आइये जाने की क्या हें राजयोग..???

आइये जाने की क्या हें राजयोग..???

हिन्दू धर्मशास्त्रों के मुताबिक गुरु बृहस्पति विद्या, भाषा, ज्ञान द्वारा निपुण व दक्ष बनाकर शाही सम्मान, पद व प्रतिष्ठा भी नियत करने वाला होता है।
लग्न कुंडली की (विभिन्न लग्नों के लिए राजयोग)स्थिति अनुसार शुभ योग—
कुछ ग्रह लग्न कुंडली में अपनी स्थिति के अनुसार शुभ योग बनाते हैं जो व्यक्ति को धन, यश, मान, प्रतिष्ठा सारे सुख देते हैं।
विभिन्न लग्नों के लिए राजयोगकारी ग्रह निम्न हैं—-
—– मेष लग्न के लिए गुरु राजयोग कारक होता है।
—– वृषभ और तुला लग्न के लिए शनि राजयोग कारक होता है।
—–कर्क लग्न और सिंह लग्न के लिए मंगल राजयोग कारक होता है।
—- मिथुन लग्न के लिए शुक्र अच्छा फल देता है।
—वृश्चिक लग्न के लिए चंद्रमा अच्छा फल देता है।
—- धनु लग्न के लिए मंगल राजयोग कारक है।
—– मीन लग्न के लिए चंद्रमा व मंगल शुभ फल देते हैं।
—- मकर लग्न के लिए शुक्र योगकारक होता है। तो कुंभ लग्न के लिए शुक्र और बुध अच्छा फल देते हैं। कन्या लग्न के लिए शुक्र नवमेश होकर अच्छा फल देता है। जो ग्रह एक साथ केंद्र व त्रिकोण के अधिपति होते हैं, वे राजयोगकारी होते हैं। ऐसा न होने पर पंचम व नवम के स्वामित्वों की गणना की जाती है। यदि कुंडली में ये ग्रह अशुभ स्थानों में हो, नीच के हो, पाप प्रभाव में हो तो उनके लिए उचित उपाय करना चाहिए।
—–जिन व्यक्तियों की कुंडली में राजयोग निर्मित होता है, वे उच्च स्तरीय राजनेता, मंत्री या किसी राजनीतिक दल के प्रमुख बनते हैं। उन्हें हर प्रकार की सुख-सुविधा और लाभ भी प्राप्त होते हैं। इस लेख केमाघ्यम से आइए जानें कि कुंडली में राजयोग का निर्माण कैसे होता है।
—–जिन लोगों की जन्म कुंडली में तीन अथवा चार ग्रह अपने उच्च या मूल त्रिकोण में बली हों तो वह मंत्री या राज्यपाल बनता है। जिस जातक के पांच अथवा छह ग्रह उच्च या मूल त्रिकोण में हों तो वह गरीब परिवार में जन्म लेने के बाद भी शासन में प्रमुख अधिकार प्राप्त करता है। पाप ग्रह उच्च स्थान में हों अथवा ये ही ग्रह मूल त्रिकोण में हों तो व्यक्ति को शासन द्वारा सम्मान प्राप्त होता है।
—–जिस व्यक्ति के जन्म समय मेष लग्न में चंद्रमा, मंगल और गुरू हो अथवा इन तीनों ग्रहों में से दो ग्रह मेष लग्न में हो तो वह शासन में अधिकार प्राप्त करता है। मेष लग्न में उच्च राशि के ग्रहों द्वारा दृष्ट गुरू स्थित होने से शिक्षा मंत्री पद प्राप्त होता है। मेष लग्न में उच्च का सूर्य हो, दशम में मंगल हो और नवम भाव में गुरू स्थित हो तो व्यक्ति प्रभावशाली मंत्री होता है।
—-गुरू अपने उच्च [कर्क] में तथा मंगल मेष में होकर लग्न में स्थित हो अथवा मेष लग्न में ही मंगल और गुरू दोनों हों तो व्यक्ति गृह मंत्री अथवा विदेश मंत्री पद प्राप्त करता है। मेष लग्न में जन्म लेने वाला व्यक्ति निर्बल ग्रहों के होने पर भी पुलिस अधिकारी होता है। यदि इस लग्न के व्यक्ति की कुंडली में क्रूर ग्रह-शनि, रवि और मंगल उच्च या मूल त्रिकोण के हों और गुरू नवम भाव में हो तो रक्षा मंत्री का पद प्राप्त होता है।
—-एकादश भाव में चंद्रमा, शुक्र और गुरू हो, मेष में मंगल हो, मकर में शनि हो और कन्या में बुध हो तो व्यक्ति को राजा के समान सुख प्राप्त होता है। उक्त प्रकार की ग्रह स्थिति में मेष या कन्या लग्न का होना आवश्यक है।
