वैदिक ज्योतिष और अंक ज्योतिष द्वारा विवेचन की क्या नरेन्द्र मोदी अगले प्रधानमन्त्री बनेंगे.???

वैदिक ज्योतिष और अंक ज्योतिष द्वारा विवेचन की क्या नरेन्द्र मोदी अगले प्रधानमन्त्री बनेंगे.???

आज देश-विदेश की निगाहें लगी हुई हैं आगामी संसदीय चुनावो पर। यहाँ नरेन्द्र मोदी जीत रहे हैं, इससे तो कोई अक्ल का अंधा भी इनकार नहीं करेगा और इसमें किसी भविष्यवाणी की आवश्यकता भी नहीं है; मगर सवाल यह है कि मोदी कैसी जीत पाते हैं? इस पर मोदी का राष्ट्रीय राजनीति का सफ़र दिशा तय करेगा। एक ज़ोरदार हल्ला मचा हुआ है मोदी को अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखने को लेकर। इस बात के समर्थकों और विरोधियों में एक तगड़ी जंग छिड़ी हुई है।

व्यक्ति-विशेष का जन्मांग और भाग्य कितना भी प्रबल क्यों न हो, वह अपने देश के प्रधानमंत्री पद को तब तक सुशोभित नहीं कर पाता जब तक कि उस देश के सितारे उसकी अपनी ग्रह दशा के क्रम तथा चुनाव के समय के गोचर से पूर्णतः अनुरूपता प्राप्त नहीं करते। आइये, करते हैं, इसी दृष्टि से भारत एवं मोदी के जन्मांग व गोचर का सटीक ज्योतिषीय विश्लेषण।

श्री नरेन्द्र मोदी का जन्म विवरण—

अंक विज्ञान के अनुसार नरेन्द्र मोदी की जन्म तिथि 17-09-1950 का मूलांक 8, भाग्यांक 5 और नामांक 5 है। इन तीनों अंको में आपस में मैत्री सम्बन्ध है। ।

क्‍या कह रहे हैं मोदी के सितारे..???

भाजपा- गुजरात में भाजपा का अस्तित्व नरेन्द्र मोदी के व्यापक व्यक्तित्व और कार्य करने की बेहतर शैली पर निर्भर है। मोदी की जन्म लग्न वृश्चिक है, जो एक स्थिर राशि है। मोदी जो निश्चय कर लेते, उस पर स्थिर एंव अटल रहते है। लक्ष्य निर्धारित कर लेने के पश्चात उन्हे उस लक्ष्य तक पहुंचने में कोई बाधा रोक नहीं पाती है। वृश्चिक राशि एक जल तत्व राशि है, जो आपकी उर्वर कल्पना शक्ति, तीव्र बुद्धिमता, दूरदर्शिता एंव गहन संवेदनशीलता की द्योतक है। यह मोदी में उल्लेखनीय अन्तः प्रेरणा शक्ति व्यक्त करती है, जो इन्हे किसी विषय का सूक्ष्म परीक्षण एंव निरीक्षण तथा विशलेषण करने की क्षमता प्रदान करती है।

लग्न में वृश्चिक का मंगल स्थित होकर रूचक महापुरूष योग का निर्माण कर रहा है, जिस कारण मोदी जी में साहस, स्वतंत्रता, उदारता, प्रतिकूल परिस्थतियों में धैर्य बनायें रखना एंव विरोधियों को निरूत्तर करने की प्रवृत्ति जैसे गुणों की उपस्थिति व्यक्त करता है। वर्तमान में मोदी की जन्मपत्री में चन्द्र की महादशा में राहु का अन्तर तथा शनि का प्रत्यन्तर चल रहा है। चन्द्रमा भाग्येश होकर लग्न में नीच राशि में बैठाकर नीचभंग राजयोग का निर्माण कर रहा है। पंचम का राहु तीक्ष्ण बुद्धि के कारण विख्यात और कीर्ति दिलाता है। शनि तृतीयेश एंव चतुर्थेश होकर दशम भाव पर आधिपत्य जमाये हुये है। दशम भाव का शनि उच्च पद का संकेतक है। गोचर में शनि तुला राशि में उच्च का होकर भ्रमण कर रहा है, जो एक अच्छा संकेत है।

