खग्रास चन्द्र ग्रहण के दुष्प्रभावों केसे करें दूर??? क्या करें उपाय/टोटके ????

खग्रास चन्द्र ग्रहण के दुष्प्रभावों केसे करें दूर??? क्या करें उपाय/टोटके ????

इस वर्ष का अन्तिम खग्रास चन्द्रगहण ..(शनिवार)10 दिसम्बर,2011 को भारत में दिखाई देने जा रहा हें । यह ग्रहण रोहिणी व मृगशिरा नक्षत्र वृषभ राशि पर रहेगा जिसमें वृषभ राशि पर ज्यादा असर कारक हैं। ग्रहण काल में बुध व देवगुरू बृहस्पति वक्री होने से विश्व स्तर पर मानसिक तनाव से शीतयुद्ध व सत्ता परिवर्तन जैसी घटनाएं घटित हो सकती हैं। एक ही माह में होने वाले लगातार दो ग्रहणों का प्रकोप पिछले दिनों में हम मुम्बई आदि कई स्थानों पर आगजनी के रूप में देख ही चुके हैं।
पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान 10 दिसंबर को सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की लुका छिपी का रोमांचक नजारा भारत समेत दुनिया के अधिकांश भू-भागों में देखा जा सकेगा। छह घंटे की खगोलीय घटना के दौरान चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की ओट में छिप जायेगा। उज्जैन की जीवाजी वेधशाला के तकनीकी अधिकारी दीपक गुप्ता ने आज फोन पर भाषा को बताया कि पूर्ण चंद्रग्रहण की शुरूआत भारतीय समय के मुताबिक 10 दिसंबर को शाम पांच बजकर दो मिनट पर होगी और यह रात 11 बजकर दो मिनट पर खत्म हो जायेगा।
यह ग्रहण 10 दिसम्बर, 2011 दिन शनिवार को भारत में दिखाई देगा. ग्रहण की अवधि 3 घण्टे 33 मिनट तक रहेगी. शाम को 6 बजकर 15 मिनट से रात 9 बजकर 48 मिनट तक ग्रहण सारे भारत में दिखाई देगा. भारत में ग्रहण आरम्भ होने से पहले ही चन्द्र उदय हो जाएगा. भारत के सभी भागों में शाम 4:30 मिनट से 5:45 मिनट तक चन्द्र उदय हो जाएगा. इस ग्रहण का प्रारम्भ, मध्य तथा समाप्ति रुप भारत के सभी भागों में दिखाई देगा.
इस खग्रास चन्द्र ग्रहण की अवधि – भारतीय समयानुसार —
ग्रहण आरम्भ – 18:15 घण्टे
खग्रास प्रारम्भ – 19:36 घण्टे
ग्रहण मध्य या परम ग्रास – 20:02 घण्टे
खग्रास समाप्त – 20:28 घण्टे
ग्रहण समाप्त – 21:48 घण्टे
चन्द्र मलिन आरम्भ – 17:02 बजे से
चन्द्र क्रान्ति निर्मल – 23:02 बजे से
ग्रहण का सूतक काल–10 दिसम्बर 2011 के दिन खग्रास चन्द्र ग्रहण दिखाई देगा. इस ग्रहण का सूतक काल, इस दिन सुबह भारतीय समयानुसार 09:15 बजे से आरम्भ हो जाएगा.

इस चन्द्र ग्रहण का असर : इस चंद्रग्रहण से सबसे ज्यादा राजकीय और प्रशासनिक वर्ग के वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित होंगे। राजनेता, मंत्री और बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों पर इसका असर अधिक रहेगा। प्रतिष्ठित व्यक्तियों के लिए यह कष्टप्रद रहेगा। राजनीतिक उथलपुथल बढ़ेगी। आम लोगों के हाथों राजनेताओं और मंत्रियों के अपमानित होने की स्थितियाँ निर्मित होंगी। सामान्यतया किसी भी ग्रहण का असर 45 दिन पहले और 45 दिन बाद तक रहता है।
ह चन्द्र ग्रहण 10 दिसम्बर, शनिवार को मिथुन लग्न में शुरू हो रहा हैं, जिसकी कुण्ड़ली को देखे तो लग्नेश बुध, राहु के साथ रिपु भाव में जाने से सत्ता को लेकर राज्य, देश व विश्व स्तर पर कई नये आयाम या परिवर्तन के संकेत देखने को मिलेंगे। बृहस्पति की वक्रता से देश ही नहीं विश्व का आर्थिक पक्ष प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगा और शेयर मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे।