—कर्क लग्न हो और उसमें पूर्ण चंद्रमा स्थित हो, सप्तम भाव में बुध हो, षष्ठ भाव में सूर्य हो, चतुर्थ में शुक्र, दशम में गुरू और तृतीय भाव में शनि मंगल हों तो जातक शासनाधिकारी होता है। दशम भाव में मंगल और गुरू एक साथ हों और पूर्ण चंद्रमा कर्क राशि में अवस्थित हो तो जातक मंडलाधिकारी या अन्य किसी पद को प्राप्त करता है।
—–जन्म समय में वृष लग्न हो और उसमें पूर्ण चंद्रमा स्थित हो तो तथा कुम्भ में शनि, सिंह में सूर्य एवं वृश्चिक में गुरू हो तो अधिक सम्पत्ति, वाहन एवं प्रभुता की उपलब्धि होती है। जन्म कुंडली में उच्च राशि का चंद्रमा और मंगल व्यक्ति को शासनाधिकारी बनाते हैं।
—–जन्म स्थान में मकर लग्न हो और लग्न में शनि स्थित हो तथा मीन में चंद्रमा, मिथुन में मंगल, कन्या में बुध एवं धनु में गुरू स्थित हो तो जातक शासनाधिकारी होता है। यह उत्तम राजयोग है। मीन लग्न होने पर लग्न स्थान में चंद्रमा, दशम में शनि और चतुर्थ में बुध के रहने से एम.एल.ए. बन सकता है। यदि उक्त योग में दशम स्थान में गुरू हो और उस पर उच्च ग्रह की दृष्टि हो तो व्यक्ति एम.पी. का योग बनता है।
—–जातक का मीन लग्न हो और लग्न में चंद्रमा, मकर में मंगल, सिंह में सूर्य और कुम्भ में शनि स्थित हो तो वह उच्च शासनाधिकारी होता है। मकर लग्न में मंगल और सप्तम भाव में पूर्ण चंद्रमा के रहने से जातक विद्वान शासनाधिकारी होता है। यदि सर्वोच्च स्थित सूर्य चंद्रमा के साथ लग्न में स्थित हो तो जातक उच्च पद प्राप्त करता है। यह योग 32 वर्ष की अवस्था में अनंतर घटित होता है। उच्च राशि का सूर्य मंगल के साथ रहने से जातक भूमि प्रबंध के कार्यों में भाग लेता है। खाद्य मंत्री या भूमि सुधार के लिए जन्म कुंडली में मंगल या शुक्र का उच्च होना या मूल त्रिकोण में स्थित रहना आवश्यक है।
—–तुला राशि में शुक्र, मेष राशि में मंगल और कर्क राशि में गुरू स्थित हो तो राजयोग होता है। इस योग के होने से प्रादेशिक शासन में जातक भाग लेता है। और उसका यश सर्वत्र रहता है। मकर जन्म-लग्न वाला जातक तीन उच्च ग्रहों के रहने से राजमान्य होता है।
—–धनु में चंद्रमा सहित गुरू हो, मंगल मकर राशि में स्थित हो अथवा बुध अपने उच्च में स्थित होकर लग्नगत हो तो जातक शासनाधिकारी या मंत्री होता है। धनु के पूर्वार्ध में सूर्य और चंद्रमा तथा सर्वोच्चगत शनि लग्न में स्थित हो और मंगल भी सर्वोच्च में हो तो जातक प्रभावशाली अधिकारी होता है।
—-सब ग्रह बली होकर अपने-अपने उच्च में स्थित हों और अपने मित्र से दृष्ट हों तथा उन पर शत्रु की दृष्टि न हो तो जातक अत्यन्त प्रभावशाली मंत्री होता है। चंद्रमा परमोच्च में स्थित हो और उस पर शुक्र की दृष्टि हो तो जातक निर्वाचन में सर्वदा सफल होता है। इस योग के होने पर पाप ग्रहों का आपोक्लिम स्थान में रहना आवश्यक हैं।
—-जन्म लग्नेश और जन्म राशीश दोनों केंद्र में हों तथा शुभ ग्रह और मित्र से दृष्ट हों, शत्रु और पाप ग्रहों की दृष्टि न हो तथा जन्म राशीश से नवम स्थान में चंद्रमा स्थित हो तो राजयोग होता है। इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति एम.एल.ए. या एम.पी. बनता है।
—-यदि पूर्ण चंद्रमा जलचर राशि के नवांश में चतुर्थ भाव में स्थित हो और शुभ ग्रह अपनी राशि के लग्न में हों तथा केंद्र स्थानों में पापग्रह न हो तो जातक शासनाधिकारी होता है। इस राजयोग में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुप्तचर या राजदूत के पद पर प्रतिष्ठित होता है।