प्रत्येक राजनैतिक पार्टी अपने प्रलोभन भरे वादों का तिलिस्म खोल रही है। किन्तु जनमानस समय के साथ धीरे-धीरे समझदार होता दिख रहा है, चूंकि उसे सर्दी से बचने के लिए 100 उस का जहर नहीं, बल्कि दो जून की रोटी चाहिए। वैसे तो चुनाव से पूर्व प्रत्येक राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत का दावा करता है। यह कोई नयीं बात नहीं बल्कि पुरानी रीति है। किन्तु इस चुनाव में सितारों की चाल किसके अनुकूल रहेगी। यह जानना दिलचस्प होगा।
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श्री नरेन्द्र मोदी का जन्म विवरण—

अंक विज्ञान के अनुसार नरेन्द्र मोदी की जन्म तिथि 17-09-1950 का मूलांक 8, भाग्यांक 5 और नामांक 5 है। इन तीनों अंको में आपस में मैत्री सम्बन्ध है। । इन सभी नियति के संकेतो को मिलाने पर परिणाम सामने आतें है। प्रथम- विकास के एजेन्डे को प्राथमिकता देने वाले मोदी की राजनीतिक सीढ़ी के शीर्ष पर पहुंचने की सम्भावित यात्रा में आने वाली बाधायें दूर होगी।

गुजरात के मौजूदा मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का पूरा नाम ‘नरेन्द्र दामोदरदास मोदी’ है। हमने यहाँ गणना में इसी नाम को काम लिया है। इनका जन्म का मूलांक 8 बना है 17 से। यहाँ नेतृत्व और सत्ता के प्रतिनिधि पुरुष अंक 1 के साथ स्त्री अंक 7 की युति बन रही है। यह युति अच्छी नहीं होती है। यह स्त्री अंक खराब कर देती है। नरेन्द्र मोदी के यहाँ भी यही हुआ है। इस युति के कारण इनके स्त्री अंक भ्रष्ट हो गये। इसका तात्पर्य यह होता है कि ऐसे जातक को लक्ष्य-प्राप्ति में अपने ही दल के साथी लोगों/साथी दलों के लोगों या स्त्री से बाधा आती है। इसी लिए जब भाजपा के सहयोगी दल के नीतीश कुमार नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्री पद के लिए विरोध करते हैं तो यह हमारे लिए तनिक भी आश्चर्य का विषय नहीं है। साथ ही यदि मोदी की पार्टी के ही कुछ लोग भी उनका (प्रत्यक्ष या प्रच्छन्न) विरोध करें तो यह भी हमारे लिए कोई अजूबा नहीं है। यहाँ एक ख़ास बात और। मोदी का मूलांक 8 अंक 6 से मित्रता रखता है। भ्रष्ट अंक 6 से अंक 8 की यह मित्रता और भी गहरी होती है। अतः ऐसे लोग जिनका अंक 6 प्रबल है या जिनका अंक 6 भ्रष्ट है, वे मोदी की प्रधानमंत्री पद की यात्रा में इनके अनपेक्षित रूप से सहयोगी बन सकते हैं। वे मोदी के साथ आ सकते हैं, भले ही एन डी ए के अन्दर आ कर साथ दें या फिर बाहर से।