काले रंग की वस्तुओं में तेजी : इस ग्रहण से काले रंग की वस्तुओं में तेजी आएगी। इसके साथ ही कपास और सूत का व्यापार करने वाले व्यापारी फायदे में रहेंगे। वर्ष 2011 के इस अंतिम ग्रहण का सर्वाधिक असर राजनेताओं और प्रतिष्ठित व्यक्तियों के लिए प्रतिकूल रहेगा। इसलिए इन लोगों को सावधानी की जरूरत है। चूँकि यह ग्रहण रोहिणी-मृगशिरा नक्षत्र से वृषभ राशि में यह ग्रहण लग रहा है इसलिए इससे सबसे ज्यादा प्रभावित वृषभ राशि ही होगी।
अशुभ प्रभाव दूर/निवारण हेतु क्या करें..????

शुभ प्रभाव प्राप्त करने के लिए निम्न उपाय करे –
ग्रहण का प्रभाव मनुष्यों पर शुभ-अशुभ दोनों ही तरह से पड़ता है। अशुभ प्रभाव से बचने के लिए और शुभ प्रभाव को और अधिक लाभकारी बनाने के लिए उक्त उपाय कारगर हो सकते हैं। प्रस्तुत हैं ग्रहण से बचने के कुछ खास उपाय…।

ग्रहण काल में इन मंत्रों का जाप करें—
– ॐ सों सोमाय नमः , – ॐ रां राहवे नमः – ॐ नमः शिवाय

—चंद्रमा मूलतः मन का देवता है। राहु-केतु के निकट होने से अंधकार की स्थिति में मानसिक अशांति और तनाव उत्पन्न होता है। इस ग्रहण से बीमार, मानसिक विकृति वाले लोगों को अधिक कष्ट हो सकता है।
अत: दुर्घटना, मानसिक रोग और तनाव से बचने के लिए चंद्रग्रहण पर राहु से संबंधित उपाय करने चाहिए।
—-इस दिन लोगों को संकटों से पार पाने के लिए गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना चाहिए।
—-चंद्रग्रहण में मंगलमूर्ति भगवान गणेश की आराधना का विशेष महत्व है।
—ग्रहण में बालक, वृद्ध और रोगी के लिए कोई नियम शास्त्रों में नहीं बताया गया है ।
—-चिटियों को पिसा हुआ चावल व आट्टा डाले ।
— चन्द्र की दान वस्तुओं में मोती, चांदी, चावल, मिसरी, सफेद कपड़ा,सफेद फूल, शंख, कपूर,श्वेत चंदन, पलाश की लकड़ी, दूध, दही, चावल, घी, चीनी आदि का दान करना शुभ रहेगा ,
—कुंडली के अनुसार चन्द्रमा को मन और माँ का कारक माना गया है जन्म कुंडली में चन्द्रमा जिस भाव में हो उसके अनुसार दान करना चाहिए . चन्द्र वृष राशी में शुभ और वृश्चिक राशी में अशुभ होता है , जब चन्द्र जन्म कुण्डली मे उच्च का या अपने पक्के भाव का हो तब चन्द्र से सम्बन्धित वस्तुऑ का दान नही करना चाहिए, अगर चन्द्र दितीय चतुर्थ भाव मे हो तो चावल चीनी दुध का दान न करे , यदि चन्द्र वृश्चिक राशी में हो तो चन्द्र की शुभता प्राप्त करने के लिए मन्दिर,मस्जिद, गुरुद्धारा, शमशान या आम जनता के लिए प्याउ( पानी की टंकी ) बनवाए या किसी मिटटी के बर्तन में चिड़ियों के लिये पानी रखे .
—चन्द्रग्रहण में बोलें चंद्र गायत्री मंत्र.. टेंशन से मिलेगा छुटकारा—-

प्रतियोगिता के इस दौर में मानसिक तनाव जीवन का हिस्सा है। तनाव से बिखरा और दु:खी मन इंसान की मनोदशा ही नहीं व्यवहार में भी बुरे बदलाव लाता है। जिससे जीवन में आंतरिक ही नहीं बाहरी कलह भी स्वयं के साथ करीबी लोगों के तनाव और कष्ट का कारण बन सकता है। ऐसी दशा से बाहर आने के लिए मानसिक संयम रख तनाव का कारण बनी समस्या, असफलता या अधूरी इच्छाओं पर सकारात्मक विचार जरूरी है।

