सुख-समृद्धि के सफल उपाय /टोटके —–

सुख-समृद्धि के सफल उपाय /टोटके —–

1॰ यदि परिश्रम के पश्चात् भी कारोबार ठप्प हो, या धन आकर खर्च हो जाता हो तो यह टोटका काम में लें। किसी गुरू पुष्य योग और शुभ चन्द्रमा के दिन प्रात: हरे रंग के कपड़े की छोटी थैली तैयार करें। श्री गणेश के चित्र अथवा मूर्ति के आगे “संकटनाशन गणेश स्तोत्र´´ के 11 पाठ करें। तत्पश्चात् इस थैली में 7 मूंग, 10 ग्राम साबुत धनिया, एक पंचमुखी रूद्राक्ष, एक चांदी का रूपया या 2 सुपारी, 2 हल्दी की गांठ रख कर दाहिने मुख के गणेश जी को शुद्ध घी के मोदक का भोग लगाएं। फिर यह थैली तिजोरी या कैश बॉक्स में रख दें। गरीबों और ब्राह्मणों को दान करते रहे। आर्थिक स्थिति में शीघ्र सुधार आएगा। 1 साल बाद नयी थैली बना कर बदलते रहें।
2॰ किसी के प्रत्येक शुभ कार्य में बाधा आती हो या विलम्ब होता हो तो रविवार को भैरों जी के मंदिर में सिंदूर का चोला चढ़ा कर “बटुक भैरव स्तोत्र´´ का एक पाठ कर के गौ, कौओं और काले कुत्तों को उनकी रूचि का पदार्थ खिलाना चाहिए। ऐसा वर्ष में 4-5 बार करने से कार्य बाधाएं नष्ट हो जाएंगी।
3॰ रूके हुए कार्यों की सिद्धि के लिए यह प्रयोग बहुत ही लाभदायक है। गणेश चतुर्थी को गणेश जी का ऐसा चित्र घर या दुकान पर लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दायीं ओर मुड़ी हुई हो। इसकी आराधना करें। इसके आगे लौंग तथा सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो एक लौंग तथा सुपारी को साथ ले कर जाएं, तो काम सिद्ध होगा। लौंग को चूसें तथा सुपारी को वापस ला कर गणेश जी के आगे रख दें तथा जाते हुए कहें `जय गणेश काटो कलेश´।
4॰ सरकारी या निजी रोजगार क्षेत्र में परिश्रम के उपरांत भी सफलता नहीं मिल रही हो, तो नियमपूर्वक किये गये विष्णु यज्ञ की विभूति ले कर, अपने पितरों की `कुशा´ की मूर्ति बना कर, गंगाजल से स्नान करायें तथा यज्ञ विभूति लगा कर, कुछ भोग लगा दें और उनसे कार्य की सफलता हेतु कृपा करने की प्रार्थना करें। किसी धार्मिक ग्रंथ का एक अध्याय पढ़ कर, उस कुशा की मूर्ति को पवित्र नदी या सरोवर में प्रवाहित कर दें। सफलता अवश्य मिलेगी। सफलता के पश्चात् किसी शुभ कार्य में दानादि दें।

अडार तंत्र—–
दारिद्रय निवारण और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए अडार तंत्र की साधना करनी चाहिए। स्मरण रहे कि यह साधना मुख्यतः स्त्रियों (गृहिणियों) के द्वारा की जाती है। जिस घर में स्त्री न हो, वहां पुरुष भी यह साधना कर सकते हैं। अडार तंत्र का परिणाम थोड़े ही दिनों में अपना प्रभाव दिखाने लगता है।

सायंकाल घर में जितनी भी लालटेन, चिमनी, कुप्पी, दीपक, बल्ब, ट्यूबलाइट, कंदील आदि हों, उन्हें थोड़ी देर के लिए जला दें। कम से कम दो-तीन दीपक सभी घरों में रहते हैं, उन्हें जलाकर घर में इस तरह से रखें कि सर्वत्र प्रकाश फैल जाए, अंधेरा न रहने पाए। यथास्थान ऐसी प्रकाश व्यवस्था 10-15 मिनट अथवा 2-3 घंटे तक के लिए की जा सकती है। बाद में अन्य प्रकाश यंत्रों को बुझाकर एक मुख्य प्रकाश यंत्र को रातभर जला रहने दें। यहां यह भी स्मरण रखना चाहिए कि दीपक को कभी फूंक से न बुझाएं।

मूल-मन्त्रः- “ॐ ऐं क्लां क्लीं क्लूं ह्रां ह्रीं ह्रूं सः वं आपदुद्धारणाय अजामल-बद्धाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण-भैरवाय मम दारिद्र्य-विद्वेषणाय श्रीं महा-भैरवाय नमः ।”

कार्य-सिद्धि कारक गोरक्षनाथ मंत्र मन्त्रः- “ॐ गों गोरक्षनाथ महासिद्धः, सर्व-व्याधि विनाशकः । विस्फोटकं भयं प्राप्ते, रक्ष रक्ष महाबल ।। १।। यत्र त्वं तिष्ठते देव, लिखितोऽक्षर पंक्तिभिः । रोगास्तत्र प्रणश्यन्ति, वातपित्त कफोद्भवाः ।। २।। तत्र राजभयं नास्ति, यान्ति कर्णे जपाः क्षयम् । शाकिनी भूत वैताला, राक्षसा प्रभवन्ति न ।। ३।। नाऽकाले मरणं […]

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s