आइये जाने आत्महत्या /अवसाद/डिप्रेशन के सामान्य कारण/लक्षण, आत्महत्या के ज्योतिषीय कारण एवं वास्तु दोष के प्रभाव को भी

आइये जाने आत्महत्या /अवसाद/डिप्रेशन के सामान्य कारण/लक्षण,
आत्महत्या के ज्योतिषीय कारण एवं वास्तु दोष के प्रभाव को भी.. —-

आए दिन अखबार के किसी कोने में देखने को मिल रहे है। कभी किसी ने परीक्षा मे फेल होने पर फांसी लगाई तो किसी ने प्यार में नाकाम होने पर किसी ने खुद को आग के हवाले कर दिया।
बदलती जीवनशैली के कारण आज युवाओं के भीतर सहनशक्ति में भी अत्याधिक कमी देखी जा रही है. वर्तमान समय में लगभग सभी ओर प्रतिस्पर्धा हावी हो चुकी है. पढ़ाई, कॅरियर और पारिवारिक जिम्मेदारियां कुछ ऐसे महत्वपूर्ण कारक हैं जिनमें असफलता व्यक्ति को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर देती है. जाहिर है कोई व्यक्ति अपने सुनहरे सपनों और बहुमूल्य जीवन का अंत खुशी से नहीं करेगा. अगर वे आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठाते हैं या कोशिश भी करते हैं तो इसके पीछे उनकी कोई बहुत बड़ी विवशता होती है.

आधुनिक भागदौड के इस जीवन में कभी न कभी हर व्यक्ति डिप्रेशन अर्थात अवसाद का शिकार हो ही जाता है। डिप्रेशन आज इतना आम हो चुका है कि लोग इसे बीमारी के तौर पर नहीं लेते और नजरअंदाज कर देते हैं। किन्तु ऎसा करने का परिणाम कभी कभी बहुत ही बुरा हो सकता है।काम की भागदौड़ में कई बार इंसान डिप्रेशन का शिकार हो जाता है यानी वह मानसिक अवसाद में आ जाता है। ऐसा होना आम बात है लेकिन कई बार डिप्रेशन इतना अधिक बड़ जाता है कि वह कुछ समय के लिए अपनी सुध-बुध खो बैठता है। कुछ लोग डिप्रेशन के कारण पागलपन का शिकार भी हो जाते हैं।
पुरूषों की तुलना में महिलाएं डिप्रेशन से अधिक प्रभावित होती हैं। कुछ शोधकर्ता ऐसा मानते हैं कि डिप्रेशन से वो महिलाएं प्रभावित होती हैं जिनका कोई इतिहास होता है जैसे कि वो पहले कभी सेक्सुअली एब्यूज़ हुई हों या फिर उन्हें किसी प्रकार की इकानामिक परेशानी हुई हो।कई दूसरी बीमारियों की तरह डिप्रेशन भी एक अनुवांशिक बीमारी है। डिप्रेशन की एवरेज एज 20 वर्ष से उपर होती हैं। कुछ फिज़ीशियन ऐसा मानते हैं कि ड्रिप्रेशन दिमाग में मौजूद कैंमिकल्स में हुई गड़बड़ी से होता है इसलिए वो एण्टी डिप्रेसेंट दवाएं देते हैं … लेकिन अभी तक ऐसा कोई टेस्ट सामने नहीं आया है, जिसकी मदद से इन कैमिकल्स का लेवल पता किया जा सके। इस बात का भी कोई प्रमाण नहीं मिला है कि मूड बदलने से जीवन के अनुभव बदलते हैं या इन अनुभवों से मूड बदलता है।डिप्रेशन शारीरिक परेशानियों से भी जुड़ा होता है जैसे फिज़िकल ट्रामा या हार्मोन में होने वाला बदलाव। डिप्रेशन के मरीज़ को अपना शारीरिक टेस्ट भी करा लेना चाहिए।

पहले यह माना जाता था कि पारिवारिक आर्थिक संकट और वित्तीय परेशानी ही व्यक्ति को आत्महत्या करने के लिए विवश करती है लेकिन अब आर्थिक कारणों से कहीं ज्यादा कॅरियर की चिंता या असफलता युवाओं को आत्महत्या करने के लिए विवश कर रही है. इसके अलावा अभिभावकों और अध्यापकों का बच्चे पर पढ़ाई को लेकर दबाव बनाना उनमें आत्महत्या करने जैसी प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहा है. हालांकि प्रेम संबंधों में कटुता या असफलता भी युवाओं के आत्महत्या करने का एक बड़ा कारण है लेकिन फिर भी अभिभावकों का उनसे अत्याधिक अपेक्षाएं उन्हें मानसिक रूप से कमजोर बना देती हैं और अंत में उनके पास अपना जीवन समाप्त करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं रह जाता.