अब बात करते हैं नरेन्द्र मोदी के यहाँ के ‘शत्रु हन्ता’ योग की। यदि यह कहें कि मोदी के जीवन का सब कुछ यही है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। मोदी के जन्म का मूलांक 8, इसके वृहदंक 17 का अंक 1 पितृ द्रोह रूप में ‘शत्रु योग’ बना रहा है। इनके जन्म का मासांक 9 की इन अंकों के साथ युति इस योग को ‘शत्रु हन्ता योग’ में परिवर्तित देती है। इस योग का फलितार्थ यह है कि जो व्यक्ति मोदी से आमने-सामने की टक्कर लेगा, वह ‘निपट’ जाएगा। यदि उसके यहाँ अंक बलिष्ठ हैं तो वह कम नष्ट होगा या धीरे-धीरे नष्ट होगा। यदि उस व्यक्ति के अंक दुर्बल हैं तो वह जल्दी नष्ट होगा और यदि उस व्यक्ति के अंक निर्बल हैं तो वह हाथोंहाथ निपट जाएगा। इस बात को मोदी के निजी जीवन से लेकर राजनीतिक जीवन तक, हर जगह आसानी से देखा और समझा जा सकता है। हमने नरेन्द्र मोदी के जीवन का पहली बार अध्ययन गुजरात विधानसभा के पिछले चुनाव (वर्ष 2007) में किया था। उस आधार पर हमने जो-जो बातें कही थीं, तक़रीबन वे सभी सही ठहरी थीं। एक-आध बात पर लगे हाथों नज़र भी डाल लीजिए। हमने 21 नवम्बर, 2007 को तैयार और 03 दिसंबर, 2007 को ‘दिव्य भास्कर’ (सूरत) में प्रकाशित भविष्यवाणी में जो बातें विस्तार से कही थीं, उनमे से है यह एक-आध बात। “३ अतः मोदी अपनी सीट से तो धाकड़ वोटों से जीतेंगे ही, साथ ही अपने सभी विरोधियों की चालों को धत्ता बताते हुए बहुमत भी लाएँगे।” “३इन के इक्के-दुक्के विरोधियों को छोड़ कर सभी चारों खाने चित हो जाएँगे।” आप खुद ही मिलान कर लीजिए कि ये बातें कितनी खरी उतरीं। इसी ‘शत्रु हन्ता योग’ के कारण मोदी का विरोध करने वाले एक-एक कर निपट गये। इसी सिलसिले में एक-आध बात और देखिए।जो लालकृष्ण अडवाणी मोदी के ळव्क्थ्।ज्भ्म्त् माने जाते हैं, जब उन्होंने मोदी से मुँह फेर कर नीतीश की तरफ रुख़ किया तो कई चक्करों में घिर गये। अंततः सार्वजनिक रूप से उन्होंने मोदी की स्वीकार्यता को स्वीकारा। यही हाल नीतीश कुमार का हो रहा है। आप देखिए कि जब से उन्होंने मोदी के खि़लाफ़ बोलना शुरू किया है, तब से वे मुसीबतों में घिरते जा रहे हैं। प्रचंड बहुमत के बाद भी अपने ही राज्य में नीतीश यात्रा तक सफलतापूर्वक नहीं कर पा रहे हैं, क्या यह घोर आश्चर्यजनक नहीं है? आपके लिए हो सकता है, हमारे लिए नहीं। हमने अपने ब्लॉगों पर यह भविष्यवाणी करते हुए नीतीश कुमार को यह सलाह चेतावनी के रूप में दी भी थी कि अंक 8 में शपथ लेने वाले वे (नीतीश) अंक 8 वाले नरेन्द्र मोदी से टक्कर ना लें, वरना उनके लिए संकट बढ़ जाएँगे। अब सब कुछ वही हो रहा है। एक बात हम यहाँ लगे हाथों और कहा दें। भाजपा में ऐसा ‘शत्रु हन्ता योग’ दो और लोगों के यहाँ है; वसुंधरा राजे सिंधिया के यहाँ मोदी से ‘बहुत थोडा-सा कम’ और येद्दियुरप्पा के यहाँ कुछ कम। इसलिए वसुंधरा राजे के यहाँ भी मोदी वाला मामला ही है। येद्दियुरप्पा भी अपने इसी योग के कारण फिर से कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनेंगे; भले ही चाहे विधानसभा चुनाव से पहले बनें या फिर बाद में; भले ही चाहे उन्हें फिर से मुख्यमंत्री भाजपा बनाए या फिर कोई और। हालाँकि हमें लगता है कि येद्दी भाजपा नहीं छोड़ेंगे। चूँकि येद्दियुरप्पा के यहाँ यह ‘शत्रु हन्ता योग’ कुछ कम है, इस लिए अब तक वे खुद मुख्यमंत्री नहीं बन पाए, हालाँकि इसी योग के कारण येद्दी के पद-त्याग के बाद कर्नाटक में मुख्यमंत्री उन्हीं की पसंद का ही बना है। इसी ‘शत्रु हन्ता योग’ के कारण इस बार के चुनाव में भी मोदी के विरोधी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएँगे। मोदी के प्रधानमंत्री बनने में भी जो कोई आड़े आएगा, वही इसी योग के परिणाम का शिकार हो जाएगा।

