हमारे जीवन(रहन सहन) पर वास्तु शास्त्र का प्रभाव (VASTU AND OUR LIFE) —

हमारे जीवन(रहन सहन) पर वास्तु शास्त्र का प्रभाव (VASTU AND OUR LIFE) —

हमारे रहन सहन में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व है। कई बार हम सभी प्रकार की उपलब्धियों के बावजूद अपने रोजमर्रा की सामान्य जीवन शैली में दुखी और खिन्न रहते हैं।
वास्तु शास्त्र भवन-निर्माण का विज्ञान है। वास्तु के आधार पर बना भवन ब्रह्माण्ड से सकारात्मक ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित करता है और भवन के अंदर ऊर्जा का संतुलन बना रहता है, जिससे वहाँ सुख, शांति,प्रगति और सौहार्द का माहौल उत्पन्न होता है। वास्तु-शास्त्र के सिद्धांत ठोस वैज्ञानिक तथ्यों पर टिके हुए हैं,जिनका प्रयोग जीवन को सही दिशा देने और अधिकतम फल प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। इन सिद्धांतों के आधार पर यदि भवन बनाया जाए और वहाँ रहते या कार्य करते समय कुछ छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखें, तो निश्चित ही बहुत अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। आइए, चर्चा करते हैं ऐसे ही कुछ सिद्धांतों की, जो जीवन को सुखमय और आनंदपूर्ण बनाने के लिए ज़रूरी हैं।वास्तु दोष मूलतः हमारे रहन सहन की प्रणाली से उत्पन्न होता है।

वास्तु शास्त्र में पेड़-पौधों को बहुत महत्व दिया गया है। वास्तु के अनुसार मज़बूत तने वाले या ऊँचे-ऊँचे पौधे उत्तर-पूर्व, उत्तर व पूर्व दिशा में ही होने चाहिए। घर के आस-पास या घर के अन्दर कैक्टस, कीकर, बेरी या अन्य कांटेदार पौधे व दूध वाले पौधे लगाने से घर के लोग तनावग्रस्त, चिड़चिड़े स्वभाव के हो जाते हैं और ऐसे पौधे स्त्रियों के स्वास्थ्य को हानि पहुँचाते हैं। घर में तेज़ ख़ुश्बूदार पौधों को नहीं लगाना चाहिए। साथ ही घर में चौड़े पत्ते वाले पौधे, बोनसाई व नीचे की तरफ़ झुकी बेलें नहीं लगानी चाहिए। पौधे लगाते समय ध्यान रखें कि पौधे सही प्रकार बढ़ें, सूखें नहीं और सूखने पर उन्हें तुरन्त बदल दें। घर में फलदार पौधे लगाना भी कभी-कभी हानिकारक हो सकता है, क्योंकि जिस वर्ष फलदार पौधे पर फल कम लगें या न लगें, इस वर्ष आपको नुक़सान या परेशानी का सामना ज़्यादा करना पड़ेगा।प्राचीन काल में वास्तु शास्त्री ही मकान की बुनियाद रखने से पहले आमंत्रित किए जाते थे और उनकी सलाह पर ही घर के मुख्य द्वार रसोईघर, शयन कक्ष, अध्ययन शाला और पूजा गृह आदि का निर्णय लिया जाता था। आजकल के शहरी जीवन और तड़क-भड़क की जिन्दगी में हम नियमों को ताक में रखकर मनमाने ढंग से घर या मकान का निर्माण कर लेते हैं।
