अमृतसर में ..बाज़ार देखा.

मित्रों…गुड आफ्टर नून ….आज दिन भर….. कल की थकान उतारी हें…अमृतसर में ..बाज़ार देखा…यदि कल तबियत और मुड ठीक रहा तो पंचकुला सम्मलेन में जाऊँगा …और भी अनेक विद्वान् आ रहे हें…इस ज्योतिष-वास्तु सम्मलेन में…आप में से कोई मित्र/दोस्त या जरुरत मंद मिलना चाहें तो ….अग्रवाल धर्मशाला…सेक्टर-16 , पंचकुला में मिलाने आ सकता हें….स्वागत/धन्यवाद….
कल अमृतसर में .स्वर्ण मंदिर देखा… दरबार साहिब के यहाँ मत्था टेका /दर्शन किये….वहां का लंगर चखा….जलियांवाला बाघ देख..खून खोल गया जी..अंगेजों का जुल्म देखकर….उसके बाद वाघा बोर्डर गया था..अटारी स्टेशन.
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हेलो..फ्रेंड्स..केसे हें आप सभी लोग…????
सबसे पहले तो बठिंडा सम्मलेन के आयोजक श्री पदम् कुमार जी का आभार एवं धन्यवाद…सभी भाग लेने वाले/ आये हुए ज्योतिषियों की तरफ से..इतने सुन्दर ढंग से और शानदार तरीके से ये सम्मलेन आयोजित हुआ/किया गया …अविस्मर्णीय…बठिंडा का किला, रजिया सुल्तान का आत्मदाह स्थल, रोज गार्डन ,झील और भी बहुत कुछ..देखने /घूमने की जगह हें वहां पर…बठिंडा की जनता का आभार/धन्यवाद..जिसने हम सभी आये हुए ज्योतिष/वास्तु/हस्तरेखा और टेरोकार्ड के विशेषज्ञों से अपनी-अपनी समस्याओं के चर्चा कर निवारण/उपाय आदि प्राप्त किये…
एक बात जो मेने नोट की/ मेरा ध्यान गया…यहाँ की अधिकांश विवाहित /शादीशुदा महिलाओं ने अपनी मांग ( सुहाग की नशानी)..ख़ाली रख छोड़ी थी…और शिकायत करती हें की उनका उनके पति से झगडा होता हें???..अरे भाई सुहागन की मांग तो भरी हुई होनी चाहिए न???? आपकी क्या राय/विचार हें???..क्या पता ये वहां की परंपरा/ रिवाज का एक तरीका/ हिस्सा हो????
दूसरी बात जो मेने देखी / नोट की…यहाँ पर विजातीय विवाह/ लव मेरिज की भी संख्या अधिक थी??? कारण समझ नहीं आया???
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चार दिन बठिंडा में रहने/गुजारने के बाद आज दोपहर में(21 -09 –2011 ) लुधियाना आये….यहाँ का DUKH निवारण गुरुद्वारा देखा, कृष्ण भगवन का विशाल मंदिर देखा ..जो आल इन वन हें अर्थात..अनेक भगवन /देवी-देवता के दर्शन आप एक साथ , एक जगह पर कर सकते हें….
डिनर/रात्रिभोज..यहाँ के सुप्रसिद्ध ऋषि वैष्णो ढाबे पर किया….और फिर बाद में विजय पान सेंटर वाले के यहाँ पर..चोकलेट पान,स्ट्राबेरी पान,मिक्स फ्रूट,गुजरती और भी अनेक स्वाद/फ्लेवर के पान वहां पर तैयार/उपलब्ध थे जी…
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मित्रों कल सुबह ..अमृतसर देखने जाना हें..जी..स्वर्ण मंदिर,दुर्गियाना मंदिर,जलियाँ वाला बाग,..वाघा बोर्डर..और ..जो भी कुछ होगा न..देखने का..वेसे तो तीन-चार बार सभी कुछ देख चूका हूँ ..ओ.के.जी..गुड नाईट….शुभ रात्रि….

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