यहाँ एक रोचक चर्चा अपने लिए स्थान मांगती है। मनमोहन सिंह और नरेन्द्र मोदी के मूलांक-भाग्यांक में 8-5 की अद्भुत समानता है। इसी अतिशय समानता के कारण मोदी मनमोहन सिंह को सीधे-सीधे रिप्लेस नहीं करेंगे। यहाँ इनके मार्ग में इनसे पहले कोई अन्य व्यक्ति प्रधानमंत्री के रूप में सामने आ सकता है। यह व्यक्ति अंक 5, अंक 6 व अंक 8 की प्रधानता वाला होगा। मोदी के मार्ग में ‘स्त्री-बाधा’ का अर्थ शरीर से स्त्री भी संभव है। पहले इस ‘सशरीरी अवस्था’ की ही बात कर लेते हैं। इस दायरे में दो महिलाएँ आती हैं। पहली तो ममता बनर्जी और दूसरी सुषमा स्वराज। ममता बनर्जी के यहाँ अंक 5 व अंक 8 है, किन्तु यह अंक 5 उनकी बॉडी लैंग्वेज में मृत अवस्था में होने के कारण अर्द्ध प्रभावी हो गया। एक और बात है। ममता बनर्जी के यहाँ अंक 6 की कोई भूमिका नहीं है। इसी कारण इनका शरीर सूखी हुई अवस्था में है। अब रही बात सुषमा स्वराज की; तो इनके यहाँ मूलांक-भाग्यांक में अंक 5-6 है तथा इनका जन्म अंक 8 के समय में हुआ है। इनकी बॉडी लैंग्वेज में भी अंक 5 व अंक 6 प्रभावी अवस्था में है। अतः नरेन्द्र मोदी और प्रधानमंत्री पद के बीच में सुषमा स्वराज आ जाएँ तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। हाँ, यह हो सकता है कि श्रीमती स्वराज को 14 से 23/24 महीनों के बाद प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ जाए। ख़ैर, यह चर्चा बहुत लम्बी हो गयी। वैसे ऐसा करना ज़रूरी भी था, क्योंकि आज हर कोई इस बारे में जानना चाहता है कि क्या नरेन्द्र मोदी अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं? यहाँ इन स्त्री अंकों के बारे में यह बात कहना भी बहुत ज़रूरी है कि इन्हीं भ्रष्ट स्त्री अंकों के कारण ही मोदी का दाम्पत्य नहीं है। इन अंकों की यह अवस्था शादी नहीं होने देती। यदि कुछ सहयोगी अंकों के कारण हो जाए तो कामयाब नहीं होने देती। नरेन्द्र मोदी के साथ यही हुआ। जसोदाबेन से शादी होने के बाद भी ये दोनों तलाकनुमा जीवन जी रहे हैं यानि दाम्पत्य का सुख मोदी को नहीं मिल रहा है।