कोटा (राजस्थान) जो आज के समय के एजुकेशन हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है, जहां हर वर्ष आईआईटी की पढ़ाई के लिए देशभर से हजारों की संख्या में छात्रों का आना-जाना लगा रहता है, वहां बच्चे पढ़ाई के दबाव या अपने सह छात्रों से पीछे रह जाने के दुख में आत्महत्या करने के लिए प्रेरित होते हैं.

प्राय: देखा जाता है जहां कुछ युवा कॅरियर या पढ़ाई के दबाव में आत्महत्या करने का निर्णय लेते हैं वहीं कुछ प्रेम संबंधों या विवाह जैसे निजी कारणों से परेशान हो कर यह राह अपनाते हैं. इससे यह साफ जाहिर होता है कि सार्वजनिक तौर पर आत्महत्या का कोई कारण लागू नहीं किया जा सकता. यह पूर्णत: व्यक्तियों के स्वभाव और उनकी प्राथमिकताओं पर ही निर्भर है. जब व्यक्ति परेशानियों से घिरने लगता है तो अपरिपक्वता के कारण वह आत्महत्या को ही एक बेहतर विकल्प समझने लगता है.

लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि आखिर क्या कारण है कि आत्महत्या, जिसे नैतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टिकोण से एक अपराध की संज्ञा दी जाती है, व्यक्ति को सभी दुखों का अंत लगती है? हो सकता है कुछ लोगों को यह बात सही ना लगे लेकिन सच यही है कि अगर व्यक्ति आत्महत्या करने की कोशिश करता है तो इसके पीछे उसका परिवार और आसपास का वातावरण पूर्ण उत्तरदायी होते हैं. अभिभावकों का अपने बच्चे से अत्याधिक अपेक्षाएं रखना, उनका तुलनात्मक स्वभाव और नंबर कम आने पर ढेर सारी डांट या मार बच्चे को मानसिक रूप से बहुत परेशान करती है. हो सकता है अभिभावक इसे अपनी जिम्मेदारियों का एक हिस्सा समझते हों लेकिन बच्चे के मस्तिष्क पर इसका नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है. वहीं दूसरी ओर अगर बच्चा अपने प्रेमी की ओर से निराश है तो उसे संभालने की पूरी जिम्मेदारी भी अभिभावकों और उसके दोस्तों की ही होती है. ऐसे समय में उनका यह दायित्व बन जाता है कि व्यक्ति को उसकी असफलता का अहसास ही ना होने दिया जाए.

आत्महत्या की ओर बढ़ते रुझान के लक्षण—

01 .—-संबंधित व्यक्ति आत्महत्या के विषय में ज्यादा बात करने लगता है. वह हर बात पर चिड़चिड़ा रहने लगता है और वह कुछ दिन पहले से ही “मैं अब शिकायत नहीं करूंगा, अब नहीं आऊंगा, मैं चला जाऊंगा” जैसे संकेत भी देने लगता है.
02 .—-व्यक्ति कई बार आत्महत्या करने की कोशिश करता है और सिगरेट, शराब या अन्य कोई नशा बहुत ज्यादा करने लगता है. ऐसा व्यक्ति बहुत ज्यादा दुखी रहने लगता है जिसके कारण वह अनिद्रा का शिकार हो जाता है.

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक भारत में आत्महत्या की दर 1978 के 6.3 प्रति एक लाख आबादी से बढ़कर 1990 में 8.9 प्रति एक लाख हो गई. इस तरह से करीब एक दशक में आत्महत्या की दर में 41.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.
आंकड़ों के मुताबिक, 2009 में भारत में आत्महत्या की दर 10.9 प्रति एक लाख हो गई है जो 2010 में बढ़कर 11.4 प्रति एक लाख आबादी हो गई.विशेषज्ञों का मानना है कि यह संख्या अधिक हो सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में ऐसे मामले पंजीकृत ही नहीं होते. लैंसेंट मेडिकल जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि आत्महत्या के मामलों में बड़ी संख्या 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की होती है.
इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी के डा.आर अब्राहम ने इस बारे में कहा कि समाज में तेजी से आ रहे बदलाव, परिवारों के टूटने का परिणाम अवसाद ग्रस्त युवा और आत्महत्या के बढ़ते मामलों के रूप में सामने आ रहा है.उन्होंने कहा कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सफलता के लिए परिवार एवं समाज के दबाव के कारण युवाओं में अवसाद पैदा हो रहा है और ऐसे में मदद के लिए कोई सहारा नहीं होने के कारण वे आत्महत्या कर रहे हैं.
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की 2010 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में आत्महत्या करने वालों में 33.6 प्रतिशत ने जहर खाकर और 31.5 प्रतिशत ने फांसी लगाकर आत्महत्या की. 9.2 प्रतिशत लोगों के आग लगाकर और 6.1 प्रतिशत लोगों के पानी में डूब कर आत्महत्या करने की बात सामने आई है.

