होस्टल बनवाएं वास्तु सम्मत—-

होस्टल बनवाएं वास्तु सम्मत—-

किसी भी भवन का जब निर्माण किया जाए तब उसमें वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों का भलीभांति पालन करना चाहिए चाहे वह निवास स्थान हो या व्यवसायिक परिसर है। प्राचीन काल में शिक्षा का मुख्य उद्धेश्य ज्ञान प्राप्ति होता था । विद्यार्थी किसी योग्य विद्वान के निर्देशन में विभिन्न प्रकार की शिक्षा ग्रहण करते थे । इसके अतिरिक्त उसे शस्त्र संचालन एवं विभिन्न कलाओं का प्रशिक्षण भी दिया जाता था । किन्तु वर्तमान समय में यह सभी प्रशिक्षण लगभग गौण हो गये । शिक्षा की महत्ता बढ़ने व प्रतिस्पर्धात्मक युग में सजग रहते हुए बालक के बोलने व समझने लगते ही माता-पिता शिक्षा के बारे में चिंतित हो जाते हैं ।प्रतियोगिता के इस युग में लगभग सभी परिवार अपने बच्चों के कैरियर को लेकर काफी परेशान नजर आते हैं।
आजकल स्कूल, कालेजों में अध्ययन करने का क्रेज बहुत बढ़ गया है। हर कोई अच्छे स्कूल, कालेज में एडमिशन लेकर उच्च स्तर की पढ़ाई करना चाहता है। अच्छे कालेज में एडमिशन के लिए वह अपने शहर को छोड़ कर किसी भी जगह चाहे वह स्थान कितनी ही दूर क्यों न हो, जाने को तत्पर रहता है। ऐसे छात्रों को जिस शहर के काॅलेज में एडमिशन मिलता है उसे वहां रहने के लिए या तो उसी शहर में किसी के यहां पेइंग गेस्ट रहना पड़ता है या काॅलेज से जुडे़ होस्टल में या प्राइवेट होस्टल में रहने का स्थान ढूंढना पड़ता कई हाॅस्टल में जगह पाने के लिए छात्र इच्छुक रहते हैं और कई हास्टल ऐसे होते हैं जहां कोई छात्र रहने को तैयार नहीं होता है। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि उस हास्टल का निर्माण वास्तु सिद्धांतों के अनुसार हुआ है या नहीं।
वास्तु अनुरूप हास्टल का निर्माण करने से वहां हवा, पानी, धूप, खुलापन भरपूर रहता है। उससे हास्टल का वातावरण खुशनुमा, मनमोहक लगता है। ऐसे हास्टल में आकर रहने वाले भी छात्र सहजता एवं प्रसन्नता महसूस करते हैं। वास्तु अनुरूप बने हास्टल में रहने की जगह नहीं मिलती क्योंकि वहां के कमरे हमेशा भरे रहते हैं।मां-बाप भी बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए खूब पैसा खर्च करते हैं। उनकी नजर में यह खर्च एक प्रकार का इन्वेस्टमेंट होता है। ताकि बच्चे अच्छी शिक्षा लेकर भविष्य में अच्छी नौकरी प्राप्त कर सुखद जीवन बिता सकें। वर्तमान में शिक्षा व्यापार बन गई है। कालेज वाले छात्रों को आकर्षित करने के लिए अच्छी पढ़ाई के साथ-साथ अन्य सुख-सुविधाएं प्रदान करते हैं। अब तो बड़े शहरों में पूर्णतः वातानुकूलित स्कूल, काॅलेज भवन भी बनने लगे हैं। इसी तर्ज पर उनसे जुड़े हास्टल भी छात्रों को आकर्षित करने के लिए उच्च स्तरीय सुख-सुविधाएं, खेल का मैदान, स्वीमिंग पूल, मनोरंजन कक्ष इत्यादि बनाते हैं।इसके विपरीत वास्तु अनुरूप हास्टल का निर्माण नहीं हुआ हो, तो वहां कोई आना पसंद नहीं करता, जो आ जाते हैं, तो उनका जल्दी छोड़कर जाने का मन करता है। ऐसे हास्टल में छात्रों को वहां का वातावरण नीरस लगता है। उन्हें वहां घुटन महसूस होती है और मौका मिलते ही छोड़कर अन्यत्र चले जाते हैं।
01 कमरे में विद्युत रोशनी की व्यवस्था इस प्रकार करनी चाहिए कि, छात्रों को पूर्व मुखी होकर पढ़ते समय किसी प्रकार की असुविधा न हो।
02 कमरे के साथ यदि टायलेट बाथरूम की सुविधा हो तो, ईशान कोण में कभी भी टायलेट नहीं बनाया जाए।
03 कमरे की दीवार व परदे का कलर हल्का आसमानी, हल्का हरा, हल्का बादामी हो तो बेहतर है। सफेद कलर रहने पर छात्रों को पढ़ते समय बड़ी जल्दी सुस्ती आ जाती है।
04 हास्टल में मनोरंजन के लिए कामन हाल व टी. वी. रूम वायव्य दिशा में बनाना चाहिए। छात्रों के लिए इनडोर गेम्स की व्यवस्था भी यहीं की जा सकती है। छात्रों को खेलने के लिए मैदान पूर्व या उत्तर में बनाना चाहिए।
05 हास्टल में चारों ओर उद्यान बनाया जा सकता है। पर ध्यान रहे, गार्डन में छोटे वृक्ष उत्तर व पूर्व दिशा में ओर विशाल वृक्ष दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही लगाने चाहिए।