स्त्री अंकों की यह अवस्था जहाँ निजी जीवन में दाम्पत्य-सुख नहीं लेने देती, वहीं दूसरी ओर करियर में कुछ ऊँच-नीच के बाद लाभ देती है। इन्हीं स्त्री अंकों से सम्बन्धित एक अद्भुत बात का यहाँ उल्लेख करना भी प्रासंगिक रहेगा। नरेन्द्र मोदी के नामांक 9 का वृहदंक 27 इन्हीं स्त्री अंकों से बना है। मोदी के मुख्यमंत्री बनने में इन स्त्री अंकों की हमेशा महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। मोदी पहली बार मुख्यमंत्री बने 07-10-2001 में। यहाँ मूलांक 7 व भाग्यांक 2 था। आयु अंक भी 7 था। मोदी दूसरी बार मुखमंत्री बने 22-12-2002 को। यहाँ मूलांक 4 व भाग्यांक 2 तथा राज्य का आयु अंक 7 था। मोदी के तीसरी बार बनने की दिनांक थी 25-12-2007। यहाँ मूलांक 7। आप खुद ही देख लीजिए कि करियर के मामले में मोदी पर इन स्त्री अंकों की किस क़दर कृपा रही है। मोदी अंक पहली बार मुख्यमंत्री बने तब इनका आयु अंक 7 (52 वाँ वर्ष) व राज्य का आयु अंक 6 (42 वाँ वर्ष) था। इनके दूसरी बार मुख्यमंत्री बनते समय इनका आयु अंक 8 (53 वाँ वर्ष) व राज्य का आयु अंक 7 (43 वाँ वर्ष) था। इसी प्रकार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाते समय इनका आयु अंक 4 (58 वाँ वर्ष) और राज्य का आयु अंक 3 (48 वाँ वर्ष) था। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि स्त्री अंक 7 ने मोदी के करियर में तो फ़ायदा ही दिया। हाँ, इतना अवश्य हुआ कि मोदी की सीटें कुछ कम हो गयीं ( 127 से 117 पर आ गयीं)। नरेन्द्र मोदी पर अंक 4 व अंक 8 की कृपा है। अंक 4 के वर्ष 2002 में ही इन्होंने पहली बार चुनावी लड़ाई जीत कर मुख्यमंत्री पद पाया। गुजरात को अंक 4 की दशा वर्ष 2003 में आरम्भ हुई। राज्य को अभी अंक 8 की दशा ही चल रही है। यह दशा वर्ष 2014 तक चलेगी। इस दशा के प्रथम वर्ष 2007 में मोदी ने फिर से चुनावी लड़ाई जीत कर मुख्यमंत्री पद पाया। गुजरात को अंक 8 की यह दशा वर्ष 2014 तक चलेगी। तब तक सत्ता का वर्तमान स्वरूप नहीं बदलेगा यानि मोदी ही मुख्यमंत्री रहेंगे। इसके बाद गुजरात को अंक 7 की दशा आरम्भ होगी, जो कि वर्ष 2021 तक चलेगी। यह राज्य के मूलांक-भाग्यांक के साथ विपरीत युति बनाती है। दूसरी बात यह कि जिस प्रकार स्त्री अंक 7 की विशिष्ट भूमिका में ही मोदी का स्थान बदला और वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने; ठीक उसी प्रकार इसी स्त्री अंक 7 की पुनः विशेष भूमिका में मोदी का फिर स्थान बदलेगा। नरेन्द्र मोदी के लिए कैलेण्डर वर्ष 2015-2016 बहुत ख़ास भूमिका निभा सकते हैं। तब इन्हें उम्र का 65-66-67 वाँ वर्ष चल रहा होगा यानि इनका तब इनका आयु अंक 2-3-4 चल रहा होगा। यह अवधि मोदी को गुजरात से दिल्ली भेज कर प्रधानमंत्री पद पर बिठा सकती है। हाँ, नरेन्द्र मोदी और उनके समर्थकों को यह सुप्रसिद्ध कहावत हमेशा याद रखनी चाहिए कि ‘रमजान में बचेंगे तो ईद मनाएँगे’। तात्पर्य यह है कि मोदी को अपनी प्राण-रक्षा की तरफ़ पर्याप्त ध्यान देना चाहिए। वे सशरीर सुरक्षित रहेंगे, तभी तो प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हो पाएँगे। वर्ष 2013 के उत्तरार्द्ध से वर्ष 2021 तक की अवधि में इनके प्राणों को ख़तरा है।
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कांग्रेस- कांग्रेस पार्टी की मिथुन राशि है, जो एक द्विस्वभाव राशि है एवं इसका स्वामी बुध ग्रह है। बुध वाणी और बौद्धिकता का प्रतिनिधित्व करता है, जिस कारण कांग्रेस की कथनी और करनी में निश्चित मत नहीं हो पाता है। वर्तमान में बुध शत्रु राशि वृश्चिक में भ्रमण कर रहा है। अतः दो दशकों से सत्ता से बेदखल कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। गुजरात परिवर्तन पार्टी के का प्रतिनिधित्व कर रहे केशुभाई पटेल की नाम राशि भी मिथुन है। कांग्रेस और केशूभाई पटेल दोनों की मिथुन राशि है। गुजरात चुनाव में केशुभाई फैक्टर कोई परिवर्तन तो नहीं कर पायेगा किन्तु स्वयं का राजनैतिक रूप से परास्त होना लगभग तय है।
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भारत और मोदी की कुंडलियों के आईये, ज्योतिष विद्या के सिंद्धातानुसार श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मांग का ज्योतिषीय विश्लेषण कर यह जानने का प्रयास करते हंै कि क्या मोदी देश के अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं ? तकनीकी संचार माध्यम से उपलब्ध जानकारी के मुताबिक श्री मोदी का जन्म गुजरात प्रदेश के वदनगर में 17 सितम्बर 1950 को दोपहर 12.21 बजे अनुराधा नक्षत्र द्वितीय चरण में 19 अंश पर वृश्चिक लग्न में हुआ। लग्न में स्वगृही मंगल एवं चंद्र ग्रह की युति से लक्ष्मी योग, मंगल से रूचक योग, उच्च बुध के साथ सूर्य की युति से बुधादित्य योग बना है। इसके अलावा प्रजासुख के कारक ग्रह शनि एवं शुक्र के केन्द्र में होने से जातक पराक्रमी, साहसी, तर्क के साथ शीध्र निर्णय लेने की क्षमता, शत्रुओं एवं विरोधियो पर काबू पाने वाला बडे व्यक्तियों व साधु-संतों का आदर करने वाला एवं प्रशासन का सफल संचालन करने की क्षमता के साथ जनता को खुश करने व सेना नायक के रूप में अपनी छवि बनाने वाला होता है। इन गुणों को श्री मोदी के स्वभाव में प्रत्यक्ष देखा जा सकता है।