आत्महत्या के तरीके /प्रकार—

आत्महत्या का तरीका ऐसी किसी भी विधि को कहते हैं जिसके द्वारा एक या अधिक व्यक्ति जान-बूझकर अपनी जान ले लेते हैं.
आत्महत्या के तरीकों को जीवन लीला समाप्त करने की दो विधियों के अनुसार वर्गीकृत किया जा सकता है: शारीरिक या रासायनिक….

01 .–डूबकर आत्महत्या करना जान-बूझकर अपने आपको पानी या किसी अन्य द्रव्य में डुबाना है
02 .–घुटन के जरिये आत्महत्या करना अपनी सांस लेने की क्षमता को बाधित करना या सांस लेते समय ऑक्सीजन अंदर लेने की क्रिया को सीमित करना है जिससे श्वासावरोध पैदा हो जाता है और अंततः सांस बंद होने से प्राण निकल जाते हैं.
03 .—कलाई काटने का कारण आम तौर पर आत्महत्या का प्रयास करने की बजाय जान-बूझकर स्वयं को नुकसान पहुँचाना होता है.
04 .–बिजली से मौत (इलेक्ट्रोक्यूशन)–इलेक्ट्रोक्यूशन के जरिये आत्महत्या में अपने आपको ख़त्म करने के लिए घातक बिजली के झटके का इस्तेमाल किया जाता है.
05 .—हाइपोथर्मिया या ठंड से आत्महत्या एक धीमी मौत है जो कई चरणों से होकर गुजरती है.
06 .–ऊँचाई से कूदने का मतलब है ऊँचे स्थानों से छलांग लगाना,
07 .— बंदूक की गोली का निशाना—–आत्महत्या का एक आम तरीका है आग्नेयास्त्र का उपयोग करना. आम तौर पर बंदूक की गोली का निशाना प्वाइंट-ब्लैंक रेंज पर, अक्सर सिर पर या कम सामान्य रूप से मुँह के अंदर, ठोड़ी के नीचे या छाती में सटाकर लगाया जाता है.
08 .–फांसी—-इस तकनीक के साथ रोगी गले के चारों ओर कुछ ऐसे उपकरण का इस्तेमाल करने की कोशिश करता है जिससे कि गला घोंट दिया जाए और/या गर्दन टूट जाए. मृत्यु की स्थिति में मौत का वास्तविक कारण फांसी लगाने के लिए इस्तेमाल किये गए उपकरण के प्रकार पर निर्भर करता है, जहाँ प्रकार आम तौर पर रस्सी की लंबाई को दर्शाता है.
09 .–वाहनों के कारण—कुछ कार दुर्घटनाएं वास्तव में आत्महत्याएं होती हैं,सामने से आ रही एक भूमिगत ट्रेन के आगे छलांग लगाने में ,सामने से चली आ रही ट्रेन के आगे कूद जाते हैं या ट्रेन के आने की प्रतीक्षा करते हुए अपनी गाड़ी में बैठकर इसे पटरियों पर चलाते हुए आगे बढ़ते हैं,
10 .–जहर के प्रभाव/कारण—तेजी से असर करने वाले जहर जैसे कि हाइड्रोजन सायनाइड या ऐसी चीजें जो मनुष्य के प्रति अपनी उच्च-स्तरीय विषाक्तता के लिए जानी जाती हैं, इनके द्वारा आत्महत्या की जा सकती है.
एक कटु सत्य यह भी हें की दुनिया भर में 30% आत्महत्याएं कीटनाशक के जहर से होती हैं..
11 .—दवा की अत्यधिक खुराक लेना आत्महत्या का एक ऐसा तरीका है जिसमें निर्धारित स्तर से कहीं अधिक मात्रा में दवाई लेना या दवाओं के ऐसे मिश्रण को लेना शामिल है जो आपस में क्रिया करके नुकसानदेह प्रभाव पैदा करता है या एक या अधिक तत्वों की शक्ति को बढ़ा देता है.

इनके अलाबा भी कई अन्य तरीके इस्तेमाल होते हें….

