क्यों हें ऋण मुक्ति से ही समृद्धि संभव-???–

क्यों हें ऋण मुक्ति से ही समृद्धि संभव-???–

क्या आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं? महीने के आखिरी तारिख आने से पहले ही आप का हाथ तंग हो जाता है। पैसा घर में आता तो है पर कहा चला जाता है पता ही नहीं चलता। बचत के नाम पर आपके पास कुछ नहीं रह पाता है। यदि ऐसा है तो कहीं इसका कारण आपके घर की तिजोरी का गलतसमय पर धन तिजोरी से निकलना या राखना हो सकता है या फिर राहू काल में पैसे की लेन- देन का कारण हो सकता है !
भारतीय ज्योतिष में हर कार्य के लिए एक विशेष मुहूर्त निकाला जाता है। ऐसा मानते हैं कि शुभ मुहूर्त में किया गया कार्य सफल व शुभ होता है। लेकिन भारतीय ज्योतिष के अनुसार दिन में एक समय ऐसा भी आता है जब कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता। वह समय होता है राहुकाल। हर दिन एक टाइम ऐसा होता है जो आपके पैसों के लिए खतरनाक हो सकता है। ये खतरनाक समय डेढ़ घंटे का होता है अगर आपने अपनी तिजोरी इस डेढ़ घंटे में खोल ली यानी तिजोरी में से पैसे निकाले या रखें तो समझ लें धीरे-धीरे आपका पैसा खत्म होने लगेगा और खर्च बढऩे लगेंगे। हो सकता है इस समय में लक्ष्मी आपकी तिजोरी से निकल जाए इसलिए सावधान रहें और जान लें किस दिन ,कौन से समय के डेढ़ घंटेतक आपके पैसों के लिए हो सकते हैं खतरनाक…!
इसके पीछे का तर्क यह है कि ज्योतिष के अनुसार राहु को पाप ग्रह माना गया है। दिन में एक समय ऐसा आता है जब राहु का प्रभाव काफी बढ़ जाता है और उस दौरान यदि कोई भी शुभ कार्य किया जाए तो उस पर राहु का प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण या तो वह कार्य अशुभ हो जाता है या उसमें असफलता हाथ लगती है। यही समय राहुकाल कहलाता है।
जानें किस दिन कौन से डेढ़ घंटे:-
सोमवार- सुबह 7:30 से 9:00
मंगलवार- दोपहर 03 से 04:30
बुधवार- दोपहर 12 से 01:३०
गुरुवार- दोपहर 01:30 से 03:००
शुक्रवार- सुबह 10:30 से 12:००
शनिवार- सुबह 09:00 से 10:30र
विवार- शाम 04:30 से 06:००

धनवान होने के लिए ऋणों से मुक्ति प्रथम सीढ़ी है। शास्त्रानुसार व्यक्ति यदि अपने मूल कर्ज से निवृत्ति का उपाय नहीं करता है, तो उसे इस जीवन में अर्थ, उपकार, दया के रूप में किसी भी तरह का उधार लेना ही पड़ता है। इस उधार को उतारने के पश्चात ही मनुष्य लक्ष्मी को प्राप्त कर सकता है।

लेकिन पांच ऋण- देव ऋण, पितृ ऋण, ऋषि ऋण, भूत-ऋण एवं मनुष्य ऋण में से किसी भी ऋण का उपाय नहीं किया जाए तो धनवान होने की संभावना निर्मूल है। यदि अध्ययन-अध्यापन करें तो ब्रह्मयज्ञ होने से ऋषि ऋण से मुक्ति मिलती है। हवन-पूजन करने से देवयज्ञ होने पर देव ऋण पूर्ण होता है। श्राद्ध-तर्पण-पूर्वजों के निमित्त दानादि कर्म से पितृ ऋण उतर जाता है। बलिवैश्व देव एवं पंचबलि करने से भूत ऋण चुक जाता है। अतिथि सत्कार-मानव सेवा से मनुष्य ऋण समाप्त होता है।

इन कर्जों से निवृत्ति मिलने पर हमें भौतिक कर्ज की आवश्यकता नहीं होती है। इस कर्म के पूर्ण होने पर गृहस्थ के यहाँ लक्ष्मी निवास करती है। ‘या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः।’ इस शास्त्र वाक्य से घर में समृद्धि का स्वयं निवास रहता है। लक्ष्मी से व्यक्ति सुरक्षित, सुसंपन्न, आश्रय देने वाला होकर इस जीवन को सुगमता से पार कर लेता है। अतः दरिद्रता-ऋण से मुक्ति के लिए पुण्यों का संचय करना आवश्यक है।