06 हास्टल में रिसेप्शन अर्थात् स्वागत कक्ष प्रवेश द्वार के पास ग्राउंड फ्लोर पर ही रखना चाहिए। जहां स्वागत कक्ष के कर्मचारी पूर्व मुखी या उत्तर मुखी होकर बैठें।
07 हास्टल का प्रशासनिक कार्यालय भवन के दक्षिण या पश्चिम में रखा जा सकता है।
08 हास्टल के मैस का डाइनिंग हाल भवन की पश्चिम दिशा में बनाना चाहिए। मैस के इंचार्ज को मैस में पूर्व या उत्तर मुखी होकर इस प्रकार बैठना चाहिए कि, मैस की हर टेबल कुर्सी पर उसकी निगाह जा सके।
09 हास्टल में कमरों का निर्माण इस प्रकार करना चाहिए जहां सुबह के सूर्य की किरणें आती हों ताकि छात्र सुबह की लाभदायक सूर्य की ऊर्जा का लाभ ले सके। कमरे में खिड़की पूर्व, पश्चिम या उत्तर दिशा की दीवार में बनानी चाहिए। कभी भी दक्षिण दिशा में खिड़की नहीं बनानी चाहिए।
10 कमरे में पुस्तकें एवं सामान रखने के लिए दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर अलमारियां बनानी चाहिए। कभी भी ईशान कोण में अलमारी नहीं बनानी चाहिए।
11 हास्टल का मुख्य द्वार पूर्व ईशान, दक्षिण आग्नेय, पश्चिम वायव्य या उत्तर ईशान में होना चाहिए। हास्टल के अंदर आने-जाने का रास्ता व हास्टल में बने छात्रों के एवं अन्य कमरों के दरवाजे भी इन्हीं दिशाओं में होने चाहिए।
12 हास्टल में बिजली के मीटर, ट्रांसफार्मर, जेनरेटर अन्य विद्युत उपकरण की व्यवस्था आग्नेय कोण में करनी चाहिए।
13 हास्टल में रसोईघर का निर्माण आग्नेय कोण में करना चाहिए, जहां अधिक प्रकाश एवं समुचित वायु उपलब्ध हो। किचन मंे मिक्सर इत्यादि मसाला पीसने की मशीनें दक्षिण में प्लेटफार्म बनाकर रख सकते हैं। तंदूर, चूल्हा, माइक्रोवेव इत्यादि रसोईघर के आग्नेय कोण में रखना चाहिए। रसोईघर में किराना भंडार दक्षिण नैऋत्य या पश्चिम में स्टोर रूम बनाकर रख सकते हैं।
14 हास्टल में छात्रों के लिए पानी गर्म करने के यंत्र (गीजर) की व्यवस्था आग्नेय कोण में करनी चाहिए।
15 ओवर हैड वाटर टैंक का निर्माण पश्चिम वायव्य से लेकर दक्षिण नैऋत्य के मध्य कहीं पर भी कर सकते हैं।
16 अच्छे शैक्षणिक वातावरण के लिए वह प्लाट, जहां हास्टल का निर्माण करना चाहते हों, तो उस प्लाट का आकार वर्गाकार या आयताकार होना चाहिए। प्लाट अनियमित आकार का न हो। प्लाट का दक्षिण पश्चिम कोना 900 का होना चाहिए। साथ ही प्लाट पर हास्टल का निर्माण कार्य करते समय ध्यान रखना चाहिए, कि उत्तर व पूर्व दिशा में ज्यादा खुली जगह छोड़ी जाए।
17 हास्टल के प्लाट की उत्तर, पूर्व एवं ईशान दिशा का दबी, कटी एवं गोल होना बहुत अशुभ होता है, इससे हास्टल के संचालकों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके विपरीत प्लाट की इन दिशाओं का बड़ा होना बहुत शुभ होता है। यदि प्लाट की यह दिशाएं दबी, कटी या गोल हों, तो इन्हे शीघ्र बढ़ाकर या घटाकर समकोण करके इसके अशुभ परिणामों से बचना चाहिए।
18 हास्टल में भूमिगत पानी के स्रोत, कुआं, बोरिंग, पानी की टंकी इत्यादि ईशान कोण में होना चाहिए। इसके विपरीत अन्य किसी भी दिशा में होना अशुभ होता है। होस्टल में स्विमिंग पूल का निर्माण उत्तर या पूर्व दिशा में करना चाहिए। हाॅस्टल के मध्य में भूमिगत पानी का स्रोत एवं स्विमिंग पूल का निर्माण छात्रों एवं संचालकों के लिए कई प्रकार की परेशानियां पैदा करता है।
19 यदि स् या न् आकार के होस्टल का निर्माण करना हो, तो दक्षिण, पश्चिम या नैऋत्य कोण में ही करें, ताकि उत्तर व पूर्व दिशा में ज्यादा खाली जगह रख सकें।

इन साधारण किंतु चमत्कारिक वास्तुशास्त्र सिद्धांतों के आधार पर यदि होस्टल का निर्माण किया जाऐ तो उत्तरोतर प्रगति संभव है।

पं0 दयानन्द शास्त्री
विनायक वास्तु एस्ट्रो शोध संस्थान ,
पुराने पावर हाऊस के पास, कसेरा बाजार,
झालरापाटन सिटी (राजस्थान) 326023
मो0 नं0 —09024390067;;
E-Mail – vastushastri08@yahoo.com,
–vastushastri08@rediffmail.co

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