हाल ही में बॉलीवुड के बड़े सितारों के साथ काम कर चुकी 25 वर्षीय फिल्म अभिनेत्री जिया खान ने नाकामी और भविष्य के डर से निराश होकर अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। हर आत्महत्या के पीछे एक दर्द भरी कहानी होती है परन्तु ऐसे कोनसे कारण होते हें जहां पर परिवार का कोई सदस्य ऐसे भयावह कदम को उठाने पर मजबूर हो जाता है?

मशहूर गायिका आशा भोंसले की बेटी वर्षा की खुदकुशी के बाद अब यह बात खुल कर सामने आई थी कि अवसाद की चपेट में आ कर खुद की जिंदगी को तबाह करने वाले सिर्फ आम आदमी ही नहीं है।बल्कि वह खास लोग भी है जो खुद की पहचान बनाने की होड़ में खुद को ही एक कोने में अकेला महसूस करते हैं। वर्षा भोंसले, आशा भोंसले की तीन में से दूसरी संतान जो कि पेशे से एक पत्रकार थीं उसके पास दौलत बेशुमार थी और शोहरत की भी कोई कमी नहीं थी। फिर क्या कारण था वर्षा के इस भयंकर कदम का जिसने पूरी मुम्बई को दहला कर रख दिया।

आत्महत्या /अवसाद/डिप्रेशन के सामान्य कारण/लक्षण—-

01 .—लोगों में बढ़ रही इस अधीरता का सीधा-सीधा कारण बढ़ रही जनसंख्या है। जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे संसाधन कम होते जा रहे हैं। इसके अलावा उन्हें पाने की कीमत भी अब दोगुनी और तीगुनी हो रही है। जिसको पाने के लिए आदमी को एक अच्छी नौकरी चाहिए, नहीं मिले तो एक पार्ट टाइम जॉब भी करना पड़ता है।

02 .—आदमी आज खुद को पैसे कमाने की मशीन बनता हुआ देख रहा है। लेकिन बुनियादी जज्बात की उपेक्षा कर रहा है। टेक्नोसेवी बनता आदमी अब आदमी से दूर होने लगा है। शांत मन, खुशमिजा़ज और धार्मिक लोग कम ही देखने को मिलते हैं।

03 .—अपने मां-बाप के बीच बेहतर संवाद न स्थापित हो पाना अवसाद का एक कारण हो सकता है। जब शुरु से ही मां और बाप बच्चे के बीच में संवादहीनता आ जाती है तो बच्चा बड़े होने पर भी खुद को अकेला पाता है।

04 .—खुद को जिंदगी में दूसरों से कम आंकना भी अवसाद को जन्म देता है जो कभी आत्महत्या का कारण बन जाता है। परीक्षा हो या प्रमोशन हर जगह प्रतियोगिता है। इस में खुद को एक लंगडा घोड़ा मान कर कई लोग अवसाद के अंधेरे में खो कर खुद को खत्म कर लेते है।

05 .—सुखद वैवाहिक जीवन न होना भी आत्महत्या का कारण माना जा सकता है। वैवाहिक जीवन मे खट्टास किसी भी व्यक्ति के लिए मानसिक समस्या होती है। जो उसके जीवन साथी से अलग होने के बाद भी रहती है।

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि कोई भी व्यक्ति एकाएक आत्महत्या करने के बारे में नहीं सोच सकता, उसे इतना बड़ा कदम उठाने के लिए खुद को तैयार करना पड़ता है और पहले से ही योजना भी बनानी पड़ती है. तनावपूर्ण जीवन, घरेलू समस्याएं, मानसिक रोग आदि जैसे कारण पारिवारिक जनों को आत्महत्या करने के लिए विवश करते हैं. इतना ही नहीं महिलाएं अपनी बात दूसरों से शेयर कर लेती हैं इसीलिए उनके आत्महत्या करने की संभावना कम होती है, लेकिन पुरुष किसी से अपनी परेशानी नहीं कहते इसीलिए उन्हें आत्महत्या करने से रोकना मुश्किल हो जाता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि आत्महत्या मनोवैज्ञानिक के साथ-साथ जेनेटिक समस्या भी है. जिन परिवारों में पहले भी कोई व्यक्ति आत्महत्या कर चुका होता है उसकी आगामी पीढ़ी या परिवार के अन्य सदस्यों के आत्महत्या करने की संभावना बहुत अधिक रहती है. वहीं दूसरी ओर वे बच्चे जो आत्महत्या के बारे में बहुत ज्यादा सोचते हैं (सुसाइडल फैंटेसी), उनके आत्महत्या करने की आशंका काफी हद तक बढ़ जाती है.