घर में तुलसी का पौधा उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में रखें और तुलसी का पौधा ज़मीन से कुछ ऊँचाई पर ही लगाना उचित है। तुलसी के पौधे पर कलावा व लाल चुन्नियाँ आदि नहीं बांधनी चाहिए। तुलसी का पौधा अपने आप में पूर्ण मन्दिर के समान माना जाता है, इसलिए इसका किसी भी प्रकार निरादर नहीं होना चाहिए। घर में पीले फूलों वाले पौधे लगाना शुभ माना जाता है। बैडरूम में पौधे नहीं लगाने चाहिए, इसके स्थान पर आर्टिफिशल पौधे रख सकते हैं। गमलों की आकृति कभी भी नोंकदार नहीं होनी चाहिए। याद रखें कि गमलों में डाली जाने वाली मिट्टी शमशान, कब्रिस्तान या कूड़ेदान आदि से न लाई गई हो, अन्यथा काफ़ी आर्थिक हानि हो सकती है। पौधे लगाते समय ध्यान रखें कि पौधे इस तरह से लगाये जायें जिसमें कोंपलें, पत्तियाँ व फूल जल्द ही निकलें। ऐसे पौधे अच्छे भाग्य के परिचायक होते हैं।

घर में सौहार्दपूर्ण वातावरण के दृष्टिकोण से सीढ़ियों का विशेष महत्व है। घर के मुख्यद्वार के सामने सीढ़ियाँ कभी न बनाएँ। सीढ़ियाँ गिनती में 5, 7, 11, 13, 17, 21 होनी चाहिए। सीढ़ियों के नीचे बाथरूम, मन्दिर, शौचालय, रसोई या स्टोर रूम न बनायें, नहीं तो मानसिक संताप का सामना करना पड़ सकता है। सीढ़ियाँ दक्षिण-पश्चिम दिशा में बनवाएँ। अगर ऐसा सम्भव न हो, तो वास्तु के अनुसार एन्टी क्लोकवाईस सीढ़ियों का निर्माण ठीक माना गया है।जब भारी लागत लगाने के बावजूद भी घर के सदस्यों का सुख चैन गायब हो जाता है, तब हमें यह आभास होता है कि मकान बनाते समय कहां पर चूक हुई है।
मकान की छत पर घर के पुराने, बेकार या टूटे -फूटे समान को न रखें। घर की छत हमेशा साफ़-सुथरी होनी चाहिए। शयनकक्ष में पलंग/चारपाई की व्यवस्था ऐसी करें कि सोने वाले का सिर दक्षिण एवं पैर उत्तर दिशा की तरफ हों। शयनकक्ष में दर्पण ऐसे न लगा हो कि सोने वाला व्यक्ति का कोई भी अंग उसमें प्रतिबिंबित हो। घर में दर्पणों को लगाते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। दर्पण के लिए हमेशा उत्तर-पूर्व, उत्तर, पूर्व दिशा को ही उत्तम माना गया है। घर के भारी सामान जैसे अलमारी, सन्दूक, भारी वस्तुओं के लिए दक्षिण व पश्चिम दिशा का स्थान चयन करना चाहिए।आज बेहतर जीवन के लिए वास्तु शास्त्र और फेंग शुई का क्रेज लोगों में सिर चढ़कर बोल रहा है। ऐसी मान्यता है कि अगर घर में सभी चीजें वास्तु शास्त्र के अनुरूप हो तो घर में सुख और शांति का वास होता है। इसीलिए आजकल वास्तु शास्त्र और फेंग शुई के उपायों को खूब अपनाया जा रहा है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन निर्माण के लिए चुना गया भूखण्ड आयताकार या वर्गाकार होना चाहिए। जिसकी सभी चारों दीवारें 90 अंश का कोण बनाती हों। ऐसा प्लॉट वास्तु नियमानुसार उत्तम श्रेणी का प्लॉट माना जाता है। वास्तु के नियमों को ध्यान में रखकर काफी हद तक हम अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं। भूखण्ड का चयन करते समय हमेशा ध्यान रखें कि भवन निर्माण के लिए चुना गया भूखण्ड बन्द गली व नुक्कड़ का न हो। ऐसे मकान में निवास करने वालों को सन्तान की चिन्ता और नौकरी, व्यापार में हानि, शारीरिक कष्ट आदि परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।