पुण्यों के संग्रह किसी भी काल में हो सकते हैं। लेकिन पर्व में इसका विशेष महत्व है तथा इन पर्वों में भी दीप का यह पर्व वर्ष का श्रेष्ठतम पर्व है। दीप पर्व कार्तिक मास में जो लक्ष्मीपति का माह है, आने से इसका सर्वोच्च स्थान है। कार्तिक माह के पुष्य नक्षत्र, धन त्रयोदशी, रूप चौदस, महालक्ष्मी पूजन, अन्नाकूट, भाईदूज, सूर्य षष्ठी, अक्षय नवमी, देव प्रबोधनी एकादशी, वैकुंठ चतुर्दशी प्रमुख हैं। इन सबमें पर्वराज दीपावली है। कार्तिक मास में आने वाले इन शुभ दिनों में हम ऐसे कुछ अनुभूत प्रयोगों की चर्चा करेंगे जिससे व्यक्ति सामर्थ्यवान होकर अपनी कामनाओं की पूर्ति करने में सक्षम होगा।

रूप चतुर्दशी के दिन पवित्रता से पांच प्रकार के पुष्पों की माला में दूर्वा व बिल्वपत्र लगाकर देवी को अर्पित करें। माल्यार्पण करते समय मौन रखें। यह प्रयोग प्रभावकारी होकर यश की वृद्धि करता है।

दीपावली की रात्रि में ग्यारह बजे के बाद एकाग्रता से बैठकर नेत्र बंद करके ऐसा ध्यान करें कि सामने महालक्ष्मी कमलासन पर विराजमान हों और आप उनके ऊपर कमल पुष्प चढ़ा रहे हैं। ऐसे कुल 108 मानसिक कमल पुष्प अर्पित करें। ऐसा करने से लक्ष्मी की कृपा होती है। साथ में विष्णु सहस्रनाम या गोपाल सहस्रनाम का पाठ करें तो अति उत्तम है।

अन्नकूट के दिन भोजन बनाकर देवता के निमित्त मंदिर में, पितरों के निमित्त गाय को, क्षेत्रपाल के निमित्त कुत्ते को, ऋषियों के निमित्त ब्राह्मण को, कुलदेव के निमित्त पक्षी को, भूतादि के निमित्त भिखारी को दें। साथ में वृक्ष को जल अर्पित करें, सूर्य को अर्घ्य दें, अग्नि में घी अर्पित करें, चींटियों को आटा तथा मछली को आटे की गोली देने से घर में बरकत आती है।

भाईदूज के दिन प्रातः शुद्ध पवित्र होकर रेशमी धागा गुरु व ईष्ट देव का स्मरण करके धूप दीप के बाद उनके दाहिने हाथ में यह डोरा बांधें। डोरा बांधते समय ईश्वर का स्मरण करते रहें। यह प्रयोग वर्षपर्यंत सुरक्षा देता है। सूर्य षष्ठी के दिन सायंकाल तांबे के लोटे में कुमकुम, केसर, लाल फूल डालकर सूर्य की ओर मुंह करके जल दें। जल देकर वहीं सात बार घूमें। यह तेज प्रदायक प्रयोग है। अक्षय नवमी के दिन इक्कीस आंवले, एक नारियल देवता के सामने रखकर श्रद्धा-भक्ति से प्रणाम करना चाहिए। चढ़े हुए आंवले व नारियल के साथ कपड़ा व मुद्रा रखकर बहन व ब्राह्मण को दे दें। यह दान आपके पुण्यों को अक्षय प्रदान करता है।

देव प्रबोधनी एकादशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है। देवता के जागने के इस दिन से शुभ काम की शुरुआत होती है। संस्कारादि कार्यों की प्रारंभता के लिए श्रेष्ठ दिन में आप सिंदूर व गाय के घी या शुद्ध घी मिलाकर अनार की लकड़ी से निम्न यंत्र घर में किसी भी पवित्र स्थान पर पूर्व या उत्तर की दीवार पर लिखें। यदि दीवार पर स्थान नहीं मिलें तो किसी चोकोर अखंडित पत्थर पर भी यह यंत्र बना सकते हैं।

विशेष परिस्थिति में बिना लाइन वाले सफेद कागज पर भी बनाकर पूर्व या उत्तर की ओर रख सकते हैं। इस यंत्र को लिखकर उस पर पुष्प, अक्षत, धूप, दीप व नेवैद्य से पूजना चाहिए। फिर उसके सामने 108 बार ‘ॐ दू दुर्गायैः नमः’ मंत्र का जप करना चाहिए, ऐसा करने से घर में समृद्धि आती है।