——बुध अपने उच्च में स्थित होकर लग्न में हो और मीन राशि में गुरू एवं चंद्रमा स्थित हो तथा मंगल सहित शनि मकर में हो और मिथुन में शुक्र हो तो जातक शासन के प्रबंध में भाग लेता है। उक्त योग के होने से निर्वाचन कार्य में सर्वदा सफलता प्राप्त होती है। उक्त योग पचास वर्ष की अवस्था में ही अपना यथार्थ फल देता है।
—-मेष लग्न हो, सिंह में सूर्य सहित गुरू, कुम्भ में शनि, वृष में चंद्रमा, वृश्चिक में मंगल एवं मिथुन में बुध स्थित हो तो राजयोग बनता है। इस प्रकार के योग के होने से व्यक्ति किसी आयोग का अघ्यक्ष होता है।
—-गुरू, बुध और शुक्र ये तीनों शनि, रवि और मंगल सहित अपने-अपने स्थान या केंद्र में हों और चंद्रमा सर्वोच्च में स्थित हो तो जातक इंजीनियर या इसी प्रकार का अन्य अधिकारी होता है। यह योग जितना प्रबल होता है, उसका फलादेश भी उतना ही अधिक प्राप्त होता है।
——यदि शुक्र, गुरू और बुध को पूर्ण चंद्रमा देखता हो, लग्नेश पूर्ण बली हो तथा द्विस्वभाव लग्न में वर्गोत्तम नवांश में हो तो राजयोग होता है। इस योग के होने से जातक सरकारी उचचपद प्राप्त करता है।
वर्गोत्तम नवांश में तीन या चार ग्रह हों और शुभ ग्रह केंद्र में स्थिति हों तो जातक उच्च पद प्राप्त करता है। सेनापति होने का योग भी उक्त ग्रहों से बनता है। एक भी ग्रह अपने उच्च या वर्गोत्तम नवांश में हो तो व्यक्ति को राज कर्मचारी का पद प्राप्त होता है।
—-यदि समस्त ग्रह शीर्षोदय राशियों में स्थिति हों तथा पूर्ण चंद्रमा कर्क राशि में शत्रुवर्ग से भिन्न वर्ग में शुभ ग्रह से दृष्ट लग्न में स्थित हो तो व्यक्ति धन वाहनयुक्त शासनाधिकारी होता है।
जन्म राशीश चंद्रमा से उपचय- 3, 6, 10, 11 में हों और शुभ राशि या शुभ नवांश में केंद्रगत शुभ ग्रह हों तथा पाप ग्रह निर्बल हों तो प्रतापी शासनाधिकारी होता है। ऎसे व्यक्ति के समक्ष बड़े-बड़े व्यक्ति नतमस्तक होते हैं।
—–जिस ग्रह की उच्च राशि लग्न में हो, वह ग्रह यदि अपने नवांश या मित्र अथवा उच्च के नवांश में केंद्र गत शुभ ग्रह से दृष्ट हो तो जन्म कुंडली में राजयोग होता है। मकर के उत्तरार्द्ध में बलवान शनि, सिंह में सूर्य, तुला में शुक्र, मेष में मंगल, कर्क में चंद्रमा और कन्या में बुध हो तो राजयोग बनता है। इस योग के होने से जातक प्रभावशाली शासक होता है। राजनीति में उसकी सर्वदा विजय होती है।
लग्नेश केंद्र में अपनी मित्रों से दृष्ट हो और शुभ ग्रह लग्न में हों तो जातक की कुंडली में राजयोग होता है। इस योग के होने से न्यायाधीश का पद प्राप्त होता है। वृष लग्न हो और उसमें गुरू तथा चंद्रमा स्थित हों, बली लग्नेश त्रिकोण में हो तथा उस पर बलवान रवि, शनि एवं मंगल की दृष्टि न हो तो सर्वदा चुनाव में विजय प्राप्त होती है। उक्त ग्रह वाले व्यक्ति को कभी भी कोई चुनाव में पराजित नहीं कर सकता है।
—–जन्म के समय में सब ग्रह अपनी राशि, अपने नवांश या उच्च नवांश में मित्र से दृष्ट हों तथा चंद्रमा पूर्ण बली हो तो जातक उच्च पदाधिकारी होता है। उक्त ग्रह योग के होने से राजदूत का पद भी प्राप्त होता है।
वर्गोत्तम नवांशगत उच्च राशि स्थित पूर्ण चंद्रमा को जो-जो शुभ ग्रह देखते हैं, उसकी महादशा या अंतर्दशा में मंत्री पद प्राप्त होता है। यदि जन्म लग्नेश और जन्म राशीश बली होकर केंद्र में स्थित हों और जलचर राशिगत चंद्रमा त्रिकोण में हो तो जातक राज्यपाल का पद प्राप्त करता है। जन्म समय में सब ग्रह अपनी राशि में, मित्र के नवांश या मित्र की राशि में तथा अपने नवांश में स्थित हों तो जातक आयोगाघ्यक्ष होता है। उक्त योग भी राजयोग है, इसके रहने से सम्मान, वैभव एवं धन प्राप्त होता है। जन्म कुंडली में समस्त ग्रह अपने-अपने परमोच्च में हों और बुध अपने उच्च के नवांश में हो तो जातक चुनाव में विजयी होता है।