वास्तु की इन छोटी-छोटी बातों को याद रखकर सरलता से जीवन में आने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है और जीवन को सुखमय बनाया जा सकता है। वास्तु का अगाध विज्ञान परेशानियों का अचूक समाधान देता है। आइए, वास्तु शास्त्र का उपयोग कर जीवन को सकारात्मक दिशा दें—-
—-घर का स्टोर हो वास्तु के अनुसार —(STORE AS PER VASTU )
—-स्टोर रूम में भारी समान दक्षिण पश्चिम दीवार पर दक्षिण दिशा की ओर रखना चाहिए।
—-स्टोर रूम का दरवाजा उत्तर व पूर्व दिशा की ओर खुलना चाहिए। साथ ही खिडकी भी इसी ओर खुलनी चाहिए। यह वास्तु के हिसाब से सही माना जाता है।
—-ऐसा हो बाथरूम व शौचालय—–(BATHROOM AS PER VASTU )
—-बाथरूम कभी भी रसोई घर के सामने नहीं होना चाहिए। इसी तरह बाथरूम में गीजर, हीटर व अन्य उपकरण दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर रखने चाहिए। वास्तु के अनुसार यह दिशा उपकरण रखने के लिए सबसे बेहतर होती है।
—-बाथरूम और शौचालय की दीवारे हमेशा हल्के रंग की होनी चाहिए। इसके लिए आप सफेद, हल्के नीले और आसमानी रंगों का दस्तेमाल कर सकते है। इन रंगों के प्रयोग से बाथरूम और शौचालय का वातावरण काफी खुशनुमा लगता है।
—बाथरूम में बाथटब पूर्व, उत्तर और ईशान की ओर रखे। वहीं शौचालय की टोंटी यानि कि नल पूर्व या उत्तर की दिशा में होनी चाहिए।
—शौचालय में कभी संगमरमर का प्रयोग कतई ना करे। अगर घर में संयुक्त शौचालय है तो उसका दरवाजा मध्य पूर्व की दिशा की ओर होना चाहिए।
—–यहाँ हो सोने का कमरा(बेडरूम/शयन कक्ष)—(BEDROOM AS PER VASTU )
—सोने के कमरे में बिस्तर हमेशा इस प्रकार रखे कि सोते समय सिर पश्चिम और दक्षिण दिशा की ओर रहे। इससे आपको मीठी नींद आएगी और रात को सोते समय बुरे सपने भी नहीं आएगें।
—लेकिन ये जरूर याद रखे कि अगर सोते समय सिर पश्चिम दिशा की ओर हो तो आपके बिस्तर का एक सिरा पश्चिमी दिशा की दीवार में छूना चाहिए।
—-इसी तरह अगर आप सिर दक्षिण की ओर रखकर सोती है तो बिस्तर का एक सिरा दक्षिणी दीवार को छूता रहे।
—- कभी भी उत्तर की दिशा की ओर सिर रखकर नहीं सोना चाहिए। अगर आप उत्तर दिशा की ओर सिर रखकर सोती है तो आपको रात में नींद नहीं आएगी और कई तरह के बुरे सपने भी दिखाई देते है। जो कि आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
—पलंग कमरे के द्वार पर कभी नहीं होना चाहिए। क्योंकि इससे घर में अशांति और व्याकुलता का वास होने लगता है।
—-बिस्तर में सामने दीवार पर उत्तेजक और भडकाऊ चित्र नहीं लगाने चाहिए। बल्कि प्रेरक और सुदंर चित्र दीवार सजाने से मन को प्रसन्नता मिलती है।
—-अगर आपके परिवार में कोई वृद्धजन रहते है तो उनका बिस्तर पूर्व की ओर लगाना चाहिए। यह दिशा में आध्यात्मिक चिंतन, ध्यान साधना और अच्छी नींद का वास होता है। जो कि वृद्धजनों के लिए उपयुक्त है।