सभी प्रकार की बाधा का शमन होता है। यंत्र में अंक हिन्दी वर्णमाला के लिखें। यंत्र बाएं से दाएं ओर की तथा नीचे से ऊपर करके लिखें।

सामान्य उपाय/टोटके कर्ज मुक्ति के—-

कर्ज लेने की आदत व्यक्ति को परमुखापेक्षी बना देती है। अगर आप भी कर्ज के बोझ तले दबे हैं, तो चिंतित न हों। शास्त्रों में इसके उपायों की व्याख्या दी हुई है।
– मंगलवार को लिया गया कर्ज स्थाई हो जाता है इसलिए न तो इस दिन कर्ज लें और न ही कर्ज के लिए बैंक आदि में आवेदन करें।
– बुधवार को दिए गए कर्ज का पैसा कठिनाई से वापस होता है। बुधवार के दिन न कर्जा लें और न कर्ज दें।
– मंगल की दशा-अंतर्दशा-प्रत्यंतर दशा में ऋण न लें।
– घर का नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) ऊंचा रखें, तथा ईशान कोण (पूर्व-उत्तर) नीचा रखें।
– रविवार के योग में हस्त नक्षत्र या अमृतसिद्धि योग आने पर कर्ज न लें।
– अथर्ववेद के छठवें कांड के 117, 118, 119 इन तीन सूक्तों का नियमित पाठ करने या करवाने से ऋण मुक्ति होती है।

– “मंगलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रद।
स्थिरासनो महाकाय: सर्वकामविरोधक:।।”

– इस मंत्र की नित्य एक माला प्रात: जपने से ऋण मुक्ति होती है। यह जप दीपक की साक्षी में होना चाहिए।
– अशोक का वृक्ष तथा नर-मादा केले का वृक्ष ऋण मुक्ति देते हैं। अत: इन्हें लगाकर इनकी नियमित देखभाल करनी चाहिए।
– ऋणमोचक मंगल स्तोत्र तथा ऋणहत्ताü गणेश स्तोत्र का भी विधि विधान पूर्वक किया गया पाठ ऋण मुक्ति कारक होता है।
– जब आप कर्ज उतारने में सक्षम हो जाएं तब कर्ज की प्रथम किश्त शुक्ल पक्ष के मंगलवार को देना ठीक रहता है।
– रविवार को हस्त नक्षत्र या अमृतसिद्धि योग घटित होने पर कर्ज चुकाना अतिशुभ होता है।

ऋण मुक्ति एवं लक्ष्मी प्राप्ति के लिए श्री गणपति का विशेष मंत्र—–

विधि- श्री गणपति जी का विशेष रूप से दिवाली और अंगारकी चतुर्थी के दिन नित्य कर्म से निवृत हो कर धुप दीप से पूजन कर के इस मन्त्र का १० हजार की संख्या में रुद्राक्ष की माला या मूंगे की माला से जप कर के हवन करें और इस मंत्र की १०८ आहुतियाँ दें प्रदक्षिणा ,आरती, दक्षिणा, मंत्र पुष्पाजंलि प्रणाम आदि कर के २१ लड्डुओं का भोग लगावें इस के पश्चात १०८ बार इस मंत्र को दोबारा जप करें , ध्यान रहे श्री गणपति को सिंदूर व् दूर्वा जरुर चढाये और पूजन करें स्वयं भी लड्डुओं का प्रशाद ग्रहण करें

हवन सामग्री – हवन में केवल पलाश की समिधा का ही प्रयोग करें, गूगल ,१०१ रक्त करबीर पुष्प एवं १०१ लड्डू का चूरमा, ये तीनों वस्तुए एकत्रित कर इस मंत्र से १०८ आहुति दे, जप पूजन के समय दीप जलता रहना चाहिए, पूर्णाहुति सुपारी से देना शुभ होगा, इस विधि से तीन पुरश्चरण करने पर व्यक्ति कितना भी ऋण ग्रस्त क्यूँ ना हो ऋण से मुक्ति प्राप्त कर लेता है तृतीय पुरश्चरण के बाद धन का आगमन उसी तरह से निश्चित है जिस तरह से सूर्य का प्रातकाल उदय होना, इसके पश्चात श्री गणेश सहस्रनाम का पाठ करना विशेष लाभप्रद होता है

मंत्र – ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं चिरचिर गणपतिवर वर देयं मम वाँछितार्थ कुरु कुरु स्वाहा ।