आइए, जानते हैं श्री मोदी के जन्मांग एवं ग्रह नक्षत्रों के योग-संयोग क्या बताते हैं? श्री मोदी की जन्मपत्रिका में सूर्य 00. 39 अंश एवं शनि 29.40 अंश पर उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में है जिसका स्वामी सूर्य है। दोनो ग्रहों के अंश बाल एवं मृत्य अवस्था में होने से ग्रहों का क्रूर प्रभाव निर्बल बन गया है जिससे दोनो के मध्य शत्रुता भाव कम हुआ है। दशम भाव में शनि के साथ शुक्र की युति है और शनि -गुरु का आपस में दृष्टि-संबध होने से जनता में स्वच्छ छवि के साथ ही भ्रष्टाचार पर अंकुश एवं सुप्रशासन चलाने में श्री मोदी सक्षम रहे हैं। एकादश भाव में उच्च के वक्री बुध एवं केतू सूर्य ग्रह के नक्षत्र में हैं। इन दोनों ग्रहों की युति सूर्य के साथ होने से गुजरात राज्य में देश एवं विदेश के आर्थिक निवेश को लाने में श्री मोदी प्रशासनिक, राजनीति एवं कूटनीति से अन्य प्रदेश की तुलना में अधिक सफल हुए। वहीं लग्न में स्थित भाग्य भाव का स्वामी नीच चंद्र व स्वग्रही मंगल की पूर्ण दृष्टि संगठन भाव पर होने से श्री मोदी की विचारधारा से कभी-कभी संगठन के साथ वैचारिक मतभेद होते रहते हैं। वे अपनी अहं छवि के कारण भी देश-विदेश में विवादित हो जाते है। लेकिन अंततः मोदी का ही पक्ष मजबूत होता है।