—–हमेशा बायी ओर करवट करके लेटना चाहिए। इससे नींद तो अच्छी आती है साथ ही पाचन क्रिया भी सही रहती है।
—– इस बात का विशेष ख्याल रखे कि तिजोरी कभी भी सोने के कमरे में न रखे। कहते है कि इससे लक्ष्मी रुठ कर चली जाती हैं।
—- कमरे में घड़ी पूर्व या पश्चिम की दीवार पर ही लगाए। उत्तर की दीवार में भी इसका प्रभाव सकारात्मक होता है।
—-ऐसा हो ड्रॉइंग रूम/बैठक —-(DROING ROOM AS PER VASTU )
—-ड्रॉइंग रूम में लडाई, पशु-पक्षी, महिलाओं और बच्चों के रोते हुए चित्र न लगाए।
—–दीवान हमेशा पश्चिम से दक्षिण की दीवार की ओर मुख कर के रखना चाहिए।
—-अगर आपके घर में एयरकंडीशनर और रूम हीटर है तो इसे सदैव कमरे के आग्रेय कोण में रखना चाहिए।
—–कमरे में भारी अलमारियां और किताबों के शेल्फ और मूर्तियां आदि पश्चिम दिशा की ओर रखने से घर का वास्तु ठीक रहता है। और मन में कोई दुष्प्रभाव नहीं आते।
—–ड्रॉइंग रूम में प्रवेश द्वार में ऊपर की ओर अंदर की तरफ से किसी भी भगवान का चित्र नहीं लगाना चाहिए। लेकिन अगर आप चाहे तो द्वार के बाहर की ओर से गणेश जी का फोटो लगा सकते हैं।
—-ऐसा हो आपका रसोई घर—–(KITCHEN AS PER VASTU )
—-आपकी किचन में गैस बर्नर, चूल्हा, स्टोव या हीटर दीवार से लगभग तीन इंच की दूरी पर रखना चाहिए।
—-किचन में भरी समान, गैस सेलेंडर, बरतन आदि दक्षिण दिशा की दीवार की ओर ही रखे।
—-माइक्रोवेव, अवन, मिक्सर, ग्राइंडर आदि दक्षिण दीवार की ओर ही रखे जाए।
—–रेफ्रिजरेटर आग्रेय, दक्षिण, पश्चिम और उत्तरी दिशा में रखे। भूल का भी नैऋत्य कोण में इन चीजों को ना रखे। अत: इनके खराब होने की संभावना अधिक होती है।
—–अगर आप भोजन कही और करती है तो इसकी व्यवस्था किचन में करे। आप अपना डाइनिंग टेबल पश्चिम दिशा की ओर रखे सकती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यह एकदम सही होगा।
—-ऐसा हो आपके घर का पूजा घर —–(PUJA GHAR AS PER VASTU )
—–पूजा घर के निकट और घर के ईशान कोण में झाडू व कूडेदान आदि नहीं रखना चाहिए। अगर संभव हो तो पूजाघर को साफ करने के लिए एक अलग से साफ कपडे को रखे।
—- धन प्राप्ति के लिए सदैव उत्तर की ओर और ज्ञान प्राप्ति के लिए पूर्व की ओर मुख करके पूजा करनी चाहिए।
—-अगर आप किसी प्राचीन मंदिर से मूर्ति लाकर मंदिर में स्थापित करने का विचार बना रहे है तो ऐसा बिल्कुल न करे। क्योंकि यह वास्तु के हिसाब से गलत होगा। इसका बुरा परिणाम भी हो सकते है।
—–पूजाघर की दीवार हमेशा हल्के रंग की ही होनी चाहिए। इसके लिए सफेद, हल्का पीला या हल्का नीला भी कर सकते है।
—-पूजाघर की फर्श सफेद या फिर हल्के पीले रंग की होनी चाहिए। यह आपके मन को नहीं भटकाएगी। और आप शांति पूर्वक पूजा कर सकते है।