डाक्टर माचिसवाला के अनुसार अवसाद के बढ़ जाने के कारण लोग अवसाद को बिमारी मानते ही नहीं है। इस के कारण यह खतरे की सीमा लांघ जाता है। मुझे हैरानी होती है जब यह देखने में आता है कि पांच में से एक मरीज ही इसके इलाज के लिए मनौवेज्ञानिक के पास जाता है। अवसाद लाइलाज बिमारी नहीं है,इसका इलाज मुमकिन है। लेकिन इसे अनदेखा कर लोग भयावह नतीजे भुगतते हैं। लड़को की अपेक्षा लड़कियों में अवसाद दोगुना होता है।
अवसाद के लक्षणों के बारे मे जानकारी देते हुए डाक्टर माचिसवाला के अनुसार कि अवसाद आदमी की उर्जा को कम और कभी-कभी खत्म कर देता है। जिंदगी का नर्क जैसा लगना, जिंदगी जीने लायक न समझना, अपने उम्र की गतिविधियों में शामिल न होना। यह सब अवसाद में घिरे व्यक्ति के लक्षण हैं।

आत्महयता से बचने के निम्न पांच प्रयास/उपाय करें—

सबसे महत्वपूर्ण अवसाद को खुद से दूर कैसे करें इस सवाल के जवाब में माचिस वाला ने कहा कि यह खुद पर निर्भर करता है। लेकिन फिर भी पांच उपाय है जो कि लागू किए जाए तो अवसाद आप से दूर रहेगा।

—-6-8 घंटे की नींद लें और देर रात तक जगना छोड़े।
—-पौष्टिक भोजन करें और खाने में फल और सब्जी मिलाएं।
—-अपना लक्ष्य निर्धारित करें और उसको पाने के लिए ध्यान केंद्रित करें।
—-शराब और सिगरेट को ना कहें। यह तनाव कम नहीं करते, बढ़ाते हैं।
—-परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताए।

आत्महत्या के विचार क्यों आते होंगे?

वह तो भीतर विकल्प खतम हो जाते हैं इसलिए। यह तो विकल्प के आधार पर जीया जाता है। विकल्प समाप्त हो जाएँ, फिर अब क्या करना, उसका कोई दर्शन दिखता नहीं है, इसलिए फिर आत्महत्या करने की सोचता है। इसलिए ये विकल्प भी काम के ही हैं।

सहज विचार बंद हो जाएँ, तब ये सब उलटे विचार आते हैं। विकल्प बंद हों इसलिए जो सहज विचार आते हों, वे भी बंद हो जाते हैं। अँधेरा घोर हो जाता है। फिर कुछ दिखता नहीं है! संकल्प अर्थात् ‘मेरा’ और विकल्प अर्थात् ‘मैं’। वे दोनों बंद हो जाएँ, तब मर जाने के विचार आते हैं।
आत्महत्या करने से तो प्रेत बनता है और प्रेत बनकर भटकना पड़ता है। इसलिए आत्महत्या करके उलटे उपाधियाँ मोल लेता है। एकबार आत्महत्या करे, उसके बाद कितने ही जन्मों तक उसका प्रतिघोष गूँजता रहता है! और यह जो आत्महत्या करता है, वह कोई नया नहीं कर रहा है। वह तो पिछले जन्म में आत्महत्या की थी, उसके प्रतिघोष से करता है। यह जो आत्महत्या करता है, वह तो पिछले किए हुए आत्मघात कर्म का फल आता है। इसलिए अपने आप ही आत्महत्या करता है। वे ऐसे प्रतिघोष पड़े होते हैं कि वह वैसा का वैसा ही करता आया होता है। इसलिए अपने आप आत्महत्या करता है और आत्महत्या होने के बाद फिर अवगतिवाला जीव बन जाता है। अवगति अर्थात् देह के बिना भटकता है। भूत बनना कुछ आसान नहीं है। भूत तो देवगति का अवतार है, वह आसान चीज़ नहीं है। भूत तो यहाँ पर कठोर तप किए हों, अज्ञान तप किए हों, तब भूत होता है, जब कि प्रेत अलग वस्तु हैं।
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आइये जाने ..मानसिक अवसाद/टेंशन/डिप्रेशन के ज्योतिषीय कारण एवं उपाय—