वहीं इस समस्या के धार्मिक उपायों पर विचार करें तो शास्त्रों में चन्द्र मन का स्वामी माना गया है। यही कारण है कि ज्योतिष शास्त्रों में तनाव, बेचैनी, मानसिक रोगों का कारण चन्द्र दोष माना जाता है। चन्द्र की अनुकूल स्थिति में इंसान मानसिक ऊर्जा से भरपूर, शांत और निरोगी जीवन पाता है।

वैसे तो चन्द्र दोष दूर करने के लिए सोमवार, अमावस्या का दिन बहुत ही शुभ होता है। किंतु चन्द्र दोष से पीडि़त के लिए चन्द्रग्रहण के दौरान चन्द्र उपासना बहुत ही जरूरी होती है। चन्द्रग्रहण से जुड़ी पौराणिक कथाओं के मुताबिक समुद्र मंथन से निकले अमृत के बंटवारे के दौरान पैदा हुई शत्रुता के कारण छायाग्रह राहु के द्वारा चन्द्र को ग्रसने से चन्द्रग्रहण होता है।

बहरहाल, धर्म हो य विज्ञान चन्द्र के मानव जीवन और प्रकृति पर चन्द्र के प्रभाव को स्वीकारते हैं। इसलिए अगर आप भी किसी मानसिक परेशानी या तनाव से गुजर रहें है तो मन को शांत और एकाग्र करने के लिए कल यहां बताई जा रही चन्द्र पूजा की सरल विधि के साथ चन्द्रग्रहण के दौरान इस चन्द्र गायत्री मंत्र का जप करें – –
पूजा के बाद इस चन्द्र गायत्री मंत्र का स्मरण करें, इसी चंद्र मंत्र का चंद्रग्रहण के दौरान भी जाप करें –

—–ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे, अमृत तत्वाय धीमहि। तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्।।

—-चन्द्र का वैदिक मंत्र :-
चंद्रमा के शुभ प्रभाव प्राप्त करने हेतु चंद्रमा के वैदिक मंत्र का 11000 जप करना चाहिए।.
—–“””ऊँ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः “””या “””ऊँ सों सोमाय नमः “”
—-चन्द्र दोष दूर करने के लिए सोमवार, अमावस्या का दिन बहुत ही शुभ होता है। किंतु चन्द्र दोष से पीडि़त के लिए चन्द्रग्रहण के दौरान चन्द्र उपासना बहुत ही जरूरी होती है। शिव जी की आराधना करें। अपने श्री इष्ट देवताये नम:, का जाप करे….
—-इस चंद्रग्रहण पर करें यह प्रयोग, बिजनेस में जरुर मिलेगी सफलता—-
यदि आपका बिजनेस ठीक नहीं चल रहा है तो घबराईए बिल्कुल मत क्योंकि 10 दिसंबर, शनिवार को आने वाला चंद्र ग्रहण इस समस्या से छुटकारा पाने का श्रेष्ठ अवसर है। बिजनेस की सफलता के लिए चंद्रग्रहण के दिन यह प्रयोग करें-
ऐसे करें प्रयोग—–
ग्रहण से पहले नहाकर लाल या सफेद कपड़े पहन लें। इसके बाद ऊन व रेशम से बने आसन को बिछाकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। जब ग्रहण काल प्रारंभ हो तब चमेली के तेल का दीपक जला लें। अब दाएं हाथ में रुद्राक्ष की माला लें तथा बाएं हाथ में 5 गोमती चक्र लेकर नीचे लिखे मंत्र का 54 बार जप करें-

—-मन्त्र “”””ऊँ कीली कीली स्वाहा”””

अब इन गोमती चक्रों को एक डिब्बी में डाल दें और फिर क्रमश: 5 हकीक के दाने व 5 मूंगे के दाने लेकर पुन: इस मंत्र का 54 बार उच्चारण करें। अब इन्हें भी एक डिब्बी में डालकर उसके ऊपर सिंदूर भर दें। अब दीपक को बुझाकर उसका तेल भी इस डिब्बी में डाल दें।