श्री मोदी गुजरात राज्य में पहली बार अक्तूबर 2001 से दिसम्बर 2002 तक शुक्र-बुध-शुक्र की दशांतर में तथा दिसंबर 2002 से दिसंबर 2007 के मध्य दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। मोदी की कुंडली में शुक्र प्रजाकारक ग्रह शनि के साथ दशम भाव में है और एकादश भाव में उच्च के बुध की प्रत्यंतर दशा में मोदी को मुख्यमंत्री पद दिलाया। इसी प्रकार तीसरी बार दिसंबर 2007 में सूर्य में शनि की अंतर्दशा चल रही थी। सिंह राशि मे शनि दशम भाव में है तथा उच्च के बुध के साथ सूर्य ने बुधादित्य योग का निर्माण किया है। सूर्य-शनि की प्राकृतिक शत्रुता होते हुए भी इस योग ने श्री मोदी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। कुंडली में सूर्य, शनि दोनो ही कम अंशों के साथ सूर्य के नक्षत्र में होने से सूर्य बलशाली रहा है। गुरु-शनि की आपस में पूर्ण दृष्टि एवं पंचम भाव में राहू और उस पर सूर्य बुध तथा केतू की दृष्टि होने के कारण मोदी विवादों में होकर न्यायालय के चक्कर भी लगाते रहे हैं।

लग्न एवं षष्टम भाव के स्वामी मंगल का स्वग्रही होकर लग्न में होना साहसी, पराक्रमी, निर्णय क्षमता में वृद्धि करता है जिसके कारण श्री मोदी को शत्रुओ पर विजय प्राप्त होती रही। ‘‘ इसका ताजा उदाहरण हाल ही में भाजपा की राष्टीयकार्यकारिणी की बैठक मुंबई में श्री मोदी ने अपनी सभी शर्तों को भाजपा के आलाकमान से मनवाकर अपना वर्चस्व कायम रखने में सफल हुए हैं।

दूसरी ओर स्वतंत्र भारत की वृषभ लग्न की पत्रिका के तृतीय भाव की कर्क राशि में पांच ग्रहों (सूर्य, बुध, शुक्र, शनि, चंद्र ) की युति है। देश में अभी तक मंगल, शुक्र, सूर्य एवं शनि ग्रहों वाले व्यक्ति ही प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए हैं। इनमें से मंगल एवं शुक्र राशि का वर्चस्व प्रधानमंत्री के लिए अधिक रहा है।

ग्रहों के मान से सन् 1947 से 2012 वर्तमान समय तक भारत में चैदह प्रधानमंत्री हुए है। इनमें ग्रहों का प्रभाव इस प्रकार रहा है। मंगल ग्रह -सर्वश्री लालबहादूर शास्त्री , चरणसिंह , चंद्रशेखर , अटलबिहारी वाजपेयी , (4) शुक्र ग्रह – श्रीमती इंदिरा गांधी , राजीव गाँधी, विश्वनाथप्रतापसिंह , इंद्रकुमार गुजराल (4) शनि ग्रह – श्री जवाहरलाल नेहरू, गुलजारीलाल नंदा (2) सूर्य ग्रह – श्री मोरारजी देसाई , मनमोहनसिंह (2) बुध ग्रह – पी.वी. नरसिंहराव (1)