अवसाद का मतलब होता है कुण्ठा, तनाव, आत्महत्या की इच्छा होना। अवसाद यानी डिप्रेशन मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक है, इसका असर स्‍वास्‍थ्‍य पर भी पड़ता है और व्यक्ति के मन में अजीब-अजीब से ख्या‍ल घर करने लगते हैं। वह चीजों से डरने और घबराने लगता है। आइए जानें कैसे खतरनाक है अवसाद..कई बार मन अवसाद ग्रस्त होता है और अपने आप ठीक हो जाता है |लेकिन कई बार अवसाद मन में कहीं गहरे तक बैठ जाता है |
अवसाद का कारक चंद्रमा —-
नींद न आना, नींद आये तो ज्यादा आये,रात को सोते हुए उठ कर चलना,आलस्य,आंख के देले की बीमारिया , कफ्ह,सर्दी के कारन बुखार,भूख न लगना,पीलिया,खून खराबी,जल से डर लगना,चित की थकावट ,किसी काम में मन न लगना,महिलाओ सम्बन्धी,इस्त्रियो का मासिक धरम का नियमत न होना,अनीमिया,आदि!

डिप्रेशन जैसे मानसिक रोगों का केन्द्रबिन्दु मन है। मन जो कि शरीर का बहुत ही सूक्ष्म अव्यव होता है,लेकिन आन्तरिक एवं बाह्य सभी प्रकार की क्रियायों को यही प्रभावित करता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार अवसाद(डिप्रेशन)मूल रूप से मस्तिष्क में रसायनिक स्त्राव के असंतुलन के कारण होता है,किन्तु वैदिक ज्योतिष अनुसार इस रोग का दाता, मन को संचालित करने वाला ग्रह चन्द्रमा तथा व्यक्ति की जन्मकुंडली में चतुर्थ भाव के स्वामी को माना जाता है। चंद्र के प्रत्यक्ष प्रभावों से तो आप सभी भलीभान्ती परिचित हैं। पृथ्वी के सबसे नजदीक होने से व्यक्ति के मन को सर्वाधिक प्रभावित यही ग्रह करता है,क्योंकि ज्योतिष में चंद्रमा का पूर्ण सम्बंध हमारे मानसिक क्रियाकलापों से है। अगर चंद्रमा या चतुर्थेश(Lord of 4th house) नीच राशी में स्थित हो, अथवा षष्ठेश(Lord of 6th house)के साथ युति हो,या फिर राहू या केतु के साथ युति होकर कुंडली में ग्रहण योग निर्मित हो रहा हो तो इस रोग की उत्पति होती है। इसके अतिरिक्त द्वादशेश(Lord of 12th house) का चतुर्थ भाव में स्थित होना भी व्यक्ति के मानसिक असंतुलन का द्योतक है।अवसाद से मुक्ति के लिए सबसे पहले तो पीडित व्यक्ति का वातावरण परिवर्तित कर देना चाहिए,लेकिन यह समझ लेना भी गलत होगा कि सिर्फ वातावरण के परिवर्तन से रोग मुक्ति संभव है। इसके अतिरिक्त उसके आत्मविश्वास को जगाने का प्रयास करते रहना चाहिए, साथ ही कुछ महत्वपूर्ण सुझाव तथा उपाए भी इसके निवारणार्थ यहां दिए जा रहे हैं
अवसाद (डिप्रेशन से प्रभावित लोगों के आम लक्षण)के निम्न लक्षण दिखायी देते हैं —
–दुःख का लगातार अनुभव
—लगातार उर्जा में कमी
–नींद में कठिनाई
–भूख में कमी
–वजन का घटना
—सिरदर्द का रहना लगातार

डिप्रेशन के कुछ ऐसे लक्षण जिनमें प्रोफेशनल ट्रीटमेंट की तुरन्त आवश्यकता होती है:—
मरने या आत्महत्या की कोशिश करना। यह बहुत ही खतरनाक स्थिति है, ऐसी स्थिति में प्रोफेशनल थेरेपिस्ट से सम्पर्क करना बहुत ज़रूरी हो जाता है।
जब डिप्रेशन के लक्षण लम्बे समय तक दिखें।
आपके काम करने की शक्ति दिन पर दिन क्षिण होती जा रही है।
आप दुनिया से कटते जा रहे हैं।
डिप्रेशन का इलाज सम्भव है। इस बीमारी में व्यक्ति का शारीरिक से ज़्यादा मानसिक रूप से स्वस्थ होना ज़रूरी होता है। ऐसी स्थिति में ऐसा मित्र बनायें जो आपकी बातों को समझ सके और अकेले कम से कम रहने की कोशिश करें।