इस डिब्बी को बंद करके अपने घर, दुकान या ऑफिस में रखें। आपका बिजनेस चल निकलेगा।
—-इस चंद्रग्रहण पर करें यह उपाय/टोटका, होगा अचानक धन लाभ—-
तंत्र शास्त्र के अनुसार ग्रहण के दौरान किया गया प्रयोग बहुत प्रभावशाली होता है और इसका फल भी जल्दी ही प्राप्त होता है। इस मौके का लाभ उठाकर यदि आप धनवान होना चाहते हैं तो नीचे लिखा उपाय करने से आपकी मनोकामना शीघ्र ही पूरी होगी और आपको अचानक धन लाभ होगा।

ऐसे करें उपाय/टोटका —-
ग्रहण के पूर्व नहाकर साफ पीले रंग के कपड़े पहन लें। ग्रहण काल शुरु होने पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके ऊन या कुश के आसन पर बैठ जाएं। अपने सामने पटिए(बाजोट या चौकी) पर एक थाली में केसर का स्वस्तिक या ऊँ बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र स्थापित करें। इसके बाद उसके सामने एक दिव्य शंख थाली में स्थापित करें।अब थोड़े से चावल को केसर में रंगकर दिव्य शंख में डालें। घी का दीपक जलाकर नीचे लिखे मंत्र का कमलगट्टे की माला से ग्यारह माला जप करें-

ये हें मंत्र—-

सिद्धि बुद्धि प्रदे देवि मुक्ति मुक्ति प्रदायिनी।

मंत्र पुते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।।

मंत्र जप के बाद इस पूरी पूजन सामग्री को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में आपको अचानक धन लाभ होगा।
=========================