भारत के लोकसभा चुनाव 2014 में होने हें लेकिन अचानक राजनैतिक घटनाक्रम बदलने पर चुनाव जनवरी 2013 में होने की स्थिति में आकाशीय ग्रहों की स्थिति के मान से सूर्य मकर में , शनि तुला में, वृषभ में गुरु, मकर राशि में मंगल तथा राहू तुला में और केतु मेंष में गोचर करेगें। जनवरी में भारत की कुडंली के मान से सूर्य में शनि की अंतर्दशा रहेगी। श्री मोदी को उस समय भाग्य भाव की राशि कर्क के स्वामी चंद्र में राहू में केतू की दशांतर रहेगी। तुला राशि में राहू और शनि द्वादश भाव में गोचर करेगें। द्वितीय एवं पंचम भाव की राशि का स्वामी गुरु मारक स्थान सप्तम भाव में, दशम भाव की राशि सिंह का स्वामी सूर्य अपनी राशि से षष्टम होकर तृतीय भाव में गोचर करेगा जो मोदी को प्रधान मंत्री बनने में बाधक बन सकते हैं।

वर्तमान लोकसभा की नियत अवधि पूर्ण हो जाने पर नवंबर 2014 में चुनाव होने के समय भारत की कुंडली में सूर्य में शुक्र में सूर्य की दशांतर होगी। वहीं श्री मोदी के लिए चंद्र में गुरु में चंद्र अथवा मंगल का दशांतर गोचर मंे रहेगा। गोचर ग्रहों के मान से सूर्य शनि एवं शुक्र वृश्चिक में, गुरु कर्क में, मंगल धनु में व राहू कन्या में, रहेगें। श्री मोदी की कुंडली के मान से लग्न में दशम भाव का स्वामी सूर्य, तृतीय भाव एवं चतुर्थ भाव के स्वामी शनि एवं सप्तम व द्वादश भाव के स्वामी शुक्र की युति रहेगी। लग्न तथा षष्टम भाव का स्वामी मंगल अपनी राशि से द्वितीय एवं नवम होकर द्वितीय भाव में गोचर करेगा। गुरु उच्च का होकर भाग्य भाव में होगा। उस वक्त श्री मोदी को लग्न, पंचम एवं भाग्य भाव की दंशातर रहेगी और भारत के मान से तृतीय भाव में कर्क राशि में गुरु की भाग्य भाव पर पूर्ण दृष्टि होगी। सूर्य, शनि, शुक्र की सप्तम भाव में युति होगी तथा उस समय भारत की सूर्य एवं शुक्र की दंशातर होगी।

भारत और मोदी की कुंडलियों के ग्रहों की चाल के मान से श्री नरेन्द्र मोदी के भारत के आगामी प्रधानमंत्री बनने के प्रबल योग बनते हैं। लेकिन मोदी के लिए बाधक ग्रह, भाग्य भाव की राशि कर्क का स्वामी चंद्रमा होता है जो लग्न में नीच का होकर मंगल के साथ है। मंगल एवं चंद्र की पूर्ण दृष्टि संगठन भाव सप्तम पर पूर्ण होने के कारण मोदी एवं संगठन के मध्य आपसी मतभेद उभर सकते हें जिससे श्री मोदी को निपटना होगा।

विश्लेष्ण— मेरे विचार श्री नरेन्द्र मोदी के सानिध्य में ही अगला संसदीय चुनाव लड़ा जायेगा..इन चुनावो में उनकी भूमिका निर्णायक होगी..उम्मीदवार तय करने से लेकर प्रचार प्रसार करने में वही आगे रहेंगे.
किन्तु चुनाव के तुरंत उनके प्रधानमंत्री बनाने में संदेह हें..!! अगली प्रधान मंत्री कोई महिला हो सकती हें..
इस प्रधानमंत्री के चयनित होने के 06 से 08 माह बाद में श्री नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शोभा बाधा सकेंगे…

विशेष सावधानी –श्री नरेन्द्र मोदी को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने के साथ साथ एवं अपने आस पास के लोगों से सावधान रहना होगा…
विशेष रूप भीड़ भाड़ से बचें..
हमले की संभावना बनती हें..

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