इसके दुष्प्रभाव—-
—–हृदय जन्य बीमारीयाँ
——अस्थमा का दौरा आना
—–त्वचा की बीमारी होना
——शरीर मे खून की कमी हो जाना
—–चश्मा लगना
—–और भी जाने कई सारी बीमारीयाँ।

अब यह किसी एक वर्ग को हो यह जरुरी नही है। पढने वाले बच्चे परीक्षा के डर से , या नम्बर कम आने के डर से इस अवस्था में आ जाते हैं .महिलायें पुरूष कोई भी किस समय इस का शिकार हो जाए कौन जाने|अवसाद रोगियों के लिए प्राकतिक चिकित्सा ,रेकी , ऊर्जा चिकित्सा आशा की किरण है |
यदि आप डिप्रेशन से बचना चाहते हैं तो यह उपाय करें-
—– रोगी को चांदी के पात्र (गिलास आदि) में जल,शर्बत इत्यादि शीतल पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
—- सोमवार तथा पूर्णिमा की रात्री को चावल,दूध,मिश्री,चंदन लकडी,चीनी,खीर,सफेद वस्त्र,चांदी इत्यादि वस्तुओं का दान करना चाहिए।
—- आशावादी बनें। प्रत्येक स्थिति में आशावादी दृ्ष्टिकोण अपनाऎं। अपनी असफलताओं को नहीं वरन सफलताओं को याद करें।
—-हरे रंग का परित्याग करें।
—-चाँदी में मंडवाकर गले में द्विमुखी रूद्राक्ष धारण करें, साथ ही नित्य प्रात: कच्चे दूध में सफेद चन्दन घिसकर मस्तक पर उसका तिलक करें।
—– कभी भी खाली न बैठे क्यों कि अगर आप खाली बैठेंगे तो मन को अपनी उडान भरने का समय मिलेगा,जिससे भांती भांती के कुविचार उत्पन होने लगेंगे।
—- हो सके तो बेहतर मनोंरंजक साहित्य पढें,सिद्ध पुरूषों के प्रवचन सुनें,व्यायाम-योग-ध्यान साधना इत्यादि विधियों को अपनाऎं।
उपरोक्त उपायों एवं सुझावों को अपनाएं तथा अपने घर परिवार,समाज के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करें,दूसरों की खुशियों में अपने लिए खुशियां ढूंढने का प्रयास करें……….जिससे आपका जीवन भी खुशियों से महके उठे।
—प्रतिदिन सुबह नित्य कर्मों से निवृत्त होकर तुलसी के पौधे की 11 परिक्रमा करें और घी का दीपक जलाएं। तुलसी के पौधे को जल चढ़ाएं। यही प्रक्रिया शाम को समय भी करें। ऐसा करने से मानसिक अवसाद कम होगा। तुलसी का माला धारण करें तो और भी बेहतर लाभ मिलेगा।
—समय समय पर आत्म विश्लेषण करते रहें।
—-मेडिटेशन जरूर करें।
—–अंगूठे और पहली उंगली यानी इंडैक्स फिंगर के पोरों को आपस में जोडऩे पर ज्ञान मुद्रा बनती है। इस मुद्रा को रोज दस मिनट करने से मस्तिष्क की दुर्बलता समाप्त हो जाती है। साधना में मन लगता है। ध्यान एकाग्रचित होता है। इस मुद्रा के साथ यदि मंत्र का जाप किया जाय तो वह सिद्ध होता है। परमानन्द की प्राप्ति होती है। इसी मुद्रा के साथ तो ऋषियों मनीषियों तपस्वियों ने परम ज्ञान को प्राप्त किया था।
लाभ- मानसिक क्षमता बढ़ती है।
– इस मुद्रा को करने से पागलपन, अनेक प्रकार के मनोरोग दूर होते हैं।
– चिड़चिड़ापन, गुस्सा, चंचलता, लम्पटता, अस्थिरता, चिंता से मुक्ति मिलती है।
– भय, घबराहट, व्याकुलता, अनिद्रा रोग, डिप्रेशन आदि से छुटकारा मिलता है।
– याददाश्त व एकाग्रता में वृद्धि होती है।
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क्या वास्तुदोषों के कारण लोग करते है आत्महत्या..???