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—–ऐसे मंगल से मिलती है राजयोग,दौलत और शौहरत—
मंगल को लेकर बहुत से लोगों में गलत धारणाएं है कि कुंडली में मंगल अशुभ फल देने वाला ही होता है लेकिन ऐसा नही है। मंगल के कारण जातक प्रसिद्ध, धनवान और बहुत सुख प्राप्त करने वाला होता है।
ज्योतिष में मंगल को पाप ग्रह जरूर माना जाता है लेकिन कुंडली के दसवें भाव में होने पर मंगल अच्छा फल देने वाला होता है। कुंडली के इस घर में मंगल राजयोग बनाने वाला भी होता है।
कब बनता है मंगल राजयोग—-
—– मेष राशि का मंगल अगर कुंडली के दसवें भाव में होता है तो ऐसा मंगल राजयोग बनाने वाला होता है। कुंडली में दसवें भाव का कारक ग्रह मंगल अगर अपनी ही राशि मेष के साथ दसवें भाव में होता है तो राजयोग बनाने वाला होता है। ऐसा मंगल जातक को संपन्न, सुखी और सम्मान देने वाला होता है। जिन लोगों की कुंडली में इस तरह का मंगल होता है वो प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं।
– अगर किसी कुंडली के दसवें भाव में पांच नंबर के साथ मंगल होता है तो भी मंगल राजयोग बनाता है। सिंह राशि का मंगल जातक को बड़ा अधिकारी और प्रतिष्ठित व्यक्ति बनाता है। ऐसे लोग अपनी अलग ही पहचान बनाते हैं।
– —जिन लोगों की कुंडली में मंगल आठ नंबर के साथ होता है उन लोगों को भी राजयोग होता है। अपनी ही राशि के साथ अपने ही घर में होने से मंगल का प्रभाव अधिक होता है और राजयोग से ऐसी कुंडली वाले लोग धनवान, यशस्वी और सुखी जीवन वाले होते हैं।
अगर आप भी शासकीय पद या शिक्षा से संबंधित किसी क्षेत्र में सफलता के इच्छुक है तो शास्त्रों में बताया बृहस्पति कवच गुरुवार या हर रोज बोलना बहुत ही जल्द और मनचाहे फल देने वाला होगा.

One thought on “आइये जाने की क्या हें राजयोग..???

  1. Ravi Prakash Singh

    सर मेरा प्रश्न हे की मैंने २००६ या २००८ मे एक वाहन दुर्घटना जिसमे जज और लड़की का पूरा परिवार था, बहुत पहले देखा था, २०१० के टाइम पर मै कंप्यूटर टीचर था, तब एक लड़की को कंप्यूटर पढ़ता था, वो दुर्घटना उस लड़की के माता पिता की निकल गयी, मैंने कंप्यूटर मे जन्म कुंडली पर अपनी date of birth 5-4-1987 डाली, तो कुछ पन्नों पर लिखकर आया, किसी नयी स्रजनात्मक उपलब्धी के कारन आपको मान्यता मिल सकती हे, मै उस लड़की के घर गया रिसर्च करते-करते, तों कुछ दिन बाद उसका बंगला बनने लगा, जब हम उस लड़की को देखता हु तो ऐसा फील होता हे की जाने कितने जन्मो से मै उसे जानता हु ! जैसे रिशी कपूर और श्रीदेवी की फिल्म नगीना में हीरो सपने में कुछ देखता हे और लड़की का चेहरा बनाता हे, वही मेरे साथ हो गया, वो लड़की जिसका नाम archana singh हे, उसकी date 28-9-1987 हें, मेरा नाम Ravi Prakash Singh हे, time: 8:25 am हे, क्या हम अगले जन्म के पति-पत्नी हे, मेरी जन्म कुंडली पर स्त्री चन्द्र 7 लिखा हे, उसका नाम भी ७ अछर से हे, मेरा दिन रविवार हे, उसका दिन सोमवार हे, हम सप्तमी को हुए, वो षसठी को, मेरी राशि तुला हे, उसकी राशि मेष हे, प्लीज ये डिटेल्स बताने की कृपा करे, वो हमको आगे मिलेगी की नहीं मै शायद मंगली हु, ये भी बताये !

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