पहले प्रधानमन्त्री थे जिन्होने गैर काँग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के 5 साल बिना किसी समस्या के पूरे किए। उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मन्त्री थे। कभी किसी दल ने आनाकानी नहीं की। इससे उनकी नेतृत्व क्षमता का पता चलता है।

ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको शतायु प्रदान करने के बाद आपकी कार्यों की रोशनी से जन साधारण शिक्षा ले,और आपका नाम इतिहास के पन्नो पर स्वर्णाक्षरो से लिखा जाये।
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नरेंद्र मोदी की जन्म कुंडली का विवेचन—-

मोदी की जन्म कुंडली

नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को मेहसाना में वृश्चिक लग्न, कर्क नवांश एवं वृश्चिक राशि में हुआ। इनके जन्म के समय चन्द्रमा और मंगल दोनों ही कुंडली के पहले घर में वृश्चिक राशि में बैठे थे। बताते हैं कि वृश्चिक लग्न में मंगल लग्नेश होकर बैठता है और चंद्रमा जब भाग्येश होता है और लग्न में जब ये संयोग करते हैं, तब राजयोग बनता है। मोदी की कुंडली के ग्यारहवें घर में सूर्य बुध, केतु एवं नेप्चयून के साथ बैठा है। गुरु चौथे घर में शुक्र और शनि के आमने-सामने बैठे हैं।

मंगल इनका लग्न स्वामी है और अपने ही घर में बैठा है जिससे मोदी आत्मबल और साहस से अपने विरोधियों को मात देते हुए आगे बढ़ते जाएंगे। मंगल की इसी स्थिति के कारण मोदी अपने विरोधियों को कभी माफ नहीं कर पाते। मौका मिलने पर विरोधियों से बदला जरूर लेते हैं।

ग्रहों की इस स्थिति के कारण मोदी की कुंडली में कई शुभ योग बने हुए हैं। जैसे गजकेसरी योग, मूसल योग, केदार योग, रूचक योग, वोशि योग, भेरी योग, चंद्र मंगल योग, नीच भंग योग, अमर योग, कालह योग, शंख योग तथा वरिष्ठ योग।
इन शुभ ग्रहों के प्रभाव के चलते ही नरेंद्र मोदी को भाजपा में सबसे वरिष्ठ पद पर पहुंचने का मौका मिला।

पंचम स्थान और भाग्य स्थान कुंडली में बहुत महत्व रखते हैं। स्वामी चंद्रमा केंद्र में है और जिस वक्त चुनाव होगा, उन दिनों नरेन्द्र मोदी के भाग्य स्थान में बृहस्पति होगा, जो निश्चित ही फलदायी होगा। इनकी कुंडली में गजकेसरी योग है, जो इनकी बाधाओं को दूर करने के साथ ही इन्हें शीर्ष तक पहुंचने में मददगार सिद्ध होगा।

पंचम भाव में राहु की स्थिति व पंचम का वक्री होना संतान सुख में बाधा का कारण बनता है। ग्रहों की माया से ही आप शादीशुदा नहीं है। इसी कारण राज्य का भला करने में पीछे भी नहीं है। जब किसी को घर-परिवार का मोह ना हो तो वो या तो संन्यासी होता है या भी फिर समाजसेवी यही कारण आपकी राजनीति में सेवा का रहा।

शनि शत्रु राशि में होकर चतुर्थ (जनता भाव) पर पूर्ण दृष्टि रखने से जनता के बीच प्रसिद्ध बना रहा है। इसी कारण से भारत की अधिकांश जनता भावी प्रधानमंत्री के रूप में देख रही है। दशमेश बुध एकादशेश के साथ है। दशमेश सूर्य, केतु से भी युक्त है। एकादश में राज्य के मालिक सूर्य के होने से आप अभी गुजरात के मुख्यमंत्री हैं। आय भाव का स्वामी आय में होने से आप आय के क्षेत्र में काफी उन्नति करते हैं सो आपने गुजरात को सामर्थ्यवान बना डाला।

ग्रहों की चाल और गोचरों की स्थिति तो मोदी के हित में है, अब देखना ये है कि सितारे उन्हें कहां तक सफल बनाते हैं।ज्योतिषियों की मानें तो मोदी की कुंडली में राजयोग है, जो उनकी बाधाओं को दूर करेगा। ग्रहों की स्थिति देखें तो ऐसा संकेत मिलता है कि अगले साल दिल्ली के लाल किला पर मोदी तिरंगा लहराएंगे। हालांकि कुछ ग्रहों के कारण थोड़ी बाधाएं आ सकती हैं।

अभी वर्तमान में सूर्य का महादशा में लग्नेश मंगल का अन्तर चल रहा है जो दशमेश होकर लाभ भाव में व मंगल स्वराशि का होकर लग्न में है और यही समय है भारतीय जनता पार्टी उनकी छवि का लाभ उठा सकती है। आगामी प्रधानमंत्री घोषित कर उनकी कार्य प्रणाली का लाभ भारत के नागरिकों को दिला सकती है।

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