आए दिन हम समाचार पत्रों, टीवी चैनलों, पत्रिकाओं आदि में आत्महत्या की दिल दहलाने वाली खबरे पढ़ते एवं देखते है। जब कोई आत्महत्या करता है तो उसके भाग्य के साथ-साथ उसके घर के वास्तुदोष भी अहम भूमिका निभाते है।वास्तु दोष के कारण दिखायी देने वाली कयी निशानिया जैसे वय्भिचार, अन्य औरतों के मोह में पड़ना, अपनी घरवाली से असंतुस्थ होना, जूया खेलना, शराब पीना, परिवार के व्यक्तियों को ही हानि पहुँचाने कि बात सोचना, पारिवारिक झगड़े, पति पत्नी के बीच के झगड़े, एक दूसरे पर आक्रमण करना, आत्महत्या कि बात सोचना, अथवा दूसरों कि हत्या करने का खयाल रखना, चोरी करना उधार माँगते रेहाना, ज्यादा खर्च करना, लाख कोशिस करने पर भी उधार ना चुका सकना, मानसिक पीदह, निस्संतु होना, बच्चों कि अकाल म्रित्यु, बच्चों का अंग वैकल्य, बच्चों कि बीमारियाँ, बच्चों कि तरक्की ठीक से ना होना, धंदे में आशा जनक प्रगति का ना होना, व्यापार में पूँजी में सूद तक ना निकालना,साझेदारी कि समस्याएँ , परिवार के लोगों में दीर्ध रोग जैसे कैंसर , एड्स, पक्श्वात, हृदय रोग, चर्म रोग आदि का होना| मानसिक रोग जैसे : डर लगना, पागलपन, दुनिया से ऊब्कर सन्यास स्वीकार कि बात सोचना |असंभव कार्यों कि कोशिश करना , ग़लत काम करके पकड़े जाना , आग बिजली के खतरे होना , नौकरी ना होना , लाख प्रयास करने पर भी विदेश ना जा सकना आदि | इसी तरह कन्याओं के लिए मा बाप कि इक्च्चा के विरुद्ध दूसरों से प्राइम करना , उनके साथ पलायन करना, शादी होने पर भी पूर्व प्रेमी से सम्बन्ध जारि रखना, पति से लद्कर मयिके पहुँचना| पति के अनुरोध पर माता पिता को पैसों के लिए सताना इत्यादि| अतः ऐसी परिस्थितियों में हम वास्तु शास्त्र का अनुसरण कर इन दोषों का निवारण कर सकते है, और सुख चैन से अपना जीवन व्यतीत कर सकते है|

सामान्यतया जिन घरों में आत्महत्या होती है उन घरों में दो या दो से अधिक वास्तुदोष अवश्य होते है,जो निम्न हो सकते हें—-

01 .—जिनमें से एक घर के ईशान कोण (नार्थ ईस्ट) में होता है..यदि उस घर के नैऋत्य कोण के वास्तुदोष जैसे भूमिगत पानी की टंकी, कुआं, बोरवेल, बेसमेंट या किसी भी प्रकार से इस कोने का फर्श नीचा हो या घर का दक्षिण नैऋत्य (साऊथ ऑफ द साऊथ वेस्ट) या पश्चिम नैऋत्य (वेस्ट ऑफ द साऊथ वेस्ट) बढ़ जाए। इस दोष के साथ यदि उस घर के पश्चिम नैऋत्य कोण में मुख्य द्वार हो तो घर के पुरूष सदस्य के साथ और यदि मुख्य द्वार दक्षिण नैऋत्य कोण में हो तो उस घर की स्त्री द्वारा आत्महत्या की संभावना बलवति हो जाती है।

02 .–दूसरा वास्तुदोष घर के ईशान कोण में होता है जैसे – घर का यह कोना अंदर दब जाए, कट जाए, गोल हो जाए या किसी कारण पूर्व आग्नेय (ईस्ट ऑफ साऊथ ईस्ट) की ओर दीवार आगे बढ़ जाए तो घर के पुरूष सदस्य द्वारा और यदि उत्तर वायव्य (नार्थ ऑफ द नार्थ वेस्ट) की दीवार आगे बढ़ जाए तो घर की स्त्री सदस्य द्वारा आत्महत्या की जा सकती है।

03.—इसी प्रकार यदि किसी मकान/घर के दक्षिण नैऋत्य में मार्ग प्रहार हो तो स्त्रियां और पश्चिम नैऋत्य में मार्ग प्रहार हो तो पुरूष अवसाद/उन्माद जैसे रोगों की शिकार होगें और कहीं कहीं वे आत्महत्या भी कर सकते है।
04 .–पूर्व आग्नेय कोण ढंके तो पुरूष द्वारा और उत्तर वायव्य ढंके तो भी वहां रहने वाली स्त्री द्वारा आत्महत्या करने की संभावना बढ़ जाती है।

यदि घर के इस तरह के वास्तुदोष हो तो उन्हें दूर कर,उपरोक्त आत्महत्याओं जैसी दुःखद घटनाओं से बचा जा सकता हें ।

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