व्यक्तिगत रूप में जिनका जन्म रोहिणी एवं मृगशिरा नक्षत्र में हुआ है तथा कुंडली में विंशोत्तरी महादशा किसी प्रबल षष्ठेश, अष्टमेश या द्वादशेश क़ी चल रही हो तो कृपया मानसिक रूप से भयंकर हानि एवं कष्ट का सामना करने के लिए तैयार रहे. किन्तु यदि शुभ लग्नेश, पंचमेश, नवमेश या द्वादशेश क़ी महादशा चल रही हो तो थोड़ी बहुत परेशानी ही होगी. उत्तरा फाल्गुनी एवं हस्त नक्षत्र में जन्म लेने वालो को पारिवारिक क्लेश का सामना करना पडेगा. चित्रा एवं स्वाती नक्षत्र वालो को अपमान एवं पदावानती झेलनी पड़ेगी. ज्येष्ठा नक्षत्र जातको को पति/पत्नी तथा बच्चो से घृणा या अपमान मिलेगा. शेष नक्षत्र में जन्म लेने वाले सामान्य रूप से ही रहेगें. पुष्य एवं अश्लेषा नक्षत्र में जन्म लेने वालो को शुभ सन्देश एवं सफलता के अलावा धन लाभ का भी बहुत बड़ा अवसर मिलेगा. उत्तरभाद्रपद, रेवती, पूर्वाफाल्गुनी एवं मघा नक्षत्र में जन्म लेने वाले सुख एवं उन्नति प्राप्त करेगें. कुंडली में जिसकी बुध एवं चन्द्रमा क़ी दशान्तार्दाशा चल रही होगी उन्हें भी विशेष सावधानी क़ी ज़रुरत है.
ऊपर जिनके लिए ग्रहण का फल अशुभ बताया गया है उन्हें चाहिए कि ग्रहण के दौरान समूल कुश, मंजरी समेत तुलसी के पत्ते, लाल चन्दन क़ी एक छोटी लकड़ी, हाथी के पूंछ का एक या दो बाल, अरोघ्नी, देवरस एवं निवारू साथ में रखे. इसे शास्त्रों में “सप्तार्क” कहा गया है. जब तक जगे है तब तक तो इन सब को पाकिट में ग्रहण के दौरान रखें. जब ग्रहण समाप्त हो जाय तो इन सब को स्वच्छ शुद्ध जल में ड़ाल कर स्नान कर लें. अगले दिन सूरज निकलने पर फिर इन सब को कही ज़मीन में दबा दें या कही बहते जल में ड़ाल दें. इससे ग्रहण का कुप्रभाव दूर होता है.
ग्रहण काल तथा बाद में करने योग्य कार्य ——
ग्रहण के सूतक और ग्रहण काल में स्नान, दान, जप, पाठ, मन्त्र, सिद्धि, तीर्थ स्नान, ध्यान, हवनादि शुभ कार्यो का करना कल्याणकारी रहता है. धार्मिक लोगों को ग्रहण काल अथवा 10 दिसंबर के सूर्यास्त के बाद दान योग्य वस्तुओं का संग्रह करके संकल्प कर लेना चाहिए. तथा अगले दिन 11 दिसंबर,2011 को प्रात: सूर्योदय के समय पुन: स्नान करके संकल्पपूर्वक योग्य ब्राह्माण को दान देना चाहिए.
ग्रहण के समय स्नानादि करने के पश्चात अपने इष्टदेव का ध्यान करना चाहिए. चन्द्र ग्रहण पर भगवान चन्द्र की पूजा करनी चाहिए. चन्द्र के मंत्रों का जाप करना चाहिए. जिसकी जो श्रद्धा है उसके अनुसार पूजा-पाठ, वैदिक मंत्रों का जाप तथा अनुष्ठान आदि करना चाहिए. ग्रहण के दौरान ही अन्न, जल, धन, वस्त्र, फल आदि का अपनी सामर्थ्य अनुसार दान देना चाहिए. ग्रहण समय में पवित्र स्थलों पर स्नान करना चाहिए. इस दिन प्रयाग, हरिद्वार, बनारस आदि तीर्थों पर स्नान का विशेष महत्व होता है.
धर्म सिन्धु के अनुसार, ग्रहण मोक्ष उपरान्त पूजा पाठ, हवन- तर्पण, स्नान, छाया-दान, स्वर्ण-दान, तुला-दान, गाय-दान, मन्त्र- अनुष्ठान आदि श्रेयस्कर होते हैं। ग्रहण मोक्ष होने पर सोलह प्रकार के दान, जैसे कि अन्न, जल, वस्त्र, फल आदि जो संभव हो सके, करना चाहिए।ग्रहण के समय स्नानादि करने के पश्चात अपने इष्टदेव का ध्यान करना चाहिए. चन्द्र ग्रहण पर भगवान चन्द्र की पूजा करनी चाहिए. चन्द्र के मंत्रों का जाप करना चाहिए. जिसकी जो श्रद्धा है उसके अनुसार पूजा-पाठ, वैदिक मंत्रों का जाप तथा अनुष्ठान आदि करना चाहिए. ग्रहण के दौरान ही अन्न, जल, धन, वस्त्र, फल आदि का अपनी सामर्थ्य अनुसार दान देना चाहिए. ग्रहण समय में पवित्र स्थलों पर स्नान करना चाहिए. इस दिन प्रयाग, हरिद्वार, बनारस आदि तीर्थों पर स्नान का विशेष महत्व होता है.
धर्मसिन्धु के अनुसार ग्रहण काल में स्पर्श के समय स्नान, ग्रहण काल में मध्य समय में होम तथा देवपूजन करना चाहिए. ग्रहण मोक्ष के समय में पितरों का श्राद्ध करना चाहिए. अन्न, वस्त्र, धन आदि का अपनी क्षमतानुसार दान करना चाहिए. ग्रहण जब पूर्ण रुप से समाप्त हो जाए तब फिर स्नान करना चाहिए. यह सभी क्रम से करना चाहिए.
सूतक व ग्रहण काल में मूर्ति स्पर्श करना, अनावश्यक खाना-पीना, मैथुन, निद्रा, तैल, श्रंगार आदि करना वर्जित होता है. झूठ-कपटादि, वृ्था- अलाप आदि से परहेज करना चाहिए. वृ्द्ध, रोगी, बालक व गर्भवती स्त्रियों को यथानुकुल भोजन या दवाई आदि लेने में दोष नहीं लगता है.भारतीय शास्त्रों में ग्रहण काल में कुछ कार्यों के बारे में बताया गया है जिन्हें ग्रहण समय में नहीं करना चाहिए. इस समय गर्भवती महिलाओं को चाकू का उपयोग नहीं करना चाहिए. सब्जी तथा फलों को नहीं काटे. पापड़ भी नहीं सेंकना चाहिए. उत्तेजित पदार्थों से दूर रहना चाहिए. इस दौरान संभोग नहीं करना चाहिए. माँस तथा मदिरा का परहेज करना चाहिए.
कुप्रभाव से ऐसे बचें —–
ग्रहण का सूतक तीन प्रहर यानी नौ घंटे पहले से शुरू होगा। सूतक और ग्रहण काल में भगवान की पूजा व मूर्ति स्पर्श नहीं करना चाहिए। ग्रहण के कुप्रभाव से बचने के लिए भगवान के नाम का स्मरण करें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान व चंद्रमा से संबंधित सफेद वस्तुएं व अन्न दान करें।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s