—-यह बात पर सदैव ध्यान दे कि गणेश कुबेर और दुर्गा माता का मुख हमेशा दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।
—-मारूति नंदन यानि हनुमान जी का मुख पश्चिम और दक्षिण दिशा की तरफ रखे।
—-इस बात का विशेष ख्याल रखे कि पूजा घर में पशु पक्षी और महाभारत का चित्र नहीं होना चाहिए।
मकान बनाने से पहले ही हम यहां पर कुछ वास्तु टिप्स दे रहे हैं, जिनका अनुसरण करके आप अपने घर-मकान, दुकान या कारखाने में आने वाली बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं । आइये जाने की केसे—(VASTU TIPS FOR NEW HOUSE )
1. उत्तर अथवा पूर्व में बड़ा खुला स्थान नाम, धन और प्रसिद्धि का माध्यम होता है। अपने मकान, फार्म हाउस कॉलोनी के पार्क फैक्टरी के उत्तर-पूर्व, पूर्व या उत्तरी भाग में शांत भाव से बैठना या नंगे पैर धीमे-धीमे टहलना सोया भाग्य जगा देता है।
2. दक्षिण-पश्चिम में अधिक खुला स्थान घर के पुरूष सदस्यों के लिए अशुभ होता है, उद्योग धंधों में यह वित्तीय हानि और भागीदारों में झगड़े का कारण बनता है।
3. घर या कारखाने का उत्तर-पूर्व (ईशान) भाग बंद होने पर ईश्वर के आशीर्वाद का प्रवाह उन स्थानों तक नहीं पहुंच पाता। इसके कारण परिवार में तनाव, झगड़े आदि पनपते हैं और परिजनों की उन्नति विशेषकर गृह स्वामी के बच्चों की उन्नति अवरूद्ध हो जाती है। ईशान में शौचालय या अग्नि स्थान होना वित्तीय हानि का प्रमुख कारण है ।
4. सुबह जब उठते हैं तो शरीर के एक हिस्से में सबसे अधिक चुंबकीय और विद्युतीय शक्ति होती है, इसलिए शरीर के उस हिस्से का पृथ्वी से स्पर्श करा कर पंच तत्वों की शक्तियों को संतुलित किया जाता है।
5. सबसे पहले उठकर हमें इस ब्रह्मांड के संचालक परमपिता परमेश्वर का कुछ पल ध्यान करना चाहिए। उसके बाद जो स्वर चल रहा है, उसी हिस्से की हथेली को देखें, कुछ देर तक चेहरे का उस हथेली से स्पर्श करें, उसे सहलाएं। उसके बाद जमीन पर आप उसी पैर को पहले रखें, जिसकी तरफ का स्वर चल रहा हो। इससे चेहरे पर चमक सदैव बनी रहेगी।
6. व्यापार में आने वाली बाधाओं और किसी प्रकार के विवाद को निपटाने के लिए घर में क्रिस्टल बॉल एवं पवन घंटियां लटकाएं।
7. घर में टूटे-फूटे बर्तन या टूटी खाट नहीं रखनी चाहिए। टूटे-फूटे बर्तन और टूटी खाट रखने से धन की हानि होती है।
8. घर के वास्तुदोष को दूर करने के लिए उत्तर दिशा में धातु का कछुआ और श्रीयंत्र युक्त पिरामिड स्थापित करना चाहिए, इससे घर में सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
तो देखा आपने कि घर में कितना महत्व रखता है यह वास्तु शास्त्र। अगर घर में सारी चीजे वास्तु के हिसाब से हो तो किसी तरह की कोई मुश्किल नहीं आती। हमारे भारतीय समाज में वास्तु का विशेष महत्व है। और इसी के आधार पर अगर आप भी नये घर में प्रवेश करने जा रहे है तो हर चीज आप वास्तु के हिसाब से रख सकते है।

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