आइये जाने कब होगी ऋण मुक्ति—-

जरूरत पडने पर हम प्राय: कर्ज लेते हैं। कर्ज जल्दी से जल्दी चुक जाए, इसके लिए हम प्रयासरत भी रहते हैं। ज्योतिष के सिद्धांत अनुसार व्यक्ति को ऋण मुक्ति तब मिलती है, जब ग्रह दशा अनुकूल होती है। द्वादश राशियों के अनुसार ऋण मुक्ति कब संभव है आइए इस पर विचार करें।

मेष राशि:– जब भी आकाश में मंगल- मकर या मेष राशि में अथवा मिथुन, कन्या, कुंभ राशि में, गुरू मेष, सिंह, तुला या धनु राशि में, सूर्य- मिथुन, कन्या, कुंभ में अथवा राहु-मिथुन, कन्या, कुंभ राशि में आता है, तब कर्ज से मुक्ति मिलती है।

वृष राशि:— गोचरवश जब भी शनि-कुंभ, मीन, कर्क में, गुरू वृष, कन्या, वृश्चिक में, शुक्र-मीन में और राहु-कर्क, तुला, मीन राशि में या सूर्य-कर्क अथवा मीन राशि में आएगा तो कर्ज चुकेगा।

मिथुन राशि:— शनि-सिंह या मेष राशि में, गुरू-मिथुन, तुला या कुंभ राशि में, शुक्र- मीन राशि में, राहु-सिंह, वृश्चिक या मेष राशि में, बुध-मिथुन, कन्या में या सूर्य-सिंह मेष राशि में आता है, तब कर्ज चुकता है।

कर्क राशि:— जब भी शनि-कन्या, वृष राशि में आए, गुरू-कर्क, वृश्चिक, मीन में, राहु-कन्या, वृश्चिक, वृष, मिथुन में, चंद्रमा-कर्क, वृष, मीन में, सूर्य व मंगल- वृष, कन्या राशि में आए, तो कर्ज मुक्ति के योग बनते हैं।

सिंह राशि:— गोचरवश जब भी शनि-तुला, मिथुन राशि में, गुरू-सिंह, धनु या मेष राशि में, राहु तुला, मकर या मिथुन राशि में, गुरू-सिंह, धुन, मेष राशि में, राहु-तुला, मकर, मिथुन राशि में, सूर्य-सिंह, धनु, मेष, मिथुन राशि में, मंगल मिथुन राशि में आए, तो कर्ज चुकेगा।

कन्या राशि:— शनि जब वृश्चिक या कर्क राशि में, गुरू-कन्या, मीन, वृष राशि में, राहु-वृश्चिक, कुंभ, कर्क राशि में, सूर्य-वृश्चिक, कर्क राशि में, बुध-कन्या, मिथुन राशि में आए, तो कर्ज चुकता है।

तुला राशि:—- गोचरवश जब भी शनि, मकर, सिंह, धनु राशि में, गुरू-तुला, मिथुन राशि में, राहु-धनु, मीन, सिंह राशि में, सूर्य-धनु, सिंह राशि में या शुक्र-कुंभ, तुला राशि में आए, तो कर्ज से मुक्ति मिलेगी।

वृश्चिक राशि:— आकाश में गोचरवश शनि- मकर, कन्या राशि में या गुरू-वृश्चिक मीन, कर्क में, राहु-मकर, मेष, कन्या में, सूर्य-मकर, कन्या राशि में, मंगल- मकर, वृश्चिक, मीन राशि में आए, तो कर्ज चुकेगा।

धनु राशि:— जब भी आकाश में गोचरवश शनि-कुंभ, तुला राशि में, गुरू-धनु, मीन, सिंह, मेष राशि में, राहु- कुंभ, वृष, तुला राशि में या सूर्य- मंगल कुंभ, तुला राशि में आए, तो कर्ज चुकेगा।

मकर राशि:— शनि-तुला मकर, वृश्चिक, मीन या कुंभ राशि में, गुरू-वृष, कर्क, कन्या राशि में, राहु-मीन, वृश्चिक, मिथुन राशि में या सूर्य-मंगल-मीन वृश्चिक राशि में आए तो कर्ज चुकने के योग बनते हैं।

कुंभ राशि:— गोचरवश शनि- मेष तुला, कुंभ या मकर राशि में, गुरू- कुंभ मिथुन, तुला राशि में, राहु-मेष, कर्क, धनु राशि में या सूर्य मंगल-मेष, धनु राशि में आए तो कर्ज चुकेगा।

मीन राशि:— जब भी आकाश में गोचरवश शनि-मकर, कुंभ, वृष राशि में, गुरू-मीन, कर्क, वृश्चिक या धनु राशि में, राहु- वृष, सिंह या मकर राशि में, सूर्य व मंगल- वृष या मकर राशि में आए, तो कर्ज चुकेगा।

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